Saturday, 23 December 2017

गदूदा का इलाज

सिद्ध आयुर्वेदिक
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                   गदूदा का इलाज

लगभग तीस फीसदी पुरुष 40 की उम्र में और पचास फीसदी से भी ज्यादा पुरुष 60 की उम्र में प्रोस्टेट की समस्या से परेशान होते हैं। प्रोस्टेट ग्लैंड को पुरुषों का दूसरा दिल भी माना जाता है। पौरूष ग्रंथि शरीर में कुछ बेहद ही जरूरी क्रिया करती हैं। जैसे यूरीन के बहाव को कंट्रोल करना और प्रजनन के लिए सीमेन बनाना। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती हैं, यह ग्रंथि बढ़ने लगती हैं। इस ग्रंथि का अपने आप में बढ़ना ही हानिकारक होता हैं और इसे बीपीएच (बीनीग्न प्रोस्टेट हाइपरप्लेसिया) कहते हैं।

prostate badhne ke lakshan
● पेशाब करने में कठिनाई मेहसूस होना।

● थोड़ी थोड़ी देर में पेशाब की हाजत होना। रात को कई बार पेशाब के लिये उठना।

● पेशाब की धार चालू होने में विलंब होना।

● मूत्राषय पूरी तरह खाली नहीं होता है। मूत्र की कुछ मात्रा मूत्राषय में शेष रह जाती है। इस शेष रहे मूत्र में रोगाणु पनपते हैं।

● मालूम तो ये होता है कि पेशाब की जोरदार हाजत हो रही है लेकिन बाथरूम में जाने पर बूंद-बूंद या रुक-रुक कर पेशाब होता है।

● पेशाब में जलन मालूम पडती है।

● पेशाब कर चुकने के बाद भी मूत्र की बूंदे टपकती रहती हैं, याने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता।

● अंडकोषों में दर्द उठता रहता है।

● संभोग में दर्द के साथ वीर्य छूटता है।

ऐसी अवस्था मरीज के लिए कष्टदायक होती है। उसे समझ नहीं आता कि क्या किया जाना चाहिए।

दूसरे रोग की तरह प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने पर भी इसका उपचार संभव है। ऐसी बहुत सी दवाइयां हैं,

जिससे मरीज को काफी आराम महसूस होता है और वह सामान्य दिनचर्या जी सकता है।

ऐसे में प्रकृति में भी बढिया उपाय हैं। जैसे सीताफल के बीज इस बीमारी में बेहद लाभदायक होते हैं।

सीताफल के कच्चे बीज को अगर हर दिन अपने खाने में इस्तेमाल किया जाए, तो काफी हद तक यह प्रोस्टेट की समस्या से बचाव करने में मददगार होता है।

इन बीजों में ऐसे ‘प्लांट केमिकल’ मौजूद होते हैं, जो शरीर में जाकर टेस्टोस्टेरोन को डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन में बदलने से बचाता है जिससे प्रोस्टेट कोशिकाएं नहीं बन पातीं।

                     गदूदा की दवा

                  त्रिफ़ला 250 ग्राम
       अजवाइन भुनी 100 ग्राम
            गिलोय चुर्ण 100  ग्राम
                      हरड़ 100-ग्राम
                   गोखरू 100 ग्राम
    सीता फल के बीज 100 ग्राम
                    अलसी 100ग्राम

सेवन विधि -:

2 -2 ग्राम पानी के साथ लेते रहे।

दिन 3 बार जरूर ले।

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परहेज

पथ्य और परहेज :–

यह खाएं

* उचित समय पर पचने वाला हल्का भोजन करें| सब्जियों में लौकी, तरोई, टिण्डा, परवल, गाजर, टमाटर, पालक, मेथी, बथुआ, चौलाई, कुलफा आदि का सेवन करें| दालों में मूंग व चने की दाल खाएं|

फलों में सेब, पपीता, केला, नारंगी, संतरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, चीकू आदि का प्रयोग करें|
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यह न खाएं
 

अरहर, मलका, मसूर, मोठ, लोबिया, काबुली चने आदि का सेवन न करें|

गुड़, लाल मिर्च, मिठाई, तेल, खटाई, अचार, मसाले, मैथुन तथा अधिक व्यायाम से परहेज करें|

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होमेपेथीक दवा

      दवा का नाम-  सेबाल सेरुलेटा

पुरानी या नई दोनों ही स्थितियों में प्रोस्टेट ग्रन्थि बढ़ जाने पर सेबाला सेरुलेटा औषधि का मूलार्क 10 से 20 बूंद की मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।

इस औषधि की 3 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।

पेशाब करने में कठिनाई होती है, पेशाब करते समय जलन होती है तथा बूंद-बूंद करके पेशाब आता है।

ऐसे लक्षणों में भी रोगी को सेबाला सेरुलेटा औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

यह दवा कोरियर से मंगवा सकते हैं।

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