Wednesday, 19 December 2018

सिद्ध क्रेक हील तेल

          *सिद्ध आयुर्वेदिक एक सेवा संस्था है*

         फ़टी एड़ियो का गरंटी सुधा आयुर्वेदिक तेल
           सर्दियों में फ़टी एड़ियो के परेशानी से बचे

                 


अमचूर तेल, देशी गाय का घी,जैतून का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल , नीम तेल 50 -50 ml ले । सभी तेलों में 100 ml वैसलीन मिलाए।

सोने से पहले वनस्पति तेल को अपनी फटी हुई एड़ियों पर लगाए ओर जुराब पहन कर सोए।

                      नही बना सकते तो
         100 ML 250 रुपये में online मगवाएँ।
               कोरीयर खर्च अलग से होगा
             Whats करे  94178 62263

Wednesday, 12 December 2018

सिद्ध सर्दी नाशक कल्पचुर्ण





😊सर्दी की करे छूटी 10मिनटों में 😊
घर रखें सदा सिद्ध सर्दी नाशक कल्पचुर्ण
 डॉक्टर के पास जाने की नही होगी जरूरत।

नुस्खा -सिद्ध सर्दी नाशक कल्पचुर्ण
गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
हींग -20 ग्राम(भूनी हुई)
शिलाजीत -20ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
सभी  चूर्ण को मिलाकर रख ले ।
दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे ।
3 दिन पूर्ण आराम जरूर करे।

★★★
साथ में काढ़ा जरूर ले★काढ़ा कैसे बनाए★
6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले।

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★शहद 5 चम्मच

*सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।

3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।

यह क्रिया 3 दिन लगातार करे।

इस अयूर्वादिक दवा और काढ़े के फायदे जाने।
गले में खराश, खांसने पर भी बलगम नहीं निकल सकता, छाती में दर्द और टीस महसूस होना, बलगम बाहर नहीं आ पाता और रोगी को सटकना पड़ता है, खांसी के साथ कूल्हे में भी दर्द, अत्यधिक बोलने अथवा गाने के कारण गले में खराश, दर्द, बिस्तर की गमीं से एवं शाम के वक्त अधिक परेशानी, ठंडा पानी पीने से आराम मिले, तो साथ ही इसमें रोगी को बार-बार पेशाब जाना पड़ता है और खांसते समय अपने आप ही पेशाब निकल जाता है, सांस अंदर खींचने में अधिक परेशानी होती है।

छाती में लगातार दर्द, जरा-सा हिलते ही छाती में जकड़न, कर्कश आवाज के साथ सूखी खांसी, गहरी व तेज सांसें, सांस छोड़ने पर परेशानी बढ़ती है, खांसने में अधिक शक्ति खर्च करनी पड़ती है, आधी रात के बाद अधिक परेशानी होती है। ठंडी, सर्दीली हवाओं से हो गई हो, तो

सूखी, तीव्र खांसी, खांसते-खांसते मरीज उठकर बैठ जाता है, गर्म कमरे में आने पर अथवा कुछ खाने-पीने पर अधिक खांसी, ऐसा लगना जैसे छाती फट जाएगी, खांसते समय रोगी छाती को हाथों से जकड़ लेता है, हिलने-डुलने-बैठने से परेशानी बढ़ जाती है,
खांसते समय सिर में भयंकर पीड़ा, जैसे सिर फट जाएगा, रोगी दर्द से चिल्ला उठता है और दोनों हाथों से सिर पकड़ लेता है। साथ ही पेशाब की थैली, घुटनों और पैरों में भी खांसते समय दर्द होता है, दर्द के कारण रोगी लेट जाता है,

• यदि बलगम के साथ खांसी आए और बलगम में तीव्र बदबू हो, जिससे रोगी भी परेशान हो

• यदि लंबे अर्से से ऐंठन के साथ बलगमयुक्त खांसी हो, जिसमें खून भी आता हो,

• यदि बलगम अत्यधिक हो और ऐसा लगे,जैसे पूरी छाती इससे भरी हुई है,बलगम की वजह से सीटी जैसी आवाजें सुनाई पड़ती हों, सांस लेने में तकलीफ हों,

• यदि खांसी बहुत जिद्दी हो अर्थात किसी दवा से फायदा न हो रहा हो एवं खांसने में बाई छाती से बाएं कंधे तक दर्द हो और प्राय:सूखी खांसी हो,
• यदि काली खांसी हो और खांसने पर तेज आवाज हो, अधिक जोर लगाना पड़े और लगातार खांसी के दौरे उठते रहें,
यदि खांसी बलगम के साथ हो, रात में बढ़ जाए, झागदार बलगम हो,
• यदि खांसी तुरही अथवा दुंदुभि जैसी आवाज के साथ हो, गले में रूखापन एवं दर्द हो, छाती की मांसपेशियों में अधिक खिंचाव हो,

इन सभी लक्ष्यण में यह दवा रामबाण है।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263

Email-sidhayurveda1@gmail.com

Saturday, 1 December 2018

सिद्ध पीलिया नाशक कल्पचुर्ण


        
खून की कमी औऱ अशुद्धि को करे 10 दिन में पूरी होगी।
पीलिया मुख्यत तीन प्रकार का होता है
जो कि इस प्रकार हैं – वायरल हैपेटाइटिस ए, वायरल हैपेटाइटिस बी तथा वायरल हैपेटाइटिस नान A व नान B।
यह दवा सभी प्रकार के पीलिया रोग में कारगर है
       (Online दवा मंगवा सकते हैं)
पीलिया नाशक कल्पचुर्ण नुस्ख़ा
गिलोय 100 ग्राम
कलमी शोरा 50 ग्राम
आँवला 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्रान
पीपर (पाखर) 30 ग्राम
हल्दी  30 ग्राम
मीठा सोडा 30 ग्रान
उत्तम लोहभस्म 50 ग्राम
मिश्री तांगा  100 ग्राम 
सभी को मिलाकर  200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
दो आनी भार (करीब 1.5 ग्राम आधा चम्मच)*जितना चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ लेने से पीलिया का उग्र हमला भी 3 से 7 दिन में शांत हो जाता है।
★★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
सब्जियों का ताजा निकला रस (चुकंदर, मूली, गाजर, और पालक), फलों का रस (संतरा, नाशपाती, अंगूर और नीबू) और सब्जियों का शोरबा।
ताजे फल, जैसे सेब, अन्नानास, अंगूर, नाशपाती, संतरे, केले, पपीता, आदि। खासकर अन्नानास विशेष रूप से उपयोगी होता है।
पीलिया के उपचार हेतु जौ का पानी, नारियल का पानी अत्यंत प्रभावी होते हैं।
*नीबू के रस के साथ अधिक मात्रा में पानी पीने से लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रक्षा होती है।
पीलिया की चिकित्सा हेतु लिए जाने वाले प्रभावी आहारों में फलों के रस का विशेष स्थान है। गन्ने, नीबू, मूली, टमाटर आदि का रस लिवर के लिए अत्यंत सहायक होता है।*
*आँवला भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है। आप अपने लिवर की कोशिकाओं को स्वच्छ करने हेतु कच्चा, धूप में सुखाया हुआ या रस के रूप में आँवला ले सकते हैं।*
अनाज जैसे ब्रेड, चपाती, सूजी, जई का आटा, गेहूँ का दलिया, चावल आदि कार्बोहायड्रेट के बढ़िया स्रोत हैं और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को दिये जा सकते हैं।
●●●
*इनसे परहेज करें
तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें आदि
सभी वसा जैसे घी, क्रीम और तेल।
★★★
कुछ अचूक नुस्खे जिससे आपको पीलिया के इलाज में मदद मिलेगी ।
*गन्ने का रस*
गन्ने का रस दिन में कई बार पीना चाहिये। पीलिया के रोग में यह अमृत है। गन्ने के रस का सेवन करने से पीलिया बहुत ही जल्दी ठीक हो जाता है।
*छाछ*
पीलिया के रोग में 1 ग्लास छाछ रोज़ाना पीनी चाहिये। इसमें काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से इसका गुण और भी बढ़ जाता है और यह कुछ ही दिनों में पीलिया के रोग को समाप्त कर देता है। प्याज़ से इलाज
प्याज़ पीलिया में बहुत ही लाभदायक होती है। प्याज़ को काट लीजिये और नीबू के रस में कुछ घंटों के लिये भिगो दीजिये। कुछ घंटों बाद इस प्याज़ को निकाल लीजिये। इसे नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिला दीजिए। दिन में 2 बार इस प्याज़ को खाने से पीलिया बहुत ही जल्दी दूर हो जाता है।
*फ्रूट्स
फलों में तरबूज और खरबूजा दोनों ही पीलिया में बहुत लाभदायक हैं। इन्हें अच्छी मात्रा में खाना चाहिये। इससे पीलिया का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
*निम्बू का रस*
लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पिएं। कुछ ही दिनों में आप खुदको पीलिया से छुटकारा मिलता है महसूस करेंगे।
*मूली के पत्ते*
मूली के हरे पत्ते पीलिया के इलाज में बेहद लाभदायक होता है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी। और आप पाएंगे पीलिया से छुटकारा।
*टमाटर का रस*
टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें।
खास एहतियात बरतें।
स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। भोजन में उन चीजों को शामिल करें  जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें। वर्कआउट खूब करें और स्वच्छता से रहें हेल्दी चीजें खाएं।
पीलिया में इनका सेवन न करें
सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थोड़ी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं।
दाल खाने से बचें,  क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है।
     ■हम आप की सेवा में है■
         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆
          ●निशुल्क सिद्घ अयूर्वादिक सलाह ले●
                 Whats 94178 62263

Saturday, 24 November 2018

सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण-पुराने से पुराने धातु रोग को करे जड़ से खत्म



         मसाने की गर्मी, पेट की गर्मी लाभदायक
     पुराने से पुराने धातु के रोग सपनदोष के लिए
                 कारगर नुस्खा
जाने :
            धत रोग के लक्षण, उपाय,
             और अयूर्वादिक दवा
★★
आज के युग में अनैतिक सोच और अश्लीलता के बढ़ने के कारण आजकल युवक और युवती अक्सर अश्लील फिल्मे देखते और पढते है तथा गलत तरीके से अपने वीर्य और रज को बर्बाद करते है! अधिकतर लड़के-लड़कीयां अपने ख्यालों में ही शारीरिक संबंध बनाना भी शुरू कर देते है!


जिसके कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजना की अवस्था में बना रहता है, और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी शुरू हो जाती है! और ऐसा अधिकतर होते रहने पर एक वक़्त ऐसा भी आता है! जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है और किसी लड़की का ख्याल मन में आते ही उनका लेस (वीर्य) बाहर निकल जाता है, और उनकी उत्तेजना शांत हो जाती है! ये एक प्रकार का रोग है जिसे शुक्रमेह कहते है!


वैसे इस लेस में वीर्य का कोई भी अंश देखने को नहीं मिलता है! लेकिन इसका काम पुरुष यौन-अंग की नाली को चिकना और गीला करने का होता है जो सम्बन्ध बनाते वक़्त वीर्य की गति से होने वाले नुकसान से लिंग को बचाता है!

■■■

धात रोग का प्रमुख कारण क्या है?
अधिक कामुक और अश्लील विचार रखना!
मन का अशांत रहना!

अक्सर किसी बात या किसी तरह का दुःख मन में होना!

दिमागी कमजोरी होना!

व्यक्ति के शरीर में पौषक पदार्थो और तत्वों व विटामिन्स की कमी हो जाने पर!

किसी बीमारी के चलते अधिक दवाई लेने पर
व्यक्ति का शरीर कमजोर होना और उसकी प्रतिरोधक श्रमता की कमी होना!

अक्सर किसी बात का चिंता करना।
पौरुष द्रव का पतला होना।

यौन अंगो के नसों में कमजोरी आना।
अपने पौरुष पदार्थ को व्यर्थ में निकालना व नष्ट करना (हस्तमैथुन अधिक करना)।

            ★धात रोग के लक्षण क्या है?★
मल मूत्र त्याग में दबाव की इच्छा महसूस होना! 

धात रोग का इशारा करती है!

लिंग के मुख से लार का टपकना!

पौरुष वीर्य का पानी जैसा पतला होना!

शरीर में कमजोरी आना!

छोटी सी बात पर तनाव में आ जाना!

हाथ पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन या कपकपी होना!

पेट रोग से परेशान रहना या साफ़ न होना, कब्ज होना!

सांस से सम्बंधित परेशानी, श्वास रोग या खांसी होना!
शरीर की पिंडलियों में दर्द होना!

कम या अधिक चक्कर आना!

शरीर में हर समय थकान महसूस करना!

चुस्ती फुर्ती का खत्म होना!

मन का अप्रसन्न रहना और किसी भी काम में मन ना लगना इसके लक्षणों को दर्शाता है!

★★★
नुस्खे

शतावरी मुलहठी ( Asparagus Liquorices ) :
50 ग्राम शतावरी, 50 ग्राम मुलहठी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज, 25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम शीतलचीनी और 4 ग्राम बंगभस्म, 50 ग्राम सालब मिसरी लेकर इन सभी सामग्रियो को सुखाकर बारीक पिस लें!
पीसने के बाद इसमे 60 ग्राम चाँदी का वर्क मिलाएं और प्राप्त चूर्ण को (60 ग्राम ) सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लें!

        ■धातु  पुष्टि कल्पचुर्ण■

कौंचबीज बीज 100 ग्राम
शीतल चीनी     100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
बड़ दूध            100 ग्राम
सालम पंजा       100 ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
मिश्री              100  ग्राम

50 ग्राम मुलहठी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज,
सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।

कैसे सेवन करे।

दिन में 2 बार 1-1चमच्च पानी या कोसे दूध से ले।

कम से कम 21 दिन कोर्स करे।
सपनदोष नही होगा
धातु रोग जड़ से खत्म होगा
★★
परहेज :
        गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।
ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है!।
वीर्य गाड़ा हो sex timing 20 मिनट होगी।
धातु दवा online भी मंगवा सकते है।।

Whats करे    9417862263

Tuesday, 13 November 2018

सिद्ध गोखरू कल्पचुर्ण- नपुंसकता रोग में सिद्ध योग




गोखरू (Gokhru)– गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। 

बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है।

                      गोखरू नुस्खा 1

 नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। 

पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए।

सुबह शाम 2 बार उपयोग करे
21 दिन लगातार उपयोग करे

1. इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

2. शरीरक ,मानसिक और आत्मिक शक्ति का उदय होगा।




★★★

                      *गोखरू नुस्ख़ा 2*

गोखरू                         100 ग्राम
कौंचबीज काला               50 ग्राम
कीकर फल(बीज रहित)    50 ग्राम
सतावर                           50 ग्राम
तालमखाना                     50 ग्राम
अशगन्ध                         50 ग्राम
मिश्री।                          100 ग्राम

     सभी को चूर्ण बना कर बंद डिब्बे में रखे

सेवन विधि :-
                  1 चमच्च सुबह 1चमच्च रात को मीठे दूध से 30 दिन तक सेवन करे।

परहेज :-खट्टे पदार्थों से परहेज करें।

लाभ:- सेक्स कमजोरी, शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, सेक्स की इच्छा की कमी, टाइम की कमी, तनाव की कमी और शरीरक कमजोरी में लाभदायक है।

          online मंगवाए या खुद बनाए।
     सदा स्वस्थ रहे।
whats 94178 62263





Thursday, 8 November 2018

सिद्ध शक्तियोग कल्पचुर्ण -शारीरिक हार्मोन असंतुलन की कारगर आयुर्वेदिक औषधि*




  40 साल के महिला और पुरूष यह जानकारी जरूर पढ़ें आप के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है।

      सिद्ध शक्तियोग कल्पचुर्ण संपूर्ण योग

अश्वगान्ध          200 ग्राम
कौंचबीज बीज  100 ग्राम
बेल चुर्ण           100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
गिलोय              50 ग्राम
बड़ दूध             50 ग्राम
मुलहठी            50 ग्राम
चरायता            50 ग्राम
हल्दी                50 ग्राम
सोंठ                 50 ग्राम
काली मिर्च       50 ग्राम
लोह भस्म        50 ग्राम
सौंफ                50 ग्राम
निर्गुन्डी            25 ग्राम
त्रिवृत               25 ग्राम
पिप्पली            25 ग्राम
लवंग                25 ग्राम
वच                   25 ग्राम
कुष्ठ                  25 ग्राम

*सभी को चुर्ण बनाए और 400 ग्राम गिलोय रस में भावना दे। फिर  धूप में सुखाकर औऱ सुबह शाम दूध के साथ ले।

यह आप खुद बना सकते हैं।
आप online भी मंगवा सकते हैं

★★★
हार्मोन असुंतलन जानकारी
बहुत बार किशोरावस्था में हार्मोन असुंतलन हो जाते हैं।

नोजवान भी ध्यान दे।

किशोरावस्था में आने वाले बच्चे को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन सब महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है हार्मोनल स्राव के कारण होने वाले शारीरिक परिवर्तन, जो कि एक बच्चे को यौवन में कदम रखने में मदद करते हैं। यह एक बहुत ही नाजुक अवधि होती है जहां वे वयस्क जैसा होने की आशा रखते हैं, जबकि उनका शरीर और मन अब भी पर्याप्त परिपक्व नहीं हुआ होता है। उनका व्यवहार और मूड हर मिनट बदलता रहता है और उनके व्यवहार के लिए होर्मोन्स को दोषी माना जाता है।

★★★


क्या होता है जब हार्मोन्स( शरीरक बदलाव)
असुंतलन होते हैं

बिना कारण के मूड बदलना,लड़कियों में अनियमित पीरियड,अचानक वजन बढ़ना,लड़कों में स्तन विकास
,लगातार सिरदर्द,डिप्रेशन,जी मिचलाना,मुँहासे,साइनस समस्याएं,पीठ दर्द,आक्रामकता,शरीर पर अत्यधिक बाल उगना,
इन दोषों पर माता पिता जरूर ध्यान दे।

★★★
40 साल के ऊपर जब हार्मोन्स असुंतलन होते हैं तो ऐसे लक्षण पाए जाते हैं।


हार्मोन महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब हार्मोन के स्तर में अस्थिरता होती है, तो उसका सीधा प्रभाव पड़ता है जिससे मूड बदलता है ,डिप्रेशन हो सकता है और वह आपकी यौन इच्छा, ओवुलेशन और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता  हैं।


कई बार शारीरिक हार्मोनल असंतुलन के कारण  कुछ हार्मोन का उत्पादन ज़्यादा या कम हो जाता है। अकसर  हम शरीर द्धारा भेजे संकेतों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते है और इससे स्थिति बदतर हो जाती है।

इसलिए,हार्मोन असंतुलन का संकेत देने वाले कुछ सामान्य लक्षण जानना आवश्यक है, और अगर यह लक्षण कुछ दिनों में नहीं जाते तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

★★
वजन बढ़ना :

पेट के निचले हिस्से में या जांघों में वजन बढ़ना यह संकेत देता है कि एड्रेनल ग्लैंड द्धारा कोर्टिसोल हार्मोन ज़्यादा स्रावित होने से इंसुलिन के स्तर (खून  से जारी होने वाला) में वृद्धि हो जाती है।  यह ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित करता है और दिल से संबंधित बीमारियों को जन्म दे सकता है।
★★

बालों का झड़ना :

एक दिन में 100 से 200 से ज़्यादा बाल टूटना बहुत खतरनाक है। डीहैड्रो-टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के असंतुलन से अत्यधिक बाल टूटते है।

★★
गर्भावस्था के बाद नींद में गड़बड़ी होना :

नींद पूरी न होना एक बहुत ही आम समस्या है, लेकिन गर्भावस्था के बाद यह  महिलाओं में एक बड़ी संख्या में होती देखी जाती है । ऐसा प्रोजेस्टेरोन  ( एक हार्मोन जो आराम प्रदान करने वाले गुणों का है) में कमी होने के कारण होता है। गर्भावस्था के बाद  प्रोजेस्टेरोन में गिरावट होने से आप बेचैन महसूस कर सकती है और आपकी नींद को प्रभावित कर सकता है।

★★
योनि में सूखापन:

रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) की शुरुआत के साथ, एस्ट्रोजन का स्तर कम होने के कारण योनि में सूखापन हो जाता है ।यह यौन गतिविधि को असहज या दर्दनाक कर सकता  हैं।
★★

डिप्रेशन:

क्या आपको बिना किसी कारण  उदास लगता है और वह भी बहुत बार? यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। जब थायराइड हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है, तब यह होता है।

★★★

पसीना:

अगर आप 40 से ऊपर हैं और बहुत पसीना आता है, तो खबरदार रहें। यह रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) की शुरुआत के कारण हो सकता है। एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करने वाले सेरोटोनिन हार्मोन के असंतुलन के कारण अत्यधिक पसीना आ सकता है।
★★

चीनी खाने की लालसा :

लगातार मीठा भोजन खाने की इच्छा होना हार्मोनल असंतुलन का संकेत है जिसके कारण थायराइड या मधुमेह हो सकता है।

★★

लगातार भूख लगना :

अगर आपको मुख्य भोजन लेने के बाद भी भूख लगती है, तो यह हार्मोन घ्रेलिन की वजह से हो सकता है (जो हमारी भूख के लिए जिम्मेदार है)।

ओक्सिनटोमोडयूलिन  और लेप्टिन जैसे  हार्मोन भूख को कम करते हैं । इन हार्मोन के असंतुलन से आपको हर समय भूख महसूस होती है।

★★

लगातार थकान होना :

क्या आप सुस्त  या हर समय नींद आना महसूस करते हैं? थकान कभी न जाने वाली लगती है ? थायराइड हार्मोन के कारण हाइपोथायरायडिज्म भी इसके पीछे कारण हो सकता है।

★★

गैस और सूजन:

ज़्यादातर हल्की गैस और सूजन जीवन शैली कारकों की वजह से होता हैं लेकिन अगर यह स्थिर है तो यह एक अंतर्निहित हार्मोनल स्थिति हो सकती है। जब एस्ट्रोजन का स्तर अनियमित होता हैं, तो शरीर अधिक तरल पदार्थ बनाए रखने के कारण फूला हुआ महसूस होता है।


Online मंगवाए

Wednesday, 7 November 2018

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण


त्वचा रोग से परेशान है तो सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण है कारगर औषधि,साथ मे लगाने दवा होगी 3 दिन में असर होना शुरु हो जाता है।
      
  अब त्वचा रोगों की जानकारी ले। चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं जैसे कि-
दाद, खाज, खुजली, छाछन, छाले, खसरा, फोड़े, फुंसी ,एक्जिमा सोरासिस  सभी रोगों की संपूर्ण जानकारी ले
चर्म रोग या त्वचा रोग के मुख्य प्रकार –

घमौरी: मुख्य रूप से अधिक गर्मी या बरसात के मौसम में हो सकता है! इसमें व्यक्ति के शरीर पर लाल रंग के छोटे-छोटे दाने निकलने लगते हैं और खारिश के साथ ये बढ़ते हैं!

दाद: यह रोग भी शरीर की सही सफाई न होने या कोई भाग अधिक पानी में रहने के कारण हो सकता है! यह रोग संक्रमिक है इसीलिए आपसे दूसरे व्यक्ति को हो सकता है! यह रोग आपने सिर, हथेली, एड़ियों, कमर, दाढ़ी या किसी अन्य भाग में हो सकता है तथा इसके आपके शरीर में पीड़ित हिस्से में कोई छल्ला या गोल सा निशान चारों और बन जाता है!

एक्जिमा: इसमें रोग से पीड़ित भाग पर पर छोटे-छोटे दाने होते है जो धीरे धीरे लाल हो जाते हैं! इसका इलाज समय पे करवाना चाहिए क्यूंकि ये बहुत कष्टदायक हो सकता है! इसे हिंदी में उकवत भी कहते हैं!

सफेद दाग: यह भी 1 प्रकार का चर्म रोग है! इसके कारण पीड़ित के शरीर के अलग अलग भागों पर सफ़ेद दाग आ जाते हैं! इसे ल्यूकोडरमा (Lucoderma) कहते हैं और देखा गया है बहुत से लोग इसे कोढ़ समझ बैठते है, जबकि ऐसा नहीं है!

एलर्जी: इसमें शरीर पर छोटे छोटे दाने निकल जाते हैं! मुख्य रूप से या उन व्यक्तियों के शरीर में हो सकता है जिनका इम्यून सीटें कमजोर हो! इससे अन्य रोग भी हो सकते है!

खुजली: यह शरीर के अलग अलग भागों में हो सकती है! ये समय के साथ बढ़ती है और इसके कीटाणु अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं! खुजली/खाज भी एक प्रकार का संक्रामक रोग है!

छाल रोग (सारिआसिस):
इसमें त्वचा पर लाल और खुरदरे निशान पड़ जाते हैं, शरीर पर घाव पड़ने लगते है क्योंकि ऊपरी त्वचा के भाग जल्दी संक्रमण के कारण झड़ने लगते है! ये रोग वंशानुगत भी हो सकता है!

बहुत से मामलों में हम आयुवेदिक व घरेलू उपचार से रोग को ठीक कर सकते हैं।

पर कई मामलो में एक अच्छे dermatologist से सलाह लेना उचित होता है।

आज इस लेख में हम चर्म रोग ठीक करने के आयुर्वेदिक तरीकों के बारे में बात करेंगे।

नहाते समय नीम के पत्तों को पानी के साथ गरम कर के, फिर उस पानी को नहाने के पानी के साथ मिला कर नहाने से चर्म रोग से मुक्ति मिलती है।

हर रोज़ मूली खाने से चहरे पर हुए दाग, धब्बे, झाईयां, और मुहासे ठीक हो जाते हैं।

हल्दी को पीस कर तिल के तैल में मिला कर उससे शरीर पर मालिश करने से चर्म रोग जड़ से खत्म होते हैं।

करेले के फल का रस पीने से शरीर का खून शुद्ध होता है। दिन में सुबह के समय बिना कुछ खाये खाली पेट एक ग्राम का चौथा भाग “करेले के फल का रस” पीने से त्वचा रोग दूर होते हैं।
***
सेंधा नमक, दूध, हरड़, चकबड़ और वन तुलसी को समान मात्रा में ले कर, कांजी के साथ मिला कर पीस लें। तैयार किए हुए इस चूर्ण को दाद, खाज और खुजली वाली जगहों पर लगा लेने से फौरन आराम मिल जाता है।
***
पीपल की छाल का चूर्ण लगा नें पर मवाद निकलने वाला फोड़ा ठीक हो जाता है। चार से पाँच पीपल की कोपलों को नित्य सुबह में खाने से एक्ज़िमा रोग दूर हो जाता है। (यह प्रयोग सात दिन तक लगातार करना चाहिए)।
***
अरण्डी, सौंठ, रास्ना, बालछड़, देवदारु, और बिजौरे की छड़ इन सभी को बीस-बीस ग्राम ले कर एक साथ पीस लें। उसके बाद इन्हे पानी में मिला कर लेप तैयार कर लें और फिर उस लेप को त्वचा पर लगा लें। इस प्रयोग से समस्त प्रकार के चर्म रोग दूर हो जाते हैं।
***
त्वचा रोग होने पर भोजन में परहेज़ 

त्वचा रोग होने पर बीड़ी, सिगरेट, शराब, बीयर, खैनी, चाय, कॉफी, भांग, गांजा या अन्य किसी भी दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन ना करें।

बाजरे और ज्वार की रोटी बिलकुल ना खाएं।

शरीर की शुद्धता का खास खयाल रक्खे।त्वचा रोग हो जाने पर, समय पर सोना, समय पर उठना, रोज़ नहाना, और धूप की सीधी किरणों के संपर्क से दूर रहेना अत्यंत आवश्यक है।

भोजन में अचार, नींबू, नमक, मिर्च, टमाटर तैली वस्तुएं, आदि चीज़ों का सेवन बिलकुल बंद कर देना चाहिए।

(चर्म रोग में कोई भी खट्टी चीज़ खाने से रोग तेज़ी से पूरे शरीर में फ़ेल जाता है।

अगर खाना पचने में परेशानी रहती हों, या पेट में गैस जमा होती हों तो उसका उपचार तुरंत करना चाहिए और जब यह परेशानी ठीक हो जाए तब कुछ दिनों तक हल्का भोजन खाना चाहिए

खराब पाचनतत्र वाले व्यक्ति को चर्म रोग होने के अधिक chances होते हैं।

त्वचा की किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को हररोज़ रात को सोने से पूर्व एक गिलास हल्के गुनगुने गरम दूध में, एक चम्मच हल्दी मिला कर दूध पीना चाहिए।

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Wednesday, 31 October 2018

Pcod की समस्या में सिद्ध कायकल्प चुर्ण हैं कारगर।

Pcod की समस्या में महलाओं के लिए रामबाण ओषधि
 सिद्ध कायाकल्प चुर्ण
                  

         एलोवेरा और गिलोय रस युक्त
कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।
           कायाकल्प चुर्ण की सामग्री
गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल चुर्ण    200 ग्राम
अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
कलौंजी -100 ग्राम
नसांदर -100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
अपामर्ग -50 ग्राम
जटामांसी -50 ग्राम
 सत्यनाशी -50 ग्राम
काला नमक -50 ग्राम
सेंधानमक -50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
ऐलोवैरा रस -500 ग्राम
सभी चूर्ण को 1 किलोग्राम एलोवेरा रस और 400 ग्राम गिलोय रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।
जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।
सेवन विधि - 3 बार दूध से 2 ग्राम (एक चम्मच)
उपयोग करे।

         45 से 90 दिन उपयोग करे
        21 दिन में आप अच्छे होने लगेंगे।
                         ★★★
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन        सिंड्रोम की जानकारी
इस रोग से ग्रस्त महिलयों की ओवारीस में बहुत सारी सिस्ट्स (cysts) अर्थात की झिल्लियाँ पाई जाती हैं।
ये झिल्लियाँ अगर बढ़ कर तैयार अंडकोषों के ऊपर भी बन जाएँ तो इससे मासिक स्राव में रुकावट और बांझपन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
माना जाता है की जो स्त्रीयाँ बहुत अधिक तनावग्रस्त होती हैं या फिर जो रात्रि में ठीक से सो नही पाती है।
उनमें इंसुलिन हॉर्मोन के असंतुलन के साथ-साथ यह बीमारी होने की संभावना भी अधिक होती है.।
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन        सिंड्रोम के कुछ लक्षण
समय पर मासिक धर्म का न आना, बालों का झड़ना और मुँह, कमर, पेट, हाथ, व पैरों पर अधिक बालों का उगना ,चेहरे पर मुहांसों का होना, भावनात्मक उथल-पुथलवज़न का बढ़ना, अनुर्वरता
           कुछ ज़रूरी सुझाव
दिन में 5-6 बार मौसमी ताज़ा फलों ख़ास तौर पर जिनसे शरीर में मीठा अधिक ना बढ़े (चकोतरा, टमाटर, आड़ू, सेब) का सेवन करें.
★यदि आपका मॅन अप्रसन्न रहता है तो ध्यान प्राणायाम और रुचिकार कार्य करने प्रारंभ करें।
अवसाद के रहते यह बीमारी ठीक नही हो पाती।
★देसी गाय के दूध से बने घृत का सेवन करना आवश्यक है।
★घृत कुमारी को सब्जियों में मिलाकर (गोभी, प्याज़) और इसका जूस दिन में एक बार अवश्य लें।
★अधिक चीनी युक्त भोजन और मिठाइयों का सेवन न करें।
★साथ ही तले हुए, मैदा युक्त पदार्थों का सेवन भी अहितकर सिद्ध होगा।
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Wednesday, 24 October 2018

सिद्ध इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन कल्पचुर्ण-समस्त दर्द, गठिया रोगों, कफ़ रोगों, स्तन रोगों,पेट के रोगों में रामबाण

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समस्त दर्द, गठिया रोगों, कफ़ रोगों, स्तन रोगों,पेट के रोगों औऱ आंत के रोगो में सदियों से इन्द्रयाण अजवाइन को अमृत माना जाता रहा है।

कैसे तैयार होती हैं इन्द्रयाण अजवाइन इन्द्रयाण फ़ल में अजवाइन को डाल देते है। 5 किलो अजवाइन में 3 किलो इन्द्रयाण 500 ग्राम काला नमक,काली मिर्च  समेत  7 और अयूर्वादिक जड़ी बूटियों को मिलाकर कर 60 दिन के लिए रख देते हैं।

5 किलो अजवाइन में 3 किलो इन्द्रयाण 500 ग्राम काला नमक,काली मिर्च 

★भूमि आवला          50  ग्राम
★बाकुची                 20  ग्राम
★शुद्ध शिलाजी        10  ग्राम
★काली मिर्च            20  ग्राम
★सफ़ेद जीरा           50  ग्राम
★काला जीरा।          50  ग्राम
★कुडू                     50  ग्राम

60 दिन में इन्द्रयाण अजवाइन तैयार  हो जाती हैं।
इसके बाद आप सिद्ध  इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन कल्पचुर्ण तैयार कर सकते हैं।
सिद्ध  इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन कल्पचुर्ण।
       32 जड़ी बूटियां से तैयार होता है
           
सेवन विधि

1.रात को 1चमच्च गर्म पानी से।
2.बच्चों को आधा चम्मच गर्म पानी से दे
3, सर्द ऋतु में 2 बार ले।
4. गर्मी ऋतु में 1 बार ले।

*इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नही है।*
*पर गर्भावस्था में यह चुर्ण न ले*

  फायदे
गैस, जिदी कब्ज, जलन, भोजन नली की जलन औऱ सूजन, शरीर के समस्त दर्द, पेट दर्द, हाजमे की खराबी, नाभि का खिसकना, खून की कमी,  लिवर की खराबी, खून की कमी और बच्चों के पेट के कीड़े , पेट की हर खराबी, पेट की सूजन, बच्चेदानी की सूजन,यूरिक एसिड, गठिया वातदर्द, माइग्रेन ,कमरदर्द, घुटनों के दर्द में कारगर ओषधि है।

महिलाओं की पीरियड की कैसी भी समस्या जैसे टाइम पर ना आना, कम आना, पीड़ादायक होना और रुक जाना सभी समस्याएं को ठीक करता है।

       
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Thursday, 18 October 2018

सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण - एक ऐसा योग जो जगाएँ तन मन की शक्ति



                      महाराजा योग
            सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण
          premature ejaculation
।।एक ऐसा योग जो किसी भी उम्र में उपयोग कर सकते है।।


       
    आप को भी आमंत्रण है महाराजा योग का
            वीर्य और बलवर्धक योग
  
शक्राणु ,उतेजना खत्म हो गई हो,शीघ्रपतन, धातु और मर्दाना कमजोरी में ,काम इच्छा का मर जाने में रामबाण 

क्या है नुस्खा
तालमखाने          250 ग्राम
कोंच गिरी            100 ग्राम
सफ़ेद मूसली        100 ग्राम
आवला चुर्ण          100 ग्राम
तुलसी बीज           100 ग्राम
कीकर फली          100 ग्राम
सतावर                 100 ग्राम
सालम मिश्री          100 ग्राम
सालम पंजा           100 ग्राम
बड़ दूध                 100 ग्राम
बारासिंघा सिंधभस्म    5 ग्राम
मिश्री                    150 ग्राम
विदारीकंद               50 ग्राम
शिलाजीत               50 ग्राम
कबाब (शीतल)चीनी 50 ग्राम
हत्था जोरी              20 ग्राम
कतीरा गोंद             20 ग्राम
बबूल का गोंद।        20 ग्राम
सभी को चुर्ण बनाए।

सेवन विधि:- 1-1 चमच्च (5 ग्राम) सुबह और शाम खाने के 1 घंटे बाद मीठे गर्म दूध से ले।

परहेज :- खट्टे सभी पदार्थों से दूर रहे। बिल्कुल सेवन न करे। 21 दिन संभोग क्रिया से परहेज रखे। ब्रह्मचर्य का पालन करे।

नोट
 सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे

जैतून तेल 100 ml
काला तिल तेल 50 ml
बादाम तेल      25 ml
इतर गुलाब 5 ml
दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।
शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी
हमारी गरंटी होगी।

        सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के फ़ायदे
🌹 शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के प्रयोग से शुक्रानुओ में वृद्धि होती है इसका 90 दिन प्रयोग करें। इसको खाने से संतान की प्राप्ति हो सकती है।
🌷 यह योग 20 से 30 मिनट तक timing में ले जाता है।
🌹शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।
🌹यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।
🌹इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।
🌹धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।
🌹यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।
🌹यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।
🌹दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।
🌹यह औरतों के संभोग करने की क्षमता को बढाता है. इसके इलावा  शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण पुरुषों की कामेक्षा बढाने के लिए भी असरदायक है. इन्फर्टिलिटी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, थकान, कमजोरी, लो स्पर्म काउंट और यूरिन की समस्या को दूर करने के लिए लाभकारी है।

                   💎 परहेज 💎

        गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।
ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है!।

वीर्य गाड़ा हो sex timing 20 मिनट होगी।
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🌹🌷🌹
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Wednesday, 17 October 2018

सिद्ध वातदर्द तेल


           
यह आयुर्वेदिक तेल आप जी घर मे आसानी से बना सकते हैं।

       साइटिका, गठिया का दर्द, कमर का दर्द ,जोड़ों का दर्द और कंधे की जकड़न स्नायू शूल मांशपेशियों का दर्द को सिर्फ़ 1 मिनट में ख़त्म करने का अद्भुत उपाय

शरीर में दर्द होना एक आम समस्या है। लेकिन इसके लिए यह तो जरूरी नहीं है कि आप दर्द निवारक दवाईयों का सेवन करें। भारत में अक्सर देखा गया है कि यदि शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो रहा होता है तो वे तुरंत दर्द नाशक गोलियां खा लेते हैं।

जिसके दुष्प्रभाव उन्हें आगे चलकर झेलने पड़ते हैं। पेन किलर के साइड इफेक्टस होते हैं। इनकी जगह आप अपने घर में दर्द निवारक तेल बनाकर उसकी मालिश कर सकते हो जिससे दर्द पल भर में दूर हो जाएगा और आपको इसका फायदा भी मिलेगा।

आइये जानते हैं दर्द निवारक तेल बनाने का तरीका।

       दर्द नाशक तेल बनाने का तरीका :

1. पहला तरीका : कांच कि शीशी में एक छोटा कपूरए पुदीने का रस एक छोटा चम्मचए एक चम्मच अजवायन को डालकर अच्छे से मिलाएं और इसमें एक चम्मच नीलगिरी का तेल डालकर इसे अच्छे से हिलाएं। अब इस तेल को दर्द वाली जगह पर लगाएं।

2. दूसरा तरीका : तारपीन का तेल 60 ग्राम, कपूर 25 ग्राम। इन दोनों को मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर इसे धूप में रख दें। और समय.समय पर इसे हिलाएं भी। जिससे कि इसमें मौजूद कपूर अच्छे से घुल जाए। अब आपका दर्द निवारक तेल तैयार है।

3. तीसरा तरीका : पचास ग्राम सरसों के तेल को किसी बर्तन में डाल दें। और उसमें दो गांठ छिला और पिसा हुआ लहसुन का पेस्ट और एक चम्मच सेंधा नमक को  डाल कर इसे गैस या चूले पर तब तक पकाते रहें जब तक इसमें मौजूद लहसुन काला न पड़ जाए। फिर बाद में इसे ठंडा करके किसी छोटी बोतल या कांच की शीशी में भर कर रख लें।

इन तीनों तेलों को आप अलग-अलग बनाकर बोतलों या कांच की शीशीयों में भरकर रख लें। ये तेल दर्द निवारक तेल गठिया के दर्द कमर के दर्द जोड़ों के दर्द और शरीर के अन्य किसी हिस्से में होने वाले दर्द में राहत देते हैं।

साइटिका, रिंगन बाय, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न, कमर दर्द के लिए एक अद्भुत तेल।

साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न एक टांग मे दर्द (साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी), गर्दन का दर्द (सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस), कमर दर्द आदि के लिए ये तेल अद्भुत रिजल्ट देता हैं। दर्द भगाएँ चुटकी में एक बार जरूर अपनाएँ। ये चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ “श्री श्याम सुंदर” जी ने अपनी पुस्तक रसायनसार मे लिखी हैं। मैं इस तेल को पिछले 2 सालों से बना रहा हूँ और प्रयोग कर रहा हूँ। कोई भी तेल जैसे महानारायण तेल, आयोडेक्स, मूव, वोलीनी आदि इसके समान प्रभावशाली नहीं है। एक बार आप इसे जरूर बनाए।

आवश्यक सामग्री :

कायफल = 250 ग्राम

तेल (सरसों या तिल का) = 500 ग्राम

दालचीनी = 25 ग्राम

कपूर = 5 टिकिया

कायफल- “यह एक पेड़ की छाल है” जो देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। ये सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर कायफल के नाम से मिलती है। इसे लाकर कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए। जितना महीन/ बारीक पीसोगे उतना ही अधिक गुणकारी होगा।

तेल बनाने की विधि :

एक लोहे/ पीतल की कड़ाही मे तेल गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल का चूर्ण डालते जाएँ। आग धीमी रखें। फिर इसमें दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे। एक कपड़े मे से तेल छान ले। तेल ठंडा हो जाए तब कपड़े को निचोड़ लें। यह तेल हल्का गरम कर फिर उसमें 5 कपूर की टिकिया मिला दे या तेल में अच्छे से कपूर मिक्स हो जाये इसलिए इसका पाउडर बना कर डाले तो ठीक होगा।  इस तेल को एक बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग नीचे बैठ जाएगा। उसके बाद उसे दूसरी शीशी मे डाल ले।

प्रयोग विधि :

अधिक गुणकारी बनाने के लिए इस साफ तेल मे 25 ग्राम दालचीनी का मोटा चूर्ण डाल दे। जो कायफल का चूर्ण तेल छानने के बाद बच जाए उसी को हल्का गरम करके उसी से सेके। उसे फेकने की जरूरत नहीं। हर रोज उसी से सेके।

जहां पर भी दर्द हो इसे हल्का गरम करके धीरे धीरे मालिश करें। मालिश करते समय हाथ का दबाव कम रखें। उसके बाद सेक जरूर करे।

बिना सेक के लाभ कम होता है। मालिस करने से पहले पानी पी ले। मालिश और सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए।

दर्द निवारक तेल बनाने की एक और विधि जो मेरी 70 वर्षीय मासी जी हर चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के बाद थक हार कर नानी माँ के ज्ञानानुसार इस घरेलू तेल का उपयोग कर रही हैं 30 वर्षो से इस तेल का उपयोग कर रही हैं और दर्दनिवारक दवायों से कोषों दूर हैं*साथ ही अपना और हृदयरोग से ग्रसित मौसा जी का देखभाल कर लेती हैं जबकि एलोपैथी चिकित्सा ने 20 साल पहले घुटना बदलने की सलाह दे चुके हैं।

समय के साथ दर्द बर्दाश्त करने की शक्ति रखे अन्यथा स्वास्थ्य व समृद्धि दोनो का नाश हो जाएगा जब दिल सामाज पारिवारिक भौतिक दर्द बर्दाश्त कर सकते हैं तो इसका दर्द क्यों नहीं दर्द निवारक आयुर्वेद होमेओपेथी पंचगव्य या घरेलू ही उपयोग में लायें।

दर्दनिवारक तेल :-

दर्दनिवारक  तेल बनाने की विधि

*500ml तिल का तेल या सरसो तेल
*100gram लहसुन की कली
*50 ग्राम सौठ
*25 ग्राम कच्चा कपूर
*15 ग्राम पीपरमेंट
*अजवायन 2 चम्मच
*मेथी 2 चम्मच
*लौंग 15 20
*दालचीनी 25 ग्राम
*सफेद प्याज 1
*गौमुत्र 100 ml या गौ अर्क 20ml
*बड़ी इलायची 2 pcs
*जवन्तरि  10 ग्राम

सबसे पहले धीमी आंच पर तेल में सभी का पाउडर बनाकर या पेस्ट बनाकर डालकर गर्म करें गर्म होते होते झाग व बुलबुले बनने बन्द हो जाएंगे तो आग को तेज करे जब सभी सुनहरे या काले रंग को हो तो आग बन्द कर दे इस बीच मे* *चलाते रहे । अब कपूर व पीपरमेंट डालकर खूब घोल दे अब छान कर कांच की शीशी में रखे व दर्द होने पर इस्तेमाल करें।

बाजार से शुद्ध व उत्तम कोटि का तेल ।
इस्तेमाल व शेयर करे  साथ ही उपयोग के बाद।अनुभव शेयर करें स्वस्थ व समृद्ध भारत निमार्ण हेतु


कुछ अन्य उपाये करें

दो गेंहूं के दाने के बराबर चुना दूध छोड़कर किसी भी तरल पेय में पथरी की समस्या हो तो न ले।
या
2 चम्मच मेथी रात को एक गिलास पानी मे भिगो दें सुबह इस पानी को पिये व मेथी को चबाकर खाये।
या
हरड़ को गौमुत्र में भिगोकर रातभर के लिए सुबह इसे साँवली छाँव में सुखाकर अरण्ड के तेल में भूनकर पाउडर बनाले इस पाउडर का एक चम्मच या भुने हरड़ का एक पीस भोजन के बाद ले गुनगुने जल के साथ।
या
सुबह प्रतिदिन एक चम्मच अरण्ड का तेल गौमुत्र के साथ सेवन करें।
या
प्रतिदिन एक कप गौमुत्र पिये सर्वरोगनाशक हेतु
या
बराबर मात्रा में मेथी हल्दी सौठ का चूर्ण बनाकर रखे सुबह शाम भोजन के बाद एक चम्मच गर्म जल या गर्म पानी के साथ सेवन करे

जब दर्द बिस्तर पर लेटा कर छोड़ दे आर्थत घुटने बदलने की नौबत आये तब इस दिव्य औषधि का उपयोग करें।

हरसिंगार (पारिजात) के पत्तो की चटनी 2 चम्मच बनाये और एक गिलास पानी मे उबाले जब पानी आधा रह जाये तो इसे रातभर छोड़ दे सुबह इस पानी को पी ले 3 माह लगातार।

     सिद्घ वातदर्द कल्पचुर्ण online मंगवाए।
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Wednesday, 12 September 2018

गुर्दे की पथरी को करे छूमंतर- सिद्ध कायाकल्प चूर्ण से 3mm की पथरी 3 दिन में खत्म


      



●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।अगर पथरी बड़ी या ज्यादा हो तो 21 दिन कायाकल्प चुर्ण का सेवन करे।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।दिन में 4 बार दवा ले।
जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

★★★
यह 21 दिन का उपयोग होगा।
21 दिन पथरी गुर्दे से बिल्कुल साफ हो जाएगी।

निम्बू पानी से केवल 5 दिन दवा लेनी।
5 दिन के बाद 2 बार सुबह शाम खाने के बाद ताजे पानी से कायाकल्प चुर्ण लेते रहे।

★★
               क्या है कायाकल्प चूर्ण
      (What is Kayakalpa churan)


कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of 
Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं
लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में -आए जाने -:::
*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम

8 और जड़ी बूटियों के साथ
सभी चूर्ण को एलोवेरा 500 रस में मिलाकर भावना दी जाती है और सांय मे सुखाया जाता है।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

विधि अनुसार सेवन करे।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।

                    कैसे मंगवाए
            ★काया कल्प चुर्ण★
         500 ग्राम 1050र रूपए
            with कोरियर खर्च
              Speed post 1150
नोट
दवा डाक से जाएगी।
डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।
पर Speed post का खर्च अलग से होगा।
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Tuesday, 24 July 2018

सिद्ध वीर्यबर्धक कल्पचुर्ण-वीर्य की समस्या में कारगर


       

वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण मानसिक परेशानी को दूर करता है।
           
             संपूर्ण जानकारी ताहित
         ●वीर्य  शरीर की दुर्लभत शक्ति है।

●जब तक वीर्य शरीर मे गाढ़ा और ताकतवर है,मनुष्य
        (औरत औऱ मर्द) स्वस्थ और ताकतवर है।

●ताकतवर औऱ गाढा वीर्य ही चेहरे की आभा है।

●जब वीर्य पतला और कमजोर हो जाता है या शरीर    वीर्य नही बना पाता तो -शीघ्रपतन, नामर्दी, बच्चों पैदा न करने की ताकत, मनुष्य को क्रोध, गुसा, कही मन न लगना, मन का उताबला पन, शरीर का कमजोर होना, बीमारियों का लगना, आदि लक्षण दिखाई देने लग जाता है।

अच्छा आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।यदि आहार अच्छा नहीं है तो रक्त कम बनेगा। जब रक्त कम बनेगा तो वीर्य भी कम बनेगा। वीर्य कम होने पर काम शक्ति भी कम होगी और कामेच्छा भी। शरीर में शक्ति की कमी होने से भी मस्तिष्क भी सही से काम नहीं करेगा।

      भोजन में निम्न पदार्थों का सेवन
           शरीर में वीर्य  को बढ़ाता है:
1. मिश्री मिला गाय का दूध
2. गाय का धारोष्ण दूध
3. मक्खन, घी
4. चावल व दूध की खीर
5. उड़द की दाल
6. तुलसी के बीज
7. बादाम का हलवा
8. मीठा अनार
9. प्याज, प्याज का रस घी-शहद के साथ
10. तालमखाना
11. खजूर
12. बादाम
     
वीर्य को गाढ़ा करने का भोजन
1. मोचरस
2. सफ़ेद मुसली
3. काली मुसली
4. बबूल का गोंद
5. काले तिल

          धातु की कमजोरी व नपुसकता
             को दूर करने वाले आहार
1. छुहारे को दूध में पकाकर खाना
2. अनार का रस
3. गाय का घी
4. पिस्ता-बादाम, चिलगोजे
5. कस्तूरी
6. केवांच के बीज का चूर्ण
7. अकरकरा
8. सालम मिश्री
9. सोंठ
10. नारियल
11. खीर
12. बादाम का हलवा
13. पिस्ते की बर्फी
ऊपर दिए गए सभी पदार्थ, मीठे, चिकने, बलवर्धक, शक्तिवर्धक, ओज वर्धक, वृष्य और पुष्टिवर्धक हैं। इनका सेवन शरीर को बलवान करता है और वज़न भी बढ़ाता है।
★★★
          सिद्ध आयुर्वेदिक की वीर्य बर्धक दवा
              बलवर्धक और वीर्यवर्धक
                   चांदी भस्म  युक्त
                वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण
           महिलाओं और मर्द दोनों
        की हर कमज़ोरी दूर करता है।
यह हाइपोथेलेमस पर काम करता है। इसके सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन, लुटीनाइज़िंग luteinizing हार्मोन, डोपामाइन, एड्रेनालाईन, आदि में सुधार होता है।

आँवला चुर्ण       200 ग्राम
बरगद फल        100 ग्राम (चुर्ण)
तुलसीबीज        100 ग्राम
बाबुल फली       100 ग्राम (बीज रहित)
सालम पंजा।      100 ग्राम
सालम मिश्री      100 ग्राम
कौंचबीज काला  50 ग्राम
तालमखाना        50 ग्राम
कंदबीज             25 ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 25 ग्राम
चांदी भस्म             2 ग्राम
सभी को मिलाए।
   
रोजाना 5 -5 ग्राम 3 बार हल्के ठंडे दूध के साथ सेवन करे।
***
यह चुर्ण मर्द और महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक है
यह महिलाओं के भी रामबाण योग है।
महिलाओं की हर कमजोरी और सफेद पानी की समस्या को ठीक करता है।
***
शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।

इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।

धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।

यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।

यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।
दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।

Online आप मंगवा सकते हैं।
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com


Thursday, 19 July 2018

सिद्ध कायाकल्प भस्म-खूनी बवासीर, मासिक धर्म का ज्यादा आना औऱ खून की गर्मी में कारगर





पेचिश पाचन तंत्र का रोग है जिसमें गंभीर अतिसार (डायरिया) की शिकायत होती है और मल में रक्त एवं म्यूकस आता है में कायाकल्प भस्म कारगर है।
            मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव और
                  खूनी बवासीर में रामबाण

   प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर यह योग

नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर मासिक धर्म में अधिक रक्तस्रावका एक दिन में भी इलाज हो सकता है।

          कैसे बनाए कायाकल्प भस्म

       3 किलोग्राम नारियल की जटा
       300 ग्राम आवला चुर्ण
       100 ग्राम कोंचबीज काला
          50  छोटी इलाची


● नारियल की जटा लीजिए।
● उसे माचिस से जला दीजिए।
● इस मे सभी और सामग्री डाल कर जला दे।
● जलकर भस्म बन जाएगी।
● इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए।
● कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ सिद्ध कायाकल्प भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है।

● ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो।

● कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।

■ यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है।

■ महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है।

■ हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए।


परहेज़

■ दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो बहुत अच्छा रहेगा।

■ अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए।

हम आपके लिए कोने कोने से कुदरत के अनसुने चमत्कारिक नुस्खे ले कर आते हैं, आप इनको आजमायें और फायदा होने पर ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुंचाए।

●विशेष सावधानियां●

                  खूनी बवासीर के लिए

1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।

2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी (जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।

            Online मंगवाए सिद्ध कायाकल्प  चुर्ण 

Whats 94178 62263

Monday, 16 July 2018

सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण- डेंगू,टाइफाइड, चिकन पॉक्स, लिवर इंफेक्शन और हर बुख़ार की जबरदस्त औषधि



पुराना बुखार हो कोई भी पीलिया हो ,हर प्रकार की इन्फ़ेक्सन के लिए और निमोनिया में अति उत्तम अयुर्वेदिक औषधि हैं।
          
सफ़ेद रक्त कोशिकाएं( wbc) बढ़ी या घटी हो 30 घंटे में समान्य हो जाती है। पुराने बुखार या 6 दिन से भी ज्यादा समय से चले आ रहे बुखार के लिए गिलोय काढ़ा उत्तम औषधि है। गिलोय काढ़ा भी हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं। 

             अज्ञात कारणों से बुखार
ऐसा बुखार जिसके कारणों का पता नहीं चल पा रहा हो उसका उपचार भी गिलोय  काढ़ द्वारा संभव है।
पुररीवर्त्तक ज्वर/Typhus fever में गिलोय की चूर्ण तथा उल्टी के साथ ज्वर होने पर गिलोय का  काढ़ा शहद के साथ रोगी को दिया जाना चाहिए।
🌹🥃🌹
                   काढ़ा कैसे बनाए
                          🥃🥃
6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले
★ गिलोय हरी - 100 ग्राम
★किसमिश     -10 पीस
★छुहारे।         - 5 पीस
★तुलसी पत्ते    -50 पीस
★पपीता पत्ता। -1पीस
★ पिपल पत्ते   -5 पीस
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए। 3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर
1 ग्लास सुबह/1 दुपहरी/1 शाम को ले।
यह क्रिया 3 दिन लगातार करे। यह काढ़ा किसी बुखार में रामबाण है।
★★★★
 गिलोय से बनी बुखार की अयुर्वेदिक औषिध
         सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण
                      🌹💎🌹
टाइफाइड, डेंगू, चिकन गुनिया,दिमागी बुखार, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी सी  हो या डेंगू बुखार हो.... यह दवा रामबाण है यह समान पन्सारी से सुलभ मिल जाता हैं।
            
🌷🌹🌷
कोरियर से मँगवा सकते हैं।
संपर्क करे -whats 78890 53063/9417862263
🌹🌷🌹

  सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण  औषधि यह लाभ करती है- 3 ग्राम दवा 5000 डेंगू cell{ wbc} निर्मित करती है। बढ़े हुए wbc को समानता देती हैं

सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण -सामग्री
गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
सतावर      100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम

सभी  चूर्ण को मिलाकर 300 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।

सेवन विधि- दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे ।

साथ मे दुध भी जरूर ले । बुखार मे  लगातार 3 दिन दवा ले । हैपेटाटस है तो 21 दिन ले / 21 दिन के बाद टेस्ट कराए।
🌷🌹🌷
What पर पूरी जानकारी ले
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200 ग्राम दवा 600 रुपये with
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Friday, 13 July 2018

सिद्ध घाव नाशक मरहम





         लगभग 25 ग्राम नीम के पत्तों को
         पानी में पीसकर टिक्की बना लें।

     और इस टिक्की को 50 मिलीलीटर
              तिल के तेल में पकायें।

              जब यह टिक्की जल जाये
       तो तेल को छानकर फिर इसमें 6 ग्राम
मोम मिलाकर घोंट लें और मरहम की तरह बना लें।

              इसके बाद इसे फूटे हुए
  फोड़े के घाव पर लगाने से घाव ठीक हो जाता है। इसको हर प्रकार के घाव पर लगाया जा सकता है।

           Whats 94178 62263
             

Thursday, 12 July 2018

सिद्ध कायाकल्प चूर्ण - हिर्दय ब्लॉकइज के लिए





  रोजाना 50  ग्राम अर्जुन छाल का काढ़ा बनाएं ।
             
                ★कैसे बनाएं काढ़ा★

1 लीटर पानी मे 50 ग्राम अर्जुन छाल डाल कर
तब तक पकाएं, जब तक 500 ग्राम न रह जाए।
रोजाना ऐसा काढ़ा बनाना है।

500 ग्राम काढ़े की 3 खुराक बनाकर एक एक चम्मच कायाकल्प चुर्ण दिन में 3 बार ले।

     सुबह -दुहपर-शाम को 3 बार ले।

50 दिन बाद टेस्ट कराए आप को 70 %फायदा होगा।  पूरे 100 दिन प्रयोग करे।

जाने क्या है

                  सदैव युवा रखने वाला,
                 शरीर का पूरा कायाकल्प
                 करने वाला सदाबहार चूर्ण
                          ★★★
            कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
                 को संतुलित करता है।



क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
• शरीर में कहीं भी गाँठ हो तो यह 15 से 50 दिन 90% लाभ होगा।


●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम


सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।


जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।


सेवन विधि - अगर आप बिमार
★★

हार्ट ब्लॉकइज के बारे जाने

हार्ट ब्लॉकेज होने पर व्यक्ति की धड़कने अर्थात Pulses सुचारु तरीके से काम करना बंद कर देती है


 इस प्रकार हार्ट ब्लॉकेज पर व्यक्ति की धड़कने रुक रुक कर चलती है| धड़कनो के रुक रूककर चलने को ही हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

 हार्ट ब्लॉकेज की समस्या कुछ लोगो में जन्मजात होती है, लेकिन कुछ लोगो में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या जन्म के बाद बड़े होने पर विकसित हो जाती है।

जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉकेज कहते है।


और बड़े होने के होने वाली हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को एक्वायर्ड हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

बड़े होने के बाद हार्ट ब्लॉकेज की समस्या खाने पीने की गलत आदतों और खराब जीवन शैली के चलते बढ़ती जा रही है।

★★


              हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण
(Heart Blockage Symptoms in Hindi)

हार्ट ब्लॉकेज की तीन डिग्री होती है और इन डिग्री के आधार पैर ही हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान की जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की पहली डिग्री में किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आता।

हार्ट ब्लॉकेज की दूसरी डिग्री में दिल की धड़कने सामान्य से थोड़ी कम हो जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की तीसरी डिग्री में दिल की धड़कने रुक रूककर धड़कना शुरू कर देती है।

हार्ट ब्लॉकेज के अन्य लक्षण निम्न है –

बार बार चक्कर आना
बार बार सिरदर्द होना
छाती में दर्द होना
सांस फूलना
थकान अधिक होना
बेहोश होना
★★

हार्ट ब्लॉकइज में परहेज


तेल में बने खाद्य पदार्थ
कोल्ड ड्रिंक
डेयरी उत्पाद
धूम्रपान
मक्खन
शराब
घी
★★★

          ★साथ साथ घरेलू नुस्खे जरूर★

★खाने में या सलाद में अलसी के बीजों का इस्तेमाल करें।

★खाने में सामान्य चावल की जगह लाल यीस्ट चावल का इस्तेमाल करें।


◆प्रतिदिन सुबह में 3 से 4 किलोमीटर की सैर करें।

 ★सुबह को लहसुन की एक कली लेने से कोलेस्‍ट्राल कम होता है।

★खाने में बैंगन का प्रयोग करने से कोलेस्‍ट्राल की मात्रा में कमी आती है।

★प्याज अथवा प्याज के रस का सेवन करने से हृदय गति नियंत्रित होती है।

★हृदय रोगी को हरी साग-सब्‍जी जैसे लौकी, पालक, बथुआ और मेथी जैसी कम कैलोरी वाली सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए।

 ★घी, मक्खन, मलाईदार दूध और तली हुई चीजों के सेवन से परहेज करें।


★अदरक अथवा अदरक का रस भी खून का थक्का बनने से रोकने में सहायक होता है।

★शराब के सेवन और धूम्रपान से बचना चाहिए।


★एक कप दूध में लहसुन की तीन से चार कली डालकर उबालें। इस दूध को रोज पीएं।

★एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और गुनगुना रहने पर शहद डालकर पीएं।

★एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस, काली मिर्च और शहद डालकर पीएं।



★दो से तीन कप अदरक की चाय रोजाना पीएं। इसके लिए पानी में अदरक डालकर उबालें और शहद मिलाकर पीएं।

★मेथी दाने को रात भर पानी में भिगाकर, सुबह मेथी चबाकर खायें और बचा हुआ पानी पी जाएं।

संपर्क whats 78890 53063

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण