Sunday, 4 March 2018

सिद्ध लकवा नाशक कल्पचुर्ण

       
सिद्ध अयूर्वादिक

           अधरंग, पक्षाघात (लकवा)
               की अयूर्वादिक दवा
            सिद्ध लकवा नाशक कल्पचुर्ण

किसी भी प्रकार लकवा  मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, शरीर के एक तरफ का लकवा, सकम्प लकवा 
सभी के लिए यह दवा कारगर है।
कुटकी          250 ग्राम
त्रिफला        100 ग्राम
अजवाइन     100 ग्राम
गिलोय         100 ग्राम
चरायता        50 ग्राम
करेला चुर्ण    50 ग्राम
तुसली पंचाग 50 ग्राम
सोंठ भुनी      50 ग्राम
अकरकरा      50 ग्राम
राई               50 ग्राम
सर्पगंधा        50 ग्राम
शुद्ध गुग्गुल   50 ग्राम
दालचीनी     50 ग्राम
कलौंजी       50 ग्राम
तिल काले    50 ग्राम
कालीमिर्च    50 ग्राम
अजमोद     25 ग्राम
सौंफ           25 ग्राम
बबूना          25 ग्राम
बालछड़       25 ग्राम
नकछिनी      25 ग्राम 
जायफल       25 ग्राम
पिपली          25 ग्राम
काला नमक  50 ग्राम


सभी को चुर्ण बनाकर 300 ग्राम ताजा एलोवेरा रस 
में मिला ले। 5 दिन सायं में सुखाए।
आप तुरंत भी उपयोग कर सकते हैं।
इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है।
◆◆
सेवन विधि-1 चम्मच चुर्ण को 50 मिलीलीटर एलोवेरा
ताजा रस को 200 ग्राम मिलाकर सेवन करे।
दिन में 4 बार पहले 15 दिन ले।
15 दिन बाद दिन 3 बार ले।
फिर
15 दिन बाद 2 बार लेते रहे ।
90 दिन पूरा कोर्स करे।
पुराना लकवा भी ठीक होगा
★★
लकवा तेल बनाए

तिल का तेल।       50 ग्राम
निर्गुण्डी का तेल   50 ग्राम
अजवायन का तेल 50 ग्राम
बादाम का तेल       50 ग्राम
सरसों का तेल        50 ग्राम
विषगर्भ तेल           50 ग्राम
कलौजी तेल           50 ग्राम
10 ग्राम लहसुन,5 ग्राम बारीक पीसी हुई अदरक, 10 ग्राम काली उडद की दाल  50 ग्राम कपूर टिकी तेल में मिलाकर 5 मिनट तक गर्म करें। 

इस तेल से दिन में 5 बार मालिश करते रहे
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      ★अयूर्वादिक लकवा दवा के फायदे★

लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
यह भूख ,नींद औऱ शरीरक कमजोरी को दूर करेगी।
★★★
रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
यह अयूर्वादिक दवा शून्यता को दूर कर अंग में हरक़त कायम करती।
★★★
                 ★लकवा रोगी ध्यान दे★

दवा के साथ आप इस बात पर ध्यान दे आप जल्दी बीमारी से छुटकारा पा लेंगे।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

★★★

      ★लकवा में इन चीजों से बचकर ही रहे★

इस रोग में नमक बहुत कम या बिलकुल न लेना अच्छा होता हैं. आरम्भ में भोजन में अन्न लेना भी ठीक नहीं. लकवा के रोगी को चाय, चीनी, तालीभुनि चीजें, नशे की चीजें, मसाले आदि उत्तेजक खाद्य से परहेज करना चाहिए. उसे ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

मानसिक उद्वेगों चिंता क्रोध तथा भय से बचना चाहिए. उसे न तो ठंडा पानी पीना चाहिए और न ठन्डे पानी से स्नान ही करना चाहिए. नया चावल, कुम्हड़ा, गूढ़, भैंस का दूध, उड़द की दाल, घुइया, भिंडी, रतालू, तरबूज, बासी ठंडी, चीजें, रात्रि जागरण, पाखाना-पेशाब रोकना, बर्फ का सेवन आदि इस रोग में वर्जित हैं.
★★★

★लकवा में दवा के साथ साथ उपवास करे ★
              डबल फायदा होगा

उपवास के दिनों में केवल जल अथवा कागजी नीबू का रस मिले जल के सिवा कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए. उन दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके 2-3 सेर या अधिक पानी रोज जरूर पीना चाहिए. जिस दिन उपवास किया जाए, उस दिन शाम को और फिर उपवास काल में रोज सबेरे या शाम को दिन में एक बार सेर डेढ़ सेर गुन-गुने पानी का एनिमा जरूर लेना चाहिए.

अगर एक दिन का उपवास किया जाए तो दूसरे दिन फल खाने के बाद, तीसरे दिन भोजन किया जा सकता हैं. अगर तीन दिन का उपवास किया जाए तो चौथे दिन केवल फल या तरकारियों का सूप पांचवे दिन फल और छठे दिन सुबह शाम को फल और दोपहर को थोड़ी रोटी और सब्जी लेनी चाहिए. फिर साधारण भोजन पर आ जाना चाहिए।

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सिद्ध अयूर्वादिक
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