Wednesday, 17 October 2018

सिद्ध वातदर्द तेल


           
यह आयुर्वेदिक तेल आप जी घर मे आसानी से बना सकते हैं।

       साइटिका, गठिया का दर्द, कमर का दर्द ,जोड़ों का दर्द और कंधे की जकड़न स्नायू शूल मांशपेशियों का दर्द को सिर्फ़ 1 मिनट में ख़त्म करने का अद्भुत उपाय

शरीर में दर्द होना एक आम समस्या है। लेकिन इसके लिए यह तो जरूरी नहीं है कि आप दर्द निवारक दवाईयों का सेवन करें। भारत में अक्सर देखा गया है कि यदि शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो रहा होता है तो वे तुरंत दर्द नाशक गोलियां खा लेते हैं।

जिसके दुष्प्रभाव उन्हें आगे चलकर झेलने पड़ते हैं। पेन किलर के साइड इफेक्टस होते हैं। इनकी जगह आप अपने घर में दर्द निवारक तेल बनाकर उसकी मालिश कर सकते हो जिससे दर्द पल भर में दूर हो जाएगा और आपको इसका फायदा भी मिलेगा।

आइये जानते हैं दर्द निवारक तेल बनाने का तरीका।

       दर्द नाशक तेल बनाने का तरीका :

1. पहला तरीका : कांच कि शीशी में एक छोटा कपूरए पुदीने का रस एक छोटा चम्मचए एक चम्मच अजवायन को डालकर अच्छे से मिलाएं और इसमें एक चम्मच नीलगिरी का तेल डालकर इसे अच्छे से हिलाएं। अब इस तेल को दर्द वाली जगह पर लगाएं।

2. दूसरा तरीका : तारपीन का तेल 60 ग्राम, कपूर 25 ग्राम। इन दोनों को मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर इसे धूप में रख दें। और समय.समय पर इसे हिलाएं भी। जिससे कि इसमें मौजूद कपूर अच्छे से घुल जाए। अब आपका दर्द निवारक तेल तैयार है।

3. तीसरा तरीका : पचास ग्राम सरसों के तेल को किसी बर्तन में डाल दें। और उसमें दो गांठ छिला और पिसा हुआ लहसुन का पेस्ट और एक चम्मच सेंधा नमक को  डाल कर इसे गैस या चूले पर तब तक पकाते रहें जब तक इसमें मौजूद लहसुन काला न पड़ जाए। फिर बाद में इसे ठंडा करके किसी छोटी बोतल या कांच की शीशी में भर कर रख लें।

इन तीनों तेलों को आप अलग-अलग बनाकर बोतलों या कांच की शीशीयों में भरकर रख लें। ये तेल दर्द निवारक तेल गठिया के दर्द कमर के दर्द जोड़ों के दर्द और शरीर के अन्य किसी हिस्से में होने वाले दर्द में राहत देते हैं।

साइटिका, रिंगन बाय, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न, कमर दर्द के लिए एक अद्भुत तेल।

साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न एक टांग मे दर्द (साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी), गर्दन का दर्द (सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस), कमर दर्द आदि के लिए ये तेल अद्भुत रिजल्ट देता हैं। दर्द भगाएँ चुटकी में एक बार जरूर अपनाएँ। ये चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ “श्री श्याम सुंदर” जी ने अपनी पुस्तक रसायनसार मे लिखी हैं। मैं इस तेल को पिछले 2 सालों से बना रहा हूँ और प्रयोग कर रहा हूँ। कोई भी तेल जैसे महानारायण तेल, आयोडेक्स, मूव, वोलीनी आदि इसके समान प्रभावशाली नहीं है। एक बार आप इसे जरूर बनाए।

आवश्यक सामग्री :

कायफल = 250 ग्राम

तेल (सरसों या तिल का) = 500 ग्राम

दालचीनी = 25 ग्राम

कपूर = 5 टिकिया

कायफल- “यह एक पेड़ की छाल है” जो देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। ये सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर कायफल के नाम से मिलती है। इसे लाकर कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए। जितना महीन/ बारीक पीसोगे उतना ही अधिक गुणकारी होगा।

तेल बनाने की विधि :

एक लोहे/ पीतल की कड़ाही मे तेल गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल का चूर्ण डालते जाएँ। आग धीमी रखें। फिर इसमें दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे। एक कपड़े मे से तेल छान ले। तेल ठंडा हो जाए तब कपड़े को निचोड़ लें। यह तेल हल्का गरम कर फिर उसमें 5 कपूर की टिकिया मिला दे या तेल में अच्छे से कपूर मिक्स हो जाये इसलिए इसका पाउडर बना कर डाले तो ठीक होगा।  इस तेल को एक बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग नीचे बैठ जाएगा। उसके बाद उसे दूसरी शीशी मे डाल ले।

प्रयोग विधि :

अधिक गुणकारी बनाने के लिए इस साफ तेल मे 25 ग्राम दालचीनी का मोटा चूर्ण डाल दे। जो कायफल का चूर्ण तेल छानने के बाद बच जाए उसी को हल्का गरम करके उसी से सेके। उसे फेकने की जरूरत नहीं। हर रोज उसी से सेके।

जहां पर भी दर्द हो इसे हल्का गरम करके धीरे धीरे मालिश करें। मालिश करते समय हाथ का दबाव कम रखें। उसके बाद सेक जरूर करे।

बिना सेक के लाभ कम होता है। मालिस करने से पहले पानी पी ले। मालिश और सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए।

दर्द निवारक तेल बनाने की एक और विधि जो मेरी 70 वर्षीय मासी जी हर चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के बाद थक हार कर नानी माँ के ज्ञानानुसार इस घरेलू तेल का उपयोग कर रही हैं 30 वर्षो से इस तेल का उपयोग कर रही हैं और दर्दनिवारक दवायों से कोषों दूर हैं*साथ ही अपना और हृदयरोग से ग्रसित मौसा जी का देखभाल कर लेती हैं जबकि एलोपैथी चिकित्सा ने 20 साल पहले घुटना बदलने की सलाह दे चुके हैं।

समय के साथ दर्द बर्दाश्त करने की शक्ति रखे अन्यथा स्वास्थ्य व समृद्धि दोनो का नाश हो जाएगा जब दिल सामाज पारिवारिक भौतिक दर्द बर्दाश्त कर सकते हैं तो इसका दर्द क्यों नहीं दर्द निवारक आयुर्वेद होमेओपेथी पंचगव्य या घरेलू ही उपयोग में लायें।

दर्दनिवारक तेल :-

दर्दनिवारक  तेल बनाने की विधि

*500ml तिल का तेल या सरसो तेल
*100gram लहसुन की कली
*50 ग्राम सौठ
*25 ग्राम कच्चा कपूर
*15 ग्राम पीपरमेंट
*अजवायन 2 चम्मच
*मेथी 2 चम्मच
*लौंग 15 20
*दालचीनी 25 ग्राम
*सफेद प्याज 1
*गौमुत्र 100 ml या गौ अर्क 20ml
*बड़ी इलायची 2 pcs
*जवन्तरि  10 ग्राम

सबसे पहले धीमी आंच पर तेल में सभी का पाउडर बनाकर या पेस्ट बनाकर डालकर गर्म करें गर्म होते होते झाग व बुलबुले बनने बन्द हो जाएंगे तो आग को तेज करे जब सभी सुनहरे या काले रंग को हो तो आग बन्द कर दे इस बीच मे* *चलाते रहे । अब कपूर व पीपरमेंट डालकर खूब घोल दे अब छान कर कांच की शीशी में रखे व दर्द होने पर इस्तेमाल करें।

बाजार से शुद्ध व उत्तम कोटि का तेल ।
इस्तेमाल व शेयर करे  साथ ही उपयोग के बाद।अनुभव शेयर करें स्वस्थ व समृद्ध भारत निमार्ण हेतु


कुछ अन्य उपाये करें

दो गेंहूं के दाने के बराबर चुना दूध छोड़कर किसी भी तरल पेय में पथरी की समस्या हो तो न ले।
या
2 चम्मच मेथी रात को एक गिलास पानी मे भिगो दें सुबह इस पानी को पिये व मेथी को चबाकर खाये।
या
हरड़ को गौमुत्र में भिगोकर रातभर के लिए सुबह इसे साँवली छाँव में सुखाकर अरण्ड के तेल में भूनकर पाउडर बनाले इस पाउडर का एक चम्मच या भुने हरड़ का एक पीस भोजन के बाद ले गुनगुने जल के साथ।
या
सुबह प्रतिदिन एक चम्मच अरण्ड का तेल गौमुत्र के साथ सेवन करें।
या
प्रतिदिन एक कप गौमुत्र पिये सर्वरोगनाशक हेतु
या
बराबर मात्रा में मेथी हल्दी सौठ का चूर्ण बनाकर रखे सुबह शाम भोजन के बाद एक चम्मच गर्म जल या गर्म पानी के साथ सेवन करे

जब दर्द बिस्तर पर लेटा कर छोड़ दे आर्थत घुटने बदलने की नौबत आये तब इस दिव्य औषधि का उपयोग करें।

हरसिंगार (पारिजात) के पत्तो की चटनी 2 चम्मच बनाये और एक गिलास पानी मे उबाले जब पानी आधा रह जाये तो इसे रातभर छोड़ दे सुबह इस पानी को पी ले 3 माह लगातार।

     सिद्घ वातदर्द कल्पचुर्ण online मंगवाए।
     निशुल्क आयुर्वेद सलाह के लिए संपर्क करे।
                Call      89680 42263
                Whats 94178 62263

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण