Tuesday, 24 July 2018

सिद्ध वीर्यबर्धक कल्पचुर्ण-वीर्य की समस्या में कारगर


       

वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण मानसिक परेशानी को दूर करता है।
           
             संपूर्ण जानकारी ताहित
         ●वीर्य  शरीर की दुर्लभत शक्ति है।

●जब तक वीर्य शरीर मे गाढ़ा और ताकतवर है,मनुष्य
        (औरत औऱ मर्द) स्वस्थ और ताकतवर है।

●ताकतवर औऱ गाढा वीर्य ही चेहरे की आभा है।

●जब वीर्य पतला और कमजोर हो जाता है या शरीर    वीर्य नही बना पाता तो -शीघ्रपतन, नामर्दी, बच्चों पैदा न करने की ताकत, मनुष्य को क्रोध, गुसा, कही मन न लगना, मन का उताबला पन, शरीर का कमजोर होना, बीमारियों का लगना, आदि लक्षण दिखाई देने लग जाता है।

अच्छा आहार अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।यदि आहार अच्छा नहीं है तो रक्त कम बनेगा। जब रक्त कम बनेगा तो वीर्य भी कम बनेगा। वीर्य कम होने पर काम शक्ति भी कम होगी और कामेच्छा भी। शरीर में शक्ति की कमी होने से भी मस्तिष्क भी सही से काम नहीं करेगा।

      भोजन में निम्न पदार्थों का सेवन
           शरीर में वीर्य  को बढ़ाता है:
1. मिश्री मिला गाय का दूध
2. गाय का धारोष्ण दूध
3. मक्खन, घी
4. चावल व दूध की खीर
5. उड़द की दाल
6. तुलसी के बीज
7. बादाम का हलवा
8. मीठा अनार
9. प्याज, प्याज का रस घी-शहद के साथ
10. तालमखाना
11. खजूर
12. बादाम
     
वीर्य को गाढ़ा करने का भोजन
1. मोचरस
2. सफ़ेद मुसली
3. काली मुसली
4. बबूल का गोंद
5. काले तिल

          धातु की कमजोरी व नपुसकता
             को दूर करने वाले आहार
1. छुहारे को दूध में पकाकर खाना
2. अनार का रस
3. गाय का घी
4. पिस्ता-बादाम, चिलगोजे
5. कस्तूरी
6. केवांच के बीज का चूर्ण
7. अकरकरा
8. सालम मिश्री
9. सोंठ
10. नारियल
11. खीर
12. बादाम का हलवा
13. पिस्ते की बर्फी
ऊपर दिए गए सभी पदार्थ, मीठे, चिकने, बलवर्धक, शक्तिवर्धक, ओज वर्धक, वृष्य और पुष्टिवर्धक हैं। इनका सेवन शरीर को बलवान करता है और वज़न भी बढ़ाता है।
★★★
          सिद्ध आयुर्वेदिक की वीर्य बर्धक दवा
              बलवर्धक और वीर्यवर्धक
                   चांदी भस्म  युक्त
                वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण
           महिलाओं और मर्द दोनों
        की हर कमज़ोरी दूर करता है।
यह हाइपोथेलेमस पर काम करता है। इसके सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन, लुटीनाइज़िंग luteinizing हार्मोन, डोपामाइन, एड्रेनालाईन, आदि में सुधार होता है।

आँवला चुर्ण       200 ग्राम
बरगद फल        100 ग्राम (चुर्ण)
तुलसीबीज        100 ग्राम
बाबुल फली       100 ग्राम (बीज रहित)
सालम पंजा।      100 ग्राम
सालम मिश्री      100 ग्राम
कौंचबीज काला  50 ग्राम
तालमखाना        50 ग्राम
कंदबीज             25 ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 25 ग्राम
चांदी भस्म             2 ग्राम
सभी को मिलाए।
   
रोजाना 5 -5 ग्राम 3 बार हल्के ठंडे दूध के साथ सेवन करे।
***
यह चुर्ण मर्द और महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक है
यह महिलाओं के भी रामबाण योग है।
महिलाओं की हर कमजोरी और सफेद पानी की समस्या को ठीक करता है।
***
शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।

इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।

धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।

यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।

यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।
दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।

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Thursday, 19 July 2018

सिद्ध कायाकल्प भस्म-खूनी बवासीर, मासिक धर्म का ज्यादा आना औऱ खून की गर्मी में कारगर





पेचिश पाचन तंत्र का रोग है जिसमें गंभीर अतिसार (डायरिया) की शिकायत होती है और मल में रक्त एवं म्यूकस आता है में कायाकल्प भस्म कारगर है।
            मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव और
                  खूनी बवासीर में रामबाण

   प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर यह योग

नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर मासिक धर्म में अधिक रक्तस्रावका एक दिन में भी इलाज हो सकता है।

          कैसे बनाए कायाकल्प भस्म

       3 किलोग्राम नारियल की जटा
       300 ग्राम आवला चुर्ण
       100 ग्राम कोंचबीज काला
          50  छोटी इलाची


● नारियल की जटा लीजिए।
● उसे माचिस से जला दीजिए।
● इस मे सभी और सामग्री डाल कर जला दे।
● जलकर भस्म बन जाएगी।
● इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए।
● कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ सिद्ध कायाकल्प भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है।

● ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो।

● कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।

■ यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है।

■ महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है।

■ हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए।


परहेज़

■ दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो बहुत अच्छा रहेगा।

■ अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए।

हम आपके लिए कोने कोने से कुदरत के अनसुने चमत्कारिक नुस्खे ले कर आते हैं, आप इनको आजमायें और फायदा होने पर ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुंचाए।

●विशेष सावधानियां●

                  खूनी बवासीर के लिए

1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।

2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी (जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।

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Monday, 16 July 2018

सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण- डेंगू,टाइफाइड, चिकन पॉक्स, लिवर इंफेक्शन और हर बुख़ार की जबरदस्त औषधि



पुराना बुखार हो कोई भी पीलिया हो ,हर प्रकार की इन्फ़ेक्सन के लिए और निमोनिया में अति उत्तम अयुर्वेदिक औषधि हैं।
          
सफ़ेद रक्त कोशिकाएं( wbc) बढ़ी या घटी हो 30 घंटे में समान्य हो जाती है। पुराने बुखार या 6 दिन से भी ज्यादा समय से चले आ रहे बुखार के लिए गिलोय काढ़ा उत्तम औषधि है। गिलोय काढ़ा भी हम नीचे विस्तार से बता रहे हैं। 

             अज्ञात कारणों से बुखार
ऐसा बुखार जिसके कारणों का पता नहीं चल पा रहा हो उसका उपचार भी गिलोय  काढ़ द्वारा संभव है।
पुररीवर्त्तक ज्वर/Typhus fever में गिलोय की चूर्ण तथा उल्टी के साथ ज्वर होने पर गिलोय का  काढ़ा शहद के साथ रोगी को दिया जाना चाहिए।
🌹🥃🌹
                   काढ़ा कैसे बनाए
                          🥃🥃
6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले
★ गिलोय हरी - 100 ग्राम
★किसमिश     -10 पीस
★छुहारे।         - 5 पीस
★तुलसी पत्ते    -50 पीस
★पपीता पत्ता। -1पीस
★ पिपल पत्ते   -5 पीस
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए। 3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर
1 ग्लास सुबह/1 दुपहरी/1 शाम को ले।
यह क्रिया 3 दिन लगातार करे। यह काढ़ा किसी बुखार में रामबाण है।
★★★★
 गिलोय से बनी बुखार की अयुर्वेदिक औषिध
         सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण
                      🌹💎🌹
टाइफाइड, डेंगू, चिकन गुनिया,दिमागी बुखार, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी सी  हो या डेंगू बुखार हो.... यह दवा रामबाण है यह समान पन्सारी से सुलभ मिल जाता हैं।
            
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  सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण  औषधि यह लाभ करती है- 3 ग्राम दवा 5000 डेंगू cell{ wbc} निर्मित करती है। बढ़े हुए wbc को समानता देती हैं

सिद्ध ज्वर नाशक कल्पचुर्ण -सामग्री
गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
सतावर      100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम

सभी  चूर्ण को मिलाकर 300 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।

सेवन विधि- दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे ।

साथ मे दुध भी जरूर ले । बुखार मे  लगातार 3 दिन दवा ले । हैपेटाटस है तो 21 दिन ले / 21 दिन के बाद टेस्ट कराए।
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Friday, 13 July 2018

सिद्ध घाव नाशक मरहम





         लगभग 25 ग्राम नीम के पत्तों को
         पानी में पीसकर टिक्की बना लें।

     और इस टिक्की को 50 मिलीलीटर
              तिल के तेल में पकायें।

              जब यह टिक्की जल जाये
       तो तेल को छानकर फिर इसमें 6 ग्राम
मोम मिलाकर घोंट लें और मरहम की तरह बना लें।

              इसके बाद इसे फूटे हुए
  फोड़े के घाव पर लगाने से घाव ठीक हो जाता है। इसको हर प्रकार के घाव पर लगाया जा सकता है।

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Thursday, 12 July 2018

सिद्ध कायाकल्प चूर्ण - हिर्दय ब्लॉकइज के लिए





  रोजाना 50  ग्राम अर्जुन छाल का काढ़ा बनाएं ।
             
                ★कैसे बनाएं काढ़ा★

1 लीटर पानी मे 50 ग्राम अर्जुन छाल डाल कर
तब तक पकाएं, जब तक 500 ग्राम न रह जाए।
रोजाना ऐसा काढ़ा बनाना है।

500 ग्राम काढ़े की 3 खुराक बनाकर एक एक चम्मच कायाकल्प चुर्ण दिन में 3 बार ले।

     सुबह -दुहपर-शाम को 3 बार ले।

50 दिन बाद टेस्ट कराए आप को 70 %फायदा होगा।  पूरे 100 दिन प्रयोग करे।

जाने क्या है

                  सदैव युवा रखने वाला,
                 शरीर का पूरा कायाकल्प
                 करने वाला सदाबहार चूर्ण
                          ★★★
            कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
                 को संतुलित करता है।



क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
• शरीर में कहीं भी गाँठ हो तो यह 15 से 50 दिन 90% लाभ होगा।


●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम


सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।


जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।


सेवन विधि - अगर आप बिमार
★★

हार्ट ब्लॉकइज के बारे जाने

हार्ट ब्लॉकेज होने पर व्यक्ति की धड़कने अर्थात Pulses सुचारु तरीके से काम करना बंद कर देती है


 इस प्रकार हार्ट ब्लॉकेज पर व्यक्ति की धड़कने रुक रुक कर चलती है| धड़कनो के रुक रूककर चलने को ही हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

 हार्ट ब्लॉकेज की समस्या कुछ लोगो में जन्मजात होती है, लेकिन कुछ लोगो में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या जन्म के बाद बड़े होने पर विकसित हो जाती है।

जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉकेज कहते है।


और बड़े होने के होने वाली हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को एक्वायर्ड हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

बड़े होने के बाद हार्ट ब्लॉकेज की समस्या खाने पीने की गलत आदतों और खराब जीवन शैली के चलते बढ़ती जा रही है।

★★


              हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण
(Heart Blockage Symptoms in Hindi)

हार्ट ब्लॉकेज की तीन डिग्री होती है और इन डिग्री के आधार पैर ही हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान की जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की पहली डिग्री में किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आता।

हार्ट ब्लॉकेज की दूसरी डिग्री में दिल की धड़कने सामान्य से थोड़ी कम हो जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की तीसरी डिग्री में दिल की धड़कने रुक रूककर धड़कना शुरू कर देती है।

हार्ट ब्लॉकेज के अन्य लक्षण निम्न है –

बार बार चक्कर आना
बार बार सिरदर्द होना
छाती में दर्द होना
सांस फूलना
थकान अधिक होना
बेहोश होना
★★

हार्ट ब्लॉकइज में परहेज


तेल में बने खाद्य पदार्थ
कोल्ड ड्रिंक
डेयरी उत्पाद
धूम्रपान
मक्खन
शराब
घी
★★★

          ★साथ साथ घरेलू नुस्खे जरूर★

★खाने में या सलाद में अलसी के बीजों का इस्तेमाल करें।

★खाने में सामान्य चावल की जगह लाल यीस्ट चावल का इस्तेमाल करें।


◆प्रतिदिन सुबह में 3 से 4 किलोमीटर की सैर करें।

 ★सुबह को लहसुन की एक कली लेने से कोलेस्‍ट्राल कम होता है।

★खाने में बैंगन का प्रयोग करने से कोलेस्‍ट्राल की मात्रा में कमी आती है।

★प्याज अथवा प्याज के रस का सेवन करने से हृदय गति नियंत्रित होती है।

★हृदय रोगी को हरी साग-सब्‍जी जैसे लौकी, पालक, बथुआ और मेथी जैसी कम कैलोरी वाली सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए।

 ★घी, मक्खन, मलाईदार दूध और तली हुई चीजों के सेवन से परहेज करें।


★अदरक अथवा अदरक का रस भी खून का थक्का बनने से रोकने में सहायक होता है।

★शराब के सेवन और धूम्रपान से बचना चाहिए।


★एक कप दूध में लहसुन की तीन से चार कली डालकर उबालें। इस दूध को रोज पीएं।

★एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और गुनगुना रहने पर शहद डालकर पीएं।

★एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस, काली मिर्च और शहद डालकर पीएं।



★दो से तीन कप अदरक की चाय रोजाना पीएं। इसके लिए पानी में अदरक डालकर उबालें और शहद मिलाकर पीएं।

★मेथी दाने को रात भर पानी में भिगाकर, सुबह मेथी चबाकर खायें और बचा हुआ पानी पी जाएं।

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Wednesday, 11 July 2018

अतिबला (खरैटी ) -वीर्य वर्धक महत्वपूर्ण अयुर्वेदिक जड़ी बूटी


सिद्ध आयुर्वेदिक

अतिबला (खरैटी ) की आयुर्वेदिक जानकारी


अतिबला यानी इसे खिरैटी(Kirati) भी कहा जाता है ये पौष्टिक गुणों से भरपूर है ये आयुर्वेद में बाजीकरण के रूप में भी प्रयुक्त की जाती है धातु सम्बंधित रोग में इसका प्रयोग कारगर है ये यौन दौर्बल्य-धातु क्षीणता- नपुंसकता तथा शारीरिक दुर्बलता(Physical infirmity) दूर करने के अलावा अन्य व्याधियों को भी दूर करने की अच्छी औषीधी है-





इसकी और भी कई जातियां हैं पर बला- अतिबला- नागबला- महाबला- ये चार जातियां ही ज्यादा प्रचलित हैं बला चार प्रकार की होती है चारों प्रकार की बला शीतवीर्य-मधुर रसयुक्त-बलकारक-कान्ति-वर्द्धक-वात रक्त पित्त-रक्त विकार और व्रण को दूर करने वाली होती है इसके जड़ और बीज को उपयोग में लिया जाता है-

उपयोग(Use)-

1- शुक्रमेह के लिए खरैटी की ताजी जड़ का एक छोटा टुकड़ा लगभग 5-6 ग्राम एक कप पानी के साथ कूट-पीस और घोंट-छानकर सुबह खाली पेट पीने से कुछ दिनों में शुक्र धातु गाढ़ी हो जाती है और शुक्रमेह होना बंद हो जाता है-

2- महिला को श्वेत प्रदर(Leukorrhea) रोग हो तो बला के बीजों का बारीक पिसा और छना चूर्ण एक एक  चम्मच सुबह-शाम शहद में मिलाकर कर दे और फिर ऊपर से मीठा दूध हल्का गर्म पी लें-

3- शरीरिक कमजोरी के लिए आधा चम्मच की मात्रा में इसकी जड़ का महीन पिसा हुआ चूर्ण सुबह-शाम मीठे हल्के गर्म दूध के साथ लेने और भोजन में दूध-चावल की खीर शामिल कर खाने से शरीर का दुबलापन दूर होता है शरीर सुडौल बनता है सातों धातुएं पुष्ट व बलवान होती हैं तथा बल वीर्य तथा ओज बढ़ता है-

4- खरैटी के बीज और छाल समान मात्रा में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण कर लें तथा  एक चम्मच चूर्ण घी-शकर के साथ सुबह-शाम लेने से वस्ति और मूत्रनलिका की उग्रता दूर होती है और मूत्रातिसार होना बंद हो जाता है-

5- बवासीर के रोगी को मल के साथ रक्त भी गिरे तो इसे रक्तार्श यानी खूनी बवासीर कहते हैं बवासीर रोग का मुख्य कारण खानपान की बदपरहेजी के कारण कब्ज बना रहना होता है बला के पंचांग को मोटा-मोटा कूटकर डिब्बे में भरकर रख लें और प्रतिदिन सुबह एक गिलास पानी में दो चम्मच यानी कि लगभग 10 ग्राम यह जौकुट चूर्ण डालकर उबालें और जब चौथाई भाग पानी बचे तब उतारकर छान लें फिर ठण्डा करके एक कप दूध मिलाकर पी पाएं- इस उपाय से बवासीर का खून गिरना बंद हो जाता है-

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6- अतिबला की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद हो जाता है-

7- अतिबला के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन तीन से चार बार कुल्ला करें ये प्रयोग  रोजाना करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन खत्म होता है-

8- जिनको मासिक धर्म रुक जाता है या अनियमित आता है उनको खिरैटी+ चीनी+मुलहठी+ बड़ के अंकुर+ नागकेसर+ पीले फूल की कटेरी की जड़ की छाल लेकर इनको दूध में पीसकर घी और शहद में मिलाकर कम से कम 15 दिनों तक लगातार पिलाना चाहिए- इससे मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है-

9- अतिबला+कंटकारी+बृहती+वासा (अड़ूसा) के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं फिर इसे 15 से 30 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी ठीक हो जाती है-

10- अतिबला(खिरैटी) के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान  के बाद दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है-


गोक्षुरादि चूर्ण चूर्ण बनाए-

नागबला+अतिबला+कौंच के शुद्ध छिलकारहित बीज+ शतावर+तालमखाना और गोखरू इन सब द्रव्य को बराबर वजन में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण करके मिला लें और छन्नी से तीन बार छान लें ताकि सब द्रव्य अच्छी तरह मिलकर एक जान हो जाएं-



प्रयोग -

यह चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम या रात को सोते समय मिश्री मिले कुनकुने गर्म दूध के साथ पीने से बहुत बलवीर्य और यौनशक्ति की वृद्धि होती है शीघ्रपतन के रोगी पुरुषों के लिए यह योग आयुर्वेद के वरदान के समान है यह योग बना-बनाया बाजार में आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के यहां इसी नाम से मिलता हैं-


सिद्ध आयुर्वेदिक
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण