Monday, 12 February 2018

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

इस दवा से चेहरे का कालापन,पीपल्स ,फुंसी, झाईयां, आँखों के नीचे काला घेरा, कब्ज से होने वाले रोग,और खून की खराबी से होने वाले रोग ठीक होते हैं।

रक्त विकार अर्थात खून में दूषित द्रव्य बनना। खून में दूषित द्रव्य बनने के कई कारण होते हैं।

सूक्ष्म कीटाणु फैलने के कारण यह रोग होता है। जब किसी रोगी का खून दूषित हो जाता है तो फुंसियां हो जाती हैं। किसी को फोड़े निकल आते हैं।

किसी को ऐसे फोड़े हो जाते हैं जो किसी साधारण दवा से ठीक ही नहीं होता।

 इस तरह विभिन्न कारणों से उत्पन्न रक्त विकार को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करने से लाभ होता है।

आइये जाने रक्त विकार(खून की खराबी)को दूर करने के घरेलू उपाय

उपाय :
पहला प्रयोगः दो तोला काली द्राक्ष (मुनक्के) को 20 तोला पानी में रात्रि को भिगोकर सुबह उसे मसलकर 1 से 5 ग्राम त्रिफला के साथ पीने से कब्जियत, रक्तविकार, पित्त के दोष आदि मिटकर काया कंचन जैसी हो जाती है।

दूसरा प्रयोगः बड़ के 5 से 25 ग्राम कोमल अंकुरों को पीसकर उसमें 50 से 200 मि.ली. बकरी का दूध और उतना ही पानी मिलाकर दूध बाकी रहे तब तक उबालकर, छानकर पीने से रक्तविकार(Blood Disorders) मिटता है।

          सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

त्रिफला 200 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
अजवायन 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
आँवला 50 ग्राम
चरायता 50 ग्राम
हल्दी 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्राम
सौंफ 50 ग्राम
काला नमक 50 ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सुबह-शाम पानी या दूध के 1 चमच्च लेते रहे।
21 दिन लगातार सेवन करें।

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★भारती सभी वैद इसका उपयोग करते रहे हैं★
खून की खराबी में होने वाले रोगों में यह दवा रामबाण है।
नीचे लिखे सभी रोग खून की अशुद्धि के कारण होते हैं। यह दवा सभी को ठीक करती हैं।

–चेहरे पर फुंसियाँ और दाने और कील-मुँहासे

–त्वचा पर चकते और धब्बे, चेहरे समेत

–एलर्जी और संक्रमण (ख़ास तौर पर त्वचा का)

–चेहरे पर झुर्रियाँ

–त्वचा पर चकते और जलन फोड़े और फुंसियाँ, या अन्य त्वचा रोग,

–सिर चकराना और सिर में दर्द

–बाल झड़ना

–आँखें कमजोर हो जाना

–सांसों की बदबू

–श्वास प्रणाली से जुड़ी समस्याएँ

यह सभी रोग आसानी से दूर होंगे।

सिद्ध अयूर्वादिक
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण