Wednesday, 31 October 2018

Pcod की समस्या में सिद्ध कायकल्प चुर्ण हैं कारगर।

Pcod की समस्या में महलाओं के लिए रामबाण ओषधि
 सिद्ध कायाकल्प चुर्ण
                  

         एलोवेरा और गिलोय रस युक्त
कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।
           कायाकल्प चुर्ण की सामग्री
गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल चुर्ण    200 ग्राम
अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
कलौंजी -100 ग्राम
नसांदर -100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 50 ग्राम
अजमायण-50 ग्राम
अपामर्ग -50 ग्राम
जटामांसी -50 ग्राम
 सत्यनाशी -50 ग्राम
काला नमक -50 ग्राम
सेंधानमक -50 ग्राम
मलॅठी-20 ग्राम
सौंठ-20 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
ऐलोवैरा रस -500 ग्राम
सभी चूर्ण को 1 किलोग्राम एलोवेरा रस और 400 ग्राम गिलोय रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।
जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।
सेवन विधि - 3 बार दूध से 2 ग्राम (एक चम्मच)
उपयोग करे।

         45 से 90 दिन उपयोग करे
        21 दिन में आप अच्छे होने लगेंगे।
                         ★★★
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन        सिंड्रोम की जानकारी
इस रोग से ग्रस्त महिलयों की ओवारीस में बहुत सारी सिस्ट्स (cysts) अर्थात की झिल्लियाँ पाई जाती हैं।
ये झिल्लियाँ अगर बढ़ कर तैयार अंडकोषों के ऊपर भी बन जाएँ तो इससे मासिक स्राव में रुकावट और बांझपन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
माना जाता है की जो स्त्रीयाँ बहुत अधिक तनावग्रस्त होती हैं या फिर जो रात्रि में ठीक से सो नही पाती है।
उनमें इंसुलिन हॉर्मोन के असंतुलन के साथ-साथ यह बीमारी होने की संभावना भी अधिक होती है.।
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन        सिंड्रोम के कुछ लक्षण
समय पर मासिक धर्म का न आना, बालों का झड़ना और मुँह, कमर, पेट, हाथ, व पैरों पर अधिक बालों का उगना ,चेहरे पर मुहांसों का होना, भावनात्मक उथल-पुथलवज़न का बढ़ना, अनुर्वरता
           कुछ ज़रूरी सुझाव
दिन में 5-6 बार मौसमी ताज़ा फलों ख़ास तौर पर जिनसे शरीर में मीठा अधिक ना बढ़े (चकोतरा, टमाटर, आड़ू, सेब) का सेवन करें.
★यदि आपका मॅन अप्रसन्न रहता है तो ध्यान प्राणायाम और रुचिकार कार्य करने प्रारंभ करें।
अवसाद के रहते यह बीमारी ठीक नही हो पाती।
★देसी गाय के दूध से बने घृत का सेवन करना आवश्यक है।
★घृत कुमारी को सब्जियों में मिलाकर (गोभी, प्याज़) और इसका जूस दिन में एक बार अवश्य लें।
★अधिक चीनी युक्त भोजन और मिठाइयों का सेवन न करें।
★साथ ही तले हुए, मैदा युक्त पदार्थों का सेवन भी अहितकर सिद्ध होगा।
         सिद्ध कायाकल्प चुर्ण
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Wednesday, 24 October 2018

सिद्ध इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन कल्पचुर्ण-समस्त दर्द, गठिया रोगों, कफ़ रोगों, स्तन रोगों,पेट के रोगों में रामबाण

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समस्त दर्द, गठिया रोगों, कफ़ रोगों, स्तन रोगों,पेट के रोगों औऱ आंत के रोगो में सदियों से इन्द्रयाण अजवाइन को अमृत माना जाता रहा है।

कैसे तैयार होती हैं इन्द्रयाण अजवाइन इन्द्रयाण फ़ल में अजवाइन को डाल देते है। 5 किलो अजवाइन में 3 किलो इन्द्रयाण 500 ग्राम काला नमक,काली मिर्च  समेत  7 और अयूर्वादिक जड़ी बूटियों को मिलाकर कर 60 दिन के लिए रख देते हैं।

5 किलो अजवाइन में 3 किलो इन्द्रयाण 500 ग्राम काला नमक,काली मिर्च 

★भूमि आवला          50  ग्राम
★बाकुची                 20  ग्राम
★शुद्ध शिलाजी        10  ग्राम
★काली मिर्च            20  ग्राम
★सफ़ेद जीरा           50  ग्राम
★काला जीरा।          50  ग्राम
★कुडू                     50  ग्राम

60 दिन में इन्द्रयाण अजवाइन तैयार  हो जाती हैं।
इसके बाद आप सिद्ध  इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन कल्पचुर्ण तैयार कर सकते हैं।
सिद्ध  इंद्रायाण(कोड़तुम्बा) अजवाइन कल्पचुर्ण।
       32 जड़ी बूटियां से तैयार होता है
           
सेवन विधि

1.रात को 1चमच्च गर्म पानी से।
2.बच्चों को आधा चम्मच गर्म पानी से दे
3, सर्द ऋतु में 2 बार ले।
4. गर्मी ऋतु में 1 बार ले।

*इसका कोई साइड इफ़ेक्ट नही है।*
*पर गर्भावस्था में यह चुर्ण न ले*

  फायदे
गैस, जिदी कब्ज, जलन, भोजन नली की जलन औऱ सूजन, शरीर के समस्त दर्द, पेट दर्द, हाजमे की खराबी, नाभि का खिसकना, खून की कमी,  लिवर की खराबी, खून की कमी और बच्चों के पेट के कीड़े , पेट की हर खराबी, पेट की सूजन, बच्चेदानी की सूजन,यूरिक एसिड, गठिया वातदर्द, माइग्रेन ,कमरदर्द, घुटनों के दर्द में कारगर ओषधि है।

महिलाओं की पीरियड की कैसी भी समस्या जैसे टाइम पर ना आना, कम आना, पीड़ादायक होना और रुक जाना सभी समस्याएं को ठीक करता है।

       
 Online मंगवा सकते हैं इन्द्रयाण अजवाइन

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Thursday, 18 October 2018

सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण - एक ऐसा योग जो जगाएँ तन मन की शक्ति



                      महाराजा योग
            सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण
          premature ejaculation
।।एक ऐसा योग जो किसी भी उम्र में उपयोग कर सकते है।।


       
    आप को भी आमंत्रण है महाराजा योग का
            वीर्य और बलवर्धक योग
  
शक्राणु ,उतेजना खत्म हो गई हो,शीघ्रपतन, धातु और मर्दाना कमजोरी में ,काम इच्छा का मर जाने में रामबाण 

क्या है नुस्खा
तालमखाने          250 ग्राम
कोंच गिरी            100 ग्राम
सफ़ेद मूसली        100 ग्राम
आवला चुर्ण          100 ग्राम
तुलसी बीज           100 ग्राम
कीकर फली          100 ग्राम
सतावर                 100 ग्राम
सालम मिश्री          100 ग्राम
सालम पंजा           100 ग्राम
बड़ दूध                 100 ग्राम
बारासिंघा सिंधभस्म    5 ग्राम
मिश्री                    150 ग्राम
विदारीकंद               50 ग्राम
शिलाजीत               50 ग्राम
कबाब (शीतल)चीनी 50 ग्राम
हत्था जोरी              20 ग्राम
कतीरा गोंद             20 ग्राम
बबूल का गोंद।        20 ग्राम
सभी को चुर्ण बनाए।

सेवन विधि:- 1-1 चमच्च (5 ग्राम) सुबह और शाम खाने के 1 घंटे बाद मीठे गर्म दूध से ले।

परहेज :- खट्टे सभी पदार्थों से दूर रहे। बिल्कुल सेवन न करे। 21 दिन संभोग क्रिया से परहेज रखे। ब्रह्मचर्य का पालन करे।

नोट
 सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे

जैतून तेल 100 ml
काला तिल तेल 50 ml
बादाम तेल      25 ml
इतर गुलाब 5 ml
दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।
शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी
हमारी गरंटी होगी।

        सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के फ़ायदे
🌹 शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के प्रयोग से शुक्रानुओ में वृद्धि होती है इसका 90 दिन प्रयोग करें। इसको खाने से संतान की प्राप्ति हो सकती है।
🌷 यह योग 20 से 30 मिनट तक timing में ले जाता है।
🌹शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।
🌹यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।
🌹इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।
🌹धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।
🌹यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।
🌹यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।
🌹दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।
🌹यह औरतों के संभोग करने की क्षमता को बढाता है. इसके इलावा  शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण पुरुषों की कामेक्षा बढाने के लिए भी असरदायक है. इन्फर्टिलिटी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, थकान, कमजोरी, लो स्पर्म काउंट और यूरिन की समस्या को दूर करने के लिए लाभकारी है।

                   💎 परहेज 💎

        गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।
ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है!।

वीर्य गाड़ा हो sex timing 20 मिनट होगी।
धातु दवा online भी मंगवा सकते है।
🌹🌷🌹
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Wednesday, 17 October 2018

सिद्ध वातदर्द तेल


           
यह आयुर्वेदिक तेल आप जी घर मे आसानी से बना सकते हैं।

       साइटिका, गठिया का दर्द, कमर का दर्द ,जोड़ों का दर्द और कंधे की जकड़न स्नायू शूल मांशपेशियों का दर्द को सिर्फ़ 1 मिनट में ख़त्म करने का अद्भुत उपाय

शरीर में दर्द होना एक आम समस्या है। लेकिन इसके लिए यह तो जरूरी नहीं है कि आप दर्द निवारक दवाईयों का सेवन करें। भारत में अक्सर देखा गया है कि यदि शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो रहा होता है तो वे तुरंत दर्द नाशक गोलियां खा लेते हैं।

जिसके दुष्प्रभाव उन्हें आगे चलकर झेलने पड़ते हैं। पेन किलर के साइड इफेक्टस होते हैं। इनकी जगह आप अपने घर में दर्द निवारक तेल बनाकर उसकी मालिश कर सकते हो जिससे दर्द पल भर में दूर हो जाएगा और आपको इसका फायदा भी मिलेगा।

आइये जानते हैं दर्द निवारक तेल बनाने का तरीका।

       दर्द नाशक तेल बनाने का तरीका :

1. पहला तरीका : कांच कि शीशी में एक छोटा कपूरए पुदीने का रस एक छोटा चम्मचए एक चम्मच अजवायन को डालकर अच्छे से मिलाएं और इसमें एक चम्मच नीलगिरी का तेल डालकर इसे अच्छे से हिलाएं। अब इस तेल को दर्द वाली जगह पर लगाएं।

2. दूसरा तरीका : तारपीन का तेल 60 ग्राम, कपूर 25 ग्राम। इन दोनों को मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर इसे धूप में रख दें। और समय.समय पर इसे हिलाएं भी। जिससे कि इसमें मौजूद कपूर अच्छे से घुल जाए। अब आपका दर्द निवारक तेल तैयार है।

3. तीसरा तरीका : पचास ग्राम सरसों के तेल को किसी बर्तन में डाल दें। और उसमें दो गांठ छिला और पिसा हुआ लहसुन का पेस्ट और एक चम्मच सेंधा नमक को  डाल कर इसे गैस या चूले पर तब तक पकाते रहें जब तक इसमें मौजूद लहसुन काला न पड़ जाए। फिर बाद में इसे ठंडा करके किसी छोटी बोतल या कांच की शीशी में भर कर रख लें।

इन तीनों तेलों को आप अलग-अलग बनाकर बोतलों या कांच की शीशीयों में भरकर रख लें। ये तेल दर्द निवारक तेल गठिया के दर्द कमर के दर्द जोड़ों के दर्द और शरीर के अन्य किसी हिस्से में होने वाले दर्द में राहत देते हैं।

साइटिका, रिंगन बाय, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न, कमर दर्द के लिए एक अद्भुत तेल।

साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न एक टांग मे दर्द (साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी), गर्दन का दर्द (सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस), कमर दर्द आदि के लिए ये तेल अद्भुत रिजल्ट देता हैं। दर्द भगाएँ चुटकी में एक बार जरूर अपनाएँ। ये चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ “श्री श्याम सुंदर” जी ने अपनी पुस्तक रसायनसार मे लिखी हैं। मैं इस तेल को पिछले 2 सालों से बना रहा हूँ और प्रयोग कर रहा हूँ। कोई भी तेल जैसे महानारायण तेल, आयोडेक्स, मूव, वोलीनी आदि इसके समान प्रभावशाली नहीं है। एक बार आप इसे जरूर बनाए।

आवश्यक सामग्री :

कायफल = 250 ग्राम

तेल (सरसों या तिल का) = 500 ग्राम

दालचीनी = 25 ग्राम

कपूर = 5 टिकिया

कायफल- “यह एक पेड़ की छाल है” जो देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। ये सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर कायफल के नाम से मिलती है। इसे लाकर कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए। जितना महीन/ बारीक पीसोगे उतना ही अधिक गुणकारी होगा।

तेल बनाने की विधि :

एक लोहे/ पीतल की कड़ाही मे तेल गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल का चूर्ण डालते जाएँ। आग धीमी रखें। फिर इसमें दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे। एक कपड़े मे से तेल छान ले। तेल ठंडा हो जाए तब कपड़े को निचोड़ लें। यह तेल हल्का गरम कर फिर उसमें 5 कपूर की टिकिया मिला दे या तेल में अच्छे से कपूर मिक्स हो जाये इसलिए इसका पाउडर बना कर डाले तो ठीक होगा।  इस तेल को एक बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग नीचे बैठ जाएगा। उसके बाद उसे दूसरी शीशी मे डाल ले।

प्रयोग विधि :

अधिक गुणकारी बनाने के लिए इस साफ तेल मे 25 ग्राम दालचीनी का मोटा चूर्ण डाल दे। जो कायफल का चूर्ण तेल छानने के बाद बच जाए उसी को हल्का गरम करके उसी से सेके। उसे फेकने की जरूरत नहीं। हर रोज उसी से सेके।

जहां पर भी दर्द हो इसे हल्का गरम करके धीरे धीरे मालिश करें। मालिश करते समय हाथ का दबाव कम रखें। उसके बाद सेक जरूर करे।

बिना सेक के लाभ कम होता है। मालिस करने से पहले पानी पी ले। मालिश और सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए।

दर्द निवारक तेल बनाने की एक और विधि जो मेरी 70 वर्षीय मासी जी हर चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के बाद थक हार कर नानी माँ के ज्ञानानुसार इस घरेलू तेल का उपयोग कर रही हैं 30 वर्षो से इस तेल का उपयोग कर रही हैं और दर्दनिवारक दवायों से कोषों दूर हैं*साथ ही अपना और हृदयरोग से ग्रसित मौसा जी का देखभाल कर लेती हैं जबकि एलोपैथी चिकित्सा ने 20 साल पहले घुटना बदलने की सलाह दे चुके हैं।

समय के साथ दर्द बर्दाश्त करने की शक्ति रखे अन्यथा स्वास्थ्य व समृद्धि दोनो का नाश हो जाएगा जब दिल सामाज पारिवारिक भौतिक दर्द बर्दाश्त कर सकते हैं तो इसका दर्द क्यों नहीं दर्द निवारक आयुर्वेद होमेओपेथी पंचगव्य या घरेलू ही उपयोग में लायें।

दर्दनिवारक तेल :-

दर्दनिवारक  तेल बनाने की विधि

*500ml तिल का तेल या सरसो तेल
*100gram लहसुन की कली
*50 ग्राम सौठ
*25 ग्राम कच्चा कपूर
*15 ग्राम पीपरमेंट
*अजवायन 2 चम्मच
*मेथी 2 चम्मच
*लौंग 15 20
*दालचीनी 25 ग्राम
*सफेद प्याज 1
*गौमुत्र 100 ml या गौ अर्क 20ml
*बड़ी इलायची 2 pcs
*जवन्तरि  10 ग्राम

सबसे पहले धीमी आंच पर तेल में सभी का पाउडर बनाकर या पेस्ट बनाकर डालकर गर्म करें गर्म होते होते झाग व बुलबुले बनने बन्द हो जाएंगे तो आग को तेज करे जब सभी सुनहरे या काले रंग को हो तो आग बन्द कर दे इस बीच मे* *चलाते रहे । अब कपूर व पीपरमेंट डालकर खूब घोल दे अब छान कर कांच की शीशी में रखे व दर्द होने पर इस्तेमाल करें।

बाजार से शुद्ध व उत्तम कोटि का तेल ।
इस्तेमाल व शेयर करे  साथ ही उपयोग के बाद।अनुभव शेयर करें स्वस्थ व समृद्ध भारत निमार्ण हेतु


कुछ अन्य उपाये करें

दो गेंहूं के दाने के बराबर चुना दूध छोड़कर किसी भी तरल पेय में पथरी की समस्या हो तो न ले।
या
2 चम्मच मेथी रात को एक गिलास पानी मे भिगो दें सुबह इस पानी को पिये व मेथी को चबाकर खाये।
या
हरड़ को गौमुत्र में भिगोकर रातभर के लिए सुबह इसे साँवली छाँव में सुखाकर अरण्ड के तेल में भूनकर पाउडर बनाले इस पाउडर का एक चम्मच या भुने हरड़ का एक पीस भोजन के बाद ले गुनगुने जल के साथ।
या
सुबह प्रतिदिन एक चम्मच अरण्ड का तेल गौमुत्र के साथ सेवन करें।
या
प्रतिदिन एक कप गौमुत्र पिये सर्वरोगनाशक हेतु
या
बराबर मात्रा में मेथी हल्दी सौठ का चूर्ण बनाकर रखे सुबह शाम भोजन के बाद एक चम्मच गर्म जल या गर्म पानी के साथ सेवन करे

जब दर्द बिस्तर पर लेटा कर छोड़ दे आर्थत घुटने बदलने की नौबत आये तब इस दिव्य औषधि का उपयोग करें।

हरसिंगार (पारिजात) के पत्तो की चटनी 2 चम्मच बनाये और एक गिलास पानी मे उबाले जब पानी आधा रह जाये तो इसे रातभर छोड़ दे सुबह इस पानी को पी ले 3 माह लगातार।

     सिद्घ वातदर्द कल्पचुर्ण online मंगवाए।
     निशुल्क आयुर्वेद सलाह के लिए संपर्क करे।
                Call      89680 42263
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण