Saturday, 17 March 2018

सिद्ध मसूरिका(चेचक) योग-चेचक रोग के लिए उत्तम योग


सिद्ध मसूरिका(चेचक) योग
चेचक रोग के लिए उत्तम योग



           ★चेचक (माता) की अयूर्वादिक दवा★
               ★यह दवा बहुत कारगर है★
          ★मात्र 3 खुराक में आराम आ जाता है★
           ★दवा ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं★
चेचक की अयूर्वादिक दवा

                 ★सिद्ध मसूरिका दवा★

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
नीम पंचाग 100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम

★सभी को चुर्ण बनाए
★ रोगी को 4 बार दिन मे  पानी से दवा दे
★रोगी को 3 दिन बंद कमरे में रखे।

★★
साथ मे नीचे लिखे उपचार जरूर करे यह उपचार बहुत कारगर हीते है ।
★★
पहला प्रयोगः चेचक में जंगल के कण्डे की राख लगाने से एवं उपवास करने से आराम मिलता है।
दूसरा प्रयोगः गूलर की जड़ का 5 से 20 मि.ली रस 2 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर खाने से बच्चों के खसरे में आराम मिलता है।

तीसरा प्रयोगः इमली के बीज एवं हल्दी का समान मात्रा में चूर्ण लेकर 3 से 4 रत्तीभार (करीब 500 मिलिग्राम) एक बार रोज ठण्डे पानी के साथ देने से बच्चों को चेचक नहीं निकलता।

चौथा प्रयोगः करेले के पत्तों का रस व हल्दी मिलाकर पीने से चेचक के रोग में फायदा होता है।
विभिन्न औषधियों से उपचार-
★★★

नीम :
नीम की छाल को पानी में पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से आराम आता है।
नीम के तेल में आक के पत्तों का रस मिलाकर चेचक(Badi Mataबड़ी माता) के दानों पर लगाने से लाभ होता है।

चेचक के रोगी का बिस्तर बिल्कुल साफ-सुथरा रखें और उसके बिस्तर पर नीम की पत्तियां रख दें। फिर नीम के मुलायम पत्तों को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इस 1-1 गोली को सुबह और शाम दूध के साथ रोगी को खिलायें। गर्मी का मौसम हो तो नीम की टहनी से हवा करने से चेचक के दानों में मौजूद जीवाणु जल्द ही समाप्त हो जाते हैं। तवे पर मुनक्का को भूनकर रोगी को खिलाना चाहिए।

नीम के 7 से 8 मुलायम पत्तों (कोपले) और 7 कालीमिर्च को 1 महीने तक लगातार सुबह खाली पेट खाने से चेचक जैसा भयंकर रोग 1 साल तक नहीं होता। 15 दिन तक यह खाने से 6 महीने तक चेचक (माता Shitala Mata) नहीं निकलती। जिन दिनों चेचक का रोग फैल रहा हो उन दिनों में जो लोग नीम के पत्तों का सेवन करते हैं उन्हें चेचक (माता) जैसा भयंकर रोग नहीं होता है।

नीम की लाल रंग के 7 कोमल पत्तियां की और 7 कालीमिर्च को एक महीने तक नियमित रूप से खाने से चेचक में निश्चित ही लाभ होता है।

नीम के बीज, बहेड़े और हल्दी को बराबर मात्रा में लेकर ठंड़े पानी में पीसकर छान लें। इसे कुछ दिनों तक पीते रहने से चेचक के दानों में शान्ति मिलती है।

नीम के पेड़ की 3 ग्राम कोपलों को 15 दिन तक लगातार खाने से 6 महीने तक चेचक(शीतला)नहीं निकलती है।
नीम की कोमल पत्तियों को पीसकर रात को सोते समय चेहरे पर लेप करें और सुबह ठंड़े पानी से चेहरे को धो लें। यह प्रयोग लगातार 50 दिन करने से चेचक के दाग मिट जाते हैं। चेचक के दानों पर कभी भी मोटा लेप नहीं करना चाहिए।

नीम के बीजों की 5-10 गिरी को भी पानी में पीसकर लेप करने से चेचक की जलन शान्त हो जाती है।

यदि चेचक के रोगी को अधिक प्यास लगती हो तो नीम की छाल को जलाकर उसके अंगारों को पानी में डालकर बुझा लें।

इस पानी को छानकर रोगी को पिलाने से प्यास शान्त हो जाती है। अगर प्यास इससे भी शान्त न हो 1 किलो पानी में 10 ग्राम कोमल पत्तियों को उबालकर जब आधा पानी शेष रह जायें, तब इसे छानकर रोगी को पिला दें। इस पानी को पीने से प्यास के साथ-साथ चेचक के दाने भी सूख जाते हैं।

जब चेचक के दाने ठीक हो जाये तो नीम के पत्तों के काढ़े से नहाना चाहिए।

10 ग्राम नीम के मिश्रण और 5 कालीमिर्च का चूर्ण रोजाना सुबह कुछ दिन तक सेवन करने से चेचक के दानों में लाभ मिलता है।

★★
जीरा
100 ग्राम कच्चा धनिया और 50 ग्राम जीरा को 12 घंटों तक पानी में भीगने के लिये रख दें। फिर दोनों को पानी में अच्छी तरह से मिला लें और इस पानी को छानकर बोतल में भर लें। चेचक के रोग में बच्चे को बार-बार प्यास लगने पर यही पानी पिलाने से लाभ होता है।

■■
शहद
चेचक के रोग में रोगी को शहद चटाने से लाभ होता है।

★★
कालीमिर्च :
5 नीम की कोंपल (नई पत्तियां) 2 कालीमिर्च और थोड़ी सी मिश्री लेकर सुबह-सुबह चबाने से या पीसकर पानी के साथ खाने से चेचक(Shitala Mata) के रोग में लाभ होता है।

★★
चमेली : चेचक के रोग में चमेली के 10-15 फूलों को पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।
◆◆
मुनक्का: चेचक के रोगी को दिन में कई बार 2-2 मुनक्का या किशमिश खिलाने से लाभ होता है।
★★
इमली के बीज और हल्दी का चूर्ण ठंडे पानी के साथ पीने से चेचक(Badi Mataबड़ी माता) का रोग नहीं होता है।
★★
लताकरंज
लताकरंज के बीज, तिल और सरसों को बराबर मात्रा में मिलाकर लेप बना लेते हैं। इस लेप को चेचक के दानों पर लगाने से आराम मिलता है।
★★
अंगूर
अंगूर को गर्म पानी में धोकर खाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।
★★
संतरे
संतरे के छिलके को पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।
संतरे के छिलकों को सुखाकर पीस लें। इसमें 4 चम्मच की मात्रा में गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाकर रोजाना चेहरे पर मलें। इससे चेचक के दाग हल्के हो जाते हैं।
★★
चना
चेचक से पीड़ित रोगी को भीगे हुए चनों पर अपनी हथेलियां रखनी चाहिए क्योंकि भीगा हुआ चना चेचक(शीतला) के कीटाणुओं को सोख लेता है।
★★
हल्दी
10 ग्राम हल्दी, 5 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम मिश्री का बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। फिर तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर उसके साथ इस चूर्ण को रोजाना सुबह-सुबह खाने से चेचक के रोग मे लाभ होता है।
हल्दी को पानी में मिलाकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।
★★
तुलसी

नीम की कोंपले (नीम की नई पत्तियां) और तुलसी के पत्तों का चूर्ण बनाकर शहद या मिश्री के साथ मिलाकर सुबह-सुबह चेचक से ग्रस्त रोगी को देने से लाभ होता है।

तुलसी के पत्तों के साथ अजवायन को पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से चेचक(Badi Mataबड़ी माता) का बुखार कम हो जाता है।

जब चेचक (माता) फैल रही हो तो उस समय प्रतिदिन सुबह तुलसी के पत्तों का रस पीने से चेचक के संक्रमण से सुरक्षा बनी रहती है।

सुबह के समय रोगी को तुलसी के पत्तों का आधा चम्मच रस पिलाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।

बुखार को कम करने के लिये तुलसी के बीज और धुली हुई अजवाइन को पीसकर रोगी को पानी के साथ दें।
★★

नारियल :
लगभग आधा ग्राम केसर को नारियल के पानी के साथ रोजाना 2 बार रोगी को पिलाने से चेचक(शीतला) के दाने जल्दी ही और आसानी से बाहर आ जाते हैं।

नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर लगाने से चेचक के दाग मिट जाते हैं।

★★★

भोजन और परहेज :

छोटे बच्चों को चेचक(chicken pox)होने पर दूध, मूंग की दाल, रोटी और हरी सब्जियां तथा मौसमी फल खिलाने चाहिए या उनका जूस पिलाना चाहिए।

चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी में छोंका नहीं लगाना चाहिए।

रोगी को तली हुई चीजें, मिर्चमसाले वाला भोजन और ज्यादा ठंड़ी या ज्यादा गर्म चीजें नहीं देनी चाहिए।

दरवाजे पर नीम के पत्तों की टहनी लटका देनी चाहिए।

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