Saturday, 30 December 2017

सफेद मूसली एक चमत्कारि औषधि है।

सिद्ध आयुर्वेदिक  

             सफेद मूसली एक 
             चमत्कारि औषधि है।

सफेद मूसली का प्रयोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को ठीक करने में किया जाता है।

■ सफेद मूसली शारीरिक शिथिलता को दूर कर उर्जा को बढ़ाने में बेहद लाभकारी होती है, यही कारण है कि कई तरह की दवाइयों के निर्माण में सफेद मूसली का प्रयोग किया जाता है। 

■ पेशाब में जलन की शिकायत होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इस दूध को पीना लाभदायक होगा।

■  महिलाओं के लिए मूसली अत्यधिक लाभकारी होती है। यह उम्र के असर को कम कर सुन्दरता बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है। इसके अलावा अन्य नारी प्रमुख समस्याओं में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है।

■  पथरी यानि स्टोन की समस्या में सफेद मूसली को इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, इसे एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं और मरीज को प्रतिदिन सुबह पिलाएं। यह उपाय सात दिनों में ही अपना प्रभाव दिखाता है और पथरी गल जाती है।

■ अगर आपको अक्सर बदन दर्द की शि‍कायत बनी रहती है, तो प्रतिदिन सफेद मूसली की जड़ का सेवन फायदेमंद होता है। उच्च रक्तचाप, रुमेटी गठिया में भी यह लाभकारी है।
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             शीघ्रपतन का घरेलु इलाज

अगर आपका वीर्य जल्दी गिरने की समस्या हूँ रही है और इसके कारन आपका सेक्स करने का समय कम हो रहा है तो आपको सेक्स करने का समय कैसे बढाया जाये के बारे में सोचने की जरुरत नहीं है ।

क्यूंकि सफ़ेद मुसली के इस्तमाल से आप सेक्स का वक़्त बढा सकते हो .

5 ग्राम काली मुसली का चूरन ,4  रत्ती बंग भस्म को शहद में मिलाकर 40  दिन तक रोज सुबह शाम लेने से शिघ्र्पतन का आयुर्वेदिक इलाज होता है .  टिप्स : इसको लेने के बाद आपको कुछ भी नहीं खाना है आधे घंटे तक .

                    ★★★★★

                       यौनशक्ति
         सेक्स पावर बढ़ने के लिए उपाय

अगर आपको सेक्स करने के वक़्त थकान मेहसूस होती अहि और इस के कारण अगर आप लड़की को खुश नहीं कर पारहे हो तो आपको आपकी सेक्स पावर को बढाने की जरुरत है.सेक्स पावर को बढ़ने के लिए आपको 5 ग्राम सफेद मुसली का चूर्ण या मुसकी पाउडर ,5 ग्राम पिसी हुई मिश्री सुबह खाली पेट और रात को खाना खाने के 2 घंटे बाद गरम दूध के साथ 2 महीने तक पीना है .

इसका सेवन करने से आपको शारीरिक कमजोरी,शीघ्रपतन की समस्या,यौनशक्ति की कमी,शिथिलता,धात में कमी आना यानिकी धातु रोग इत्यादि रोग दूर होते है .

★★★★

                दुबलापन का इलाज
               (बॉडी बढाने के लिए)

अगर आपको कोई दुबला पतला बोलता है तो आप उनको आपकी बॉडी क्या है दिखाने के लिए आपको सफेद मुसली का इस्तमाल से अपने दुबलेपन का इलाज कर सकते हो.

इसके लिए आपको अश्वगंधा,शतावरी,सफेद मुसली और मुलहठी इन सब को 50 -50 ग्राम लेकर इनका चूर्ण बनाके इसमें 100  ग्राम मिश्री को पीसकर मिला दे .

इसको रोज सुबह शाम मतलब दिन में दो बार 40 दिन तक पिने से आपका शरीर मजबूत और शक्तिशाली बन जाता है.

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                   सफेद मुसली का
            महिलाओ के लिए फायदे

योनी का सूखापन दूर करने के लिए और योनी का सूखापन से बचने के लिए  ।

इसके इस्तमाल से आप जवान ही रहती हो ज्यादा देर तक.।

महिला के स्थनों का दूध शुद्ध करने ब्रैस्ट का दूध बढाता है.
सफेद मुसली का थोडा इस्तमाल करने से बच्चे की और माँ के लिए nutritive tonic की तरह काम करता है गर्भावस्था में यानिकी प्रेगेनेंसी के पीरियड में ।
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Saturday, 23 December 2017

समस्त शरीरिक दर्दों के लिए यह दवा रामबाण है ।

सिद्ध आयुर्वेदिक
9417862263

           समस्त शरीरिक दर्दों के लिए
                यह दवा रामबाण है ।

             ★सिद्ध वातदर्द क्ल्पचुर्ण★
          ★समस्त वात रोग में रामबाण★
     ★इंग्लिश दर्द युक्त दवाईयों से मुक्ति पाएं★

          यह दवा शुगर के मरीज भी ले ।
         यह योग शुगर को भी नार्मल करता है।

   (यह दवा online से भी मंगवा सकते है )

◆अफस्फीत शिराएंV(aricose veins) दर्द
◆सर्वकल दर्द
◆छाती का दर्द
◆घुटनों का दर्द,
◆जोड़ा का दर्द और सुजन,
◆कमर दर्द ,गठिया दर्द
◆समस्त शरीर का दर्द
◆युरिक एसिड दर्द
◆माइग्रेन का दर्द
◆डिस्क का दर्द
◆सिर (आधा) दर्द
◆नस ब्लॉक दर्द
◆नजला के दर्द
यह दवा सभी प्रकार के दर्दो के लिए है क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।
अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी
दवा क्या है
इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
सौंठ भुनी 50 ग्राम
सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।
पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।
योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।
दवा तैयार हो गई ।
सेवन विधि -
1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।
☆☆☆
घुटनों के दर्द में दवा के साथ
यह जरूर करे
दिन 2 बार
3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट तक नित्य सेंकाई करें।
☆☆☆☆
परहेज -:

घुटने दर्द में क्या खाएं क्या नहीं


अपथ्य भोजन:- (तीन से छह महीनों तक क्या न खाएं):- केला,सब खट्टे फल व पदार्थ ( नींबू, अचार इत्यादि) सब ठंडे पदार्थ, सब सूखे मेवे खासकर काजू ,बादाम इत्यादि उड़द दाल का उपयोग न करे। जोड़ो के दर्द ठीक होने में कब्ज सबसे बड़ी समस्या है इसलिये पेट का रोज साफ होना जरूरी है।

पथ्य:- दिन में भोजन के पहले गेंहू के दाने के बराबर चुना थोड़े से देशी गुड़ व देशी गाय के घी के साथ खाएं । कम से कम 20 मिनट धूप में (कम से कम कपड़े पहन कर ) बैठे।

घुटने के दर्द में केवल ठंडी तथा वायु बनाने वाली चीजों का उपयोग वर्जित है।

फलों तथा हरी तरकारियों का सेवन अधिक करें| मट्ठा, चाट, पकौड़े, मछली, मांस, मुर्गा, अंडा, धूम्रपान आदि का सेवन बिलकुल न करें।

घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए।

पेट को साफ रखें तथा कब्ज न बनने दें।

दूध के साथ ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करें।

शरीर को अधिक थकने वाले कार्य न करें।

प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने के लिए अवश्य जाएं।
***
☆साथ मे यह करे ज्यादा फायदा होगा ☆

आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लाल मिर्च, अत्‍यधिक नमक, बैगन आदि न खाये।

घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।
घुटनो के निचे तकिया रखे।

वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।


ज्‍यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।
आराम करे दर्द बढ़ाने वाली गति विधिया न करे इससे आपका दर्द और बढता जायेगा और आप इसे सहन नहीं कर पाएंगे।

सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये, विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।

सिद्ध आयुर्वेदिक
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गदूदा का इलाज

सिद्ध आयुर्वेदिक
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                   गदूदा का इलाज

लगभग तीस फीसदी पुरुष 40 की उम्र में और पचास फीसदी से भी ज्यादा पुरुष 60 की उम्र में प्रोस्टेट की समस्या से परेशान होते हैं। प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुषों का दूसरा दिल भी माना जाता है। पौरूष ग्रंथि शरीर में कुछ बेहद ही जरूरी क्रिया करती हैं। जैसे यूरीन के बहाव को कंट्रोल करना और प्रजनन के लिए सीमेन बनाना। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती हैं, यह ग्रंथि बढ़ने लगती हैं। इस ग्रंथि का अपने आप में बढ़ना ही हानिकारक होता हैं और इसे बीपीएच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहते हैं।

prostate badhne ke lakshan
● पेशाब करने में कठिनाई मेहसूस होना।

● थोड़ी थोड़ी देर में पेशाब की हाजत होना। रात को कई बार पेशाब के लिये उठना।

● पेशाब की धार चालू होने में विलंब होना।

● मूत्राषय पूरी तरह खाली नहीं होता है। मूत्र की कुछ मात्रा मूत्राषय में शेष रह जाती है। इस शेष रहे मूत्र में रोगाणु पनपते हैं।

● मालूम तो ये होता है कि पेशाब की जोरदार हाजत हो रही है लेकिन बाथरूम में जाने पर बूंद-बूंद या रुक-रुक कर पेशाब होता है।

● पेशाब में जलन मालूम पडती है।

● पेशाब कर चुकने के बाद भी मूत्र की बूंदे टपकती रहती हैं, याने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता।

● अंडकोषों में दर्द उठता रहता है।

● संभोग में दर्द के साथ वीर्य छूटता है।

ऐसी अवस्था मरीज के लिए कष्टदायक होती है। उसे समझ नहीं आता कि क्या किया जाना चाहिए।

दूसरे रोग की तरह प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने पर भी इसका उपचार संभव है। ऐसी बहुत सी दवाइयां हैं,

जिससे मरीज को काफी आराम महसूस होता है और वह सामान्य दिनचर्या जी सकता है।

ऐसे में प्रकृति में भी बढिया उपाय हैं। जैसे सीताफल के बीज इस बीमारी में बेहद लाभदायक होते हैं।

सीताफल के कच्चे बीज को अगर हर दिन अपने खाने में इस्तेमाल किया जाए, तो काफी हद तक यह प्रोस्टेट की समस्या से बचाव करने में मददगार होता है।

इन बीजों में ऐसे ‘प्लांट केमिकल’ मौजूद होते हैं, जो शरीर में जाकर टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन में बदलने से बचाता है जिससे प्रोस्टेट कोशिकाएं नहीं बन पातीं।

                     गदूदा की दवा

                  त्रिफ़ला 250 ग्राम
       अजवाइन भुनी 100 ग्राम
            गिलोय चुर्ण 100  ग्राम
                      हरड़ 100-ग्राम
                   गोखरू 100 ग्राम
    सीता फल के बीज 100 ग्राम
                    अलसी 100ग्राम

सेवन विधि -:

2 -2 ग्राम पानी के साथ लेते रहे।

दिन 3 बार जरूर ले।

◆◆◆

परहेज

पथ्य और परहेज :–

यह खाएं

* उचित समय पर पचने वाला हल्का भोजन करें| सब्जियों में लौकी, तरोई, टिण्डा, परवल, गाजर, टमाटर, पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, कुलफा आदि का सेवन करें| दालों में मूंग व चने की दाल खाएं|

फलों में सेब, पपीता, केला, नारंगी, संतरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, चीकू आदि का प्रयोग करें|
●●●
यह न खाएं
 

अरहर, मलका, मसूर, मोठ, लोबिया, काबुली चने आदि का सेवन न करें|

गुड़, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, खटाई, अचार, मसाले, मैथुन तथा अधिक व्यायाम से परहेज करें|

●●●
होमेपेथीक दवा

      दवा का नाम-  सेबाल सेरुलेटा

पुरानी या नई दोनों ही स्थितियों में प्रोस्टेट ग्रन्थि बढ़ जाने पर सेबाला सेरुलेटा औषधि का मूलार्क 10 से 20 बूंद की मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।

इस औषधि की 3 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।

पेशाब करने में कठिनाई होती है, पेशाब करते समय जलन होती है तथा बूंद-बूंद करके पेशाब आता है।

ऐसे लक्षणों में भी रोगी को सेबाला सेरुलेटा औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

यह दवा कोरियर से मंगवा सकते हैं।

★दांत दर्द के लिए★

सिद्ध आयुर्वेदिक

                  ★दांत दर्द के लिए★

फिटकरी को तवे या लोहे की कड़ाही में पानी के साथ आग पर रखें।

जब पानी जल जाए और फिटकरी फूल जाए तो तवे को आग पर से उतारकर फिटकरी को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें।

जितना फिटकरी का पावडर बने उसका 1/4 भाग पिसी हल्दी उसमें मिला कर लकड़ी की सींख की नोक से दाँत के दर्द वाले स्थान पर या सुराख के भीतर यह मिश्रण भर दें।

यह बहुत ही लाभकारी प्रयोग है ।

★पेट की हर खराबी के लिए★

सिद्घ आयुर्वेदिक

        ★पेट की हर खराबी के लिए★

अजवायन   200 ग्राम
छोटी हरड़    100 ग्राम
आँवला चुर्ण100 ग्राम
सेंधानमक   20 ग्राम
कालानमक 10ग्राम
हींग            5 ग्राम
पुदीना सत   5 ग्राम
निम्बू सात  5 ग्राम

लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें।

1 -1 ग्राम चूर्ण चाटने  से डकार न आना ,गैस ,पेट दर्द  ,पेट  की हर बीमारी से मूक्ति मिलती है।

  ★कब्ज गैस की दवा कोरियर से मंगवाए★

बुद्धिवर्धक चूर्ण(शंखपुष्पादि चूर्ण)

सिद्ध आयुर्वेदिक
                बुद्धिवर्धक चूर्ण
              (शंखपुष्पादि चूर्ण)
आवश्यक सामग्री :-
शंखपुष्पी 150 ग्राम
ब्राह्मी 50 ग्राम
शतावर 50 ग्राम
बादाम 100 ग्राम
सोंफ 50 ग्राम
कालीमिर्च 10 ग्राम
छोटी इलायची बिज 10 ग्राम
तरबुज बिज गिरी 20 ग्राम
अश्वगंधा 50 ग्राम
आवला 50 ग्राम
जटामांशी 20ग्राम
तुलसी पंचाग 10 ग्राम
धागा मिश्री 250 ग्राम
सारे सामान को कुटपिस कर चूर्ण तैयार कर ले और सुबह शाम आधा आधा चमच्च दूध के साथ बच्चों को चौथाई चमच्च दूध के साथ नित्य प्रयोग करे ।।
★★★
फायदे
◆दिमागी तनाव फायदेमंद
◆भूलने की आदत में फायदेमंद
◆ दिमागी रूप से सशक्त बनाता है दिमाग तेज़ करता है ।
◆अनिद्रा के रोगों में सहायक ।
◆मानसिक परेशानी और तनाव दूर करता है ।
◆थाइरोइड के रोग में लाभदायक थाइरोइड कम करता है ।
◆शरीर में सुस्ती नही आने देता हरदम एक्टिव रखता है ।
आज के समय में बच्चों के लिए ये चूर्ण अत्यंत आवश्यक है इसलिए आज ही इसे घर बनाए और प्रयोग करे।

किसी भी प्रकार के बुखार की रामबाण दवा

सिद्ध आयुर्वेदिक
09417862263

        किसी भी प्रकार के बुखार की
               रामबाण दवा

टाइफाइड, डेंगू, चिकन गुनिया,दिमागी बुखार, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी सी  हो या डेंगू बुखार हो....
              
            ★यह दवा रामबाण है★
★ यह समान पन्सारी से सुलभ मिल जाता हैं★
            ★कोरियर से मँगवा सकते हैं★

     ★3 ग्राम दवा 5000 डेंगू cell{ wbc} निर्मित करती है★

बुखार की रामायण दवा

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम

सभी  चूर्ण को मिलाकर रख ले ।

दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे ।
साथ मे दुध भी जरूर ले ।

बुखार मे  लगातार 3 दिन दवा ले ।

हैपेटाटस है तो 21 दिन ले
21 दिन के बाद टेस्ट कराए

जब हमें या घर पर किसी को बुखार होता है तब सबसे पहले हम क्रोसिन या किसी एंटीबायोटिक से बुखार ठीक करने का प्रयास करते है। इन एलोपैथिक  दवाओं  से बुखार में आराम तो मिल जाता है पर ये मेडिसिन्स हमारे लिवर पर बुरा प्रभाव डालती है।

बुखार का उपचार इसके लक्षणों के आधार पर होता है। कई बार किसी चीज से इंफेक्शन से और कई बार मौसम बदलने के कारण बुखार हो जाता है।

शुरूआती लक्षण को अगर समय पर ही पहचान लिया जाये तो बुखार के असर से बचा जा सकता है और ज़रूरत पड़ने पर इसका इलाज भी कर सकते है।

बुखार कई प्रकार का होता है जैसे अंदरूनी बुखार, दिमागी बुखार, टाइफाइड, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी सी  हो या डेंगू बुखार हो.....

चिकन गुनिया में रामायण है यह।

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अगर बुखार तेज हो तो इस दवा के साथ मरीज के माथे पर ठंडे पानी में भीगी पट्टियां रखें और ये तबके तक करे जब तक शरीर का temprature कम ना हो जाए। पट्टी रखने के कुछ देर बाद गरम हो जाती है, ऐसे में थोड़ी देर बाद इसे फिर से पानी में भिगो कर सिर पर रखे।
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बुखार से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी ना हो इसलिए जरुरी है पानी अधिक मात्रा में पिए। पानी में ग्लूकोस घोल कर भी ले सकते है। पानी पीना हो तो पहले उसे उबाल कर रखे और बाद में इसमें से ही पानी पिए। गुनगुना पानी पीना जादा बेहतर है।

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बुखार आने पर रोगी को जादा से जादा आराम करना चाहिए और खाने पिने का भी पूरा ध्यान रखे। दूध, साबूदाना और मिश्री जैसी हल्की फुलकी चीज़े खाने को दे। नारियल पानी और मौसमी का जूस पीना भी अच्छा होता है।
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बुखार में परहेज क्या करे

अगर मरीज को वायरल फीवर है तो उसके प्रयोग की हुई चीजों का इस्तेमाल ना करे और रोगी के आस पास सफाई का पूरा ध्यान रखे।

बुखार से पीड़ित व्यक्ति को अपने पास रुमाल रखना चाहिए और जब भी खाँसी या छींक आये तब रुमाल का प्रयोग अवश्य करे ताकि वायरस दूसरे लोगों में ना फ़ैल सके।

बुखार में दही और ठंडी चीजें खाने पिने से बचे और हल्का भोजन करे।

सिद्ध आयुर्वेदिक
09417862263

★पाचन शक्ति बढ़ती है★


सिद्घ आयुर्वेदिक

               ★पाचन शक्ति बढ़ती है★

100 ग्राम अजवायन
सौंफ 100 ग्राम
कलौंजी 50 ग्राम
सेंधानमक आधा चम्मच

पीसकर चूर्ण बनाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पाचनशक्ति बढ़ती है और अपच दूर होता है।

                    Whats 9417862263

Friday, 22 December 2017

*कब्जहर और गैस हरण चूर्ण*

सिद्ध आयुर्वेदिक
               (Constipation )
       *कब्जहर  और गैस हरण  चूर्ण*
        गैस की समस्या 1 मिनट में ठीक
     (जटिल से जटिल कब्ज में लाभकारी )


      
आजकल पेट में गैस बनना एक साधारण बात हो गई है।
पाचन तंत्र में विकार उत्पन्न होने की वजह से उदर और आंतों में गैस की समस्या उत्पन्न हो जाती है है।
गैस बनना किसी रोग का लक्षण भी हो सकता है। अधेड़ उम्र के लोग इससे अधिक पीडि़त रहते हैं।
क्योंकि इस उम्र में पाचन क्रिया कमजोर होने लगती है। लोग अक्सर इसे आम समस्या समझकर नजर अंदाज कर दिया करते हैं।
पेट में गैस होने पर सीने में जलन होने का मुख्य कारण पेट में मौजूद एसिड होता है।
इस एसिड के इसोफेगस में आने से गले में जलन होती है। इसके चलते कुछ भी खाना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते कई बार हार्ट अटैक की समस्या भी हो सकती है।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। कब्ज का शिकार लोगों को गैस की समस्या ज्यादा परेशान करती है।
लक्षण :
रोगी की भूख कम हो जाती है। छाती और पेट में दर्द होने लगता है, बेचैनी बढ़ जाती है, मुंह और मल-द्वार से आवाज के साथ वायु निकलती रहती है। इससे गले तथा हृदय के आस-पास भी दर्द होने लगता है। सुस्ती, ऊंघना,बेहोशी, सिर में दर्द, आंतों में सूजन, नाभि में दर्द, कब्ज, सांस लेने में परेशानी, हृदय (दिल की बीमारी), जकड़न, पित्त का बढ़ जाना, पेट का फूलना, घबराहट, सुस्ती, थकावट, सिर में दर्द, कलेजे में दर्द और चक्कर आदि लक्षण होने लगते हैं।
आएं पाएं छुटकारा इन सभी बीमारियों से
इस आयुर्वेदिक चूर्ण के साथ

हरड़ 250 ग्राम
इंद्रायण 100 ग्राम
अजवायन 100 ग्राम
आवला सुखा 50 ग्राम
बहेड़ा 50 ग्राम
सेंधा नमक 100 ग्राम
काला नमक 50 ग्राम
नोसादर 50 ग्राम
निम्बू सत 10 ग्राम
हल्दी 50 ग्राम
सोंठ 10 ग्राम
सोंफ 100 ग्राम
काली मिर्च 20 ग्राम
दालचीनी 20 ग्राम
सभी को कुटपिस कर चूर्ण बना ले और शाम को सोते समय एक छोटा आधा चमच्च गुनगुने पानी से ले ।
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फायदे
●यह आँतों में जमे मल को बाहर निकालता है।
●कब्ज की समस्या से राहत देता है ।
●भूख बढाता है ।
●खाने से रस बनाने की प्रकिर्या को सरल करता है ।
●आंतों की सफाई कर आंतों को मजबूत करता है।
● पेट की चर्बी नही बढ़ने देता।
●गैस की समस्या को दूर करता है।
● पेट दर्द के रामबाण है यह।
●अगर आप को गैस बनने की या एसिड की या जलन की समस्या होती है।
तो एक एक चुटकी चुर्ण लेते रहे। 2 मिनट में जलन समाप्त हो जाती है।
सिद्ध आयुर्वेदिक
09417862263
यह दवा आप कोरियर से मंगवा भी सकते है । 

शुगर की कामयाब दवा

सिद्ध आयुर्वेदिक
094178 62263

         शुगर की कामयाब दवा

जिन की शुगर 200 से उपर रहती है
वह यह दवा ऐपल के सिरके से ले ।

शुगर 2 मै दिन समान्य हो जाएगी  ।

आप ने आधा ग्लास पानी लेना है
और 2 चम्मच ऐपल सिरका लेना है ।

धोलकर सिरका पानी के साथ एक
चम्मच शुगर की दवा लेनी है ।

2 दिन में शुगर समान्य हो जाएगी ।

सिरका बजार में आम मिल जाता है ।

(यह दवा कोरिया से भी मंगवा सकते है सिरका आप को खुद लेना होगा )

*त्रिफला चूर्ण-400 ग्राम
*इन्द्रजो कडवा या
  इन्द्रजो तल्ख़ 250 ग्राम
*इंद्राण अजमायन-250ग्राम
*मेथी का दना - 200ग्राम
*कलौंजी 200 ग्राम
*तेज पत्ता ------- 200 ग्राम
*जामुन की गुठली -200 ग्राम
*बेलपत्र के पत्ते - 200 ग्राम
*गुडमार -130 ग्राम
*नीम की गुठली  130 ग्राम
*तुलसी की पत्तियाँ- 130 ग्राम
*सदाबहार की पत्तियाँ -130 ग्राम
*वंशलोचन -130 ग्राम
*जायफल -50 ग्राम
*जावित्री -50ग्राम
*चार गोंद -50 ग्राम
*छोटी इलायची -20 ग्राम
*कालीमिर्च- 50

एलोवेरा रस 500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय में
सुखाए ।

सेवन विधि - सुबह -शाम  3 से 5  ग्राम पानी से लेते रहे ।

***
खानपान में करें परहेज

-अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।

गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।
-***

मधुमेह केरोगी इसका करें सेवन

जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें ।
***

पत्तागोभी,पालक,मेथी और मेथी दाने का साग, करेला,तुरई (तोरी),गिलकी, घीया (लोकी),टिंडा, परवल,कन्दूरी, बथुआ, चौलाई, मुंग, अरहर,चने की दाल, भुने हुए चने,चने के बेसन से छाछ में बनाई हुई कढी,जीरा प्याज तथा लहसुन से छौंकी हुई, अकेली छाछ,पका हुआ पीला नींबू,नींबू का अचार थोडी मात्रा में, फ़ीका दूध, घी,थोडा मक्खन,जामुन फ़ल,कैथ[कबीट]के गुद्दे की चटनी खा सकते हैं। पथ्य के बिना औषधि सेवन बेकार है। लाभ का कोई चांस नहीं है।

-जौ और गेहूं की रोटी खाएं। मूंग, मसूर और चने की दाल का सेवन करें। करेला, बबूल के फले खाएं।सिद्ध आयुर्वेदिक
094178 62263

         शुगर की कामयाब दवा

जिन की शुगर 200 से उपर रहती है
वह यह दवा ऐपल के सिरके से ले ।

शुगर 2 मै दिन समान्य हो जाएगी  ।

आप ने आधा ग्लास पानी लेना है
और 2 चम्मच ऐपल सिरका लेना है ।

धोलकर सिरका पानी के साथ एक
चम्मच शुगर की दवा लेनी है ।

2 दिन में शुगर समान्य हो जाएगी ।

सिरका बजार में आम मिल जाता है ।

(यह दवा कोरिया से भी मंगवा सकते है सिरका आप को खुद लेना होगा )

*त्रिफला चूर्ण-400 ग्राम
*इन्द्रजो कडवा या
  इन्द्रजो तल्ख़ 250 ग्राम
*इंद्राण अजमायन-250ग्राम
*मेथी का दना - 200ग्राम
*कलौंजी 200 ग्राम
*तेज पत्ता ------- 200 ग्राम
*जामुन की गुठली -200 ग्राम
*बेलपत्र के पत्ते - 200 ग्राम
*गुडमार -130 ग्राम
*नीम की गुठली  130 ग्राम
*तुलसी की पत्तियाँ- 130 ग्राम
*सदाबहार की पत्तियाँ -130 ग्राम
*वंशलोचन -130 ग्राम
*जायफल -50 ग्राम
*जावित्री -50ग्राम
*चार गोंद -50 ग्राम
*छोटी इलायची -20 ग्राम
*कालीमिर्च- 50

एलोवेरा रस 500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय में
सुखाए ।

सेवन विधि - सुबह -शाम  3 से 5  ग्राम पानी से लेते रहे ।

***
खानपान में करें परहेज

-अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।

गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।
-***

मधुमेह केरोगी इसका करें सेवन

जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें ।
***

पत्तागोभी,पालक,मेथी और मेथी दाने का साग, करेला,तुरई (तोरी),गिलकी, घीया (लोकी),टिंडा, परवल,कन्दूरी, बथुआ, चौलाई, मुंग, अरहर,चने की दाल, भुने हुए चने,चने के बेसन से छाछ में बनाई हुई कढी,जीरा प्याज तथा लहसुन से छौंकी हुई, अकेली छाछ,पका हुआ पीला नींबू,नींबू का अचार थोडी मात्रा में, फ़ीका दूध, घी,थोडा मक्खन,जामुन फ़ल,कैथ[कबीट]के गुद्दे की चटनी खा सकते हैं। पथ्य के बिना औषधि सेवन बेकार है। लाभ का कोई चांस नहीं है।

-जौ और गेहूं की रोटी खाएं। मूंग, मसूर और चने की दाल का सेवन करें। करेला, बबूल के फले खाएं।

बलवर्धक और वीर्यवर्धकचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक
            बलवर्धक और वीर्यवर्धक
                        चुर्ण
               वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण


           महिलाओं और मर्द दोनों
        की हर कमज़ोरी दूर करता है।
आँवला चुर्ण       200 ग्राम
बरगद फल        100 ग्राम (चुर्ण)
तुलसीबीज        100 ग्राम
बाबुल फली       100 ग्राम (बीज रहित)
कौंचबीज काला  50 ग्राम
तालमखाना        50 ग्राम
कंदबीज             25 ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 25 ग्राम
सभी को मिलाए।
   ★यह 650 ग्राम चुर्ण बन जाएगा।★
  ◆यह 60 दिन के करीब दवा बनेगी।◆
रोजाना 5 -5 ग्राम 3 बार हल्के ठंडे दूध के साथ सेवन करे।
***
यह चुर्ण मर्द और महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक है
यह महिलाओं के भी रामबाण योग है।
महिलाओं की हर कमजोरी और सफेद पानी की समस्या को ठीक करता है।
***
शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।
यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।
इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।
धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।
यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।
यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।
दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।
Online आप मंगवा सकते हैं।
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★शुक्राणु की पुरुषों में कमी★

सिद्ध आयुर्वेदिक

         ★शुक्राणु की पुरुषों में कमी★

    【बच्चे न होने की एक पीड़ा यह भी है】

ज्यादातर बच्चे के ना होने का कारण महिलाओं को ही ठहराया जाता है ।

लेकिन इसमें पुरूष भी कम नही है जब पुरूषों में शुक्राणु के बनने के लक्षण कम होते है तो उनमें नपुंसकता बढ़ने लगता है ।

जिससे बच्चे के पैदा होने में
दुविधा खड़ी हो जाती है

सामान्य तौर पर एक स्वस्थ या हेल्दी पुरूष में 15 मिलियन शुक्राणु की कोशिकाओं का होना काफी आवश्यक होता है।

जिसमें स्वस्थ शुक्राणु के इन लक्षणों के अलावा रूप, संरचना और गतिशीलता का होना जरूरी माना जाता है।

और इसकी कमी ही अनहेल्दी शुक्राणु के लक्षणों का होना पाया जाता है। जिसमें मर्द में नपुंसकता और सेक्स करने के इच्छा में कमी होने लगती है और पूरी लाइफ पर इसका असर देखने को मिलता है।

यदि आप थोड़ी सी सतर्कता बरते तो आप अपनी जीवनशैली में कुछ सुधार लाकर शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या को बढ़ा सकते है।

★★★
                       शुक्राणुओं के बारे          
                   कुछ हैरान करने वाले सच

भारत के मर्दो के वीर्य में साल दर साल शुक्राणुओं की कमी देखी जा रही है।  भारत के मर्दो में अब पहले जैसी बात नही रही। शक्राणु के आकर और संरचना में गड़बड़ियां आ रही है। 1978 में एक सेहतमंद व्यक्ति के वीर्य में शुक्राणुओं की गिनती 6 करोड़ प्रति लीटर पाई जाती थी, 2012 में यह गिनती 6 करोड़ से 2 करोड़ हो गयी थी।

इन सालों में भारती मर्द बहुत कमजोर हुआ है।

कारण क्या है।

आयुर्वेद मान्यता है कि

■अवैध नशीली दवाओं का प्रयोग – कोकीन या गांजा जैसे नशीले पदार्थों के सेवन से आपके शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ सकती है।

■शराब का सेवन – शराब पीने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है और शुक्राणु उत्पादन में कमी आ सकती है। (और पढ़ें – टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय)

■धूम्रपान – अन्य व्यक्तियों की तुलना में धूम्रपान करने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है।

■तनाव – लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण शुक्राणु पैदा करने वाले कुछ आवश्यक हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं।

■वजन – मोटापे के कारण हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पुरुषों की प्रजनन क्षमता कमज़ोर हो सकती है।

★★★

फिर भी चिंता की बात है आयुर्वेद में हर रोग का इलाज  शर्तिया है।

★★★

       ★शुक्राणुओं के लिए आयुर्वेदिक योग★

गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
तुसली बीज 100 ग्राम
कौंच के बीज 100 ग्राम (छिलकारहित)
सफ़ेद मूसली 100ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाबुल फली 50 ग्राम
गोखरू 50 ग्राम
विदारीकंद 50 ग्राम
बरगद दूध 50 ग्राम
सालम पंजा 50 ग्राम
सालम मिश्री 50 ग्राम
शिलाजीत 50 ग्राम
आवला चुर्ण 50 ग्राम
कबाब (शीतल)चीनी 50 ग्राम
तालमखाना 20 ग्राम
हत्था जोरी 20 ग्राम
कतीरा गोंद 20 ग्राम
बबूल का गोंद 20 ग्राम
काले तिल  20 ग्राम

सभी को चुर्ण को 200 ग्राम एलोवेरा रस में मिलाकर धुप में सुखाए।

सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।

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भोजन में निम्न पदार्थों का सेवन शरीर में वीर्य Semen improving को बढ़ाता है:

★मिश्री मिला गाय का दूध
★ गाय का धारोष्ण दूध
★मक्खन, घी
★चावल व दूध की खीर
★ उड़द की दाल
★तुलसी के बीज
★बादाम का हलवा
★मीठा अनार
★प्याज, प्याज का रस घी-शहद के साथ
★ खजूर
★बादाम

★★★

परहेज
1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

5. ओषधि सेवन के आगे-पीछे कम से कम दो घंटे कुछ न खाएं। खाली पेट सेवन से यह मतलब है।

★★★

सावधानी-

इसका उपचार करते समय लगभग 4-5 दिन तक स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए।

रात को सोते समय पानी में किशमिश के 6-7 दाने भिगोकर सुबह नाश्ते के समय पानी के साथ ही खा लें।

काले चनों का सूप बनाकर पिएं और उनको उबालकर खाना भी लाभकारी होता है।

अगर खाना चाहो तो बादाम की 8-10 गिरियों को भी खा सकते हैं।

मन को एकदम गलत विचारों से दूर रखें।

★★★

कोई भी समस्या हो

Call नही sms करें।

Whats 9417862263

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण