Sunday, 27 May 2018

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण-त्वचा के हर रोग को करे जड़ से ख़त्म

 दाद ,खाज खुजली के लिए रामबाण अयूर्वादिक दवा
                  सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण




          अगर हमारे शरीर में कहीं भी कुछ हलचल हो रही है या ऐसा लग रहा हो कि कुछ काट रहा है तो हम शरीर के उस हिस्सें को हाथों से रगड़ देते हैं तो हमें थोड़ी शान्ति मिलती है इसे ही खाज-खुजली कहते हैं। यह ``सारकोप्टीस स्केवी´´ नाम के रोगाणु से फैलती है और यह मुख्यत: दो तरह की होती है- तर (गीली) और सूखी।

कारण :
         गर्मी के मौसम में शरीर में बहुत ज्यादा पसीना आता है और जब यह पसीना त्वचा पर सूख जाता है तो खुजली पैदा हो जाती है। बाहर निकलने पर जब धूल-मिट्टी शरीर पर लगती है तो भी खुजली पैदा हो जाती है। रोजाना न नहाना भी खुजली होने का बहुत बड़ा कारण है। सर्दी के मौसम में ठंड़ी हवा जब शरीर में लगती है तो शरीर की त्वचा सूखकर खुरदरी सी हो जाती है और उसमें तेज खुजली होने लगती है ज्यादा जोर से खुजालने पर त्वचा में निशान से पड़ जाते हैं और उनमें तेज जलन होती है। खुजली एक फैलने वाला रोग है। घर के अन्दर अगर किसी एक व्यक्ति को खुजली हो जाती है तो उसके साथ वाले सारे लोग भी खुजली के शिकार हो जाते हैं।
लक्षण :
         खुजली बहुत तेजी से फैलने वाला त्वचा का रोग है। इस रोग में सबसे पहले शरीर में छोटी-छोटी फुंसिया निकल जाती है। यह फुंसिया हाथ-पैरो में, उंगलियों में, कलाई के पीछे के भाग में और बगल में ज्यादा निकलती है और धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाती है। यह अक्सर लाल रंग के निशान के रूप में दिखाई देती है। यह खराब चीजों को छूने से, गलत इंजैक्शन के लग जाने के कारण या संक्रमण होने के कारण हो जाती है।
                 
   सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण संपूर्ण योग

त्रिफला - 200 ग्राम
चरायता 100 ग्राम
कुटकी   100 ग्राम
गिलोय-100ग्राम
शंखपुष्पी-100 ग्राम
नीम चुर्ण-100 ग्राम
अजवाइन -100 ग्राम
गोरखमुण्डी-100 ग्राम
तुलसी चुर्ण -100 ग्राम
पित्तपापड़ा-100 ग्राम
काकड़ासिंगी-100 ग्राम
कलौंजी-100 ग्राम
कूठ-50 ग्राम
हारसिंगार-50 ग्राम
चित्रक -50 ग्राम
आम्बा हल्दी --50 ग्राम
अपामार्ग-50 ग्राम
महुआ छाल चुर्ण-50 ग्राम
सभी चुर्ण को 300 ग्राम एलोवेरा रस में मिलाकर धूप में सूखा ले।

सेवन विधि
दिन में 3 बार एक एक चम्मच पानी के साथ लेते रहे।
★★
21 दिन उपयोग करे
अगर रोग पुराना हो तो 90 दिन का कोर्स करे।
★★
परहेज
तली ,खट्टी और आचार बिल्कुल बंद कर दे।
★★
जिदी दाद हो साथ यह करे
दाद खाज की सिर में खुजली होने पर 25 ग्राम पिसा हुआ लहसुन, 50 ग्राम पानी और 100 ग्राम सरसों का तेल इन सबको मिलाकर पानी जल जाने तक गर्म करे. ठंडा हो जाने पर छानकर शीशी में भर लें. इस तेल की सिर पर मालिश करने से दाद व खाज के वजह से सिर में हो रही खुजली मिट जाती है. इसका प्रयोग पुरे शरीर में कहीं भी किया जा सकता है.
****
लहसुन को मैदे की तरह बारीक पीसकर शुद्ध शहद में मिलाकर दाद पर दिन में 3-4 बार लगाते रहने से दाद का तुरंत इलाज होता है. बहुत जल्दी ठीक होते है.
***
दाद को खुजला कर दिन में चार बार नींबू का रस लगाने से दाद ठीक हो जाते हैं।
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Friday, 25 May 2018

सिद्ध गिलोय कल्पचुर्ण-,नाक बढ़ी हड्डी में कारगर योग




        

हम सबने अपने आस पास बहुत से लोगों को सुबह उठते ही लगातार 10 से 20 छीकें लगाते देखा होगा। ए छींकें नाक में होने वाली एलर्जी की वजह से होता है जिसे “एलर्जिक राइनाइटिस” कहते है। इस प्रकार नाक की एलर्जी घर एवं वातावरण की धूल के कण एवं पालतू व अन्य जानवरों की वजह से हो सकती है।

★★★

          ★एलर्जी rhinitis के लक्षण★
एलर्जी rhinitis निम्न लक्षण पैदा कर सकता है:
नाक की एलर्जी के लक्षण:

लगातार छीकें आना;

नाक से पानी जैसा तरल पदार्थ बहना;

नाक आँख व तालु में खुजली होना;

नाक या गले में खराश होना;

हल्का बुखार या सिरदर्द होना;

आँखों से आंसू निकलना होना;

नाक बंद होना।
★★
        *एलर्जी rhinitis के निदान और दवा*

               *सिद्ध गिलोय कल्पचुर्ण*
गिलोय चूर्ण।         200 ग्राम
हल्दी अम्बा           100 ग्राम
सतावर                 100 ग्राम
इन्द्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
नीम पंचाग।            100 ग्राम
सोंठ                        50 ग्राम
आँवला चूर्ण              50 ग्राम
तुलसी पंचांग            50 ग्राम
चिरायता                  50 ग्राम

सभी चूर्ण को 100 मिलीग्राम एलोवेरा रस में
मिलाकर सुखाये।
दूप में सुखा सकते हैं।

1 चमच्च चूर्ण को 50 मिलिग्राम एलोवेरा रस को 1 ग्लास पानी में मिलाकर सेवन करे।

इस चूर्ण को 21 दिन लगातार
दिन में 3 बार सेवन करे।

एलर्जी rhinitis में जबरदस्त फायदा होगा।

★★
           *परहेज और आहार*
लेने योग्य आहार
गर्म तरल पदार्थ
शहद
मछली
दही
गहरी हरी पत्तेदार सब्जियाँ।
अलसी के बीज
स्थानीय स्तर पर उत्पन्न, बिना छना शहद, कई लोगों द्वारा हे फीवर की औषधि माना जाता है, माना जाता है कि यह शरीर को आवश्यक परागकणों की आपूर्ति करता है।
  ◆◆◆◆
      साथ मे   *घरेलू उपाय (उपचार)*  जरूर करे
अपनी नाक को उत्तेजक पदार्थों से मुक्त रखने के लिए अपने नथुनों को सलाइन घोल से नियमित धोएँ।
हर बार धुलाई के समय हर नथुने को कम से कम 200 मिली (लगभग 3/4 कप) व्यावसायिक या घर पर निर्मित घोल से धोएँ।
अपनी नाक के म्यूकस को ढीला करने के लिए नाक से श्वास सहित भाप लें।
★★★
इनसे परहेज करें

मूंगफली, स्ट्रॉबेरी या किसी अन्य वस्तु के लिए एलर्जी से चकत्ते या सूजन उत्पन्न हो सकती है।


कुछ फल और सब्जियों से
कुछ लोगों में शराब खासकर बियर या वाइन लेने से नाक में अवरोध उत्पन्न हो जाता है।

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Wednesday, 23 May 2018

सिद्ध बलवर्धक कल्पचुर्ण- शरीर का पतलपन करे मोटा और ताकतवर

शरीरिक की हर कमजोरी के लिए,खाया पीया न लगे तो यह चुर्ण लेे बॉडीबिल्डर के लिए उत्तम योग।
  बिना किसी साइड इफेक्ट्स के।
सिद्ध बलवर्धक कल्पचुर्ण
बच्चों को दे संपूर्ण खुराक


घर में काम करने वाली महिला, दफ्तर जाने वाले पुरुष, स्पोर्ट्स खेलने वाले खिलाडी हो या running करने वाले लड़के हो सबको बेहतर प्रदर्शन के लिए शरीर में ताकत और स्टैमिना चाहिए। इस लिए हर कोई ये जानना चाहता है की शारीरिक कमजोरी दूर करके शरीर में ताकत और एनर्जी कैसे बढ़ाये ताकि जल्दी थकान ना हो। बलवर्धक चुर्ण ऐसा है जिनकी मदद से आप बॉडी में एनर्जी और स्टैमिना बढ़ा सकते है।


★ बीमारी के बाद आई कमजोरी को दूर करे★
★महिलाओं औऱ पुरुषों के रामबाण चुर्ण★
★जिन को खून की कमी है वो यह जरूर
दवा ले★
★दुगले पतले लोग और बच्चे जरूर उपयोग करे
★जिन को खाया पिया नही लगता उनके लिए कारगर है।

        ★बलवर्धक कल्पचुर्ण नुस्खा★
अश्वगंधा        -250 ग्राम
सतावर।         -250 ग्राम
आवला-          200  ग्राम
अनार छिलका  200 ग्राम
अजवाइन-       100ग्राम
सौंफ                100 ग्राम
मिश्री                -100 ग्राम
शंखपुष्पी         -100 ग्राम
ब्राह्मी बुटी         -100  ग्राम
जायफल           100 ग्राम
जावित्री           100 ग्राम
लोहभस्म           50 ग्राम
तुलसी बीज       -50 ग्राम
सालम मिश्री     -50 ग्राम
सालम पंजा       -5 0 ग्राम
काली मिर्च -20 ग्राम
सभी को मिलाकर किसी बंद डब्बे मे रखे ।
सेवन विधि -
इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें।
हर शरीरिक कमजोरी दूर होगी।

◆◆◆
*शारीरिक कमजोरी के लक्षण*
★पसीना ज्यादा आना
★जल्दी थकान होना
★नींद नहीं आना
★चक्कर आना
★दुबला पतला शरीर दिखना
★भूख ना लगना या कम लगना
★किसी भी काम में मन नहीं लगना
★मर्दाना कमज़ोरी महसूस होना

    दवा के साथ साथ यह भी जरूर करे।
कमजोरी चाहे शारीरिक हो या मानसिक, सबसे पहले समस्या के कारण पता होना चाहिए तभी इलाज सही तरीके से और सही दिशा में संभव है। शरीर की कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने के लिए आप दवा दवा के साथ साथ  निम्न उपयोग भी करे आप को  दुगना फायदा होगा।


देसी खजूर शरीर में ताक़त बढ़ाने का एक आसान तरीका है। खजूर के बीज निकाल ले, अब खजूर में मक्खन भर कर खाये। इस उपाय को कुछ दिन निरंतर करने पर आप शरीर में भरपूर ताकत और एनर्जी महसूस करेंगे।


नसों की कमजोरी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 8 – 10 खजूर खाये और एक गिलास दूध पिए।

शारीरिक ताकत बढ़ाने के उपाय में गाजर का हलवा भी फायदेमंद है। अगर आपका शरीर दुबला पतला और कमजोर दिखाई देता है तो गाजर का सेवन करना चाहिए। प्रतिदिन गाजर के जूस का सेवन भी उत्तम उपाय है।


मर्दाना कमज़ोरी दूर करने के लिए सुबह मीठा आम खाये और सोंठ वाला दूध पिए।


अंकुरित दाल, चने और सोयाबीन दाल खाने से body को प्रोटीन और आवश्यक पोषक मिलते है। इससे शरीर में ताकत आने के साथ साथ पाचन तंत्र भी दरुस्त रहता है।

शरीर की कमजोरी कैसे दूर करे में दूध भी काफी उपयोगी है। दूध में कैल्शियम और अन्य कई प्रकार के पोषक तत्व होते है जिससे शरीर में ताक़त बढ़ती है। रोजाना कम से कम एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए। दूध से हड्डियां भी मजबूत होती है।


शरीर में energy बढ़ने के लिए अपने आहार में केला शामिल करे। केला प्राकृतिक शुगर का अच्छा स्रोत है जो शरीर में एनर्जी जल्दी छोड़ता है। प्रतिदिन 2 केले ज़रूर खाए।


सुबह दूध के साथ एक केला हर रोज खाने से बॉडी में power और चर्बी बढ़ती है। वजन बढ़ाने और दुबलापन दूर करने का ये सबसे आसान उपाय है।*


प्रतिदिन टमाटर का सूप पीने से शरीर में खून की कमी पूरी होती है। इस होम रेमेडीज से भूख बढ़ती है व चेहरे पर निखार भी आने लगता है।


दूध के ही जैसे दही भी कमज़ोरी दूर करने व stamina बढ़ाने के लिए कारगर है। अगर जुखाम हो या गला खराब हो तो दही के सेवन से बचे।


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Sunday, 20 May 2018

सिद्ध पित्ताशय पथरी नाशक कल्पचुर्ण


 पित्त की पथरी के लिए
           सिद्ध पित्ताशय पथरी नाशक कल्पचुर्ण



गुलहर फूल चुर्ण           250 ग्राम
इन्द्रयाण अजवाइन       200 ग्राम
त्रिफला                       100 ग्राम
ब्रह्मी                            100 ग्राम
इन्द्रयाण(कड़वी तुंबी)   100 ग्राम
सोंठ                            100 ग्राम
अजमोदा फल का चूर्ण  100 ग्राम
मजीठा                        100 ग्राम
गोखरू                         100 ग्राम
बड़ी इलाची                  100 ग्राम
सहजना की छाल           50  ग्राम
अपामार्ग                        50 ग्राम
काली मिर्च                     20 ग्राम
हींग                              20 ग्राम
सेंधानमक                     100 ग्राम

सभी मिलाकर चुर्ण बनाए।

सेवन विधि
दिन में 3 बार एक एक चम्मच गर्म पानी से ले।

साथ मे रात को रात 10 बजे आधा कप जैतून  या तिल का तेल – आधा कप ताजा नीम्बू रस में अच्छे से मिला कर पीयें।
केशों की मजबूती ओर सुन्दर्य के लिए।
21 दिन में पथरी निकल जाती हैं।

ध्यान दे


 सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* दर्द को ततकाल बंद कर देता है।

अगर पथरी बड़ी हो तो सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण।
टुकड़े करेगा उस वक्त दर्द बड़ सकता है। 10 से 20 मिनट तक।
           थोड़ा अपने पर विश्वास रखे दर्द बर्दाश्त करे।

पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें तो आछा है।

★★★

         पित्त की थैली में  पथरी क्यों बनती हैं

जब ज्यादा वसा से भरा पदार्थ यानी घी, मक्खन, तेल वगैरह से बने पदार्थ का सेवन करते हैं तो शरीर में कोलेस्ट्रोल, कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम फांस्फेट के अधिक बनने से पित्ताशय में पथरी का निर्माण होता है।


रक्त विकृति के कारण छोटे बच्चों के शरीर में भी पथरी बन सकती है। पित्ताशय में पथरी की बीमारी से स्त्रियों को ज्यादा कष्ट होता है।

 30 वर्ष से ज्यादा की स्त्रियां गर्भधारण के बाद पित्ताशय की पथरी से अधिक ग्रस्त होती हैं।

कुछ स्त्रियों में पित्ताशय की पथरी का रोग वंशानुगत भी होता है। खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा ज्यादा होने पर कैल्शियम के मिलने से पथरी बनने लगती है।

           *कैसे पता चले कि  पित्ते में पथरी है*
            * पित्त की थैली में पथरी के लक्षण*

पेट के ऊपरी भाग में दायीं ओर बहुत ही तेज दर्द होता है और बाद में पूरे पेट में फैल जाता है। लीवर स्थान बड़ा और कड़ा और दर्द से भरा होता है। नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। शरीर ठंड़ा हो जाता है, मिचली और उल्टी के रोग, कमजोरी (दुर्बलता), भूख की कमी और पीलिया रोग के भी लक्षण होते हैं। इसका दर्द भोजन के 2 घण्टे बाद होता है इसमें रोगी बहुत छटपटाता है।

भोजन तथा परहेज :

गाय का दूध, जौ, गेहूं, मूली, करेला, अंजीर्ण, तोरई, मुनक्का, परवल, पके पपीता का रस, कम खाना, फल ज्यादा खाना और कुछ दिनों तक रस आदि का प्रयोग करें।

चीनी और मिठाइयां, वसा और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें- इस रोग में कदापि सेवन न करें। तेल, मांस, अण्डा, लाल मिर्च, हींग, उड़द, मछली और चटपटे मसालेदार चीजें, गुड़, चाय, श्वेतसार और चर्बीयुक्त चीजें, खटाई, धूम्रपान, ज्यादा मेहनत और क्रोध आदि से परहेज करें।

                  यह लोग सेवन न करे।
           इस दवा का कोई नुकसान नही है।

फिर भी तासीर गर्म  होने के कारण यह लोग ध्यान से उपयोग करे।
सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण
उन महिलाओं के लिए असुरक्षित है जो गर्भवती हैं या जो प्रजनन उपचार के दौर से गुजर रही हैं।

  सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण*  शरीर में एस्ट्रोजेन का स्तर कम करती है और मासिक धर्म का कारण हो सकती है, जिससे गर्भपात हो सकता है या खून बह सकता है।

विशेष रूप से, पहली तिमाही में गर्भवती महिलाओं को बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए।

हार्मोन उपचार करवा रही महिलाओं या गर्भनिरोधक गोलियां ले रही महिलाओं को * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* नहीं लेनी चाहिए।


  सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण के उपयोग से नींद आने लगती है। अतः वाहन ड्राइव करते समय या मशीन चलाते समय गुड़हल 
सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण का उपयोग नहीं करें।

 सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* के उपयोग से उच्च रक्तचाप को कम किया जाता है। निम्न रक्तचाप वाले इस का उपयोग नहीं करें।

इसके उपयोग से आप का स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है।


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Tuesday, 8 May 2018

अफस्फीत शिराएं(Varicose veins)


सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण
अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) की कारगर औषधि।
                             
इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम ,सौंठ भुनी 50 ग्राम ,सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।

पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड,
अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला,शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।

योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।

दवा तैयार हो गई ।

सेवन विधि -
बड़े लोग-1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।
बचों को आधी खुराक दे।

इसका 90 दिन का कोर्स पहली अवस्था मे होता है।
मरीज बिल्कुल ठीक हो जाता है।

अगर रोग 3 से 10 साल पुराना है तो 1 से 3 साल कोर्स चल सकता है।

       इस दवा कोई साइड इफेक्ट्स नही है।

              यह दवा गर्मी नही करती

                          परहेज

 खाद्य पदार्थों की हिदायत ( Food Instructions ) :

 इस तरह के रोग से ग्रस्त रोगी को पिने में नारियल का पानी, खीरे का पानी, गाजर का रस, पालक का रस, पत्तागोभी, आदि का इस्तेमाल करना चाहियें, साथ ही साथ उपवास भी रखें।

आपके लिए हरी सब्जियों का सूप भी बहुत फायदेमंद होता है. इन सब चीजों के सेवन के साथ रोगी को उपवास रखना चाहिये।

इन सब के बाद कुछ दिनों तक रोगी व्यक्ति को फल, सलाद, अंकुरित दालों को ही अपने आहार और खाद्य पदार्थों में शामिल करें।

विटामिन E तथा विटामिन C को पूरी करने वाली चीजें रोगी व्यक्ति को ज्यादा मात्रा में देनी चाहिये।

 रोगी को तला भुना खाने से और ज्यादा नमक मिर्च खाने से कुछ दिनों के लिए परहेज करना चाहिये.

                        ★★★★

                   *जानकारी*

          जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसके शरीर की शिराएं (नसें) फैलकर लंबी और मोटी हो जाती हैं।

यह शिराएं (नसें) शरीर की किसी भाग की हो सकती हैं जैसे- मलाशय शिराएं, वृषण शिराएं तथा ग्रासनली शिराएं।

लेकिन यह रोग अधिकतर पैरों को प्रभावित करता है जिसके कारण पैरों की शिराएं लंबी तथा मोटी हो जाती हैं।

 इस रोग का शिकार अधिकतर महिलाएं होती हैं और इस रोग में रोगी का दाहिना पैर, बाएं पैर की अपेक्षा अधिक प्रभावित होता है।

वेरिकोस वेन्स रोग का लक्षण :-

          इस रोग के हो जाने पर रोगी व्यक्ति के पैरों में दर्द के साथ थकान तथा भारीपन महसूस होने लगता है। रोगी के टखने में सूजन हो जाती है।

रात के समय में रोगी के पैरों में ऐंठन होने लगती है। इस रोग से पीड़ित रोगी की त्वचा का रंग बदलने लगता है। इस रोग के कारण स्टैटिस डर्मेटाइटिस तथा शरीर के नीचे के अंगों में सेल्युलाइटिस रोग हो जाता है।

          *वेरिकोस वेन्स रोग होने का कारण*

ये शिराएं वह रक्त वाहिकाएं होती हैं जो रक्त (खून) को हृदय में वापस लाती हैं। इन शिराओं में वॉल्व लगे होते हैं, जिनसे रक्त का एक ही दिशा में संचारण होता है।

 जब ये शिराऐं फैल जाती हैं तो इसके वॉल्व अपना कार्य करना बंद कर देते हैं, जिसके कारण रक्त (खून) उपास्थि शिराओं में जमा होकर, टांग के ऊतकों के बीच में जमने लगता है, जिसके कारण उस भाग पर सूजन हो जाती है और आगे चलकर त्वचा के रंग में परिवर्तन होने लगता है।

 जिसके कारण रोगी व्यक्ति के शरीर में क्षय, एक्जिमा, खून की कमी आदि लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं।
वेरिकोस वेन्स रोग उन व्यक्तियों को हो जाता है जो अधिक देर तक खड़े होकर या बैठकर काम करते हैं।

वेरिकोस वेन्स रोग उन व्यक्तियों को भी हो जाता है जो अधिक वजन उठाने का कार्य करते हैं तथा अधिक वजन वाले व्यक्तियों और महिलाओं को भी वेरिकोस वेन्स रोग हो जाता है।

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Friday, 4 May 2018

सिद्ध कंठ कल्पचुर्ण-गले की हर समस्या में कारगर


         सिद्ध कंठ कल्पचुर्ण

       गले की आवाज बैठ जाएं तो गले सूजन हो तो

मलाठी चुर्ण       100 ग्राम
ब्राह्मी                100 ग्राम
सोंठ भुनी           50 ग्राम
कालीमिर्च          50 ग्राम
छोटी इलाची      50 ग्राम
आवला चुर्ण       50 ग्राम
चरायता             50 ग्राम
गिलोय चुर्ण        50 ग्राम
लौंग                  10 ग्राम
हींग                   10 ग्राम
सुहागे की खील  10 ग्राम
काला नमक       10 ग्राम


चुर्ण बना कर 2 ग्राम चुर्ण एक चम्मच शुद्ध शहद से दिन में 3 से 4 बार ले।


            *क्यों बैठता है गला संपूर्ण जानकारी ले*

        अस्पष्ट आवाज (खराब आवाज), कर्कश स्वर (भारी आवाज) को स्वरभंग या गला बैठना कहते हैं। ठंड लगने या ठंड शरीर में बैठ जाने से आवाज अटकने से होता है। ज्यादा जोर से बोलने या ज्यादा देर तक लगातार बोलने या गाने से भी यह रोग हो जाता है।


गला बैठना या आवाज (स्वर) खराब होने का कारण है गुस्से में अधिक जोर से चिल्लाकर बोलना। ऊंची आवाज से पढ़ने या गाने से गला बैठ जाता है। गले में लकड़ी आदि की चोट के कारण एवं विष या विषयुक्त पदार्थों का सेवन कर लेने से भी गला बैठ जाता है।

आवाज का बैठ जाना कोई रोग नहीं होता है परन्तु यह रोग द्वारा उत्पन्न हो सकता है जैसे : गले में कैंसर, हिस्टीरिया और पक्षाघात (लकवा) आदि।

             *गले बैठने के 6 प्रकार होते है*

           यह रोग 6 प्रकार से उत्पन्न होता है :

 1. वातज 2. पित्तज 3. कफज 4. त्रिदोषज 5. क्षयज 6. मेदज।
कारण :

खट्टा, चटपटा या ज्यादा मसालेदार चीजें खाने से गला बैठ सकता है। यह चीजें हमारी आवाज को खराब कर देती हैं।

 स्वर-यंत्र में सूजन आने से, जोर-जोर से बोलने से, अधिक खांसी और गले में जख्म आदि कारणों से भी आवाज बैठ जाती है जिसमें रोगी को बोलते समय गले में जलन सी महसूस होती है। गले में कफ (बलगम) रुक जाता है।

शरीर में कमजोरी, खून की कमी, वीर्य आदि के कम हो जाने के कारण भी गले की आवाज खराब हो जाती है।
संपर्क सूत्र -78890 53063

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण