Wednesday, 28 February 2018

★गुर्दे की खराबी में रामबाण★ ■कायाकल्प चुर्ण■

सिद्ध अयूर्वादिक

             ★गुर्दे की खराबी में रामबाण★
                   ■कायाकल्प चुर्ण■


   गुर्दे खराब हो और डायलिसिस ट्रीटमेंट ले रहे तो 21 दिन कायाकल्प चुर्ण ले ।आप को डायलिसिस ट्रीटमेंट
की जरूतर नही पड़ेगी।

गुर्दे हमारे शरीर में खून साफ़ करने और शरीर से विषेले पदार्थ पेशाब के रास्ते बाहर निकालने का काम करते है, इससे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।


 इसके इलावा ब्लड प्रेशर, नया खून बनाना, पानी और कैल्शियम का नियंत्रण बनाए रखना भी किडनी के कुछ अन्य काम है। अगर किडनी में कोई इन्फेक्शन या फिर कोई बीमारी हो जाती है तो ये सही से काम नहीं कर पाती जिस कारण शरीर को कई दूसरे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

गुर्दे सही तरीके से काम नही कर रहे तो कायाकल्प चुर्ण आप के गुर्दे रोग में सहायता करेगा।

क्योंकि  कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।


कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं
लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि - गुर्दे के रोगी दिन में 3 बार पानी से ले।

★★

         किडनी को स्वस्थ रखने के लिए
               ★आहार और परहेज★

नमक का सेवन जादा ना करे।

बाजार में मिलने वाला डब्बा बंद खाने से दूर रहे।

साफ पानी पिए और अगर पानी साफ ना मिले तो उबाल कर पिए।

किडनी के लिए डाइट हेल्थी होनी चाहिए और फास्ट फुड खाने से परहेज करे। अपने आहार में फलों और सब्जियों का सेवन अधिक करे।

अगर दस्त, उल्टी या बुखार हुआ हो तो शरीर में पानी की कमी ना हो, इसलिए प्रयाप्त मात्रा में पानी पिए।

धूम्रपान शराब और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहे।
गुर्दे के रोग से बचने के लिए ज़रूरी है की आप किसी भी तरह के इन्फेक्शन से बचे रहे।

ज्यादा तनाव लेने से बचे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाये।
शरीर का वजन जादा ना बढ़ने दे।

दर्द निवारक दवा का सेवन कम से कम करे, क्योंकि ये मेडिसिन किडनी को नुकसान करती है।


कायाकल्प चुर्ण online मंगवा सकते हैं।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए 
contact करे
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com
http://www.ayurvedasidh.blogspot.com/

★मोतियाबिंद दवा★

सिद्ध अयूर्वादिक
   सफ़ेद या काला मोतियाबिंद हो कारगर
                 ★मोतियाबिंद दवा★ घर मे बनाएं

10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 10 मिलीलीटर अदरक का रस, 10 मिलीलीटर नींबू का रस और 50 मिलीलीटर शहद को मिला लें।
इस रस की 2-2 बूंदें रोजाना आंखों में डालने से मोतियाबिंद कट जाता है।

दिन में 5 से 7 बार आँखों में 41 दिन उपयोग करे।
पक्का फ़ायदा होगा।
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए 
contact करे
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com
http://www.ayurvedasidh.blogspot.com/

★पाचनतंत्र क्ल्प चुर्ण★

सिद्ध अयूर्वादिक
   ★पाचनतंत्र खराब हो जाए तो घर में बनाएं★
                 ★पाचनतंत्र क्ल्प चुर्ण★
             ★Online भी मंगवा सकते हैं★


अजवाइन 100 ग्राम ,त्रिफला 50 ग्राम, बेल चुर्ण 50 ग्राम लौंग 10 ग्राम, सौंठ 10 ग्राम, कालीमिर्च 10 ग्राम, पीपल 10 ग्राम

  सभी को मिलाकर अच्छी तरह पीसकर इसमें एक 10 ग्राम  सेंधानमक मिलाकर लें। इस मिश्रण को एक स्टील के बर्तन में रखकर ऊपर से 10 ग्राम नींबू का रस डाल दें।


जब यह सक्त हो जाए तो इसे छाया में सूखाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद सुबह-शाम पानी के साथ लें। 

इससे पाचनक्रिया की गड़बड़ी दूर होती है। गैस 1 मिनट दूर होगी। सुबह अच्छी तरह पेट साफ होगा।।


किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए 
contact करे
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com
http://www.ayurvedasidh.blogspot.com/

Monday, 26 February 2018

सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा★


सिद्ध अयूर्वादिक

       
        ★सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा★


श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिया (Leukorrhea) या "सफेद पानी आना" स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है।

ल्‍यूकोरिया स्त्री की योनि से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। योनि मार्ग से आने वाले सफेद और चिपचिपे गाढ़े स्राव को ल्‍यूकोरिया कहते हैं। कभी-कभी योनि से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह सामान्य होता है। लेकिन कई बार योनि से निकलते स्राव में ज़्यादा चिपचिपापन, जलन, खुजली, गंध होती है जिसके कारण यह ज़्यादा परेशानी का कारण बनता है।

लिकोरिया होने के लक्षण :
★पेट के निचले हिस्से और टांगो में दर्द रहना
★बार बार पेशाब आना
★योनी के आस पास खुजली होना
★सम्भोग के दौरान दर्द महसूस होना
★थकावट ज्यादा रहना
★कब्ज़ होना
★गर्भ न ठहरना
★खाया पीया न लगना।
★ शरीर का कमजोर होना।

★★★
लकोरिया की दवा

कौंचबीज बीज 100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
मिश्री               100  ग्राम
मुलहठी            50 ग्राम
छोटी इलायची के बीज 25 ग्राम

सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।

कैसे सेवन करे।
दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले।
कम से कम 21 दिन कोर्स करे।
अगर पुराना लकोरिया रोग है तो 90 दिन कोर्स करे।
★★
साथ मे यह जरूर करे

नीम पत्ती 200 ग्राम 100 ग्राम फिटकरी को 2 लीटर
में उबालकर कर बोतल में भर ले।
दिन में 5 से 7 वार इस पानी से योनि की सफाई करे।
या
योनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें, इसके लिए आप गुनगुने पानी में कुछ बूँद डेटॉल का डालकर साफ करें।

सेक्स करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को धोना न भूलें।
यूरिन पास करने के बाद पानी से साफ करें।

सेक्स के समय कंडोम क प्रयोग करें।

अपने अंडरगारमेंट को अच्छे से साफ करें।
दवा online मंगवा सकते हैं।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263


श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिया (Leukorrhea) या "सफेद पानी आना" स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है।

ल्‍यूकोरिया स्त्री की योनि से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। योनि मार्ग से आने वाले सफेद और चिपचिपे गाढ़े स्राव को ल्‍यूकोरिया कहते हैं। कभी-कभी योनि से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह सामान्य होता है। लेकिन कई बार योनि से निकलते स्राव में ज़्यादा चिपचिपापन, जलन, खुजली, गंध होती है जिसके कारण यह ज़्यादा परेशानी का कारण बनता है।

लिकोरिया होने के लक्षण :

★पेट के निचले हिस्से और टांगो में दर्द रहना
★बार बार पेशाब आना
★योनी के आस पास खुजली होना
★सम्भोग के दौरान दर्द महसूस होना
★थकावट ज्यादा रहना
★कब्ज़ होना
★गर्भ न ठहरना
★खाया पीया न लगना।
★ शरीर का कमजोर होना।

★★★
लकोरिया की दवा

कौंचबीज बीज 100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
मिश्री               100  ग्राम
शतावरी            50 ग्राम
मुलहठी            50 ग्राम
छोटी इलायची के बीज 25 ग्राम

सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।

कैसे सेवन करे।
दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले।
कम से कम 21 दिन कोर्स करे।
अगर पुराना लकोरिया रोग है तो 90 दिन कोर्स करे।

★★
साथ मे यह जरूर करे
नीम पत्ती 200 ग्राम 100 ग्राम फिटकरी को 2 लीटर
में उबालकर कर बोतल में भर ले।
दिन में 5 से 7 वार इस पानी से योनि की सफाई करे।
या
योनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें, इसके लिए आप गुनगुने पानी में कुछ बूँद डेटॉल का डालकर साफ करें।

सेक्स करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को धोना न भूलें।
यूरिन पास करने के बाद पानी से साफ करें।

सेक्स के समय कंडोम क प्रयोग करें।

अपने अंडरगारमेंट को अच्छे से साफ करें।


दवा online मंगवा सकते हैं।
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com

Sunday, 25 February 2018

सिद्ध अस्थमा नाशक कल्पचुर्ण- अस्थमा होगा छूमंतर


         


आज के समय में दमा (अस्थमा) तेजी से स्त्री-पुरुष व बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। यह रोग धुंआ, धूल, दूषित गैस आदि जब लोगों के शरीर में पहुंचती है तो यह शरीर के फेफड़ों को सबसे अधिक हानि पहुंचाती है। प्रदूषित वातावरण में अधिक रहने से श्वास रोग (अस्थमा) की उत्पत्ति होती है।

         यह श्वसन संस्थान का एक भयंकर रोग है। इस रोग में सांस नली में सूजन या उसमें कफ जमा हो जाने के कारण सांस लेने में बहुत अधिक कठिनाई होती है। दमा का दौरा अधिकतर सुबह के समय ही पड़ता है। यह अत्यंत कष्टकारी है जो आसानी से ठीक नहीं होता है।
आयुर्वेद के अनुसार यह पांच प्रकार का होता है :

1. क्षुद्र श्वांस -रूखे पदार्थों का सेवन करने तथा अधिक परिश्रम करने के कारण जब कुछ वायु ऊपर की और उठती है तो क्षुद्रश्वांस उत्पन्न होती है। क्षुद्रश्वांस में वायु कुपित होती है परन्तु अधिक कष्ट नहीं होता है। यह रोग कभी-कभी स्वत: ही ठीक हो जाता है।

2. तमक श्वास  : इस दमा रोग में वायु गले को जकड़ लेती है और गले में जमा कफ ऊपर की ओर उठकर श्वांस नली में विपरीत दिशा में चढ़ता है जिसे तमस (पीनस) रोग उत्पन्न होता है। पीनस होने पर गले में घड़घड़ाहट की आवाज के साथ सांस लेने व छोड़ने पर अधिक पीड़ा होती है। इस रोग में भय, भ्रम, खांसी, कष्ट के साथ कफ का निकलना, बोलने में कष्ट होना

3. श्वास :इस रोग में रोगी ठीक प्रकार से श्वांस नहीं ले पाता, सांस रुक-रुककर चलती है, पेट फूला रहता है, पेडू में जलन होती है, पसीना अधिक मात्रा में आता, आंखों में पानी रहता है तथा घूमना व श्वांस लेने में कष्ट होता है। इस रोग में मुंह व आंखे लाल हो जाती हैं, चेहरा सूख जाता है, मन उत्तेजित रहता है और बोलने में परेशानी होती है। रोगी की मूत्राशय में बहुत जलन होती है और रोगी हांफता हुआ बड़बड़ाता रहता है।

4. ऊध्र्वश्वास :ऊध्र्वश्वास (सांस को जोर से ऊपर की ओर खिंचना) :
ऊपर की ओर जोर से सांस खींचना, नीचे को लौटते समय कठिनाई का होना, सांसनली में कफ का भर जाना, ऊपर की ओर दृष्टि का रहना, घबराहट महसूस करना, हमेशा इधर-उधर देखते रहना तथा नीचे की ओर सांस रुकने के साथ बेहोशी उत्पन्न होना आदि लक्षण होते हैं।

5. छिन्न श्वास:सांस ऊपर की ओर अटका महसूस होना, खांसने में अधिक कष्ट होना, उच्च श्वांस, स्मरणशक्ति का कम होना, मुंह व आंखों का खुला रहना, मल-मूत्र की रुकावट, बोलने में कठिनाई तथा सांस लेने व छोड़ते समय गले से घड़घड़ाहट की आवाज आना आदि इस रोग के लक्षण हैं। जोर-जोर से सांस लेना, आंखों का फट सा जाना और जीभ का तुतलाना-ये महाश्वास के लक्षण हैं।
इन सभी के लिए एक ही दवा है।आप घर मे इसको आसानी से बना सकते हैं।

अस्थमा की अयूर्वादिक दवा


त्रिफला            50 ग्राम
अजवाइन भुनी 50 ग्राम
सौंठ भुनी         50 ग्राम
गिलोय             50 ग्राम
हल्दी                50ग्राम
चरायता            50 ग्राम
अडूसा             20 ग्राम
लौंग का चूर्ण    20 ग्राम
हरड़ काली       20 ग्राम
अपामार्ग          20 ग्राम
बेरी की छाल    20 ग्राम
नौसादर           20 ग्राम
नागरमोथा       20 ग्राम
तेजपात           10 ग्राम
पीपल             10 ग्राम
बबूल के गोंद    10 ग्राम
काली मिर्च       10 ग्राम
भुनी हुई हींग    10 ग्राम
काला नमक     10 ग्राम
पीपर                5 ग्राम
काकड़ासिंगी    5 ग्राम
पुष्करमूल         5 ग्राम
गंधक का चूर्ण   5 ग्राम
कुलिंजन           5 ग्राम
गुग्गल               5 ग्राम
हरसिंगार           5 ग्राम
जावित्री             5 ग्राम

एलोवेरा रस 200 ग्राम ताजा ले कर सभी अयूर्वादिक जड़ी बूटियों को मिलाकर धुप में सुखा लें।

★★★
सेवन विधि
दिन में 3 बार 1 -1 चमच्च  50 ग्राम गाय  मूत्र 100 ग्राम पानी से ले।
जिदी अस्थमा भी ख़त्म होगा।
यह 90 दिन का कोर्स है।


सिद्ध अयूर्वादिक


किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com

Wednesday, 21 February 2018

सिद्ध सफ़ेद दाग नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक
           ★सिद्ध सफ़ेद दाग नाशक कल्पचुर्ण

त्रिफला         100 ग्राम
नीम पंचाग    100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
गिलोय चुर्ण   100 ग्राम
अखरोट        100 ग्राम
ग्राम हल्दी      50 ग्राम
शीतलचीनी     50 ग्राम
सोना गेरू       50 ग्राम
बावची           50 ग्राम
मंजीठ            20 ग्राम
कुटकी            20 ग्राम
बच                20 ग्राम
सभी चुर्ण को 200 ग्राम एलोवेरा रस में मिलाकर कर दूप में सुखा लें।
★★
सेवन विधि
दिन 3 बार  1-1 चम्मच 1 ग्लॉस छाछ से ले।
छाछ न मिले तो पानी से ले।
प्रतिदिन 3 से 4 बादाम और 30 से 50 ग्राम भीगे काले चने खाए।
★★
नॉट करे÷
इलाज थोड़ा जटिल होता है कृपया विश्वास से 3 से 9 महीने तक दवा का ओर तेल का सेवन करे।
★★
प्राकृतिक उपचार-
सफेद दाग के रोग में सुबह-सुबह उठकर सैर करना चाहिए।
सफेद दाग में एनिमा लेना लाभदायक रहता है।
सफेद दाग वाले स्थान पर 2 मिनट तक गर्म सिंकाई करें और 3 मिनट तक ठंड़ी सिकाई करें।
धूप का स्नान सफेद दाग के रोग में काफी लाभदायक रहता है।
             सफेद दाग के रोग में चमड़ी के ऊपर का भाग सफेद हो जाता है जिसे सफेद दाग या श्वेत कुष्ठ कहते हैं। इस रोग में शरीर में कही दर्द नहीं होता है और न ही यह फैलने वाला रोग है।
भोजन और परहेज :
सफेद दाग के रोग में भोजन हमेंशा ताजा और शाकाहारी करना चाहिये।
सफेद दाग से पीड़ित रोगी को त्रिफला के पानी में भिगोए हुए अंकुरित चने, मूंग, पालक, गाजर, परवल, बथुआ, चोकर के आटे की रोटी, कैल्शियम और विटामिन `डी´ वाली चीजों का सेवन करना चाहिए और शरीर में सूरज की किरणे लगानी चाहिए।
रोगी को जिस भोजन को खाकर ठंड़क मिले वो ही भोजन करना चाहिये।
सफेद दाग के रोग में भोजन में खट्टे पदार्थ, तेल, लालमिर्च और गर्म मसालों का सेवन बन्द कर देना चाहिये और नमक भी कम खाना चाहिए।
सफेद दाग के रोग में मांस बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।
सफेद दाग के रोग से ग्रस्त रोगी को मीठी चीजों का सेवन कम करना चाहिए।
,◆◆◆
सफ़ेद दाग के तेल खुद बनाए।
नुस्खा नो -1
➡ अवश्यक सामग्री :
बावची तेल 10 मिली
चाल मोगरा तेल 10 मिली
लौंग तेल 10 मिली
दालचीनी तेल 10 मिली
तारपीन तेल 10 मिली
श्वेत मिर्च का तेल 20 मिली
नीम तेल 40 मिली
➡ सप्त तेल तैयार करने की विधि और लगाने का तरीका :
इन सात तेल को मिला कर अच्छी तरह सुबह शाम मालिश करे या लगाये कितना भी पुराना श्वेत कुष्ठ हो इस तेल के योग से पूरी तरह से ठीक हो जाता है हा एक बात जरुर है इसमें चार से सात माह का समय लगता है ।
अत : निराश नहीं होना चाहिए और ये प्रयोग निरंतर करते रहना चाहिए और अगर किसी तरह का कोई उपद्रोव नजर आये तो इसमें 50 मिली नारियल तेल मिला सकते है।
इससे इसकी शक्ति कम हो जायेगी पर घबराना नहीं चाहिये कुछ समय और लग सकता है।
★★
नुस्खा नो- 2
10 ग्राम हरताल, 20 ग्राम गंधक, 10 ग्राम मैनसिल, 10 ग्राम नीला थोथा, 10 ग्राम मुर्दाशंख, 10 ग्राम सिंदूर, 10 ग्राम सुहागा और 10 ग्राम पाराभस्म को एक साथ पीसकर आधे कप नींबू के रस में मिलाकर लगातार 2 महीने तक सफेद दागों पर लगाए।
ऑनलाइन दवा मंगवाए
सिद्घ अयूर्वादिक

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda@gmail.com


Monday, 19 February 2018

सिद्ध माइग्रेन नाशक कल्पचुर्ण- माइग्रेन रोग को करे जड़ से खत्म


https://www.sidhayurved.com/2017/12/blog-post_95.html?m=1



अलसी चूर्ण 200 ग्राम
तुलसी पत्ते चूर्ण 100 ग्राम
दालचीनी 50 ग्राम
सौंठ 50 ग्राम
मलहठी 50 ग्राम
बादाम 50 ग्राम

सभी को चूर्ण बनाकर एक चम्मच सुबह शाम या 3 बार दुध  के साथ दो । 21 दिन उपयोग करे। इस दवा का कोई साइड इफेक्ट्स नही है।

★★

परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
चावल, खासकर भूरे चावल,पकी हुई हरी सब्जियाँ जैसे ब्रोकोली, पालक, स्विस चार्ड या कोलार्ड पकी हुई नारंगी रंग वाली सब्जियाँ जैसे गाजर या शकरकंद
पके या सूखे खटाई रहित फल: चेरी, क्रेनबेरी, नाशपाती, सूखे आलूबुखारे।

प्रतिदिन 6-8 गिलास पानी पीयें।
थोड़ी मात्रा में नमक, मेपल सिरप, और वैनिला अर्क लिया जा सकता है।
★★
इनसे परहेज करे
डेरी उत्पाद, चॉकलेट, अंडे, खट्टे फल, माँस, गेहूँ (ब्रेड, पास्ता), मेवे, मूंगफली, टमाटर, प्याज, मक्का, सेब, केले।
शराब (खासकर रेड वाइन), कैफीन युक्त पेय (कॉफ़ी, चाय, और कोला)।

आहार जो माइग्रेन बढ़ाते हैं उनमें पनीर, चॉकलेट, चाईनीस फ़ूड, अजीनोमोटो, मेवे, इत्यादि बिलकुल नहीं लेना चाहिए।
🌹🌲🌹
सिद्ध वात दर्द कल्पचुर्ण वातदर्दो और माइग्रेन जबरदस्त दवाई है कृपया एक बार ऑनलाइन जरूर मगवाएँ।
https://www.sidhayurved.com/2017/12/blog-post_95.html?m=1

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda1@gmail.com

Sunday, 18 February 2018

हर्निया के लिए अयूर्वादिक नुस्खा

सिद्ध अयूर्वादिक

अयूर्वादिक छोटे कारगर नुस्खे

           ★हर्निया के लिए अयूर्वादिक नुस्खा


200 छोटी हरड़ को गाय के 100 ग्राम मूत्र में उबालकर
फिर एरंडी के तेल में तल लें।

इन हरड़ों का पाउडर बनाकर

अजवायन 100ग्राम
हींग भुनी 30 ग्राम
काला नमक 10 ग्राम

मिलाकर चुर्ण बना ले।

5 ग्राम मात्रा मे सुबह-शाम हल्के गर्म पानी के साथ ले।

या 10 ग्राम पाउडर का काढ़ा बनाकर लेने  से आंत्रवृद्धि की विकृति खत्म होती है।

प्रयोग आप के हाथ मे है ।
नुस्खा सस्ता और सुलभ भी है।

Whats 94178 62263

Saturday, 17 February 2018

सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

★ यकृत के विकार (लिवर या जिगर की खराबी)★
                     अयूर्वादिक दवा


                    *सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण*

        *बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा*
*Online मगवाएँ -whats करे 94178 62263*
★*सुबह पेट साफ ओर सभी पेट की बीमारी    ठीक होगी*
★ *एक दम हल्का महसूस होगा।*
★*खून साफ औऱ शुद्ध होने लगेगा*
★*लिवर इन्फ़ेक्सन SGOT का इलाज है*
          *सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण*

त्रिफला          100 ग्राम
गिलोय           100 ग्राम
अजवायन      100 ग्राम
करेला चुर्ण     100 ग्राम
तुलसी पंचाग  100 ग्राम
सोंठ               50 ग्राम
चित्रकमूल       50 ग्राम
अडूसा            50 ग्राम
पिपली छोटी    50 ग्राम
त्रिकुट             50 ग्राम
मुलहठी           20 ग्राम
हल्दी              20 ग्राम
अतीस             20 ग्राम
चिरायता          20ग्राम
काला नमक     20 ग्राम
सेंधा नमक       20 ग्राम
सभी जड़ी बूटियों को पीसकर चुर्ण बना ले।

सेवन विधि

    1 बार मे 2 ग्राम (1चम्मच) पानी के साथ ले।
                 दिन में 3 बार दवा ले।
( बच्चों को 1 ग्राम आधा चम्मच ही दे दिन में 2 बार)
                 21 दिन का कोर्स पूरा करे।

लिवर की सभी बीमारी ठीक होगी। 

अगर आप कभी कभी इस चुर्ण को लेते हैं तो कभी लिवर की बीमारी नही होगी।

★★★
नोट
★नही बना सकते तो online मंगवाए★

          ★जिगर की सूजन का कारण★

लीवर कमज़ोर होना या लीवर की खराबी, इस बिमारी के कई कारण हो सकते है। लीवर में दर्द होना, भूख कम लगना आदि इस बिमारी के सामान्य लक्षण है।
जिगर की सूजन का प्रमुख कारण भोजन को चबाए बिना निगल जाना, ठूंस-ठूंसकर तेल, मिर्च, मसालेदार पदार्थों तथा खट्टी, चटपटी चीजों का सेवन करना होता है

| रात्रि का भोजन करने के बाद अधिक देर तक जागकर कार्य करने से भी जिगर में सूजन उत्पन्न हो सकती है| दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने से भी पाचन क्रिया विकृत होकर जिगर में सूजन का कारण बन जाती है|

लिवर की खराबी का अगर सही समय पर इलाज़ न हो तो आगे जाकर यह बिमारी विकराल रूप ले सकती है, यहाँ तक की जान भी जा सकती है।

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके
★★★
          ★ खराब लिवर के लक्षण★

पेट में सूजन आना.
शरीर में थकावट.
छाती में जलन होती है भारीपन महेसुस होता है.
पेट में जल्दी गैस बनने की समस्या.
शरीर में आलसपन आना.
शरीर में कमजोरी आना.
लीवर बड़ा हो जाता है.
मुह का स्वाद ख़राब होता है.

इस रोग में जिगर में सूजन आ जाती है।
 वह शनै:-शनै: सिकुड़कर छोटा तथा कठोर हो जाता है।रोगी को अपच, उबकाई एवं वमन की शिकायत होने लगती है| भूख नहीं लगती| शरीर का वजन कम होने लगता है| पेट दर्द, त्वचा में पीलापन, हल्का ज्वर तथा शारीरिक और मानसिक थकावट के लक्षण प्रकट होने लगते हैं| पेट की नसें फूल जाती हैं| शरीर तथा चेहरे पर मकड़ी के जाले-से हल्के चिह्न दिखाई देने लगते हैं|


लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके से नहीं पहुँच पाता और ठीक तरह से हज़म भी नहीं हो पाता। ठीक तरह से हज़म न हो पानें से अन्य तरीके के रोग भी उत्पन्न हो सकते है। इसलिए लीवर की खराबी का पक्का, आसान और पूरी तरह से आयुर्वेदिक इलाज़ हम आपके लिए लेकर आये है जिससे लिवर की खराबी से निजात मिल जाएगी।
★★★

     ★ इन उपायों को साथ इसके साथ करे ★

● दो सप्ताह तक चीनी अथवा मीठा का इस्तेमाल न करें। चीनी के बजाय दूध में चार-पाँच मुनक्का डाल कर मीठा कर लें। रोटी भी कम खायें। अच्छा तो यह है कि जबै उपचार चलता रहे रोटी बिल्कुल न खाकर सब्जियाँ और फल से ही गुजारा कर लें।

सब्जी में मसाला न डालें। टमाटर, पालक, गाजर, बथुआ, करेला, लौकी आदि शाक-सब्जियाँ और पपीता, ऑवला, करें।

धी और तली वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें। पन्द्रह दिन में जिगर ठीक हो जाएगा।

★★★
जिगर का संकोचन में दिन में दो बार प्याज खाते रहने से भी लाभ होता है।

जिगर रोगों में छाछ (हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिलाकर) दोपहर के भोजन के बाद सेवन करना बहुत लाभप्रद है।

◆◆◆
आँवला का रस 25 ग्राम या सूखे ऑवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से 15-20 दिन में यकृत के सारे दोष हो जाते हैं।

★★★
एक सौ ग्राम पानी में आधा नीबू निचोडकर नमक (चीनी की जाय) डालें और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होगी। 

7  से 21 दिन लें।
★★★
जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम दिया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है। 

★★★
तिल्ली अथवा जिगर (यकृत) व तिल्ली (प्लीहा) दोनों के बढ़ने पर पुराना गुड़ डेढ़ ग्राम और बड़ी (पीली) हरड़  का चूर्ण बराबर वजन मिलाकर एक गोली बनायें और ऐसी गोली दिन में दो बार प्रातः सायं हल्के गर्म पानी के साथ एक महीने तक लें।

इससे यकृत (Liver) और प्लीहा (Spleen) यदि दोनों ही बढ़े हुए हों, तो भी ठीक हो जाते हैं।
विशेष-इसके तीन दिन के प्रयोग से अम्लपित्त का भी नाश होता है।



सिद्ध अयूर्वादिक
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda@gmail.com

सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

                सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

अजवायन, चीता, यवाक्षर, पीपलामूल, दंती की जड़, छोटी पीपल, एकसाथ 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें।

Wednesday, 14 February 2018

जिदी जुकाम ,कफ़ खाँसी और बुखार की रामबाण दवा

सिद्ध अयूर्वादिक

     जिदी जुकाम ,कफ़ खाँसी और
         बुखार की रामबाण दवा

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम

सभी  चूर्ण को मिलाकर रख ले ।

दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे ।
3 दिन पूर्ण आराम जरूर करे।
★★★
साथ में काढ़ा जरूर ले

 ★काढ़ा कैसे बनाए★

6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★शहद 5 चम्मच

सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।

3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।

यह क्रिया 3 दिन लगातार करे।


इस अयूर्वादिक दवा और काढ़े के फायदे जाने।

 गले में खराश, खांसने पर भी बलगम नहीं निकल सकता, छाती में दर्द और टीस महसूस होना, बलगम बाहर नहीं आ पाता और रोगी को सटकना पड़ता है, खांसी के साथ कूल्हे में भी दर्द, अत्यधिक बोलने अथवा गाने के कारण गले में खराश, दर्द, बिस्तर की गमीं से एवं शाम के वक्त अधिक परेशानी, ठंडा पानी पीने से आराम मिले, तो साथ ही इसमें रोगी को बार-बार पेशाब जाना पड़ता है और खांसते समय अपने आप ही पेशाब निकल जाता है, सांस अंदर खींचने में अधिक परेशानी होती है।

 छाती में लगातार दर्द, जरा-सा हिलते ही छाती में जकड़न, कर्कश आवाज के साथ सूखी खांसी, गहरी व तेज सांसें, सांस छोड़ने पर परेशानी बढ़ती है, खांसने में अधिक शक्ति खर्च करनी पड़ती है, आधी रात के बाद अधिक परेशानी होती है। ठंडी, सर्दीली हवाओं से हो गई हो, तो

सूखी, तीव्र खांसी, खांसते-खांसते मरीज उठकर बैठ जाता है, गर्म कमरे में आने पर अथवा कुछ खाने-पीने पर अधिक खांसी, ऐसा लगना जैसे छाती फट जाएगी, खांसते समय रोगी छाती को हाथों से जकड़ लेता है, हिलने-डुलने-बैठने से परेशानी बढ़ जाती है,

खांसते समय सिर में भयंकर पीड़ा, जैसे सिर फट जाएगा, रोगी दर्द से चिल्ला उठता है और दोनों हाथों से सिर पकड़ लेता है। साथ ही पेशाब की थैली, घुटनों और पैरों में भी खांसते समय दर्द होता है, दर्द के कारण रोगी लेट जाता है,

• यदि बलगम के साथ खांसी आए और बलगम में तीव्र बदबू हो, जिससे रोगी भी परेशान हो,

• यदि लंबे अर्से से ऐंठन के साथ बलगमयुक्त खांसी हो, जिसमें खून भी आता हो,

• यदि बलगम अत्यधिक हो और ऐसा लगे,जैसे पूरी छाती इससे भरी हुई है,बलगम की वजह से सीटी जैसी आवाजें सुनाई पड़ती हों, सांस लेने में तकलीफ हों,

• यदि खांसी बहुत जिद्दी हो अर्थात किसी दवा से फायदा न हो रहा हो एवं खांसने में बाई छाती से बाएं कंधे तक दर्द हो और प्राय:सूखी खांसी हो,

• यदि काली खांसी हो और खांसने पर तेज आवाज हो, अधिक जोर लगाना पड़े और लगातार खांसी के दौरे उठते रहें,

यदि खांसी बलगम के साथ हो, रात में बढ़ जाए, झागदार बलगम हो,

• यदि खांसी तुरही अथवा दुंदुभि जैसी आवाज के साथ हो, गले में रूखापन एवं दर्द हो, छाती की मांसपेशियों में अधिक खिंचाव हो,

इन सभी लक्ष्यण में यह दवा रामबाण है।
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda@gmail.com

Monday, 12 February 2018

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

इस दवा से चेहरे का कालापन,पीपल्स ,फुंसी, झाईयां, आँखों के नीचे काला घेरा, कब्ज से होने वाले रोग,और खून की खराबी से होने वाले रोग ठीक होते हैं।

रक्त विकार अर्थात खून में दूषित द्रव्य बनना। खून में दूषित द्रव्य बनने के कई कारण होते हैं।

सूक्ष्म कीटाणु फैलने के कारण यह रोग होता है। जब किसी रोगी का खून दूषित हो जाता है तो फुंसियां हो जाती हैं। किसी को फोड़े निकल आते हैं।

किसी को ऐसे फोड़े हो जाते हैं जो किसी साधारण दवा से ठीक ही नहीं होता।

 इस तरह विभिन्न कारणों से उत्पन्न रक्त विकार को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करने से लाभ होता है।

आइये जाने रक्त विकार(खून की खराबी)को दूर करने के घरेलू उपाय

उपाय :
पहला प्रयोगः दो तोला काली द्राक्ष (मुनक्के) को 20 तोला पानी में रात्रि को भिगोकर सुबह उसे मसलकर 1 से 5 ग्राम त्रिफला के साथ पीने से कब्जियत, रक्तविकार, पित्त के दोष आदि मिटकर काया कंचन जैसी हो जाती है।

दूसरा प्रयोगः बड़ के 5 से 25 ग्राम कोमल अंकुरों को पीसकर उसमें 50 से 200 मि.ली. बकरी का दूध और उतना ही पानी मिलाकर दूध बाकी रहे तब तक उबालकर, छानकर पीने से रक्तविकार(Blood Disorders) मिटता है।

          सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

त्रिफला 200 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
अजवायन 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
आँवला 50 ग्राम
चरायता 50 ग्राम
हल्दी 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्राम
सौंफ 50 ग्राम
काला नमक 50 ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सुबह-शाम पानी या दूध के 1 चमच्च लेते रहे।
21 दिन लगातार सेवन करें।

●●
★भारती सभी वैद इसका उपयोग करते रहे हैं★
खून की खराबी में होने वाले रोगों में यह दवा रामबाण है।
नीचे लिखे सभी रोग खून की अशुद्धि के कारण होते हैं। यह दवा सभी को ठीक करती हैं।

–चेहरे पर फुंसियाँ और दाने और कील-मुँहासे

–त्वचा पर चकते और धब्बे, चेहरे समेत

–एलर्जी और संक्रमण (ख़ास तौर पर त्वचा का)

–चेहरे पर झुर्रियाँ

–त्वचा पर चकते और जलन फोड़े और फुंसियाँ, या अन्य त्वचा रोग,

–सिर चकराना और सिर में दर्द

–बाल झड़ना

–आँखें कमजोर हो जाना

–सांसों की बदबू

–श्वास प्रणाली से जुड़ी समस्याएँ

यह सभी रोग आसानी से दूर होंगे।

सिद्ध अयूर्वादिक
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda@gmail.com

Saturday, 10 February 2018

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण-हिर्दय की हर समस्या का करे समाधान


                     

   

      ह्र्दय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा
                  सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण
             बढ़े ह्रदय की रामबाण दवा
यह दवा अधरंग के दौरे को भी ठीक करती है।
      पोटेशियम की कमी को दूर करता है।
        ह्रदय का वाल बंद हो यह दवा करे।
           खराटे की समस्या ठीक होगी।
          Bp हाई रहता है तो ठीक होगा।

      दिल में तेज दर्द होने पर बेचैनी हो जाती है। हृदय में दर्द अचानक उठता हैं और बाएं कंधे तथा बाएं हाथ तक फैल जाता है। सांस फूलना, घबराहट बढ़ जाना, ठंडा पसीना आना तथा बेहोश हो जाना, जी मिचलाना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना तथा नब्ज कमजोर मालूम पड़ना इस रोग के अन्य लक्षण हो तो यह दवा रामबाण है।
★★★
जिन को हदय का अटैक हुआ है उन को दवा कारगर है।
★★
यह दवा आप खुद बना सकते है।
★★
यह सभी समान पन्सारी से आसानी से मिल जाता हैं।
नही तो online मंगवा सकते हैं।

ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की 
          अयूर्वादिक दवा

अर्जन छाल चुर्ण 200 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
त्रिफला 100 ग्राम
अश्वगंधा50 ग्राम
तुसली बीज 50 ग्राम
पुनर्नवा 50 ग्राम
राई 50 ग्राम
अकरकरा 50 ग्राम
मुलेठी 50 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
इन्द्रयाण अजवायन 50 ग्राम
बरगद का दूध 50 ग्राम
जावित्री 20 ग्राम
दालचीनी 20 ग्राम
पीपला मूल 20 ग्राम
छोटी इलायची 20 ग्राम
:हींग10 ग्राम
बच10 ग्राम
सोंठ10ग्राम
जीरा10ग्राम
कूट10ग्राम
जवाखार10 ग्राम

सभी को कूट छानकर चुर्ण बनाए औऱ 200 ग्राम गिलोय रस औऱ 500 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे  
सायं में सुखा कर सेवन करे।
सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
दिन में 3 बार 21 दिन ले।

★21 दिन के बाद अगले 90 दिन सुबह शाम ले।
दिन 2 बार दवा ले।

★★★
भोजन और परहेज:
★अत्यधिक गर्म एवं ठंडे दोनों खाद्य-पदार्थों से बचें।
अधिक परिश्रम, सहवास, घी, मलाई, मक्खन आदि हानिकारक है।

★तम्बाकू, जर्दा, चाय, कॉफी, शराब एवं अन्य नशीली चीजें तथा मांस-मछली, गर्म मसाला आदि का सेवन करना मना है।

★हृदय-रोग में शीर्षासन कभी न करें।


★ रोगी को हाइड्रोजनकृत चर्बी जैसे- घी, मक्खन, वनस्पति, नारियल का तेज, नकली मक्खन या ताड़ का तेल आदि का उपयोग भोजन में नहीं करना चाहिए।
इन तेलों की जगह रोगी को सोयाबीन तेल, सूर्यमुखी तेल या कुसुम कराड़ी तेल का उपयोग करना चाहिए। पापकार्न, मजोला या सफोला तेल का भी उपयोग भोजन बनाने में कर सकते हैं।

★★★
क्रीम, पनीर या दूध से बने दही या अन्य मिठाईयां जो गाढ़े दूध से बनी हो जैसे- गुलाब जामुन, मावा, चाकलेट तथा रसगुल्ले आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
★★★

यह करते रहे

रोजाना ध्यान में घंटा भर बैठना, प्राणायाम, आसन, व्यायाम, हर रोज आधा घंटा घूमने जाना और चर्बी बढऩे से रोकने के लिए सात्विक या शाकाहारी भोजन अत्यंत लाभकारी है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक स्वस्थ आहार, धूम्रपान छोडऩे, एक स्वस्थ वजन बनाए रखने और तनाव से खुद को बचाए रखना भी काफी अहम है।

★★
सिद्ध अयूर्वादिक

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।

  

Tuesday, 6 February 2018

★पेट की हर खराबी के लिए चुर्ण★

सिद्घ आयुर्वेदिक

        ★पेट की हर खराबी के लिए चुर्ण★

त्रिफला 250 ग्राम
अजवायन   200 ग्राम
छोटी हरड़    100 ग्राम
आँवला चुर्ण100 ग्राम
सेंधानमक   20 ग्राम
कालानमक 10ग्राम
हींग            5 ग्राम
पुदीना सत   5 ग्राम
निम्बू सात  5 ग्राम

लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें।

1 -1 ग्राम चूर्ण चाटने  से डकार न आना ,गैस ,पेट दर्द  ,पेट  की हर बीमारी से मूक्ति मिलती है।

★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार

आहार में रेशेदार फल और सब्जियाँ जैसे सेब, संतरे, ब्रोकोली, बेरियाँ, नाशपाती, मटर, अंजीर, गाजर और फलियाँ आदि शामिल करें।
★★
साबुत अनाज जैसे भूरे चावल, ज्वार, बाजरा, मेवे, गिरियाँ, और मछली, दालें, मसूर दाल, चावल और सोया के उत्पादों का प्रयोग बढ़ाएँ।

★★

पानी मिला फलों का रस, प्राकृतिक पदार्थों से उत्पन्न सब्जियाँ, और औषधीय चाय पियें।
★★
बीज सहित अमरुद और बेल का फल आँतों को व्यवस्थित करता है, और आहार में रेशे की मात्रा बढ़ाता है, ताकि कब्ज से राहत मिल सके। फल जैसे कि केले, आलूबुखारे, अंगूर और पपीता भी इसमें सहायक होते हैं।
★★
इनसे परहेज करे
अधिक शक्कर उत्सर्जित करने वाले आहार जैसे रिफाइंड अनाज, शक्कर की गोलियाँ, केक और बिस्कुट आदि से परहेज।
रेड मीट, डेरी आहार, और अंडे।
कॉफ़ी, चाय और शक्करयुक्त कार्बन वाले पेय।
  ★कब्ज गैस की दवा कोरियर से मंगवाए★

Whats 9417862263

Monday, 5 February 2018

सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण - साइटिका रोग की उत्तम दवा


               ★साइटिका की दवा★


कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है।

जिसे गृध्रसी या सायटिका (Sciatica) कहा जाता है।

साइटिका की बीमारी में होने वाला दर्द बहुत तकलीफ देह होता है।

यह दर्द कभी कभी हमारी रीढ़ की हड्डी के नीचे से पैर की एड़ी तक जाता है।

इस दर्द में सूजन की समस्या भी होने लगती है।

 जिसके कारण हमारे पैरो में बहुत ज़्यादा दर्द होने लगता है जिससे उठने बैठने में भी तकलीफे होने लगती है।

हम इस के लिए आप को रामबाण दवा बता रहे हैं।

आप करे आप को फायदा होगा।

           ★साइटिका दवा★

गिलोय चुर्ण       ~200 ग्राम
सहजन की जड़ ~100ग्राम
सतावर             ~100 ग्राम
आँवला चुर्ण     - 100 ग्राम
चरायता             ~ 50 ग्राम
अजवाइन         ~ 50 ग्राम
सौंठ भुनी         ~ 50 ग्राम
हींग  भुनी         ~ 10 ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।

दिन में 2 बार दूध के साथ सेवन करे।

दवा खाने के एक घंटे बाद ही ले।


कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में यह दवा रामबाण है।

यह दवा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |

Online दवा मंगवा सकते हैं।
Whats 9417862263

Sunday, 4 February 2018

सिद्ध थाइरायड नाशक कल्पचुर्ण -हर प्रकार के थाइरायड की रामबाण दवा


यह दवा हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड  दोनों प्रकार के थायराइड को ठीक करती है ।
★★
हाइपर थायराइड के लक्षण
वजन कम होना,हार्ट बीट तेज होना,पसीना जादा आना,हाथ और पैरों में कप कपी होना आदि हैं ।
★★★

    सिद्ध थाइराइड नाशक कल्पचुर्ण - संपूर्ण योग
यह नुस्खा किसी वैद की रेख देख में तैयार करे।

कचनार छाल        300 ग्राम
हार सिंगार फूल     250 ग्राम
इंद्रायण अजवाइन  200 ग्राम
गिलोय चुर्ण          125 ग्राम
निर्गुंडी बीज          125 ग्राम
हल्दी                    125 ग्राम
सौंठ                     125 ग्राम
मलॅठी चुर्ण            100 ग्राम
डाल चीनी             100 ग्राम
चित्रक मूल            100 ग्राम
काली मिर्च             50 ग्राम
सभी को कूटपीस कर चुर्ण बनाए
फिर चुर्ण को 200 ग्राम गिलोय रस और 400 ग्राम एलोवेरा रस भावना दे धूप में सुखाएं।
सेवन विधि -2 ग्रा से 5 ग्राम दिन में 3 बार
                 दूध के साथ लें ।

                        "★★★
साथ यह भी ले -

दिन मे 2 बार दही 200 -200 ग्राम जरूर सेवन करे ।
सुबह और रात को सोते समय 5 बादाम 1 अखरोट सेवन करे ।

साबित दालें ज्यादा इस्तेमाल करे,
गऊ मूत्र 50 मिलीलीटर रोजाना सेवन करे ।

परहेज -

तली हुई चीजे बिल्कुल इस्तेमाल न करे ।
मास अंडे प्रयोग न करे यह थाइरायड में जहर
समान है ।

साथ मे यह जरूर करे

1. हल्दी दूध: थायराइड कण्ट्रोल करने के लिए आप रोजाना दूध में हल्दी को पका कर पिए। अगर हल्दी वाला दूध न पिया जाये तो हल्दी को भून कर इसका सेवन करे।

2. लौकी का जूस: रोजाना सुबह खली पेट लौकी का जूस पिने से भी थाइरोइड खत्म करने में मदद मिलती है। जूस पिने के आधे घंटे तक कुछ खाये पिए नहीं।

3. तुलसी और एलोवेरा: दो चम्मच तुलसी के रास में आधा चम्मच एलोवेरा जूस मिला कर सेवन करना भी इस बीमारी से छुटकारा पाने का उत्तम उपाय है।

4. लाल प्याज: प्याज को बीच से काट कर दो टुकड़े कर ले और रात को सोने से पहले थायराइड ग्रंथि के आस पास मसाज करे। इसके बाद गर्दन से प्याज का रस को धोये नहीं।

5. बादाम और अखरोट: बादाम और अखरोट में सेलीनीयम तत्व मौजूद होता है जो  थायराइड के इलाज में फायदा करता है। इस के सेवन से गले की सूजन से भी आराम मिलता है। हाइपोथायराइड में ये उपाय जादा फायदा करता है।

6. अश्वगंधा: रात को सोते वक़्त एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गाय के गुनगुने दूध के साथ सेवन करे।

7 .एक्सरसाइज: रोजाना आधा घंटा एक्सरसाइज करे, इससे थाइरोइड बढ़ता नही है और कंट्रोल में रहता है। 

ऑनलाइन मंगवाए
What's 94178 62263


Friday, 2 February 2018

चेहरे की छाया( कालापन ) का अयूर्वादिक इलाज

कभी-कभी चेहरे में कालापन आ जाता है जिसे चेहरे की छाया कहते हैं। इसमें चेहरे की त्वचा में काले या भूरे रंग के दाग-धब्बे भी हो जाते हैं।

★★★
     चेहरे का कालापन दूर करने के लिए
                 अयूर्वादिक उपाय

गेंदे के फूल से हटाए झाई

झाई के उपाय में गेंदे के फूल और गेंदे के पत्ती ले और पीस ले| झाई हटाने के घरेलू उपाय  मे यह एक सफल उपाय है जिस के नियमित उपयोग से झाई ख़तम हो जाती है| रात को लेप करे और सवेरे धो दे|

★★

काले तिल और हल्दी से झाई हटाए

झाइयां की क्रीम  का इस्तेमाल करे उस के बदले फेस की झाइयों का इलाज जानिए कैसे करे ।

काले तिल और हल्दी के उपयोग से काले तिल को गुलाब जल के साथ मिला के पीस ले और फिर इस मे हल्दी और नींबू का रस मिला के झाई पर लगा के रखे ।

एक घंटे तक तक धोएं नही

इस मे एलो वेरा जूस मिलाया जाए तो और भी अच्छा काम करेगा|
★★

संतरे के छिलके से हटाए झाइया

संतरे के छिलके मे गुण है जो काले दाग धब्बे मिटा दे और त्वचा के मेलानोसाईट मे अधिक मेलेनिन के निर्माण पर रोक लगाए ।


इसलिए झाइयों का उपचार करने के लिए संतरे के छिलके को पीस ले और इस मे तुलसी का रस मिला के जहाँ पर झाई है वहाँ पर लगा के रात भर रहने दे।

बेकिंग सोडा, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, अरीठा से झाई निकाले अरीठा को भिगो के पीस दे|

 इस मे बेकिंग सोडा मिलाए और फिर थोड़े बूँद हाइड्रोजन पेरोक्साइड डाल के झाइयों पर 10 मिनिट तक घिसे और फिर धो दे।

★★★
झाइया हटाने की क्रीम
आप चाहे तो बाजार मे मिल रही झाइयों की क्रीम  का इस्तेमाल करे।

झाइयों के लिए बेस्ट क्रीम आप को
ऑनलाइन ज़रूर मिल जाएँगे|

झाइयां मिटाने की झाइयों की बेस्ट क्रीम एक है Mediderma

 दूसरा है Vincere एंटी -मेलासमा क्रीम,

 तीसरा है मेला K वाइट मेलासमा ब्राइटनिंग क्रीम

 और Reviva Labs ka skin lightening और brown spot removing cream।

 यह झाइयां मिटाने की क्रीम (jhaiya mitane ki cream) का प्रयोग करे या तो घर पर ही बनाए|

★★


झाइयों के लिए बेस्ट क्रीम घर पर बनाने के लिए

 झाइयां के लिए क्रीम बनाने के लिए
 इस मे आप ले

मलाई     5 ग्राम (2 चमच्च)
हल्दी      1 ग्राम (आधा चम्मच)
शहद      1 ग्राम
 बादाम   4  (बादाम रात को भिगोकर रखना है।)

सभी को मिलाकर कर पेस्ट बनाएं।
तो फ्रेश एंटी स्पॉट क्रीम तैयार।

20 मिनट के लिए चेहरे में लगाए।
यह प्रयोग दिन में 2 बार करे।

21 दिन लगातार उपयोग करे।


झाई गायब होंगे और साथ मे त्वचा मे भी अनोखा निखार आएगा|

झाई मिट जाने के बाद भी यह प्रयोग करते रहे हफ्ते मे दो बार तो त्वचा की कोमलता और रंगत बरकरार रहेगी|

◆◆
नोट

बाजार की क्रीम में होते है हानिकारक एसिड

 ध्यान मे रखे की इन झाइयों की क्रीम मे होते है hydroquinone, kojic acid, retinoid जो की लंबे समय के उपयोग पर त्वचा के लिए हानिकारक है तो बेहतर है की घरेलू नुस्खे से झाइयां हटाए।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda@gmail.com

Thursday, 1 February 2018

हम बता रहे हैं दांत दर्द का अयूर्वादिक इलाज

सिद्ध अयूर्वादिक
          हम बता रहे हैं दांत दर्द का
             अयूर्वादिक इलाज
आप खुद इलाज करे।
दाँत दर्द में हमें बड़ी कठनाई का सामना करना पड़ता है । कई बार कुछ गलत खाने से तो कई बार दांतों की ठीक से सफाई न करने या कीड़े लगने के कारण दांतों में दर्द होने लगता है. दांतों में दर्द का कारण कोई भी हो, लेकिन इसकी पीड़ा हमारे लिए बेहद कष्टकारी बन जाती है। यहाँ पर हम आपको दाँत दर्द में कुछ बहुत ही आसान से उपचार बता रहे है।
*पिसी हल्दी, नमक व सरसो का तेल मिलाकर पेस्ट सा बना कर उसे डिब्वे में रख ले सुबह इस पेस्ट को ब्रुश अथवा उगली के द्वारा दाँतों व मसूड़ों पर लगा लें थोड़ी देर लगा कर रखे फिर बाद में कुल्ला कर लें इस प्रयोग से हिलते हुए दाँत जम जाते हैं दाँतो से पीलापन दुर होकर दाँत विल्कुल सफेद हो जाते हैं।इस प्रयोग करते रहने से कभी भी पायरिया नही होगा।
*नींबू के छिलकों पर थोड़ा-सा सरसों का तेल डालकर दाँत एवं मसूढ़ों पर लगाने से दाँत सफेद एवं चमकदार होते हैं, मसूढ़े मजबूत होते हैं, हर प्रकार के जीवाणुओं तथा पायरिया आदि रोगों से बचाव होता है।
*जामफल के पत्तों को अच्छी तरह चबाकर उसका रस मुँह में फैलाकर, थोड़ी देर तक रखकर थूक देने से अथवा जामफल की छाल को पानी में उबालकर उसके कुल्ले करने से हर तरह के दाँत के दर्द में लाभ होता है।
*हींग दांत में दर्द से तुरंत मुक्ति दिलाता है । हींग को मौसमी के रस में डुबोकर दांतों में दर्द की जगह पर रखें, मौसमी न होने पर हींग में नींबू भी मिलाया जा सकता है। इससे शीघ्र ही आपको दर्द से छुटकारा मिल जायेगा।
*तिल के तेल में पीसा हुआ नमक मिलाकर उँगली से दाँतों को रोज घिसने से दाँत की पीड़ा दूर होती है ।
*दांतों के दर्द में लौंग दांतों के सभी बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता हैं। ऐसे में लौंग को दांतों के दर्द की जगह पर रखना चाहिए, कुछ ही देर में आपका दर्द जाता रहेगा। लेकिन चूँकि इसमें दर्द कम होने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी होती है इसलिए इसमें धैर्य रखना चाहिए ।
*जामुन के वृक्ष की छाल के काढ़े के कुल्ले करने से दाँतों के मसूढ़ों की सूजन मिटती है व हिलते दाँत भी मजबूत होते हैं।
*प्याज दांत दर्द के लिए एक उत्तम घरेलू उपचार है। जो व्यक्ति रोजाना कच्चा प्याज खाते हैं उन्हें दांत दर्द की शिकायत होने की संभावना कम रहती है क्योंकि प्याज में कुछ ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो बैकटीरिया को नष्ट कर देते हैं। अगर आपके दांत में दर्द है तो प्याज के टुकड़े को दांत के पास रखें अथवा प्याज चबाएं। आपको आराम महसूस होने लगेगा।
*10 ग्राम बायविडंग और 10 ग्राम सफेद फिटकरी थोड़ी कूटकर तीन किलो पानी में उबालें। एक किलो बचा रहने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। तेज दर्द में दिन में 2-3 बार इस पानी से कुल्ला करने से दो दिन में ही आराम आ जाता है। कुछ अधिक दिन कुल्ला करने से दाँत पत्थर की तरह मजबूत हो जाते हैं।
*प्रायः दाढ़ में कीड़ा लगने पर असहय दर्द उठता है। तब अमरूद के पत्ते के काढ़े से कुल्ला करने से दाँत और दाढ़ की भयानक टीस और दर्द दूर हो जाता है। पतीले में पानी में अमरूद के पत्ते डालकर इतना उबालें कि वह पानी उबाले हुए दूध की तरह गाढ़ा हो जाए।
*नमक के पानी के कुल्ले करने एवं कत्थे अथवा हल्दी का चूर्ण लगाने से गिरे हुए दाँत का रक्तस्राव जल्दी ही बंद हो जाता है।
*लहसुन में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं जो अनेकों प्रकार के संक्रमण से लड़ने की क्षमता रखते हैं।लहसुन में एलीसिन होता है जो दांत के पास के बैकटीरिया, जर्म्स, जीवाणु इत्यादि को नष्ट कर देता है।इसलिए एक फांक लहसुन को सेंधा नमक के साथ पीसकर यदि आप दांतों में दर्द की जगह पर लगायेंगे तो आपको दर्द में आराम मिलेगा।
*दाँत-दाढ़ दर्द में अदरक का टुकड़ा कुचलकर दर्द वाले दाँत में रखकर मुँह बंद कर लें और धीरे-धीरे रस चूसते रहें। फौरन राहत महसूस होगी।
*नीम के पत्तों की राख में कोयले का चूरा तथा कपूर मिलाकर रोज रात को सोने से पहले लगाकर पायरिया में लाभ होता है।
*सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दाँतों पर लगाने से दाँतों से निकलती दुर्गन्ध एवं रक्त बंद होकर दाँत मजबूत होते हैं तथा पायरिया भी जड़ से ख़त्म हो जाता है।
*फिटकरी को तवे या लोहे की कड़ाही में पानी के साथ आग पर रखें। जब पानी जल जाए और फिटकरी फूल जाए तो तवे को आग पर से उतारकर फिटकरी को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। जितना फिटकरी का पावडर बने उसका 1/4 भाग पिसी हल्दी उसमें मिला कर लकड़ी की सींख की नोक से दाँत के दर्द वाले स्थान पर या सुराख के भीतर यह मिश्रण भर दें।यह बहुत ही लाभकारी प्रयोग है ।
*भोजन अथवा अन्य किसी भी पदार्थ को खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला जरूर करें तथा गर्म वस्तु के तुरंत पश्चात् ठण्डी वस्तु का सेवन न करें।
किसी भी शरीरक  समस्या के लिए whats करे 9417862262


सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण-नही बढ़ने देगा कैंसर की इंफेक्शन को।


★कैंसर की अयूर्वादिक दवा★
गुर्दे का कैंसर
रीढ़ की हड्डी का कैंसर
खून का कैंसर
पेट का कैंसर
हड्डी कैंसर
सभी गांठ रोग में यह योग काम करता है।
★★★
क्या है अयूर्वादिक कैंसर दवा
सतावर चूर्ण 200 ग्राम
अश्वगंधा 100 ग्राम
गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
इंद्ररायाण अजवाइन 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
सोंठ 100 ग्राम
मेथी दाना 50 ग्राम
चरायता। 50 ग्राम
अम्बा हल्दी। 50 ग्राम
लाल चित्रक। 50 ग्राम
कलौंजी 50 ग्राम
दालचीनी 50 ग्राम
खुरासानी कुटकी 50 ग्राम
मदार की जड़ 50 ग्राम
कचनार छाल चूर्ण। 50 ग्राम
फिटकरी (भुनी) 50 ग्राम
ताम्र सिंदूर 25 ग्राम
इमली चुर्ण 25 ग्राम
सभी को कूटकर कर 500 मिलीलीटर गुमूत्र में मिलाकर धूप में सुखाए।
जब यह सुख जाए तो
दिन में 3 बार गुमूत्र से सेवन करे।
50 मिलीलीटर गुमूत्र ले 150 मिलीलीटर पानी में मिलाकर कर 3 ग्राम दवा सेवन करे।
★★
साथ मे यह करते रहे-:
1 मिट्टी के बर्तन में 300 मिलीलीटर पानी भर लें। इसमें 12 ग्राम अजवायन, 12 ग्राम मोटी सौंफ, दो बादाम की गिरी रात को भिगो दें।
सुबह पानी के साथ छानकर इनको पत्थर के सिलबट्टे पर पीसें। इनको पीसने में इन्हें भिगोकर छाना हुआ पानी ही काम में लें।
फिर 21 पत्ते तुलसी के तोड़कर, धोकर इस पिसे पेस्ट में डालकर फिर से बारीक पीसें और छानकर रखे पानी में स्वाद के अनुसार मिश्री पीसकर घोलें।
अन्त में पेस्ट मिलाकर कपड़े से छान लें और पीयें। यह सारा काम पीसकर, घोल बनाकर पीना, सब सूर्य उगने से पहले करें। सूर्य उगने के बाद बनाकर पीने से लाभ नहीं होगा।
इसे करीब 21 दिनों तक सेवन करें। जब तक लाभ न हो, आगे भी पीते रहें। इससे हर प्रकार के कैंसर से लाभ होता है।
★★★
अनार दाना और इमली को रोजाना सेवन करते रहने से कैंसर के रोगी को आराम मिलता है और उसकी उम्र 10 वर्ष के लिए और बढ़ सकती है।
★★
अंगूर का सेवन करें, 1 दिन में दो किलो से ज्यादा अंगूर न खायें। कुछ दिनों के बाद छाछ पी सकते हैं और कोई चीज खाने को न दें। इससे लाभ धीरे-धीरे महीनों में होगा। कभी-कभी अंगूर का रस लेने से पेट दर्द, मलद्वार पर जलन होती है। इससे न डरे। दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। दर्द होने के बाद इसे सेंक सकते हैं। इस प्रयोग से कैंसर की बीमारी में आराम मिलता है।
◆◆
दही के लगातार सेवन से कैंसर होने की संभावना नहीं रहती है।
★★★
गेहूं के नये पौधों का रस रोजाना सुबह-शाम पीने से कैंसर रोग ठीक हो जाता है।आधा कप गेहूं धोकर किसी बर्तन में दो कप ताजा पानी डालकर रख दें। 12 घंटे के बाद उस पानी को सुबह-शाम पीयें। लगातार 8-10 दिनों में ही रोग भागने लगेगा और 2-3 महीने के लगातार प्रयोग से कैंसर रोग से मरने वाला प्राणी रोग मुक्त हो जाएगा।
कैंसर भी शरीर की एक स्थिति मात्र है, जो यह बताती है कि अदभुत यंत्र में कोई खराबी है।
प्रकृति हमेशा शरीर में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। कुछ लोग कैंसर से पीड़ित होते है और कुछ को अन्य बीमारियां।
यह इसलिए कि सबके जीने का ढंग अलग-अलग होता है। एक महिला की छाती में कैंसर था वह सभी प्रकार की चिकित्सा कराकर निराश हो चुकी थी।
उसको सभी प्रकार के रसों का आहार दिया गया तो वह कुछ ही महीनों में ठीक हो गई। इसी प्रकार एक ल्यूकीमिया के रोगी को पानी को एनिमा देकर पेट साफ किया गया और बाद में एनिमा से ही आंतों में गेहूं के पौधे का रस पहुंचाया गया और वह रोगी भी ठीक हो गया।
◆◆◆
लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होता है। खाना-खाने के बाद 2 लहसुन को चबाकर 1 गिलास पानी के साथ पीयें। पेट कैंसर होने पर लहसुन को पानी में पीसकर कुछ दिनों तक पीयें। इससे लाभ होगा।
◆◆
तांबे के लोटे में रात को पानी भरकर रख दें। सुबह इसी पानी को पीयें। इससे कैंसर में लाभ होगा।
◆◆
★दवा आप online भी मंगवा सकते है■
Whats करे
941-78-622-63

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण