Tuesday, 30 January 2018

जमी कफ़ में 3 दिन यह कफ़ नही रहेगा



                जमी कफ़ में 3 दिन यह
                    कफ़ नही रहेगा

500 ग्राम पानी में मुलहठी चूर्ण 5 ग्राम ,5 ग्राम गिलोय चुर्ण,5 किसमिस 2 छुहारे  डाल कर उबालें और जब पानी आधा कप रह जाये तब इसे छान ले।

इस काढ़े को आधा सुबह और आधा शाम को पिए। 2 से 3 दिन ये उपाय करने पर कफ पतला हो कर आसानी से बाहर निकल जायेगा और खांसी भी ठीक होने लगेगी।

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Sunday, 28 January 2018

सिद्ध बलवर्धक कायाकल्प योग~लंबाई और शरीरक विकास के लिए



लंबाई और मोटे होने की
रामबाण आयुर्वेदिक दवा

अश्वगंधा -250 ग्राम
सतावर -250 ग्राम
आवला-200  ग्राम
मिश्री -100 ग्राम
शंखपुष्पी-100 ग्राम
ब्राह्मी बुटी -100  ग्राम
तुलसी बीज -50 ग्राम
सालम मिश्री-50 ग्राम
सालम पंजा -5 0 ग्राम

काली मिर्च -20 ग्राम

सभी को मिलाकर किसी बंद डब्बे मे रखे ।

सेवन विधि -

इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें। इससे दुबले व्यक्ति भी मोटे हो जायेंगे।
◆◆◆

साथ मे यह जरूर करें।

रोजाना रात को सोने से पहले एक ग्लास पानी में सोयाबीन और चने (gram) को (जितना आप खा सके) उतने पानी में डालकर रात भर ऐसे ही छोड़ दें.

फिर सुबह उठकर सोयाबीन और चने को निकाल लें और दूसरे साफ़ पानी से धो कर खाये. इसके सिर्फ 30 दिन के प्रयोग से ही आपको बदलाव महसूस होने लगेगा यह शरीर का खून और मांस बढ़ता है.

◆◆◆

■कम कद वाले लोग लंम्बे हो सकते हैं।

■इससे नया खून भी बनना शुरू होता है।

■इस चूर्ण का सेवन करने से कमजोर व्यक्ति अपने अंदर स्फूर्ति महसूस करने लगता है।

■जो जिम करते हैं उन के लिये रामबाण है यह योग।

■जिन को खाया पीया न लगता हो यह उस के बहुत अच्छा योग है।

■इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लेते रहें।

नोट -

खनिज से भरपूर तत्वों का इस्तेमाल करें। यह पालक, हरी बीन्स, फलियां, ब्रोकोली, गोभी, कद्दू, गाजर, दाल, मूंगफली, केले, अंगूर और आड़ू में पाया जाता है।
 लंबाई बढ़ाने के लिए जिस विटामिन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वह विटामिन डी। यह दाल, टोफू, मशरूम, गाय के दूध और दूध से बने पदार्थो से, सूर्य की किरणों से और बादाम आदि में पाया जाता है।

इस चूर्ण को शीतकाल में लेने से अधिक लाभ मिलता है।
***
खूब पानी और दूध पियें।

नशे से दूर रहें :- शराब पीना और धूम्रपान गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। धूम्रपान या अल्कोहल लेने वाले व्यक्ति के विकास को और लम्बाई पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें।

फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन न करें, खटाई न खाएं, ज्यादा मिर्च-मसाले से परहेज करें।

आजकल कोल्ड ड्रिंक्स पीना फैशन बन गया है, लेकिन यह सेहत के लिहाज से सही नहीं है। बर्गर, नूडल्स, पिज्जा खाने से भी हाइट नहीं बढ़ती। दूध, दही, पनीर, मक्खन, दालें खाने से हाइट बढ़ती है। प्रोटीन दूध, दही, अंडे में खूब होता है। विटामिन, मिनरल्स के लिए फल खाओ, जूस पियो और हरी सब्जी, दालें खाना मत भूलना।

इस चूर्ण का सेवन करते समय खटाई, तली चीजें न खायें और जिन्हें आंव की शिकायत हो,तो यह दवा न ले  न लें।

यह योग आप online से भी मंगवा सकते है ।

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★पाचन शक्ति के लिए ★

सिद्घ आयुर्वेदिक

           भारतियों घरों का सुंदर नुस्खा
             ★पाचन शक्ति के लिए ★

100 ग्राम अजवायन
 सौंफ 100 ग्राम
बेल गुदा 100ग्राम
कलौंजी 50 ग्राम
सेंधानमक आधा चम्मच

 पीसकर चूर्ण बनाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पाचनशक्ति बढ़ती है और अपच दूर होता है।


कभी गैस नही बनेगी।
न कभी जलन होगी।
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सिद्ध महाशक्ति योग- शुक्राणु विर्द्धि के लिए



           शुक्राणु की पुरुषों में कमी
     बच्चे न होने की एक पीड़ा यह भी है।

 ज्यादातर बच्चे के ना होने का कारण महिलाओं को ही ठहराया जाता है ।

लेकिन इसमें पुरूष भी कम नही है जब पुरूषों में शुक्राणु के बनने के लक्षण कम होते है तो उनमें नपुंसकता बढ़ने लगता है ।

 जिससे बच्चे के पैदा होने में
 दुविधा खड़ी हो जाती है

 सामान्य तौर पर एक स्वस्थ या हेल्दी पुरूष में 15 मिलियन शुक्राणु की कोशिकाओं का होना काफी आवश्यक होता है।

जिसमें स्वस्थ शुक्राणु के इन लक्षणों के अलावा रूप, संरचना और गतिशीलता का होना जरूरी माना जाता है।

और इसकी कमी ही अनहेल्दी शुक्राणु के लक्षणों का होना पाया जाता है। जिसमें मर्द में नपुंसकता और सेक्स करने के इच्छा में कमी होने लगती है और पूरी लाइफ पर इसका असर देखने को मिलता है।

यदि आप थोड़ी सी सतर्कता बरते तो आप अपनी जीवनशैली में कुछ सुधार लाकर शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या को बढ़ा सकते है।

★★★
                       शुक्राणुओं के बारे         
                   कुछ हैरान करने वाले सच

भारत के मर्दो के वीर्य में साल दर साल शुक्राणुओं की कमी देखी जा रही है।  भारत के मर्दो में अब पहले जैसी बात नही रही। शक्राणु के आकर और संरचना में गड़बड़ियां आ रही है। 1978 में एक सेहतमंद व्यक्ति के वीर्य में शुक्राणुओं की गिनती 6 करोड़ प्रति लीटर पाई जाती थी, 2012 में यह गिनती 6 करोड़ से 2 करोड़ हो गयी थी।

इन सालों में भारती मर्द बहुत कमजोर हुआ है।

कारण क्या है।

आयुर्वेद मान्यता है कि

■अवैध नशीली दवाओं का प्रयोग – कोकीन या गांजा जैसे नशीले पदार्थों के सेवन से आपके शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ सकती है।

■शराब का सेवन – शराब पीने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है और शुक्राणु उत्पादन में कमी आ सकती है। (और पढ़ें – टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय)

■धूम्रपान – अन्य व्यक्तियों की तुलना में धूम्रपान करने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है।

■तनाव – लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण शुक्राणु पैदा करने वाले कुछ आवश्यक हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं।

■वजन – मोटापे के कारण हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पुरुषों की प्रजनन क्षमता कमज़ोर हो सकती है।

★★★

फिर भी चिंता की बात है आयुर्वेद में हर रोग का इलाज  शर्तिया है।

★★★

       ★शुक्राणुओं के लिए आयुर्वेदिक योग★

गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
तुसली बीज 100 ग्राम
कौंच के बीज 100 ग्राम (छिलकारहित)
सफ़ेद मूसली 100ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाबुल फली 50 ग्राम
गोखरू 50 ग्राम
विदारीकंद 50 ग्राम
बरगद दूध 50 ग्राम
सालम पंजा 50 ग्राम
सालम मिश्री 50 ग्राम
आवला चुर्ण 50 ग्राम
कबाब (शीतल)चीनी 50 ग्राम
तालमखाना 20 ग्राम
शिलाजीत 50 ग्राम
हत्था जोरी 20 ग्राम
कतीरा गोंद 20 ग्राम
बबूल का गोंद 20 ग्राम
काले तिल।   20 ग्राम

सभी को चुर्ण को 200 ग्राम एलोवेरा रस में मिलाकर धुप में सुखाए।

 सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।

●●●

भोजन में निम्न पदार्थों का सेवन शरीर में वीर्य Semen improving को बढ़ाता है:

★मिश्री मिला गाय का दूध
★ गाय का धारोष्ण दूध
★मक्खन, घी
★चावल व दूध की खीर
★ उड़द की दाल
★तुलसी के बीज
★बादाम का हलवा
★मीठा अनार
★प्याज, प्याज का रस घी-शहद के साथ
★ खजूर
★बादाम

★★★

परहेज
1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

5. ओषधि सेवन के आगे-पीछे कम से कम दो घंटे कुछ न खाएं। खाली पेट सेवन से यह मतलब है।


★★★

सावधानी-

इसका उपचार करते समय लगभग 4-5 दिन तक स्त्री के साथ संभोग नहीं करना चाहिए।

रात को सोते समय पानी में किशमिश के 6-7 दाने भिगोकर सुबह नाश्ते के समय पानी के साथ ही खा लें।

काले चनों का सूप बनाकर पिएं और उनको उबालकर खाना भी लाभकारी होता है।

अगर खाना चाहो तो बादाम की 8-10 गिरियों को भी खा सकते हैं।

मन को एकदम गलत विचारों से दूर रखें।

★★★

कोई भी समस्या हो
Call नही sms करें।
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सिद्ध हड्डी गैप नाशक कल्पचुर्ण-हड्डियों की गैप की दवा घुटनों और रीढ़ के मनकों के गैप में कारगर।


    सिद्ध हड्डी गैप नाशक कल्पचुर्ण
    कीकर फली औऱ शिलाजीत युक्त

गठिया व जोड़ों के दर्द के अलावा हड्डियों के गैप और
अन्य बीमारियां कीकर फली और शिलाजीत युक्त घुटनों और रीढ़ के मनकों के गैप में  कारगर।

एक बार जरूर इस्तेमाल करे।

आज हम आपको इस बबूल (कीकर) की फली और शिलाजीत से दवा का एक ऐसा प्रयोग बताने जा रहें हैं जिससे अगर आपके घुटनों में दर्द है या इसको बदलने की भी नौबत आ चुकी है.

तो एक बार घुटनों को बदलवाने की बजाये इस प्रयोग को ज़रूर करें.
एक आयु के बाद शरीर के जोड़ों में लुब्रीकेन्टस एवं केल्शियम बनना कम हो जातां है.

जिससे कारण जोडो का दर्द, गैप, केल्शियम की कमी,वगैरा प्रोब्लेम्स सामने आती है।

जिसके चलते आधुनिक चिकित्सा आपको जोइन्ट रिप्लेस करने की सलाह देते है. तो यह प्रयोग आपको ऐसी नौबत से बचा सकता है।

               हड्डियों के गैप की दवा
       सिद्ध हड्डी गैप नाशक कल्पचुर्ण

                   आयुर्वेदि  नुस्खा
बाबुल की फली     250 ग्राम
बाबुल गोंद            100ग्राम
हरसिंगार फूल       100 ग्राम
मेथी दाना (भुना)   100 ग्राम
अजवाइन               100 ग्राम
हल्दी                     100 ग्राम
गिलोय चुर्ण            100 ग्राम
चरायता                  100 ग्राम
सतावर चुर्ण            100 ग्राम
दालचीनी                100 ग्राम
काली जीरी             50 ग्राम
शिलाजीत              10 ग्राम
200 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे।

अब आइये जाने इसके सेवन की विधि.
सुबह 1 चम्मच गुनगुने पानी से खाने के एक घंटे के बाद ले। दिन में 3 बार दवा ले।

2-3 महीने लगातार सेवन करने से आपके घुटने का दर्द बिल्कुल सही हो सकता है।और आपको घुटने बदलने की नौबत नहीं आएगी.

रीढ़ की हड्डी का गैप में यह  दूध के साथ सेवन करे।
हम हमेशा आपके लिए नयी नयी जानकारी ले कर आते हैं. तांकि आपका स्वास्थ्य बना रहे. और आप दवाओं के नाम पर होने वाले धोखे से बचे रहें.
**
साथ मे यह जरूर  करे -:

दिन 2 बार 3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट तक नित्य सेंकाई करें।
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सिद्ध वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण- और मर्द दोनों की हर कमज़ोरी दूर करता है


            बलवर्धक और वीर्यवर्धक
                        चुर्ण

           महिलाओं और मर्द दोनों
        की हर कमज़ोरी दूर करता है।

आँवला चुर्ण       200 ग्राम
बरगद फल        100 ग्राम (चुर्ण)
तुलसीबीज        100 ग्राम
बाबुल फली       100 ग्राम (बीज रहित)
कौंचबीज काला  50 ग्राम
तालमखाना        50 ग्राम
कंदबीज             25 ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 25 ग्राम

सभी को मिलाए।

   ★यह 650 ग्राम चुर्ण बन जाएगा।★

  ◆यह 60 दिन के करीब दवा बनेगी।◆

रोजाना 5 -5 ग्राम 3 बार हल्के ठंडे दूध के साथ सेवन करे।

***
यह चुर्ण मर्द और महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक है

यह महिलाओं के भी रामबाण योग है।
महिलाओं की हर कमजोरी और सफेद पानी की समस्या को ठीक करता है।


***

शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

 यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।

इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।

धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।

 यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।

यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।

दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।

Online आप मंगवा सकते हैं।
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Friday, 26 January 2018

सिद्ध महाशक्ति कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक
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                 ● शक्ति की कमी है तो●

          ★यह योग आप को निपुणता देगा★
                           सोना युक्त
                *सिद्ध महाशक्ति कल्पचुर्ण*

          (Online भी मंगवा सकते हैं आप)
फायदे-शक्राणु विर्दी, खून का बनना,शीघ्रपतन, धातु कमजोरी, मर्दाना कमजोरी, नशों की कमजोरी, वीर्य का पतलापन, सभी रोगों में लाभदायक और कारगर।

जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।

कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।


कारण

नपुंसकता के दो कारण होते हैं- शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।

लक्षण :

मैथुन के योग्य न रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना-इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।

बाजीकरण योग

●सफेद मूसली -100 ग्राम
●कीकर फली -100 ग्राम (बीज रहित)
●अश्वगंधा -100 ग्राम
●सतावरी-100  ग्राम
●गोखरू-100 ग्राम
●जयफल -100 ग्रा ऐसीम
●जामुन - 100 ग्राम
 की गुठली
●कौंच के - 100ग्राम
  बीज के चूर्ण
●तालमखाना-50 ग्राम
●गिलोय चुर्ण-50 ग्राम
●सफेद जीरा-50ग्राम
●सेमल का चूर्ण -50ग्राम
●बबूल गोंद-50 ग्राम
●4 मगज-50ग्राम
●सालममिश्री-50ग्राम
●सालम पंजा-50ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सुबह शाम 5-5 ग्राम दूध के साथ ले।

● इसका इस्तेमाल दो महीने तक विस्तारपूर्वक करने से इससे काफी अधिक फायदा मिलता है।

●यह वीर्य को अधिक गाढ़ा बनाता है।

यह रात को होने वाले स्वप्न रोग, वीर्य का जल्दी गिरना और यौनांग के ढीलेपन एवं कमजोरी जैसे रोगों को समाप्त कर देता है-

इससे हर प्रकार की शरीरक कमजोरी दूर होती है और
सुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।

यह दवा कोरियर से मंगवा सकते हैं आप।

सिद्ध आयुर्वेदिक

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कायाकल्प चुर्ण -शरीर का पूरा कायाकल्प करने वाला सदाबहार चूर्ण

 सिद्ध आयुर्वेदिक
कायाकल्प चूर्ण
सभी रोग के लिए
सदैव युवा रखने वाला,
शरीर का पूरा कायाकल्प
करने वाला सदाबहार चूर्ण
★★★
कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
को संतुलित करता है।
★★★
किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।
★★★

आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा।
कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए, हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाये। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।
इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिल करे।
●●●

क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना


●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 गरा
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम


सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।


जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।


सेवन विधि - अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।
अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच
सुबह खाली पेट ले ।

●●
काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

● अफस्फीत शिराएं (varicose veins)  -          इस रोग के हो जाने पर रोगी व्यक्ति के पैरों में दर्द के साथ थकान तथा भारीपन महसूस होने लगता है। रोगी के टखने में सूजन हो जाती है। रात के समय में रोगी के पैरों में ऐंठन होने लगती है। इस रोग से पीड़ित रोगी की त्वचा का रंग बदलने लगता है। इस रोग के कारण स्टैटिस डर्मेटाइटिस तथा शरीर के नीचे के अंगों में सेल्युलाइटिस रोग हो जाता है।
इस रोग में
कायाकल्प चुर्ण आप 90 दिन उपयोग करे ।

सेवन विधि -सुबह खाली पेट 1 चम्मच पानी से लेते रहे।
दवा लेने के बाद 1 घंटे तक कुछ खाए पिएं नही।

रात को सोने से 30 मिनट पहले दवा ले।
खयाल रखें रात को दवा खाने से 50 मिनट बाद ही ले।


●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।
कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।
जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।


****
● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग।
●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-
नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।
● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।
● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे
● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति
काम करता है ।
●ओवरी में सूजन ',पानी भरना' अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।
● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की
भांति काम करता है ।
● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।
● बालो की वृद्धि तेजी से होती है,
● अनावश्यक चर्बी घटेगी.
● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी
● खून साफ़ होगा
● रक्त नलिकाए साफ़ होगी.
● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे ।
● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।
● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी
नया शुद्ध खून बनेगा.
◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प
रामबाण जैसा काम करता है ।
◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे
बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।
● नपुसंकता दूर होती है।
● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण
● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ।
● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,
● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता
दात मजबूत होते है।
● हड्डीया मजबूत होती है।
● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है।
◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा ।
●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।
● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ।
● आयु बढ़ेगी
● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।
◆ Diabetes काबू में रहती है।
● कफ से मुक्ति मिलती है।
परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं

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सिद्ध आयुर्वेदिक
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सिद्ध मोटापा नाशक कल्पचुर्ण


सिद्ध अयूर्वादिक

      *सिद्ध मोटापा नाशक कल्पचुर्ण*

            ¶यह एक फ़ूड है इस योग का
    कोई साइड इफेक्ट्स और नुकसान नही है।¶

            【बाजार में  मिलने वाली दवाएं
        हड्ड़ी रोग का कारण बन सकती हैं।】
★★★
नोट -: online दवा मंगवाए जिस में हम आप को साथ मे कायकल्प चुर्ण भी देगे। जो आप की नाड़ी तंत्र को शुद्ध और साफ करेगा।
कायकल्प  चुर्ण बारे जानने के लिए whats 94178 62263  पर sms करे।

                   ★★★★
    *मोटापा नाशक कल्पचुर्ण के फायदे*

* मोटापा कम करने  के साथ साथ यह भी फायदे होंगे*

★*अधिक वजन होने से ट्राइग्लिसराइड्स जाते हैं और एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) भी बढ़ जाते है।
यह चुर्ण कॉलोस्ट्रल को ठीक करेगा।*

★*खून शुद्वि होगी*

★*वातरोग और कफ़ रोग  ठीक होगा होगा*
★लीवर सिरोसिस, फैटी लीवर, पीलिया, यकृत का बढ़ना आदि में इसके सेवन से लाभ मिलता है ।

★आंतो के विकारों में भी इसका सेवन लाभ दायक होता है । इसके सेवन से आंते साफ होती है एवं अगर कोई आंतो का इन्फेक्शन है तो वह भी ठीक होता है ।

◆सभी प्रकार की ज्वर व्याधियों में आयुर्वेदिक चिकित्सक इसका प्रयोग करते है । जैसे जीर्ण ज्वर, सामान्य ज्वर, सनिपाताज ज्वर आदि में ।

★शरीर में कंही पर भी इन्फेक्शन में इसका प्रयोग किया जा सकता है । इसके प्रयोग से इन्फेक्शन में आराम मिलता है ।

★शरीर को सामान्य बिमारियों से रक्षा करती है ।
रोगप्रतिरोधक क्षमता का विस्तार होता है ।

★लीवर फंक्शन को ठीक रखती है ।

★शरीर की धातुओं को पौष्ण मिलता हा जिससे शरीर में ओज की व्रद्धी होती है

    *नुस्खा मोटापा नाशक कल्पचुर्ण*


★त्रिफला                 500 ग्राम
★ इंद्रयाण अजवाइन 500 ग्राम
★अर्जन छाल           300 ग्राम
★सोंठ                     300 ग्राम
★सर्पगन्धा               300 ग्राम
★बेल चुर्ण               300 ग्राम
★शुद गूगल              300 ग्राम
★छूटी हरड़              200 ग्राम
★इमली                   200 ग्राम
★पोदीना पंचाग        100 ग्राम
★दारू हल्दी            100 ग्राम
★मेथी                    100 ग्राम
★सोंफ                    100 ग्राम
★ कंलोंजी।             100 ग्राम
★आवला                100 ग्राम
★धनिया                 100 ग्राम
★गिलोय                 100 ग्राम
★कुटकी                 100  ग्राम
★कालीजीरी             50  ग्राम
★चिरायता               50  ग्राम
★भूमि आवला          50  ग्राम
★बाकुची                 20  ग्राम
★शुद्ध शिलाजी        10  ग्राम
★काली मिर्च            20  ग्राम
★सफ़ेद जीरा           50  ग्राम
★काला जीरा।          50  ग्राम
★कुडू                     50  ग्राम


सभी को कूट पीस कर चूर्ण बना ले ।
सभी चुर्ण को 1 लीटर एलोवेरा रस में भावना दे।

24 घंटे बाद फिर 1 लीटर एलोवेरा रस में भावना दे।

साया में सुखाए।

सूखने के बाद सुबह - शाम एक - एक चमच्च गुनगुने पानी से ले।
***
सौंफ पानी से ले तो  और भी अच्छे  प्रमाण आ सकते है।
         
( 100 ग्राम सौंफ़ को 750 मिलिगग्राम पानी मे उबालकर रखे। दिन में इसी पानी से 3 बार दवा ले।
    सौंफ़ और पानी की 10 उबाली दे
**
सेवन विधि
प्रतिदिन आपको इसमें से दस ग्राम सुबह खाने से पहले गुनगुने पानी से और शाम को खाने के बाद गुनगुने पानी से लेना है ।
★★
      1महीने  में 2 से 5 किलो वजन कम होगा।
       पेट बढ़ा है 2 से 3 इंच कम हो जाएगा।
★★
पहले माह तेजी से घटता है लगभग छ: से सात किलो फिर थोडा कम घटेगा।

आप इसे आगे भी जारी रख सकते है जब आपको लगे कि आपका वजन और चर्बी अब आपके लिए पर्याप्त है दवा को बंद कर सकते है।

★ आवश्यक परहेज :
भोजन और परहेज :
          मोटापे से परेशान व्यक्ति को मुद्ग, जौ, मूंग का रस, मक्खन, गर्म पानी, बाजरा, गेहूं, ताजा दूध, मुनक्का, संतरा, टमाटर, मसूर, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। मोटे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह टहलना चाहिए और थोड़ी-बहुत मेहनत भी करनी चाहिए। रोगी को पतला करके दूध, फलों का रस, कॉफी, गर्म करके पीना चाहिए।
          मोटापे के रोगी को गाय का दूध, देशी घी, गाढ़ी दाल, चावल, आलू, गर्म दूध, चीनी से बने पदार्थ, पनीर, आइसक्रीम, मिठाइयां, मांसाहारी भोजन, अधिक चिकनाई व चटपटा पदार्थ, सांभर, सूप, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ, जेली, मिठाइयां, बाहर का खाना, देर रात पार्टियों में खाना, नए शालि चावल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। शीतल पानी से नहाना मोटापे के लिए हानिकारक होता है।
तली भुनी चीजे, फास्ट-फ़ूड तथा रिफाइंड आयल का प्रयोग न करे।
Online आप दवा मंगवा सकते हैं।
हम साथ मे काया क्ल्प चूर्ण भी देगे।
जो मोटापे की दवा औऱ मोटापे में हैरानीजनक फायदा करता है।
सिद्ध अयूर्वादिक

             मोटापा नाशक कल्पचुर्ण के साथ
                    आहार-तालिका

           *मोटापा नाशक कल्पचुर्ण मोटापा के साथ साथ यूरिक एसिड, कॉलोस्ट्रल, शरीरक दर्द, खून अशुद्धि और नशों की कमजोरी में भी फायदेमंद है।*

मोटापे को कम करने के लिए खाने के सम्बंध में कुछ दिशा-निर्देश नीचे दिये गए हैं जो इस प्रकार से हैं-   

दिशा-निर्देश                                                                     समय

शहद मिला हुआ एक गिलास नींबू का रस।                              6.00 बजे सुबह

एक फल और छाछ                                                               8.00 बजे सुबह

100 ग्राम कच्चा सलाद, 300 ग्राम सब्जियां,

3 चपाती, 200 ग्राम चावल, दलिया, खिचड़ी,

एक दिन छोड़कर दाल, छाछ, सूप।                                         12.00 से 1.00 बजे के बीच

फल का रस, कोई रसीला फल                                                 शाम 4.00 बजे

2 या तीन तरह के फल और

इनमें से प्रत्येक 100 ग्राम की मात्रा में लें।

200 ग्राम सब्जियां भाप में पकी हुई लें।                                    शाम 7.00 बजे

एक बड़ा चम्मच अंकुरित दाल और सूप लें। 

    मोटापा नाशक कल्पचुर्ण चुर्ण online मंगवाए
           

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                  ■हम आप की सेवा में है■
         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆ 
          ●निशुल्क सिद्घ अयूर्वादिक सलाह ले●
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Wednesday, 24 January 2018

नजला, कफ़, सुखी खाँसी,कफ़ खाँसी के लिए रामबाण नुस्खा

सिद्ध अयूर्वादिक

      नजला, कफ़, सुखी खाँसी,कफ़ खाँसी
                 के लिए रामबाण नुस्खा

हींग 20 ग्राम
सौंठ 20 ग्राम
और शहद 50 ग्राम मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें।

इस मिश्रण को दिन में 3 बार एक एक चम्मच चाटते रहे।
बच्चों को आधा चम्मच दे।

इस नुस्खे से  सुखी कफ़ ,खाँसी, खांसीदार कफ, बंद नाक  और अस्थमा  में हैरानीजनक फायदा होगा।

Whats 941-78-622-63

Wednesday, 17 January 2018

एक्जिमा और सोरायसिस की रामबाण दवा *एक्जिमा कल्पचुर्ण*

सिद्ध अयूर्वादिक  
     एक्जिमा और  सोरायसिस
        की रामबाण दवा

         *एक्जिमा कल्पचुर्ण*


त्रिफला 250 ग्राम
अजवाइन 200 ग्राम
गिलोय 200 ग्राम
चरायता 100 ग्राम
सत्यनाशी 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
मिश्री 100 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
बच 50 ग्राम
दारूहल्दी 50 ग्राम
मजीठ 50 ग्राम
नींबू की छाल 50 ग्राम
गंधक 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्राम
सभी जड़ी बूटियां को पीसकर  300 ग्राम एलोवेरा रस(जो ताजा हो) मिलाकर धूप मे सूखा ले।
जब सुख जाए तो बंद बर्तन रखे।
★★
सेवन विधि
एक एक चम्मच दिन में 3 बार 50 मिलीलीटर गुमूत्र से ले।
50 मिलीलीटर  गुमूत्र को एक ग्लास पानी मे मिलाकर ले।
यह 90 दिन का कोर्स है।
दवा बीच न छोड़े।

परहेज :–
       (किसी भी चर्म रोग मे ये चीजें छोड़ दे)
              मांस, दूध, दही, लस्सी,
★★
तेल
(सरसों के तेल को छोड़ कर),
★★
कुलथी की दाल, उरद(माह) की दाल, सेम, ईख के बने पदार्थ (चीनी, गुड खांड, मिश्री आदि),
★★
पिट्ठी से बनी वस्तुएं जैसे दहीबड़ा, कचौरी आदि, खटाई जैसे इमली, नींबू, अमचूर, कांजी आदि,
★★
विरोधी भोजन (जैसे दूध के साथ नमक, खटाई, जामुन आम आदि, घी के ऊपर ठंडा पानी, पानी में शहद आदि
★★
अध्यशन (पहले खाए हुए भोजन के न पचने पर भी भोजन या कुछ भी ऐसे ही खा लेना)अजीर्ण (अपच) में भोजन, खाना।
◆◆
विदाही अर्थात जलन करने वाले भोजन जैसे:-
लाल/हरी मिर्च, राई, अदरक, रायता, शराब/सिरका आदि, अभिष्यन्दी जैसे:- दही, खीर, बर्फी, आइसक्रीम आदि, दिन में सोना और रात में जागना छोड़ दे।
इन परहेजों का सख्ती से पालन करें।
दूध/दही और मीठा बिलकुल भी न खाए।
अन्यथा कितनी ही दवा लेते रहो कोई भी फायदा नहीं होगा।
कई वैद्य नमक बंद कहते हैं परंतु उसकी कोई जरूरत नहीं है।
किसी के कहने पर चने को अधिक न खाए।
चना अधिक खाने से शरीर में खून की कमी हो जाती है।
काली मिर्च का प्रयोग करें।
खटाई के लिए टमाटर, आवंला प्रयोग करें। 
अगर आप इस रोग से पीड़ित हैं और थक चुके है दवाईयां खा-खाकर, और फ़िर भी आपको आराम नहीं मिल रहा तो मजबूर होकर मत जियें।
आयुर्वेद में इसका स्थायी इलाज है।
आप यह दवा बनाए या
Online मंगवाए

Monday, 15 January 2018

संग्रहणी (दस्त, पेचिश)

सिद्ध अयूर्वादिक                

              ~संग्रहणी (दस्त, पेचिश) ~

    ●संग्रहणी की दवा ऑनलाइन मंगवा सकते हैं आप●

10 ग्राम बेल की गिरी का चूर्ण, 6-6 ग्राम सौंठ का चूर्ण और पुराने गुड़ को पीसकर दिन में 3-4 बार छाछ के साथ 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेचिश के रोग में लाभ मिलता है। खाने में केवल छाछ का ही प्रयोग करें।
10 से 20 ग्राम बेल की गिरी और कुड़ाछाल का चूर्ण बनाकर रात के समय 150 मिलीलीटर पानी में भिगोकर, सुबह पानी में पीसकर छानकर रोगी को पिलाने से पेचिश का रोग ठीक हो जाता है।

◆◆◆
10 से 20 ग्राम कच्ची बेल को आग में सेंककर उसके गूदे में थोड़ी चीनी और शहद मिलाकर पिलाने से पेचिश के रोग में आराम आता है।

◆◆◆
कच्चे बेल का गूदा तथा सोंठ के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इस चूर्ण में दुगुना पुराना गुड़ डालकर लुगदी बना लें। इसके सेवन करने के बाद ऊपर से मट्ठा (लस्सी) पी लें। इससे संग्रहणी (दस्त) का रोग दूर हो जाता है।

◆◆◆
बेलगिरी, नागरमोथा, इन्द्रजौ, सुगंधबाला तथा मोचरस इन सभी को बकरी के दूध में डालकर पका लें। इसको छानकर पीने से संग्रहणी (दस्त) मिट जाता है।

◆◆◆
पके हुए बेल का शर्बत पुराने आंव की महाऔषधि है। इसके सेवन से बहुत जल्द ही संग्रहणी (दस्त) का रोग दूर हो जाता है।

◆◆◆
बेल (बेलपत्थर) का शर्बत बनाकर सेवन करने से संग्रहणी (दस्त) रोग ठीक हो जाता है।

◆◆◆
बेलगिरी, गोचरस, नेत्रबाला, नागरमोथा, इन्द्रयव, कूट की छाल सभी को लेकर पीसकर कपड़े में छान लें। इसको खाने से संग्रहणी (दस्त) के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

★★★

                ■  प्रवाहिका (पेचिश, संग्रहणी) ■

कच्ची बेल का गूदा, गुड़, तिल, तेल, पिप्पली, सौंठ आदि को बराबर मात्रा में मिलाकर मिश्रण तैयार करें।

प्रवाहिका में जब पेट में गैस का दर्द हो और बार-बार मलत्याग की इच्छा हो और मल पूरा न होकर थोड़ा-थोड़ा आंव सहित आये तब 10-20 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम इस मिश्रण का प्रयोग करें। इससे लाभ होता है।

बेल की गिरी और तिल को बराबर मात्रा में लेकर मिश्रण बनाकर, दही की मलाई या घी के साथ सेवन करने से प्रवाहिका रोग में लाभ होता है।

★★★
3 ग्राम कच्चे फल की मज्जा का चूर्ण तथा 2 ग्राम तिल को दिन में 2 बार पानी के साथ लेने से प्रवाहिका रोग में लाभ मिलता है।

ऑनलाइन मंगवाने के लिए whats करे

9417862263

Saturday, 13 January 2018

माइग्रेन की दवा

सिद्ध आयुर्वेदिक

माइग्रेन की दवा

अलसी चूर्ण 200 ग्राम
तुलसी पत्ते चूर्ण 100 ग्राम
दालचीनी 50 ग्राम
सौंठ 50 ग्राम
मलहठी 50 ग्राम
बादाम 50 ग्राम

सभी को चूर्ण बनाकर एक चम्मच सुबह शाम या 3 बार दुध  के साथ दो ।

कोरिया से भी मंगवा सकते है ।

Friday, 12 January 2018

भारतियों घरों का सुंदर नुस्खा ★पाचन शक्ति के लिए ★

सिद्घ आयुर्वेदिक

           भारतियों घरों का सुंदर नुस्खा
             ★पाचन शक्ति के लिए ★

100 ग्राम अजवायन
सौंफ 100 ग्राम
बेल गुदा 100ग्राम
कलौंजी 50 ग्राम
सेंधानमक आधा चम्मच

पीसकर चूर्ण बनाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पाचनशक्ति बढ़ती है और अपच दूर होता है।

कभी गैस नही बनेगी।
न कभी जलन होगी।
                    Whats 9417862263

Tuesday, 9 January 2018

वाजीकरण योग की जान कोंचबीज

सिद्ध अयूर्वादिक

                 वाजीकरण योग की जान
                          कोंचबीज

                       ★★★★★

         कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ  बारीक चूर्ण

पुरुष और महिला दोनों उपयोग कर सकते है।यह योग शरीर की हर कमजोरी को दूर करता है।

                            ★★★

          कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं।

इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है।

इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए।

इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

          कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ  बारीक चूर्ण तैयार कर लें।
★★★

इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।

★★

महिलाओं में सफेद पानी की समस्या हो तो यह योग 21दिन में पुराना रोग भी ठीक कर देता है।

और sex इच्छा की कमी को दूर करता है।

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Thursday, 4 January 2018

★असगंध के फायदे★

सिद्ध अयूर्वादिक

                      ★असगंध के फायदे★

★.हृदय शूल : वात के कारण उत्पन्न हृदय रोग में असगंध का चूर्ण दो ग्राम गर्म पानी के साथ लेने से लाभ होता है।

★गंडमाला : असंगध के नये कोमल पत्तों को समान मात्रा में पुराना गुड़ मिलाकर तथा पीसकर झाड़ी के बेर जितनी गोलियां बना लें। इसे सुबह ही एक गोली बासी पानी के साथ निगल लें और असगंधा के पत्तों को पीसकर गंडमाला पर लेप करें।     

★क्षयरोग (टी.बी.) : 2 ग्राम असंगध के चूर्ण को असगंध के ही 20 मिलीलीटर काढ़े के साथ सेवन करने से क्षय रोग में लाभ होता है।

★ गर्भधारण : अश्वगंधा का चूर्ण 20 ग्राम, पानी 1 लीटर तथा गाय का दूध 250 मिलीलीटर तीनों को हल्की आंच पर पकाकार जब दूध मात्र शेष रह जाये तब इसमें 6 ग्राम मिश्री और 6 ग्राम गाय का घी मिलाकर मासिक-धर्म की शुद्धिस्नान के 3 दिन बाद 3 दिन तक सेवन करने से स्त्री अवश्यगर्भ धारण करती है।

★.नपुंसकता : अश्वगंधा का कपड़े से छना हुआ बारीक चूर्ण और चीनी बराबर मिलाकर रखें, इसको 1 चम्मच गाय के ताजे दूध के साथ सुबह भोजन से 3 घंटे पूर्व सेवन करें। इस चूर्ण को चुटकी-चुटकी भर खाते हैं और ऊपर से दूध पीते रहें। रात के समय इसके बारीक चूर्ण को चमेली के तेल में अच्छी तरह घोटकर लगाने से इन्द्रिय की शिथिलता दूर होकर वह कठोर और दृढ़ हो जाती हैं।

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण