Sunday, 25 March 2018

सिद्ध कायाकल्प योग- निम्न रक्तचाप के लिए


      सिद्ध कायाकल्प योग- निम्न रक्तचाप के लिए
        
गिलोय चुर्ण          50 ग्राम
आवला चुर्ण         50 ग्राम
सोंठ चुर्ण              20 ग्राम
तुलसी चुर्ण           20 ग्राम
दालचीनी पाउडर 20 ग्राम
सेंधा नमक            10 ग्राम
भुनी हुई हींग          10 ग्राम
बड़ी इलायची         5 ग्राम
काली मिर्च चुर्ण      5 ग्राम
लौंग  चुर्ण               5 ग्राम
तरबूज बीज चुर्ण     5 ग्राम
सभी  चुर्ण  को बना घर रखे ।
सेवन विधि -
किसी को भी निम्न रक्तचाप हो तो 1 चम्मच गर्म दूध से दे और 1 घंटा पूर्ण करने दे।

★★★
अगर निम्न रक्तचाप हमेशा रहता हो तो
रात को सोने से पहले एक गिलास गरम पानी में आधा चम्मच मेथी दाना भिगो कर रखे, सुबह उठ कर पानी से 1 चम्मच दवा ले और मेथी के दाने चबा कर खाये। इस नुस्खे से उच्च रक्तचाप जल्दी कम होगा।
यह उपयोग 5 दिन करे।

★★★
लो ब्लड प्रेशर का इलाज के घरेलू नुस्खे
Low blood pressure का सब से आसान और बढ़िया उपाय है नमक वाला पानी। दिन में दो से तीन बार नमक का पानी पिने से आराम मिलता है।

★★
निम्न रक्तचाप की समस्या में गुड़ का सेवन करना उतम है। 1 गिलास पानी में 20 से 25 ग्राम गुड़ थोड़ा सा निम्बू का रास और थोड़ा सा नमक मिला कर पिये। इस gharelu upay को दिन में 2 से 3 बार करने पर सामान्य हो जायेगा।

★★
अनार के रस में थोड़ा नमक डाल कर पिने से जल्दी आराम मिलता है। इसके इलावा गन्ने का रस, अनानास का रस और संतरे का रस भी निम्न रक्तचाप ठीक करने में फायदा करते है।

★★
एक गिलास देसी गाय के दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिला कर पिने से ठीक हो जाता है।

★★
एक ग्लास पानी में, 10 तुलसी के पत्ते, 4 काली मिर्च और 2 लोंग डालकर अच्छी तरह उबाल लीजिए।
एक मिट्टी का बर्तन ले और उसमे किशमिश को रातभर भिगोने के लिए रख दे। सुबह भीगी हुई किशमिश को चबाकर खाए।

■■■
              निम्न रक्तचाप हेतु आहार
दिन भर के दौरान थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कुछ खाने से रक्तचाप में एकाएक होने वाली गिरावट को रोकने में मदद मिलती है, जिस गिरावट का अनुभव किसी भी व्यक्ति को भोजन के बाद होता है।

●●
निम्न रक्तचाप की समस्या के उपचार के लिए गाजर और चुकंदर अत्यंत प्रभावी होते हैं।

●●
किशमिश निम्न रक्तचाप की समस्या का बढ़िया और प्रभावी घरेलू उपचार है। एक कटोरे में कुछ काले रंग की किशमिश पानी में डालकर रात भर के लिए रखें और सुबह उठते ही उन्हें खा लें। इन्हें धीरे-धीरे चबाएँ और निश्चित रहे कि आप पानी भी पी लें।

●●
रात भर कुछ बादाम गलाकर रखें। सुबह उन्हें छीलें और पीसकर एक समान पेस्ट बना लें। एक छोटा चम्मच भरकर ये पेस्ट दूध में मिलाएँ और इसे अपने नाश्ते के साथ लें।
●●
कॉफ़ी में कैफीन होता है जो रक्तचाप को बढ़ाता है। इसलिए ब्लैक कॉफ़ी के एक या दो कप पीने से वास्तव में आपको अच्छा महसूस होता है और यह आपके रक्तचाप को बढ़ाने में सहायक होता है।
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Friday, 23 March 2018

सिद्ध नारी पीरियड कल्पचुर्ण



             *सिद्ध नारी पीरियड कल्पचुर्ण*
पीरियड को जल्दी लाने, बंद होने पर, कष्ट पूर्ण होने पर, शरीर कष्ट होने पर और अनिमियत पीरियड में कारगर और 100% लाभदायक।

नारी पीरियड कल्पचुर्ण
गिलोय चूर्ण 10 ग्राम 
आंवला चूर्ण 10 ग्राम 
छोटी हरड़ 10 ग्राम 
तुलसी पाचांग-10 ग्राम  
चरायता चूर्ण 10 ग्राम 
तिल काले 10 ग्राम
अलसी 10 ग्राम
अजमायण-10 ग्राम 
मलॅठी-10 ग्राम 
सौंठ-20 ग्राम 
काली मिर्च -10 ग्राम 
सभी चुर्ण को 50 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे।चुर्ण बना कर दिन में 3 या 4 बार गर्म  दूध से सेवन करे।
                   ★फायदे★
★इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है★
★ 3 दिन में पीरियड आ जाता है
★अगर पीरियड बंद हो गए हो 21 दिन दवा ले।
★पीरियड जल्दी आएगा।
★पीरियड में दर्द नही होगा।
★कमजोरी और सुस्ती नही पड़ेगी।
★अगर गर्भ ठहर गया है तो पुरियड बिन दर्द के आएगा।
★पीरियड दौरान गुसा नही आएगा
★खून की कमी ठीक होगी।

       ★अगर यह समान आप को न मिले तो ★
             ★ऑनलाइन मंगवा सकते हैं।★
         ★यह दवा  कभी खराब नही होती ।★
           ★ आप कभी ले सकते है★
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                       ★★★★★
              पीरियड्स जल्दी लाने के 
        लिए अयूर्वादिक उपाय क्या हैं ?
                      ★★★★
       ★गिलोय काढ़ा साथ जरूर ले★
                           
                    ★कैसे बनाए काढ़ा★
★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★छोटी हरड़ 4 पीस
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★शहद 5 चम्मच
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।
3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर 
1 ग्लास सुबह 
1 दुपहरी 
1 शाम को ले।
यह क्रिया 3 दिन लगातार करे।
पीरियड 3 दिन पका आ जाएगा
मासिक धर्म के रुक जाने का कारण
शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी – इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|
मासिक धर्म के रुक जाने की पहचान
गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|
                   
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Sunday, 18 March 2018

फेफड़ो की कमजोरी के लिए छोटा पर कारगर नुस्खा



         फेफड़ो की कमजोरी के लिए
         छोटा पर कारगर नुस्खा

लहसुन की एक गांठ को पीसकर 250 मिलीलीटर दूध में थोड़ा-सा पानी मिलाकर उबाल लें और फिर लहसुन को दूध से निकालकर चीनी के साथ सेवन करें। इसके सेवन से फेफड़ों की कमजोरी दूर होती है और फेफड़े साफ होते हैं।
★बलगम को यह नुस्खा जड़ से खत्म करता है ।

       ★दिन मे 1 बार उपयोग करे।
        ★ बच्चों को आधा दे।
        ★ 7 दिन उपयोग करे।
        ★ स्वास्थ्य लोग भी कभी उपयोग करें।
        ★ इसका कोई नुकसान (साइड इफेक्ट) नही है।

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Saturday, 17 March 2018

सिद्ध मसूरिका(चेचक) योग-चेचक रोग के लिए उत्तम योग


सिद्ध मसूरिका(चेचक) योग
चेचक रोग के लिए उत्तम योग



           ★चेचक (माता) की अयूर्वादिक दवा★
               ★यह दवा बहुत कारगर है★
          ★मात्र 3 खुराक में आराम आ जाता है★
           ★दवा ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं★
चेचक की अयूर्वादिक दवा

                 ★सिद्ध मसूरिका दवा★

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
नीम पंचाग 100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम

★सभी को चुर्ण बनाए
★ रोगी को 4 बार दिन मे  पानी से दवा दे
★रोगी को 3 दिन बंद कमरे में रखे।

★★
साथ मे नीचे लिखे उपचार जरूर करे यह उपचार बहुत कारगर हीते है ।
★★
पहला प्रयोगः चेचक में जंगल के कण्डे की राख लगाने से एवं उपवास करने से आराम मिलता है।
दूसरा प्रयोगः गूलर की जड़ का 5 से 20 मि.ली रस 2 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर खाने से बच्चों के खसरे में आराम मिलता है।

तीसरा प्रयोगः इमली के बीज एवं हल्दी का समान मात्रा में चूर्ण लेकर 3 से 4 रत्तीभार (करीब 500 मिलिग्राम) एक बार रोज ठण्डे पानी के साथ देने से बच्चों को चेचक नहीं निकलता।

चौथा प्रयोगः करेले के पत्तों का रस व हल्दी मिलाकर पीने से चेचक के रोग में फायदा होता है।
विभिन्न औषधियों से उपचार-
★★★

नीम :
नीम की छाल को पानी में पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से आराम आता है।
नीम के तेल में आक के पत्तों का रस मिलाकर चेचक(Badi Mataबड़ी माता) के दानों पर लगाने से लाभ होता है।

चेचक के रोगी का बिस्तर बिल्कुल साफ-सुथरा रखें और उसके बिस्तर पर नीम की पत्तियां रख दें। फिर नीम के मुलायम पत्तों को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इस 1-1 गोली को सुबह और शाम दूध के साथ रोगी को खिलायें। गर्मी का मौसम हो तो नीम की टहनी से हवा करने से चेचक के दानों में मौजूद जीवाणु जल्द ही समाप्त हो जाते हैं। तवे पर मुनक्का को भूनकर रोगी को खिलाना चाहिए।

नीम के 7 से 8 मुलायम पत्तों (कोपले) और 7 कालीमिर्च को 1 महीने तक लगातार सुबह खाली पेट खाने से चेचक जैसा भयंकर रोग 1 साल तक नहीं होता। 15 दिन तक यह खाने से 6 महीने तक चेचक (माता Shitala Mata) नहीं निकलती। जिन दिनों चेचक का रोग फैल रहा हो उन दिनों में जो लोग नीम के पत्तों का सेवन करते हैं उन्हें चेचक (माता) जैसा भयंकर रोग नहीं होता है।

नीम की लाल रंग के 7 कोमल पत्तियां की और 7 कालीमिर्च को एक महीने तक नियमित रूप से खाने से चेचक में निश्चित ही लाभ होता है।

नीम के बीज, बहेड़े और हल्दी को बराबर मात्रा में लेकर ठंड़े पानी में पीसकर छान लें। इसे कुछ दिनों तक पीते रहने से चेचक के दानों में शान्ति मिलती है।

नीम के पेड़ की 3 ग्राम कोपलों को 15 दिन तक लगातार खाने से 6 महीने तक चेचक(शीतला)नहीं निकलती है।
नीम की कोमल पत्तियों को पीसकर रात को सोते समय चेहरे पर लेप करें और सुबह ठंड़े पानी से चेहरे को धो लें। यह प्रयोग लगातार 50 दिन करने से चेचक के दाग मिट जाते हैं। चेचक के दानों पर कभी भी मोटा लेप नहीं करना चाहिए।

नीम के बीजों की 5-10 गिरी को भी पानी में पीसकर लेप करने से चेचक की जलन शान्त हो जाती है।

यदि चेचक के रोगी को अधिक प्यास लगती हो तो नीम की छाल को जलाकर उसके अंगारों को पानी में डालकर बुझा लें।

इस पानी को छानकर रोगी को पिलाने से प्यास शान्त हो जाती है। अगर प्यास इससे भी शान्त न हो 1 किलो पानी में 10 ग्राम कोमल पत्तियों को उबालकर जब आधा पानी शेष रह जायें, तब इसे छानकर रोगी को पिला दें। इस पानी को पीने से प्यास के साथ-साथ चेचक के दाने भी सूख जाते हैं।

जब चेचक के दाने ठीक हो जाये तो नीम के पत्तों के काढ़े से नहाना चाहिए।

10 ग्राम नीम के मिश्रण और 5 कालीमिर्च का चूर्ण रोजाना सुबह कुछ दिन तक सेवन करने से चेचक के दानों में लाभ मिलता है।

★★
जीरा
100 ग्राम कच्चा धनिया और 50 ग्राम जीरा को 12 घंटों तक पानी में भीगने के लिये रख दें। फिर दोनों को पानी में अच्छी तरह से मिला लें और इस पानी को छानकर बोतल में भर लें। चेचक के रोग में बच्चे को बार-बार प्यास लगने पर यही पानी पिलाने से लाभ होता है।

■■
शहद
चेचक के रोग में रोगी को शहद चटाने से लाभ होता है।

★★
कालीमिर्च :
5 नीम की कोंपल (नई पत्तियां) 2 कालीमिर्च और थोड़ी सी मिश्री लेकर सुबह-सुबह चबाने से या पीसकर पानी के साथ खाने से चेचक(Shitala Mata) के रोग में लाभ होता है।

★★
चमेली : चेचक के रोग में चमेली के 10-15 फूलों को पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।
◆◆
मुनक्का: चेचक के रोगी को दिन में कई बार 2-2 मुनक्का या किशमिश खिलाने से लाभ होता है।
★★
इमली के बीज और हल्दी का चूर्ण ठंडे पानी के साथ पीने से चेचक(Badi Mataबड़ी माता) का रोग नहीं होता है।
★★
लताकरंज
लताकरंज के बीज, तिल और सरसों को बराबर मात्रा में मिलाकर लेप बना लेते हैं। इस लेप को चेचक के दानों पर लगाने से आराम मिलता है।
★★
अंगूर
अंगूर को गर्म पानी में धोकर खाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।
★★
संतरे
संतरे के छिलके को पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।
संतरे के छिलकों को सुखाकर पीस लें। इसमें 4 चम्मच की मात्रा में गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाकर रोजाना चेहरे पर मलें। इससे चेचक के दाग हल्के हो जाते हैं।
★★
चना
चेचक से पीड़ित रोगी को भीगे हुए चनों पर अपनी हथेलियां रखनी चाहिए क्योंकि भीगा हुआ चना चेचक(शीतला) के कीटाणुओं को सोख लेता है।
★★
हल्दी
10 ग्राम हल्दी, 5 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम मिश्री का बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। फिर तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर उसके साथ इस चूर्ण को रोजाना सुबह-सुबह खाने से चेचक के रोग मे लाभ होता है।
हल्दी को पानी में मिलाकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।
★★
तुलसी

नीम की कोंपले (नीम की नई पत्तियां) और तुलसी के पत्तों का चूर्ण बनाकर शहद या मिश्री के साथ मिलाकर सुबह-सुबह चेचक से ग्रस्त रोगी को देने से लाभ होता है।

तुलसी के पत्तों के साथ अजवायन को पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से चेचक(Badi Mataबड़ी माता) का बुखार कम हो जाता है।

जब चेचक (माता) फैल रही हो तो उस समय प्रतिदिन सुबह तुलसी के पत्तों का रस पीने से चेचक के संक्रमण से सुरक्षा बनी रहती है।

सुबह के समय रोगी को तुलसी के पत्तों का आधा चम्मच रस पिलाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।

बुखार को कम करने के लिये तुलसी के बीज और धुली हुई अजवाइन को पीसकर रोगी को पानी के साथ दें।
★★

नारियल :
लगभग आधा ग्राम केसर को नारियल के पानी के साथ रोजाना 2 बार रोगी को पिलाने से चेचक(शीतला) के दाने जल्दी ही और आसानी से बाहर आ जाते हैं।

नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर लगाने से चेचक के दाग मिट जाते हैं।

★★★

भोजन और परहेज :

छोटे बच्चों को चेचक(chicken pox)होने पर दूध, मूंग की दाल, रोटी और हरी सब्जियां तथा मौसमी फल खिलाने चाहिए या उनका जूस पिलाना चाहिए।

चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी में छोंका नहीं लगाना चाहिए।

रोगी को तली हुई चीजें, मिर्चमसाले वाला भोजन और ज्यादा ठंड़ी या ज्यादा गर्म चीजें नहीं देनी चाहिए।

दरवाजे पर नीम के पत्तों की टहनी लटका देनी चाहिए।

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Thursday, 15 March 2018

★ओम मेडिटेशन के फायदे★

सिद्ध अयूर्वादिक 

                ★ओम मेडिटेशन के फायदे★

1 घड़ी                   =24 मिनट
आधी घड़ी             =12 मिनट
आधी से पुनः आध  =6 मिनट

6 मिनट  किया गया ॐ उच्चारण आप को अनेक फायदे दे सकता।

          ★केवल अपने के लिए 6 मिनट निकाले।★
            ★ आप की आप पर कृपा होगी★

ॐ हमारे जीवन को स्वस्थ बनाने का सबसे उत्तम मार्ग है।
नियमित ओम मेडिटेशन करने से तनाव से पूरी तरह मुक्ति मिलती है और दिमाग शांत रहता है।
★★

ओम से चेहरे पर कांति और
आंखों में अनोखी चमक आती है।
★★

थकान के बाद ॐ का मनन आपको
नई एनर्जी से भर देता है।
★★

ओम से पाचन तंत्र मजबूत होता है।
ओम की गूंज आपको स्वयं को
नियंत्रित करने में सक्षम बनाती है।
★★

ॐ के उच्चारण से कंपन पैदा होता है
जो रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करता है।
★★

ॐ की शक्ति आपके फेफड़ों और
श्वसन तंत्र को सुदृढ़ बनाती है।
★★

ॐ की शक्ति आपको दुनिया का
सामना करने की शक्ति देती है।
★★

ॐ मंत्र आपको सांसरिकता से
अलग करके आपको स्वयं से जोड़ता है।
★★
ओम का उच्‍चारण वह सीढ़ी है
 जो आपको स्‍वस्‍थ रख, समाधि और आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाता है।
★★

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Tuesday, 13 March 2018

★ सिद्ध पाचन चूर्ण ★


सिद्ध
              ★ सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण★
                 *पाचन तंत्र की मजबूती के लिएे*


          *सिद्ध संतों की एक खोज*

         *गिलोय रस में तैयार होता है*
         *सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण चुर्ण*

मानसिक तनाव, चिंता, भय, अवसाद, असंतुलित खान पान आदि आपके पाचन को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं|

गिलोय में digestive और stress दूर करने वाले गुण होते हैं जो की बदहजमी, कब्ज, गैस, मरोड़ आदि समस्याओं को दूर करता है और आपके पाचन को बेहतर बनाता है

      *यह गैस और कब्ज के लिये सर्वश्रेष्ठ दवा है।*
         *यह पेट के समस्त रोगों में लाभदायक है।*


   *सिद्ध  पाचन चूर्ण एक बेहतरीन दस्तावर औषधि है* 

    सभी रोग पेट के साफ न होने के कारण ही होते है
पेट साफ नही होगा बीमारी शरीर को जकड़ लेती हैं।

आयुर्वेद में कहा भी गया है कि स्वस्थ रहने का रास्ता पेट से होकर जाता है ।

सिद्ध पाचक चूर्ण गैस्ट्रिक एवं कब्ज की समस्या में रामबाण औषधी साबित होती है ।

आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में गैस्ट्रिक और कब्ज एक आम समस्या हो गई है जो हर घर में देखने को मिलती है ।
सिद्ध पाचन चुर्ण आप को औऱ आपके  परिवार को रोग से मुक्ति दिलवा सकता है।

रोज या दूसरे दिन रात आधा चम्मच जरूर ले। आप कभी बीमार नही होंगे।

गैस बन गई हैं तो एक चुटकी मात्र चूसे 1 मिनट में जलन गैस समाप्त हो जाती है।
       सिद्ध पाचन चूर्ण बनाने की विधि
     सिद्ध  पाचन चूर्ण बनाने के लिए हमें –

त्रिफला                ~ 20 ग्राम
बेल चुर्ण               ~  20 ग्राम
ब्रह्मी बूटी              ~ 20 ग्राम
संखपुष्पी               ~10 ग्राम
हिंग                      ~  10 ग्राम
कालीमिर्च             ~  10 ग्राम
अजवायन             ~  10 ग्राम
दालचीनी             ~ 10 ग्राम
छोटी हरेड             ~  10 ग्राम
शुद्ध सज्जीखार     ~  10 ग्राम
सैंधा नमक            ~   10 ग्राम
सौंफ भुनी             ~   10 ग्राम
पुदीना सत             ~    2 ग्राम
निम्बू सत               ~    2 ग्राम 
मीठा सोडा             ~100 ग्राम  मिलाए

100 ग्राम गिलोय रस में भावना जरूर दे।
तभी यह पेट की हर इंफेसन को दूर करेगी।

अगर निम्बू औऱ पुदीना सत न मिले तो 20 ग्राम निम्बू रस में सभी चुर्ण को मिलाकर सायं में सुखाए।

इनको अच्छी तरह कूट – पीसकर और कपडछान कर के साफ़ एवं (Air Tight ) मजबूत डक्कन वाली शीशी में भर लेवे ,

  ★ यह गैस्ट्रिक और कब्ज की रामबाण औषधि है ★

मात्रा और सेवन विधि
पानी के साथ सेवन करे
सिद्ध पाचन चूर्ण को आधा चम्मच की मात्रा में रोज सुबह शाम सेवन करे ।

बच्चों को कब्ज की या पेट दर्द की शकायत में चमच्च का 1/4 भाग गर्म पानी से दे।

1 से 6 महीने के बच्चों को एक चुटकी चटाएं।
लाभ
यह चूर्ण वायु तथा वात के सभी प्रकार के रोगों को दूर करता है ।

इसके सेवन से पेट की अग्नि ठीक होती है ।

अपान वायु बहार निकल जाती है ,
कब्ज को भी जड़ से दूर करने में सक्षम है ।

यह चूर्ण बच्चो में भी लाभ कारी है ।

★★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार

आहार में रेशेदार फल और सब्जियाँ जैसे सेब, संतरे, ब्रोकोली, बेरियाँ, नाशपाती, मटर, अंजीर, गाजर और फलियाँ आदि शामिल करें।

साबुत अनाज जैसे भूरे चावल, ज्वार, बाजरा, मेवे, गिरियाँ, और मछली, दालें, मसूर दाल, चावल और सोया के उत्पादों का प्रयोग बढ़ाएँ।

पानी मिला फलों का रस, प्राकृतिक पदार्थों से उत्पन्न सब्जियाँ, और औषधीय चाय पियें।

बीज सहित अमरुद और बेल का फल आँतों को व्यवस्थित करता है, और आहार में रेशे की मात्रा बढ़ाता है, ताकि कब्ज से राहत मिल सके। फल जैसे कि केले, आलूबुखारे, अंगूर और पपीता भी इसमें सहायक होते हैं।

★★★
इनसे परहेज करे

अधिक शक्कर उत्सर्जित करने वाले आहार जैसे रिफाइंड अनाज, शक्कर की गोलियाँ, केक और बिस्कुट आदि से परहेज।

रेड मीट, डेरी आहार, और अंडे।

कॉफ़ी, चाय और शक्करयुक्त कार्बन वाले पेय।
Online मंगवा सकते हैं।

सिद्ध अयूर्वादिक
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Saturday, 10 March 2018

◆सिद्ध कब्जहरण गोली,◆

सिद्ध अयूर्वादिक
              ◆सिद्ध कब्जहरण गोली,◆
हरड़            10 ग्राम,
छोटी पीपल  10 ग्राम
अजवाइन    10 ग्राम
बेल चुर्ण      10 ग्राम
सौंफ           10 ग्राम
को लेकर पीसकर थूहर के दूध में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर प्रतिदिन सुबह 1 या 2 गोली पानी के साथ  खाने से पेट का फूलना और कब्ज दूर होती है।
                   ■हम आप की सेवा में है■
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Thursday, 8 March 2018

★टी. बी. की दवा★ ● क्षय रोग चुर्ण●

सिद्ध अयूर्वादिक
                ★टी. बी. की दवा★
                  ● क्षय रोग चुर्ण●               ★टी.बी के तीन प्रकार हैं★
  फुफ्सीय टी.बी, पेट का टी.बी और हड्डी का टी.बी.
★किसी भी प्रकार की क्षय रोग में रामबाण दवा★

                  ★Online मंगवाए★

काकड़सिंगी 10 ग्राम
करेला चुर्ण 10 ग्राम
अर्जुन की छाल 10 ग्राम
कौंच के बीज 10 ग्राम
गुलाब के फूलों 10 ग्राम
सोंठ 10 ग्राम
असगंध 10 ग्राम
मुलेठी 5 ग्राम
बहेड़ा 5 ग्राम
पिपली 5 ग्राम
पीपल 5 ग्राम
पीपलामूल 5 ग्राम
धनिया 4 ग्राम
अजमोद 5 ग्राम
अनारदाना 50 ग्राम
मिसरी 25 ग्राम
काली मिर्च 5 ग्राम
बंशलोचन 2 ग्राम
दालचीनी 2 ग्राम
लोंग चुर्ण 2 ग्राम
तेजपात  8-10 पत्ते।
सबको पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन शहद या बकरी/गाय के दूध से सेवन करें।
***
नोट
साथ में चयवनप्राश 10 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें।
★★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
वे आहार जो शरीर को टी.बी. संक्रमण से मुकाबले के लायक बनाते हैं उनमें दूध, फल और सब्जियाँ आते हैं।
स्ट्रॉबेरी पोटैशियम, विटामिन और खनिजों से भरीपूरी होती है, जिनसे प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और रोग से लड़ने की शक्ति मिलती है।
सीताफल टीबी की घरेलु चिकित्सा में प्रयुक्त होता है, जिसमें गूदे को पानी के साथ उबालकर बने आहार को प्रतिदिन लिया जाता है।
टीबी के इलाज में अन्नानास अत्यंत उपयोगी है। दिन में एक बार इसका रस पीने से बलगम बाहर निकल जाता है और ठीक होने में सहायता होती है।
अन्य फल जैसे कि ब्लूबेरी और चेरी तथा हरी पत्तेदार सब्जियाँ के साथ साबुत अनाज, दूध, लीन मीट और पोल्ट्री उत्पाद
संतरे के रस में विटामिन C होता है जो कि एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है और शरीर को ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है. अन्य लाभकारी रसों में गाजर, टमाटर, गूसबेरी, और अन्नानास आते हैं।
प्रतिदिन सुबह इंडियन गूसबेरी और शहद लेने से ट्यूबरक्लोसिस ठीक करने में सहायता होती है।
हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें, और स्टार्च युक्त सब्जियाँ जिनमें करेला, सहजन, पालक, और ब्रोकोली हैं, शरीर को ट्यूबरक्लोसिस से लड़ने में सहायता करती हैं। ट्यूबरक्लोसिस की चिकित्सा में लौकी सबसे बढ़िया सब्जी है।
विटामिन-B और आयरन से समृद्ध आहार लें, जैसे कि साबुत अनाज (यदि कोई एलर्जी ना हो), गहरे हरे पत्तों वाली (जैसे कि पालक और केल), और समुद्र सब्जियाँ।
प्रोटीन के लिए रेड मीट कम और लीन मीट अधिक लें, ठन्डे पानी की मछली, टोफू (सोया, यदि एलर्जी ना हो), या फलियाँ लें।
★★★
इनसे परहेज करें
कैन में बंद आहार, पाई, पुडिंग, सॉस, कैफीन युक्त पेय, अचार, मसाले और प्रोसेस्ड आहार सख्ती अपनाते हुए बिलकूल बंद करें।
रिफाइंड आहार, जैसे कि सफ़ेद ब्रेड, पास्ता, और शक्कर से परहेज।
कॉफ़ी और अन्य उत्तेजक, शराब और तम्बाकू से परहेज।
ट्रांस-फैटी एसिड को बंद या कम करें, जो कि व्यावसायिक बेकरी उत्पाद जैसे की कूकीज, क्रैकर्स, केक्स, फ्रेंच फ्राइज, ओइनों रिंग्स, डोनट आदि में होता है।
स्वयं को धूम्रपान और मदिरापान से दूर रखें।

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Tuesday, 6 March 2018

सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण- जिद्दी कफ को करे अलविदा




          
  टॉसिल रोग में औऱ साइनस रोग  में रामबाण है कफ़ चुर्ण फेफड़ों की इन्फ़ेक्सन में 100℅ असरदार हैं।
जिदी इंफेक्शन में 3 महीने का कोर्स करें।

 गले की सूजन और खराश के उत्तम है सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण। जिदी कफ़ को कहे अलविदा।
                           ★★★
             3 ही खुराक छींकना, गला खराब होना, गले मे रेसा आना, रेसा कारण सांस का बंद होना,
               नाक जाम होना, खाँसना बंद
                            ★★★
     ★ कफ़ के कारण सिर दर्द रहता है तो यह ले★
   ★पूरे परिवार के लिए सदा यह चूर्ण अपने घर रखे★
            ◆साइनस में रामबाण है कफ़ चुर्ण◆
★ शरीर मे कही भी रेशा हो यह चुर्ण रामबाण है★
        ■ खुद बनाए या online मंगवाए ■
                ★सिद्ध कफ चुर्ण★
★हींग              100 ग्राम (हींग भून लें)
★अजवाइन    100 ग्राम
★अड़ूसा        100 ग्राम
★गिलोय चूर्ण    50 ग्राम
★बंसलोचन      50 ग्राम
★पिपली          50 ग्राम
★दालचीनी       50 ग्राम
★आंवला चूर्ण।  50 ग्राम
★छोटी हरड़      50 ग्राम
★तुलसी पाचांग-50 ग्राम 
★मलॅठी-            50 ग्राम
★चरायता चूर्ण    50 ग्राम
★काला नमक      50 ग्राम( नमक को भून लें)
★सौंठ-                20 ग्राम
★काली मिर्च -      10 ग्राम
400 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
साया में सुखाए।
सभी को चुर्ण बना कर 1-1 चमच्च दिन में 3 बार गर्म पानी से लेते रहे।

●●
बच्चों को आधा चमच्च दे।
3 दिन पूर्ण आराम करें।
जिदी कफ़ में 21 से 90 दिन तक सेवन करे।
      ●इन रोग में जबरदस्त फायदा करेगी●
★गले की खराश ,ले में खराश खिचखिच रहना
★सर्दी जुकाम
★वायरल बुखार
★लगातार नाक बहना
★छाती (सीने) और गले में इंफेसन
★सांस लेने में तकलीफ होना,
★जिदी कफ़ रेसा का बने रहना
के लिए यह दवा रामबाण है।
■■■
बलगम जमने के कारण
ज्यादा धूम्रपान करना
वायरल इन्फेक्शन होना
साइनस का रोग
सर्दी जुखाम और फ्लू
■■■
छाती में कफ के लक्षण
सांस लेने और खाँसने पर घरघराहट की आवाज आना
गले में खराश रहना
बलगम वाली खांसी होना
सीने में जकड़न और दर्द महसूस होना
लगातार छीकें आना और सांस लेने में तकलीफ होना
■■■
कफ को दूर करने के आसान उपाय
पानी ज्यादा पिए, शरीर से बलगम बाहर निकालने के लिए दिन भर में हर घंटे पानी पिए।
सीने, गले और नाक से बलगम तोड़ने के लिए भाप ले। ये बलगम खत्म करने का तरीका काफी आसान और फायदेमंद है।
Gale mein balgam ka ilaj, एक गिलास गरम पानी में 1 चम्मच नमक मिला कर इससे गरारे करे। दिन में 2 से 3 बार ये उपाय करने पर नाक और गले में जमा बलगम बाहर निकलने लगती है।
बलगम बनने से रोकने के लिए डेयरी प्रोडक्टस का सेवन ना करे जैसे की चीज़, दूध, दही और आइसक्रीम। इसके इलावा ज्यादा तला हुआ खाना भी ना खाएं।
धूम्रपान ना करे, धुँआ शरीर में balgham को बढ़ाता है और शरीर का जल्दी ठीक होने की क्षमता को कम करता है।
मसालेदार खाना नाक की बलगम तोड़ता है और इसे आसानी से बहने देता है।
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Monday, 5 March 2018

कान दर्द की दवा

सिद्ध अयूर्वादिक

                  कान दर्द की दवा



मेथी के दाने    5 ग्राम
लहसुन कली    5 पीस
नीम पत्ती          5 पीस
प्याज               2 ग्राम
अजवाइन         2 ग्राम
अदरक            2 ग्राम

सभी को

200 ग्राम  जैतून तेल में डाल कर गरम करे और ठंडा होने के बाद इसे छान कर कान में डालने से दर्द से तुरंत आराम मिलता है।

दिन में 3 से 5 बार कान डालते रहे।

★★★

यह भी कर सकते है

       कान में दर्द का आयुर्वेदिक उपचार

1. चाहे कितना भी कान दर्द हो केले के तने का रस निकल कर सोने से पहले रात को कान में डाले। इस उपाय को करने से सुबह तक कान में होने वाले दर्द से राहत मिल जाएगी। कान से जुड़े दूसरे रोगों के इलाज में भी ये उपाय काफ़ी कारगर है।

2. घी में मुलेठी को हल्का गरम करे और कान के आस पास इसका लेप लगाये। इस नुस्खे से दर्द में आराम मिलता है।

3. अजवाइन का तेल सरसों के तेल में मिलाकर गुनगुना करे और कान में डाले। अजवाइन तेल सरसों के तेल का तीसरा भाग होना चाहिए।


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◆साइनस की दवा◆

सिद्ध अयूर्वादिक
                ◆साइनस की दवा◆


गिलोय चुर्ण    100 ग्राम
त्रिफला चुर्ण    100 ग्राम
चरायता           50 ग्राम
हल्दी                50 ग्राम
दालचीनी          50 ग्राम
जीरा                 50 ग्राम
मेथी भुनी          50 ग्राम
सोंठ                  50 ग्राम
तुसली पंचाग      50 ग्राम
सभी को चुर्ण मिला ले।
सेवन विधि - दिन में 3 बार गर्म पानी से 1 -1 चम्मच लेते रहे।
41 दिन का कोर्स करे।
★★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
संक्रमण के दौरान सीमित मात्रा में खाएँ, आहार में साबुत अनाज, फलियाँ, दालें, हलकी पकी सब्जियाँ, सूप, और शीतलन की प्रक्रिया से बने तेल (जैतून का तेल)
शिमला मिर्च, लहसुन, प्याज़, और हॉर्सरैडिश अपने सूप और आहार में शामिल करें, ये अतिरिक्त म्यूकस को पतला करके निकलने में सहायक होते हैं।
अच्छी तरह साफ पानी अधिक मात्रा में पियें।
◆◆
इनसे परहेज करें
म्यूकस बनाने वाले आहार जैसे कि मैदे की चीजें, अंडे, चॉकलेट्स, तले और प्रोसेस्ड आहार, शक्कर और डेरी उत्पाद, कैफीन, और शराब
■■
साइनसाइटिस और साइनस संक्रमण के प्रकार
साइनसाइटिस को कई प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है, जिसमें संक्रमण रहने की अवधि (तीव्र, कम तीव्र या लंबे समय से), सूजन (संक्रामक या असंक्रामक) आदि शामिल हैं -
1) तीव्र साइनस संक्रमण (Acute sinus infection; कम समय तक रहने वाला) - आम तौर पर शरीर में इसका संक्रमण 30 दिन से कम समय तक ही रह पाता है।
2) कम तीव्र साइनस संक्रमण (Sub acute sinus infection) - इसका संक्रमण एक महीने से ज्यादा समय तक स्थिर रह सकता है मगर 3 महीने से ज्यादा नहीं हो पाता।
3) क्रॉनिक साइनस संक्रमण (Chronic sinus infection; लंबे समय तक रहने वाला) - यह शरीर में 3 महीने से भी ज्यादा समय तक स्थिर रह सकता है। क्रॉनिक साइनसाइटिस आगे उप-वर्गीकृत भी हो सकता है, जैसे
क्रॉनिक साइनसाइटिस नाक में कणों (polyps) के साथ या उनके बिना
एलर्जिक फंगल साइनसाइटिस
4) रीकरंट साइनसाइटिस (Recurrent Sinusitis; बार-बार होने वाला) यह तब होता है जब किसी व्यक्ति पर प्रतिवर्ष कई बार संक्रमण का प्रभाव होता है।
संक्रमित साइनसाइटिस आम तौर पर सीधे वायरस संक्रमण से होता है। अक्सर बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण साइनस संक्रमण या फंगल साइनस संक्रमण भी हो सकता है लेकिन ये बहुत ही कम हो पाता है। कम तीव्र साइनस संक्रमण (Sub acute sinus infection) और क्रॉनिक साइनस संक्रमण (chronic infection) ये दोनों तीव्र साइनस संक्रमण (acute sinus infection) के अधूरे इलाज का परिणाम होते हैं।
असंक्रामक साइनसाइटिस जलन और एलर्जी के कारण होता है, जो तीव्र, कम तीव्र औऱ क्रॉनिक साइनस संक्रमण को सामान्य साइनस संक्रमण के रूप में अनुसरण करता है।
★★★

साइनस शब्द का हिन्दी अर्थ विवर या कोटर होता है। ये हडि्डयों के अन्दर वाले खोल या गहृर होते हैं।
उदाहरण के लिये ऊर्ध्वहनु की हड्डी का विवर तथा नाक का वह विवर जो माथे के नीचे अन्दर की ओर पाया जाता है।

जब कभी इन विवरों में प्रदाह (जलन) होती है तो उसे ही साइनस की प्रदाह या विवरशोथ नाम से जाना जाता है। वैसे मनुष्य के शरीर में कई सारे विवर पाये जाते है जैसे- ललाटविवर (फरनटल साइनस), ऊर्ध्वहन्वास्थि विवर (मैकसीलैरी साइनस), गोल विवर (लैफनाओइड साइनस), झर्झर विवर (ऐथमोइड साइनस )। मनुष्य के शरीर में जब कभी इन सभी विवरों के कारण जलन की अवस्था प्रकट होती है तो उसे साइनस की प्रदाह कहते हैं। ये सारे विवर नाक तथा उसकी आस-पास की हडि्डयों में पाए जाते हैं। इस रोग से पीड़ित रोगी को सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना, माथे पर हल्का-हल्का दर्द रहना, बार-बार छींके आना तथा बुखार जैसी अवस्थाएं घेर लेती है। रोगी के विवर को दबाने पर दर्द हो सकता है।
कारण-
        इस प्रकार का रोग विवरशोथ में ठंड लग जाने के कारण, इन्फ्लुएंजा रोग के कारण या दांत में फोड़ा होने के कारण भी हो सकता है।

सिद्ध अयूर्वादिक
94178 62263

Sunday, 4 March 2018

सिद्ध लकवा नाशक कल्पचुर्ण

       
सिद्ध अयूर्वादिक

           अधरंग, पक्षाघात (लकवा)
               की अयूर्वादिक दवा
            सिद्ध लकवा नाशक कल्पचुर्ण

किसी भी प्रकार लकवा  मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, शरीर के एक तरफ का लकवा, सकम्प लकवा 
सभी के लिए यह दवा कारगर है।
कुटकी          250 ग्राम
त्रिफला        100 ग्राम
अजवाइन     100 ग्राम
गिलोय         100 ग्राम
चरायता        50 ग्राम
करेला चुर्ण    50 ग्राम
तुसली पंचाग 50 ग्राम
सोंठ भुनी      50 ग्राम
अकरकरा      50 ग्राम
राई               50 ग्राम
सर्पगंधा        50 ग्राम
शुद्ध गुग्गुल   50 ग्राम
दालचीनी     50 ग्राम
कलौंजी       50 ग्राम
तिल काले    50 ग्राम
कालीमिर्च    50 ग्राम
अजमोद     25 ग्राम
सौंफ           25 ग्राम
बबूना          25 ग्राम
बालछड़       25 ग्राम
नकछिनी      25 ग्राम 
जायफल       25 ग्राम
पिपली          25 ग्राम
काला नमक  50 ग्राम


सभी को चुर्ण बनाकर 300 ग्राम ताजा एलोवेरा रस 
में मिला ले। 5 दिन सायं में सुखाए।
आप तुरंत भी उपयोग कर सकते हैं।
इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है।
◆◆
सेवन विधि-1 चम्मच चुर्ण को 50 मिलीलीटर एलोवेरा
ताजा रस को 200 ग्राम मिलाकर सेवन करे।
दिन में 4 बार पहले 15 दिन ले।
15 दिन बाद दिन 3 बार ले।
फिर
15 दिन बाद 2 बार लेते रहे ।
90 दिन पूरा कोर्स करे।
पुराना लकवा भी ठीक होगा
★★
लकवा तेल बनाए

तिल का तेल।       50 ग्राम
निर्गुण्डी का तेल   50 ग्राम
अजवायन का तेल 50 ग्राम
बादाम का तेल       50 ग्राम
सरसों का तेल        50 ग्राम
विषगर्भ तेल           50 ग्राम
कलौजी तेल           50 ग्राम
10 ग्राम लहसुन,5 ग्राम बारीक पीसी हुई अदरक, 10 ग्राम काली उडद की दाल  50 ग्राम कपूर टिकी तेल में मिलाकर 5 मिनट तक गर्म करें। 

इस तेल से दिन में 5 बार मालिश करते रहे
■■■

      ★अयूर्वादिक लकवा दवा के फायदे★

लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
यह भूख ,नींद औऱ शरीरक कमजोरी को दूर करेगी।
★★★
रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
यह अयूर्वादिक दवा शून्यता को दूर कर अंग में हरक़त कायम करती।
★★★
                 ★लकवा रोगी ध्यान दे★

दवा के साथ आप इस बात पर ध्यान दे आप जल्दी बीमारी से छुटकारा पा लेंगे।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

★★★

      ★लकवा में इन चीजों से बचकर ही रहे★

इस रोग में नमक बहुत कम या बिलकुल न लेना अच्छा होता हैं. आरम्भ में भोजन में अन्न लेना भी ठीक नहीं. लकवा के रोगी को चाय, चीनी, तालीभुनि चीजें, नशे की चीजें, मसाले आदि उत्तेजक खाद्य से परहेज करना चाहिए. उसे ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

मानसिक उद्वेगों चिंता क्रोध तथा भय से बचना चाहिए. उसे न तो ठंडा पानी पीना चाहिए और न ठन्डे पानी से स्नान ही करना चाहिए. नया चावल, कुम्हड़ा, गूढ़, भैंस का दूध, उड़द की दाल, घुइया, भिंडी, रतालू, तरबूज, बासी ठंडी, चीजें, रात्रि जागरण, पाखाना-पेशाब रोकना, बर्फ का सेवन आदि इस रोग में वर्जित हैं.
★★★

★लकवा में दवा के साथ साथ उपवास करे ★
              डबल फायदा होगा

उपवास के दिनों में केवल जल अथवा कागजी नीबू का रस मिले जल के सिवा कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए. उन दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके 2-3 सेर या अधिक पानी रोज जरूर पीना चाहिए. जिस दिन उपवास किया जाए, उस दिन शाम को और फिर उपवास काल में रोज सबेरे या शाम को दिन में एक बार सेर डेढ़ सेर गुन-गुने पानी का एनिमा जरूर लेना चाहिए.

अगर एक दिन का उपवास किया जाए तो दूसरे दिन फल खाने के बाद, तीसरे दिन भोजन किया जा सकता हैं. अगर तीन दिन का उपवास किया जाए तो चौथे दिन केवल फल या तरकारियों का सूप पांचवे दिन फल और छठे दिन सुबह शाम को फल और दोपहर को थोड़ी रोटी और सब्जी लेनी चाहिए. फिर साधारण भोजन पर आ जाना चाहिए।

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Thursday, 1 March 2018

●अयूर्वादिक ही भारत की पहचान है●

सिद्ध अयूर्वादिक

          ●अयूर्वादिक ही भारत की पहचान है●

प्राचीनकाल से ही हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा आयुर्वेदिक उपचार को अपनाया गया है और आज इस चिकित्सा द्वारा बहुत से रोगों का सफल उपचार किया जा चुका है यही कारण है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा को पूरे विश्व में ख्याति प्रसिद्ध हो हुई है।


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