Friday, 27 April 2018

सिद्ध शीतल चुर्ण-शरीर की हर गर्मी को करे शांत


गर्मी में अयुर्वेदिक तोहफा पेट की गर्मी के लिए आयुर्वेदिक चुर्ण

                     सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण
        21 जड़ी बूटी का महत्वपूर्ण मिश्रण
लाभ :-                      
★दिमाग को रखे ठंडा , बच्चों और बजुर्गों के गर्मी की राहत के लिए वरदान है ।

★गर्भवती महिलाओं और  पेट पल रहे बचें के लिए   सिद्ध शीतल चुर्ण गर्मी में रामबाण है।

★ पैरों से सेक निकलता है तो यह चुर्ण ले।
★ मुह में और सांस नली में छाले (जब खाना खाते जलन होती ) हो तो सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण कारगर साबित होता है।

★ दफ्तरों और कम्यूटर पे काम करने वाले यह चुर्ण जरूरत इस्तेमाल करे।
            घर मे आसानी से बना सकते हैं आप
              इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है।
       21 जड़ी बूटी का महत्वपूर्ण मिश्रण।

     सिद्ध शीतल चुर्ण
कौंचबीज बीज काला 100 ग्राम
त्रिफला             100 ग्राम
सफेद चंदन       100 ग्राम
ब्रह्मबुटी            100 ग्राम
खसखस सफेद  100ग्राम
संखपुष्पी          100ग्राम
सौंफ़                 100 ग्राम
आवला चुर्ण       100  ग्राम
तुलसी बीज        100  ग्राम
बादाम गिरी        100 ग्राम
मुलेठी का चूर्ण    100 ग्राम
मिश्री                 100 ग्राम
जीरा                    50 ग्राम
छोटी इलाची         50 ग्राम
पुदीना सत             5 ग्राम
निम्बू सत।             5 ग्राम


5 और महत्वपूर्ण जड़ी बूटी 
  वैद की देखरेख में तैयार करे
      सभी को मिलाकर चुर्ण बना ले।

और चार गोंद 200 ग्राम काढ़े  में भावना दे और सायं में सुखाए।


सेवन विधि
           दिन में 3 बार 3 से 5 ग्राम
        बच्चों को 2 ग्राम
निम्बू पानी, छाछ, मठा पानी(दही पानी),नारियल पानी,
बेल शर्बत के साथ ले।
फायदे जाने
पेट में तेजाब बनना, पेट मे गैस, कब्ज, एसिडिटी, आंतों, मसाने की गर्मी होना या लिवर की गर्मी और सूजन होना।
पेट में गर्मी होने पर पेट में जलन, मरोड़, दर्द और ठीक से पेट साफ़ ना होना जैसे लक्षण दिखने लगते है।
इन सभी को   सिद्ध शीतल चुर्ण फायदा करेगा।
★★★
●सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण फायदे●
~~~~~~~~~~~~
_यह उत्तम शीतल गुणों से युक्त होती है |
_पेशाब में धातु जाना,
_पेशाब में जलन,
_पेशाब में इन्फेक्शन एवं
_महिलाओं के श्वेत प्रदर जैसे रोगों में लाभदायक औषधि साबित होती है |
_सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण  में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जो इसे और अधिक उपयोगी औषधि बनाते है |
_यह शरीर में जलन,
_उष्णता एवं पत्थरी के निर्माण को रोकने का कार्य करती है |
_अश्मरी रोग एवं हृदय की कमजोरी में भी यह लाभदायक परिणाम देती है |
★★★
पेट की गर्मी के कारण
ज्यादा मसालेदार खाना
शाम होने के बाद ज्यादा खाना खाने से
दर्द दूर करने वाली दवा का जादा सेवन करना
पेट में तेजाब (एसिडिटी) बनने के कारण
धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन करना
★★★
पेट में गर्मी के लक्षण
पेट में जलन होना
सीने में जलन महसूस होना
मुंह और गले में छाले पड़ना
गले मे छाले।
शरीर पर छोटे छोटे लाल रंग के दाने निकलना
   पेट की गर्मी का इलाज और घरेलू उपाय
1. अरहर की दाल बारीक पीस कर इसे पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है और साथ ही इस उपाय से पेट की गर्मी दूर होती है।
2. एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर इस पानी से गरारे करे। इस घरेलू नुस्खे को करने पर पेट की गर्मी से राहत मिलती है।
3. पेट की गर्मी दूर करने के उपाय में थोड़ा काला नमक और निम्बू पानी मे मिला कर पिए। इससे पेट के रोग दूर होते है व पेट की अन्य समस्या से बचाव में मदद मिलती है।
4. लिवर की गर्मी होना पीलिया होने का प्रमुख कारण है, ऐसे में छाछ, नारियल पानी और गन्ने का जूस रामबाण इलाज है।
5. पेट की बीमारी ठीक करने व इससे बचने के लिए नीम काफी उपयोगी है। शरीर की गर्मी कम करने के लिए प्रतिदिन नीम का दातुन करना चाहिए।
6. पेट की गर्मी कैसे दूर करे में नींबू का रस गुनगुने पानी में मिला कर पिने से तुरंत आराम मिलने लगता है।
7. नारियल पानी हर रोज पीने से भी पेट की गर्मी से छुटकारा मिलता है।
8. गले की सूजन व पेट की गर्मी कम करने में गुड़ का पानी पीने से आराम मिलता है।
9. बबूल की छाल पीस कर इसे पानी में उबाल कर इससे कुल्ला करे। Baba ramdev के देसी नुस्खे से पेट की गर्मी के लक्षण कम होने लगते है।
10. शरीर की गर्मी कम करने और इससे बचने के लिए ठंडी चीज़ो का सेवन अधिक करे जैसे नारियल का पानी, शरबत, नींबू पानी और छाछ। शहद के सेवन से भी शरीर में ठंडक आती है।
पेट की गर्मी दूर करने के लिए क्या खाएं
◘  पेट की बीमारी का उपचार करने मे लस्सी और दही के सेवन करने से काफी आराम मिलता है। पेट की गर्मी को कम करने में भी लस्सी और दही फायदेमंद है। आप इन्हें अपने आहार में शामिल कर सकते है।
◘  पेपेट में गर्मी का इलाज करने के लिए हफ्ते मे 2 – 3 बार चने की दाल और दही का सेवन करे।
◘  पेथोड़ी सी चीनी और घी चावल मे मिला कर खाने से भी pet ki garmi कम करने में मदद मिलती है।

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Friday, 20 April 2018

नाड़ी दुर्बलता कल्पचुर्ण-नाड़ी दुर्बलता(Nervous Weakness) के लिए


      नाड़ी दुर्बलता(Nervous Weakness) के लिए
                        
        नाड़ी दुर्बलता कल्पचुर्ण
अश्वगन्धा 100 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
सर्पगन्धा 100 ग्राम
ब्रह्मबुटी 100 ग्राम
संखपुष्पी 100 ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाहीपत्र 100 ग्राम
इसबगोल की भूसी 100 ग्राम
तालमिश्री 100 ग्राम
इन सबको कपड़छन चूर्ण बनाकर एक काँच की शीशी में भरकर रख लें।
सुबह-शाम दूध या पानी के साथ 10 ग्राम मात्रा लें।
5 ग्राम सुबह
5 ग्राम शाम
21 दिन तक लेने के बाद ही मस्तिष्क एवं शरीर रक्त में संचार का अनुभव होगा।
★★★
                *नाड़ी दुर्बलतामें क्या होता*
जब किसी व्यक्ति नाड़ी दुर्बलता का रोग हो जाता है तो उसे नींद बहुत आती है तथा उसकी पाचनक्रिया खराब हो जाती है जिसके कारण उसको भूख नहीं लगती है तथा खाया हुआ खाना ठीक से पचता नहीं है।
रोगी का शरीर गिरा-गिरा सा रहता है तथा उसे यौन सम्बंधी अनियमिताएं भी हो जाती हैं। रोगी को भय, क्रोध, चिंता, ईर्ष्या, चिड़चिड़ापन, दुविधा में रहना आदि परेशानियां भी हो जाती हैं।
रोगी को कोई काम करने का मन नहीं करता है और उसका मन इधर-उधर भटकता रहता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी-कभी आत्महत्या करने का मन करता है तथा रोगी को अकेले रहने का मन करता है और उसे कहीं भी शांति नहीं मिलती है।
          इस रोग से पीड़ित रोगी को सहानुभूति की आवश्यकता होती है इसलिए इस रोग के रोगी के साथ मधुरवाणी (प्यार भरे शब्द) से बोलना चाहिए और रोगी व्यक्ति को अधिक देर तक सोने देना चाहिए।
रोगी को सोच-विचार का अधिक कार्य नहीं करना चाहिए। इस रोग से पीड़ित रोगी को पहले की सारी बातें याद दिलानी चाहिए जिसमें उसने कोई सफलता प्राप्त की हो या फिर उसने अच्छे स्थान की यात्रा की हो।
रोगी की इच्छाओं को महत्व देना चाहिए। रोगी व्यक्ति के साथ कभी भी बहस नहीं करनी चाहिए।
           निःशुक्ल अयूर्वादिक सलाह ले
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Saturday, 14 April 2018

सिद्ध पित्त ज्वर नाशक कल्पचुर्ण



गिलोय 100 ग्राम
नागरमोथा 50 ग्राम
धनिया 30  ग्राम
मुलहठी 30 ग्राम
चिरायता 30 ग्राम



सभी को चुर्ण बनाए कर दिन में 3 बार बकरी दूध या पानी से उपयोग करे।

3 खुराक ही पित्त ज्वर को शांत कर देती हैं।

7 दिन दवा का सेवन करे।


गिलोय के शर्बत में चीनी डालकर पीने से पित्त बुखार ठीक हो जाता है।


   पित्त गर्मी का ही अंश है। पित्त ठंड़ी शीतल वस्तुओं से शान्त होता है। इसमें नाड़ी मेढ़क या कौए की तरह कूद-कूदकर चलती है।

कारण

          नमकीन, खट्टे, गरम, तीखे और गरिष्ठ पदार्थों को ज्यादा खाने से या ज्यादा खाना, ज्यादा मेहनत, तेज धूप या आग के सामने बैठना और ज्यादा क्रोध यानी गुस्सा करने से भी इसका बुखार हो सकता है।

पित्त ज्वर के लक्षण :

          पित्त बुखार काफी तेज रहता है। इस बुखार में शरीर ठंड़ा रहता है। पसीना ज्यादा आता है। आंखों और त्वचा का रंग पीला हो जाता है और मल पीले रंग का पतला या गाढ़ा हो जाता है।

पेशाब का रंग पीला हो जाता है।

दिमाग में गर्मी के बढ़ने पर बकवाद पैदा करता है। भूख को रोक देता है। मुंह का स्वाद कड़वा होता है। मुंह के अन्दर काफी कफ हो जाता है, खांसी, भूख न लगना, प्यास, आलस्य, बेहोशी, बार-बार कभी गर्मी कभी सर्दी लगना, हाथ-पैरों और सिर में दर्द, आंखों में जलन, किसी काम में मन न लगना और भ्रम जैसे लक्षण होते हैं। इसमें नाड़ी कभी ठंड़ी कभी कम ठंड़ी और पतली छोटी हो जाती है तथा हल्की गति से चलती है।*


               
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Wednesday, 11 April 2018

सिद्ध मधुमेह कामक्ल्प चुर्ण- शुगर में आई कमजोरी में कारगर

सिद्ध मधुमेह कामक्ल्प चुर्ण
शुगर में आई कमजोरी में कारगर
  महिलाओं और मर्दो दोनों के लिए कारगर है।       
जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात उस व्यक्ति का अग्नाशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिये वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधा निकलता है।

इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं, उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है।

मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है।

अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रेागी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

सबसे बड़ी बात सेक्स कमजोरी हो जाती हैं।
पर आधुनिक विशेषग्य इसपे खुलकर बात नही करते।

मधुमेह या डायबिटीज का एक प्रभाव ऐसा भी है जिस पर अमूमन खुलकर चर्चा कम ही होती है।

सच यह है कि असुविधाजनक चर्चा मानकर छोड़ दिए जाने से इस गंभीर नुक्सान के प्रति जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है।

आधुनिक विशेषग्यों का मानना है कि मधुमेहग्रस्त स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स संबंधी ऐसी शिथिलता आ जाती है जिसके कारण इच्छा होते हुए भी ऐसे मरीज सेक्स के प्रति अक्षम हो जाते हैं।

पर आयुर्वेद ऐसा नही मानता ,आयुर्वेद अनुसार हर रोग का इलाज है। बस गहरे ध्यान से इलाज की जरूरत होती है।

आयुर्वेद सदियो से शुगर से आई कमजोरी को ठीक करता आया है।

हम बता रहे वो सिद्ध मधुमेह कामकल्प चुर्ण जो शुगर के मरीज के लिए रामबाण है।

यह दवा महिलाओं और मर्द दोनों के लिए कारगर है
आप खुद तैयार कर सकते है।

क्या है सिद्ध मधुमेह कामकल्प चुर्ण

इन्द्रजो तल्ख़       250 ग्राम
करेला चुर्ण          200 ग्राम
गिलोय                100 ग्राम
चरायता              100 ग्राम
छोटी हरड़          100 ग्राम
सर्पगन्धा             100 ग्राम
मिचका बीज चुर्ण 100 ग्राम
अश्वगान्ध            100 ग्राम
सतावर               100 ग्राम
आँवला चुर्ण        100 ग्राम
बरगद फल         100 ग्राम (चुर्ण)
तुलसीबीज         100 ग्राम
बाबुल फली       100 ग्राम (बीज रहित)
कौंचबीज काला  50 ग्राम
कंदबीज             25 ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 25 ग्राम
सालम मिश्री        25 ग्राम
सालम पंजा।        25 ग्राम
जायफल              50 ग्राम
*जावित्री।             50ग्राम
*चार गोंद।            50 ग्राम
*छोटी इलायची      20 ग्राम
*कालीमिर्च।           50

सभी चूर्ण को मिलाकर सेवन करे
सेवन विधि - सुबह -शाम  3 से 5  ग्राम दूध (बिना मीठा) से लेते रहे

फायदे

★शुगर कट्रोल में रहेगी।
★शुगर के कारण आई शरीरक कमजोरी दूर  हो        जाएगी।
★शुगर कारण सेक्स कमजोरी दूर होगी।

***
खानपान में करें परहेज

-अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।

गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।
-***

मधुमेह केरोगी इसका करें सेवन

जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें ।
***

पत्तागोभी,पालक,मेथी और मेथी दाने का साग, करेला,तुरई (तोरी),गिलकी, घीया (लोकी),टिंडा, परवल,कन्दूरी, बथुआ, चौलाई, मुंग, अरहर,चने की दाल, भुने हुए चने,चने के बेसन से छाछ में बनाई हुई कढी,जीरा प्याज तथा लहसुन से छौंकी हुई, अकेली छाछ,पका हुआ पीला नींबू,नींबू का अचार थोडी मात्रा में, फ़ीका दूध, घी,थोडा मक्खन,जामुन फ़ल,कैथ[कबीट]के गुद्दे की चटनी खा सकते हैं। पथ्य के बिना औषधि सेवन बेकार है। लाभ का कोई चांस नहीं है।

-जौ और गेहूं की रोटी खाएं। मूंग, मसूर और चने की दाल का सेवन करें। करेला, बबूल के फल खाएं।

सिद्ध आयुर्वेदिक
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
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Thursday, 5 April 2018

सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण(शंखपुष्पादि चूर्ण)

सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण
 (शंखपुष्पादि चूर्ण)
★ पढ़ाई में कमजोर बच्चे यह चुर्ण उपयोग करे पढ़ाई की कमजोरी दूर होगी।


★ मानसिक तनाव, चिंता, डर, डिप्रेशन में कारगर है यह चुर्ण।

★ कोई भी उम्र हो यह चुर्ण उपयोगी हैं।

★ नींद की कमी पूरी कर दिमाग को स्वस्थ रखता है।

- एकाग्र ना हो पाना, कमजोर स्मरणशक्ति, अवसाद, चिंता, द्विध्रुवी विकार , भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का बढ़ जाना-अधिक रोना या संवेदनशील या आक्रामक होना।

- यदि आप अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं तो आप निष्क्रिय हो जाते हैं और कम काम करने लगते हैं। यह आपके काम की प्रगति को भी प्रभावित करता है।
   

  *तो यह चुर्ण आप को फायदेमंद साबित होगा*
आप बहुत आसानी से विचलित हो जाते  है और लगातार अज्ञात डर के नीचे आ जाते हैं।

प्रेरणा, समर्पण और आत्मविश्वास का अभाव होने लगते है तो यह चुर्ण आप को इन से बाहर ले कर आएगा।

आप अपने आप को दूसरे लोगों से अलग रखते हैं और आत्महत्या के विचार आते रहते हैं।
यह बुद्धिवर्धक चुर्ण आप को 100% लाभ देगा।

बुद्धिवर्धक चुुर्ण
आवश्यक सामग्री :-

शंखपुष्पी 150 ग्राम
गुडूची 100 ग्राम
ब्राह्मी 50 ग्राम
शतावर 50 ग्राम
बादाम 100 ग्राम
हल्दी 50 ग्राम
सोंफ 50 ग्राम
कालीमिर्च 10 ग्राम
छोटी इलायची बिज 10 ग्राम
तरबुज बिज गिरी 20 ग्राम
अश्वगंधा 50 ग्राम
आवला 50 ग्राम
जटामांशी 20ग्राम
तुलसी पंचाग 10 ग्राम
धागा मिश्री 250 ग्राम
सारे सामान को कुटपिस कर चूर्ण तैयार कर ले ।
और सुबह शाम एक एक चमच्च दूध के साथ ले।
बच्चों को आधा चमच्च दूध के साथ नित्य प्रयोग दे।
★★★
फायदे
◆मानसिक रोग में कारगर
◆दिमागी तनाव फायदेमंद
◆भूलने की आदत में फायदेमंद
◆ दिमागी रूप से सशक्त बनाता है दिमाग तेज़ करता है ।
◆अनिद्रा के रोगों में सहायक ।
◆मानसिक परेशानी और तनाव दूर करता है ।
◆थाइरोइड के रोग में लाभदायक थाइरोइड कम करता है ।
◆शरीर में सुस्ती नही आने देता हरदम एक्टिव रखता है ।
आज के समय में बच्चों के लिए ये चूर्ण अत्यंत आवश्यक है इसलिए आज ही इसे घर बनाए और प्रयोग करे।
जो लोग ध्यान करते हैं वो यह चुर्ण जरूर उपयोग करे।
                     ऑनलाइन मंगवाए
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Monday, 2 April 2018

सिद्ध बवासीर योग - हफ्ते में करे बादी बवासीर ठीक


                
             
सिद्ध बवासीर योग
                   
त्रिफला 200 ग्राम
नीम बीज 80 ग्राम
आवला 80 ग्राम
रीठा 50 ग्राम
शुद गूगल 50 ग्राम
शंख भस्म 30 ग्राम
मोच रस 30 ग्राम
सभी को कूटपीस कर चुर्ण बनाए।

मात्रा :
   1-1 चमच्च -दिन में 3 से 4 बार पानी से ले।
1 हफ्ता दवा करे बिलकुल बादी बवासीर ठीक हो जएगी।
★★★

बवासीर के मस्सो पर -लगाने के लिए तेल
एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले।

अगर कपूर की मात्रा 10 ग्राम हो तो अरंडी का तेल 80 ग्राम होना चाहिए। मतलब 8 गुना अगर कपूर 5 ग्राम हैं तो तेल 40 ग्राम।

पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें।

इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।
★★★
बवासीर के मस्से नष्ट करने के लिए  अजमाये हुए रामबाण घरेलू इलाज--

1. हल्दी को कड़वी तोरई के रस में लेप बनाकर मस्सों पर लगाने से सब तरह के मस्से नष्ट हो जाते हैं। इसमें अगर नीम का तेल या कोई भी कड़वा तेल मिलाकर मस्सों पर लगाया जाये तो और भी जल्दी आराम आता है।

2. आक के पत्ते और सहजने के पत्तों का लेप भी मस्सों के लिए बहुत रामबाण है।

3. नीम और कनेर के पत्तों का लेप मस्सों को नष्ट करता है।

4. सेहुंड(थूअर) के दूध में हल्दी का चूर्ण मिलाकर एक-एक बूँद मस्सों पर लगाने से मस्से नष्ट होते हैं
 
अगर बार बार बवासीर होती हैं और मस्से बाहर आ कर बहुत कष्ट देते हो तो ये घरेलु उपचार और मस्सो पर लगाने के लिए ये तेल घर पर बनाये बहुत ही लाभदायक हैं।

तो आइये जाने खूनी बादी बवासीर और बवासीर के मस्सो का इलाज।

दो सूखे अंजीर शाम को पानी में भिगो दे। सवेरे के भगोये दो अंजीर शाम चार-पांच बजे खाएं।

एक घंटा आगे पीछे कुछ न लें। आठ दस दिन के सेवन से बादी और खुनी हर प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती है।

बवासीर को जड़ से दूर करने के लिए और पुन: न होने के लिए छाछ सर्वोत्तम है।

दोपहर के भोजन के बाद छाछ में डेढ़ ग्राम ( चौथाई चम्मच ) पीसी हुई अजवायन और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है और नष्ट हुए बवासीर के मस्से पुन: उत्प्न्न नही होते।

*****

बवासीर के मस्से सूजकर संगर की भांति मोटे हो जाते है और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते है।
ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगाकर अंदर किया जाये तो दर्द नही होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किये जा सकते है।

सहायक उपचार
1. बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल, मूंग की खिचड़ी ले। देसी घी प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज न होने दे। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार, उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थो के सेवन से बचे।

2. खुनी बवासीर में छाछ या दही के साथ कच्चा प्याज ( या पीसी हुयी प्याज की चटनी ) खाना चहिए।

3. रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घटे बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकारी है।

4. बवासीर चाहे कैसी भी हो बड़ी हो अथवा खुनी, मूली भी अक्सीर है। कच्ची मूली ( पत्तो सहित ) खाना या इसके रस का पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषो को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।

विशेष
1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।

2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से परम आवश्यक है।



                   ■हम आप की सेवा में है■
         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण