Saturday, 24 November 2018

सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण-पुराने से पुराने धातु रोग को करे जड़ से खत्म



         मसाने की गर्मी, पेट की गर्मी लाभदायक
     पुराने से पुराने धातु के रोग सपनदोष के लिए
                 कारगर नुस्खा
जाने :
            धत रोग के लक्षण, उपाय,
             और अयूर्वादिक दवा
★★
आज के युग में अनैतिक सोच और अश्लीलता के बढ़ने के कारण आजकल युवक और युवती अक्सर अश्लील फिल्मे देखते और पढते है तथा गलत तरीके से अपने वीर्य और रज को बर्बाद करते है! अधिकतर लड़के-लड़कीयां अपने ख्यालों में ही शारीरिक संबंध बनाना भी शुरू कर देते है!


जिसके कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजना की अवस्था में बना रहता है, और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी शुरू हो जाती है! और ऐसा अधिकतर होते रहने पर एक वक़्त ऐसा भी आता है! जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है और किसी लड़की का ख्याल मन में आते ही उनका लेस (वीर्य) बाहर निकल जाता है, और उनकी उत्तेजना शांत हो जाती है! ये एक प्रकार का रोग है जिसे शुक्रमेह कहते है!


वैसे इस लेस में वीर्य का कोई भी अंश देखने को नहीं मिलता है! लेकिन इसका काम पुरुष यौन-अंग की नाली को चिकना और गीला करने का होता है जो सम्बन्ध बनाते वक़्त वीर्य की गति से होने वाले नुकसान से लिंग को बचाता है!

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धात रोग का प्रमुख कारण क्या है?
अधिक कामुक और अश्लील विचार रखना!
मन का अशांत रहना!

अक्सर किसी बात या किसी तरह का दुःख मन में होना!

दिमागी कमजोरी होना!

व्यक्ति के शरीर में पौषक पदार्थो और तत्वों व विटामिन्स की कमी हो जाने पर!

किसी बीमारी के चलते अधिक दवाई लेने पर
व्यक्ति का शरीर कमजोर होना और उसकी प्रतिरोधक श्रमता की कमी होना!

अक्सर किसी बात का चिंता करना।
पौरुष द्रव का पतला होना।

यौन अंगो के नसों में कमजोरी आना।
अपने पौरुष पदार्थ को व्यर्थ में निकालना व नष्ट करना (हस्तमैथुन अधिक करना)।

            ★धात रोग के लक्षण क्या है?★
मल मूत्र त्याग में दबाव की इच्छा महसूस होना! 

धात रोग का इशारा करती है!

लिंग के मुख से लार का टपकना!

पौरुष वीर्य का पानी जैसा पतला होना!

शरीर में कमजोरी आना!

छोटी सी बात पर तनाव में आ जाना!

हाथ पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन या कपकपी होना!

पेट रोग से परेशान रहना या साफ़ न होना, कब्ज होना!

सांस से सम्बंधित परेशानी, श्वास रोग या खांसी होना!
शरीर की पिंडलियों में दर्द होना!

कम या अधिक चक्कर आना!

शरीर में हर समय थकान महसूस करना!

चुस्ती फुर्ती का खत्म होना!

मन का अप्रसन्न रहना और किसी भी काम में मन ना लगना इसके लक्षणों को दर्शाता है!

★★★
नुस्खे

शतावरी मुलहठी ( Asparagus Liquorices ) :
50 ग्राम शतावरी, 50 ग्राम मुलहठी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज, 25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम शीतलचीनी और 4 ग्राम बंगभस्म, 50 ग्राम सालब मिसरी लेकर इन सभी सामग्रियो को सुखाकर बारीक पिस लें!
पीसने के बाद इसमे 60 ग्राम चाँदी का वर्क मिलाएं और प्राप्त चूर्ण को (60 ग्राम ) सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लें!

        ■धातु  पुष्टि कल्पचुर्ण■

कौंचबीज बीज 100 ग्राम
शीतल चीनी     100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
बड़ दूध            100 ग्राम
सालम पंजा       100 ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
मिश्री              100  ग्राम

50 ग्राम मुलहठी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज,
सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।

कैसे सेवन करे।

दिन में 2 बार 1-1चमच्च पानी या कोसे दूध से ले।

कम से कम 21 दिन कोर्स करे।
सपनदोष नही होगा
धातु रोग जड़ से खत्म होगा
★★
परहेज :
        गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।
ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है!।
वीर्य गाड़ा हो sex timing 20 मिनट होगी।
धातु दवा online भी मंगवा सकते है।।

Whats करे    9417862263

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण