Saturday, 14 April 2018

सिद्ध पित्त ज्वर नाशक कल्पचुर्ण



गिलोय 100 ग्राम
नागरमोथा 50 ग्राम
धनिया 30  ग्राम
मुलहठी 30 ग्राम
चिरायता 30 ग्राम



सभी को चुर्ण बनाए कर दिन में 3 बार बकरी दूध या पानी से उपयोग करे।

3 खुराक ही पित्त ज्वर को शांत कर देती हैं।

7 दिन दवा का सेवन करे।


गिलोय के शर्बत में चीनी डालकर पीने से पित्त बुखार ठीक हो जाता है।


   पित्त गर्मी का ही अंश है। पित्त ठंड़ी शीतल वस्तुओं से शान्त होता है। इसमें नाड़ी मेढ़क या कौए की तरह कूद-कूदकर चलती है।

कारण

          नमकीन, खट्टे, गरम, तीखे और गरिष्ठ पदार्थों को ज्यादा खाने से या ज्यादा खाना, ज्यादा मेहनत, तेज धूप या आग के सामने बैठना और ज्यादा क्रोध यानी गुस्सा करने से भी इसका बुखार हो सकता है।

पित्त ज्वर के लक्षण :

          पित्त बुखार काफी तेज रहता है। इस बुखार में शरीर ठंड़ा रहता है। पसीना ज्यादा आता है। आंखों और त्वचा का रंग पीला हो जाता है और मल पीले रंग का पतला या गाढ़ा हो जाता है।

पेशाब का रंग पीला हो जाता है।

दिमाग में गर्मी के बढ़ने पर बकवाद पैदा करता है। भूख को रोक देता है। मुंह का स्वाद कड़वा होता है। मुंह के अन्दर काफी कफ हो जाता है, खांसी, भूख न लगना, प्यास, आलस्य, बेहोशी, बार-बार कभी गर्मी कभी सर्दी लगना, हाथ-पैरों और सिर में दर्द, आंखों में जलन, किसी काम में मन न लगना और भ्रम जैसे लक्षण होते हैं। इसमें नाड़ी कभी ठंड़ी कभी कम ठंड़ी और पतली छोटी हो जाती है तथा हल्की गति से चलती है।*


               
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण