Tuesday, 29 January 2019

मंदाग्नि के 103 रोग-मंदाग्नि से होते हैं 103 हानिकारक रोग


   
पेट के हाजमे की अग्नि जब मध्म पड़ जाती है तो अनेकों रोगों का शरीर पर हमला होने लग जाता है।


सिद्ध आयुर्वेदिक आप को कर रहा है जागृत मंदाग्नि को दरुस्त करता है
              सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

       मंदाग्नि रोगों की संपूर्ण जानकारी

आयुर्वेद में बताया गया है कि मंदाग्नि (मन्द अगनी) से 103 प्रकार के रोग होते है, जिसमे पहले स्थान पर एसिडिटी और एक सौ तीन स्थान पर कैंसर को रखा गया है।

ये सूची यहाँ देने का प्रयास कर रही हूँ।
1. हाइपर एसिडिटी
2. जल्दी-जल्दी भूख लगना
3. भोजन के 4 घंटे बाद या खाली पेट जलन
4. अत्यधिक प्यास
5. हर समय मुँह सुखना
6. मसूढ़ो में संवेदनशीलता
7. लार का खट्टा होना
8. दाँतो में ढीलापन
9. होठो के किनारे फटना
10. दाँतो में ठंडा गर्म लगना
11. दाँतो का फटना या टुकड़ो में निकलना
12. दाँतो की नसों में दर्द
13. गले या टॉन्सिल का बार बार संक्रमण
14. अम्ल का मुँह में आना
15. अल्सर
16. खट्टी डकार
17. उदर के ऊपरी भाग में दर्द
18. बहुत ज्यादा गर्मी लगना या जलन होना
19. थकान, हाथ पैरो में भारीपन, मानसिक शक्ति का ह्रास
20. शरीर छूने से बुखार की अनुभूति
21. प्रसन्नता व उत्साह की कमी
22. अवसादित होने की प्रवृति
23. बिना कारण घबराहट, व्याकुलता, तेज शोरगुल में चिड़चिड़ाहट
24. अत्यधिक रक्तहीन चेहरा
25. सिरदर्द
26. आसानी से बातो बातो में आँसू आजाना
27. आँखों में सूजन, लाली, दर्द, जलन, गड़न
28. पलको एवं कोर्निया में प्रदाह
29. बालो का घुँघराले होना
30. नाख़ून पतले होना, जल्दी टूट जाना
31. रूखी त्वचा
32. बाल घुँघराले, बेजान, झड़ते
33. शरीर पर पसीने से खुजली
34. पित्ती उछलना
35. पिण्डलियों में बायटे आना, ऐंठन
36. झाईयां
37. कान में दर्द
38. आवाज़ में बदलाव
39. बैचैनी
40. कब्ज
41. ऑस्टियो ऑर्थोरिटिस
42. यूरिक एसिड बढ़ना
43. CRP बढ़ना
44. मासपेशियो में ऐंठन
45. पैर के बाहरी भाग में दर्द
46. अमाशय या अन्न नली में दर्द या घाव
47. बवासीर
48. भगन्दर
49. फिशर
50. गैस्ट्रिक

(वायु बनकर शरीर में घूमने से)

51. पेट में जलन
52. गले में जलन
53. छाती में जलन जैसे heart attack हो
54. सिर दर्द या भारीपन
55. चक्कर
56. कान में घंटियाँ बजना
57. हाई बी पी
58. सिर में भ्रम की स्थिति, समझ न आना
59. बालो का झड़ना
60. बालो का सफ़ेद होना या पकना
61. पीठ दर्द
62. धड़कन बढ़ना
63. पायरिया
64. मुँह में दुर्गन्ध
65. भूख न लगना
66. प्यास न लगना
67. खट्टी / कच्ची डकार
68. मितली होना
69. मल में गंध
70. पेट में भारीपन
71. अफारा
72. शुगर
73. ढीले मसूड़े
74. मसूढ़ो के किनारे सफ़ेद या हरी परत
75. मल थोड़ा पतला, लेकिन मुश्किल से निकले
76. उल्टी होने, करने के बाद हल्का महसूस होना
77. अनिद्रा
78. कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
79. बॉडी का फूल जाना मोटा हो जाना
80. पैरो में चलने पर दर्द
81. मसूढ़ो से खून आना

(कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से होने वाले रोग)

82. रक्त वाहिनियों में अवरोध
83. हृदयाघात
84. रक्त वाहिनियों का का संकरा होना
85. धमनियों में थक्के जमना
86. अत्यधिक बलगम
87. साँस लेने में कठिनाई
88. सीने में भारीपन
89. धमनियों में कड़कपन
90. किडनी से जुडी हुई बीमारियाँ
91. मस्तिष्क में ब्लड सप्लाई अवरोध होने से भूलने की समस्या
92. शरीर में जगह जगह गाँठे
93. हर्निया
94. गर्भाशय का स्थान से नीचे लटक जाना
95. हाथ पैर पतले होना
96. आंतरिक या बाहरी रक्त स्त्राव
97. आँखों का कमजोर होना
98. आँखों के सामने कुछ उड़ता प्रतीत होना
99. मुँह में कफ़ ज्यादा आना
100. पसीने में बदबू
101. मल मूत्र ज्यादा होना, मल लेसदार होना
102. हाथ पैरो में फड़कन
103. शरीर में होने वाला कैंसर

103 रोगों को सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण जड़ से करता है खत्म

      सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण online मंगवाएं
               
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Wednesday, 23 January 2019

सिद्ध नारी पीरियड कल्पचुर्ण

सिद्ध नारी पीरियड कल्पचुर्ण




             *सिद्ध नारी पीरियड कल्पचुर्ण*
पीरियड को जल्दी लाने, बंद होने पर, कष्ट पूर्ण होने पर, शरीर कष्ट होने पर और अनिमियत पीरियड में कारगर और 100% लाभदायक।

नारी पीरियड कल्पचुर्ण
गिलोय चूर्ण 10 ग्राम 
आंवला चूर्ण 10 ग्राम 
छोटी हरड़ 10 ग्राम 
तुलसी पाचांग-10 ग्राम  
चरायता चूर्ण 10 ग्राम 
तिल काले 10 ग्राम
अलसी 10 ग्राम
अजमायण-10 ग्राम 
मलॅठी-10 ग्राम 
सौंठ-20 ग्राम 
काली मिर्च -10 ग्राम 
सभी चुर्ण को 50 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे।चुर्ण बना कर दिन में 3 या 4 बार गर्म  दूध से सेवन करे।
                   ★फायदे★
★इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है★
★ 3 दिन में पीरियड आ जाता है
★अगर पीरियड बंद हो गए हो 21 दिन दवा ले।
★पीरियड जल्दी आएगा।
★पीरियड में दर्द नही होगा।
★कमजोरी और सुस्ती नही पड़ेगी।
★अगर गर्भ ठहर गया है तो पुरियड बिन दर्द के आएगा।
★पीरियड दौरान गुसा नही आएगा
★खून की कमी ठीक होगी।

       ★अगर यह समान आप को न मिले तो ★
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         ★यह दवा  कभी खराब नही होती ।★
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                       ★★★★★
              पीरियड्स जल्दी लाने के
        लिए अयूर्वादिक उपाय क्या हैं ?
                      ★★★★
       ★गिलोय काढ़ा साथ जरूर ले★
                           
                    ★कैसे बनाए काढ़ा★
★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★छोटी हरड़ 4 पीस
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★शहद 5 चम्मच
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।
3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।
यह क्रिया 3 दिन लगातार करे।
पीरियड 3 दिन पका आ जाएगा
मासिक धर्म के रुक जाने का कारण
शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी – इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|
मासिक धर्म के रुक जाने की पहचान
गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|
                   
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Tuesday, 22 January 2019

सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण


           


एक ऐसा पाचन रोग जिसमें पेट के एसिड या पित्त के कारण खाने की नली की अंदरूनी परत में जलन होती है.

यह एक लंबे समय का रोग है जो तब होता है जब पेट का एसिड या पित्त खाने की नली में आ जाता है और उसकी अंदरूनी परत में जलन करता है. एसिड का ऊपर आना और सीने में जलन अगर सप्ताह में दो बार होती है तो यह गर्ड का लक्षण हो सकता है.

लक्षणों में शामिल हैं सीने में जलन जो आमतौर पर खाने के बाद होती है और लेटने पर हालत बिगड़ जाती है.

दस्त, पेट में जलन, पतले दस्त का आना, मल त्यागने में गुदा प्रदेश में जलन महसूस हो तो कारगर है *सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण*

आयुर्वेद में एसिडिटी को अम्ल पित्त कहते हैं। इसमें खट्टे डकार आ सकते हैं, छाती में जलन महसूस हो सकती है, उल्टी की प्रवृति दिखती है
क्योंकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतें हमें कई रोगों की तरफ धकेल रही हैं। हमारी दिनचर्या आरामदेह हो गई है और खाने में स्वस्थ खाने की जगह पिज़्ज़ा, बर्गर और सोडा कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली है।

एसिड रिफ्लक्स भी ऐसा ही एक रोग है, जो हमारे खान-पान और रहन-सहन की गलत आदतों के कारण होता है। पेट के अंदर गई हुई चीज़ों का वापस खाने की नली  में आना एसिड रिफ्लक्स (acid reflux) कहलाता है।

कभी- कभार, बहुत थोड़ी मात्रा में पेट की चीज़ों का खाने की नली में वापस आना आम बात है, लेकिन ऐसा बार-बार और अधिक मात्रा में होना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

●इसे हार्टबर्न (heartburn),
●एसिड इनडाइजेशन (acid indigestion),
●गेस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लक्स डिसीज (gastrooesophageal reflux disease/GERD/GORD)
या
●पाईरोसिस (pyrosis) के नाम से भी जाना जाता है।
       क्या हैं एसिड रिफ्लक्स के मुख्य कारण ?
*अनियमित और असंतुलित आहार
*निष्क्रिय जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)
*मोटापा (Obesity)
*हर्निया (hiatal hernia)
*स्मोकिंग (Smoking)
*नमक और नमक युक्त खाने का अत्यधिक प्रयोग
*गर्भावस्था (Pregnancy)
*बुढ़ापा
*अत्यधिक चाय और कॉफ़ी का सेवन
*अत्यधिक मात्रा में और भूख न लगने पर भी खाना
*कुछ दवाओं जैसे एंटी-डिप्रेसेंट, पेन किलर्स, एंटी-अलर्जिक या एंटी-बायोटिक के साइड इफेक्ट्स फलस्वरुप एसिड रिफ्लक्स
●●●
  क्या हैं एसिड रिफ्लक्स के लक्षण ?
(What Are The Symptoms Of Acid Reflux Or GERD?)
*छाती के बीच के हिस्से में जलन
*खाने की चीज़ों का पेट से वापस अन्न नली में आना
*सूखी खांसी और आवाज का बैठ जाना
*जी मचलाना या उल्टी आना
*बिना किसी कारण के वजन कम होना
*बेचैनी या घबराहट होना
*खट्टी डकार आना
*पेट भरा हुआ लगना

        क्या सिद्ध अम्लपित्त कल्पचुर्ण
त्रिफला                ~ 20 ग्राम
बेल चुर्ण               ~  20 ग्राम
ब्रह्मी बूटी              ~ 20 ग्राम
संखपुष्पी               ~10 ग्राम
हिंग                      ~  10 ग्राम
कालीमिर्च             ~  10 ग्राम
अजवायन             ~  10 ग्राम
दालचीनी             ~ 10 ग्राम
छोटी हरेड             ~  10 ग्राम
सतपुष्पा                ~10 ग्राम
सैंधा नमक            ~   10 ग्राम
सौंफ भुनी             ~   10 ग्राम
मीठा सोडा             ~100 ग्राम  मिलाए

सभी चुर्ण को 100 ग्राम एलोवेरा रस भावना दे।
●●●
सेवन विधि
जब सुख जाए तो पानी से खाने के बाद एक एक चम्मच लेते रहे।



              साथ यह जरूर करे
*सबसे पहले तो खाने के बाद गुड़ जरुर खाएं। ऐंसा करने से एसिड की समस्या नही होती।
*खाने में भुने हुए जीरे को शामिल कर लें।
*खाने के बाद रोज 4 से 5 बादाम खायें।
*इलाइची भी पाचन में काफी मदद करती है, और आपको एसिड रिफ्लक्स से भी आराम दिलाने में मदद करती है।
* पुदीना, अदरक, आंवला और तुलसी के सेवन से भी आराम मिलता है।
*ठंडा दूध एसिड को पेट तक ही रखने में मदद करेगा।
*यदि आप स्मोकिंग करते हैं, तो स्मोकिंग करना बंद कर दें।
*मुलेठी चूर्ण (Licorice Powder) का काढ़ा आपकी काफी मदद कर सकता है।
*गरिष्ठ भोजन से दूर रहें।
*बहुत ज्यादा टाइट कपड़े ना पहनें।
*एक्सरसाइज करें।
*अल्कोहल से दूर रहें।
*तली हुई चीज़ों से दूरी बनाकर रखें।

■■

अम्लपित्त रोग में और जानकारी ध्यान दे।

अधोग स्थिति: यह स्थिति छोटी अमाशय और बड़ी अमाशय के बीच होती है। इसमें दस्त, पेट में जलन, पतले दस्त का आना, मल त्यागने में गुदा प्रदेश में जलन महसूस होता है।

 इसमें पित्त और वायु बढ़ जाते हैं। ऐसा बरसात में पेय पदार्थ का ज्यादा सेवन करने से भी हो सकता है या खट्टे पदार्थ का ज्यादा सेवन भी कारण बन सकता है।

क्या करें: ऐसे लोगों को उड़द की दाल, बैंगन, तिल के तेल से बनी चीजें, गरिष्ठ भोजन, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर इस समस्या से परेशान हैं तो बेल का शरबत, नारियल पानी, चिरायता आदि का इस्तेमाल करें, पूरा लाभ होगा।
■■

उध्र्वग-अधोग स्थिति: इसमें दोनों के मिले-जुले लक्षण होते हैं। इसमें मल का रंग काला होता है। जो लोग खाना खाने के काफी देर बाद सोते हैं, उनका पित्त विकृत हो जाता है।

■■
क्या करें: इसमें परवल के व्यंजन, कुटकी, चिरायता का काढ़ा, गिलोय के रस का सेवन करना चाहिए। 

उन्हें गुलकंद, सेब और बेल का मुरब्बा खाना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए अदरक और सौंठ, कागजी नींबू, नारियल का पानी लाभकारी है।

■■
दफ्तर में लगातार बैठकर काम करते हैं तो

जो लोग लगातार बैठकर काम करते हैं उनके पेट और छाती में जलन पैदा होती है। 

इससे शरीर में भारीपन, नींद, चकत्ते आना आदि की समस्या होती है। इससे शुरुआत में खांसी होती है। इसके बाद रोग शुरू होता है। 

इसके रोगियों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए। नारियल पानी बेहतर पेय है। उनके लिए पेठे की मिठाई अमृततुल्य है। 

कभी-कभी गुलकंद, मुनक्का का भी सेवन कर लेना चाहिए। इन्हें टमाटर, चावल, चाय, सिगरेट आदि से बचना चाहिए। खाने में उड़द की दाल, राजमा आदि चावल के साथ न लें। राजमा का सेवन रोटी के साथ कर सकते हैं

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Monday, 21 January 2019

सिद्ध स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण-सिद्ध स्वाइन फ्लू नाशक काढ़ा

  

स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू की ऊष्मायन अवधि एक से चार दिनों (लक्षण प्रकट होने वाला समय) की होती हैं। इसके लक्षण इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के समान हैं। इसके लक्षणों में शामिल है :

बुख़ार●सिरदर्द●नाक बहना●गले में खराश●खांसी की तकलीफ या सांस फूलना●भूख में कमी●दस्त या उल्टी

●गिलोय- लगभग 50 इंच लम्बा तना कुटा हुआ
●मुनक्का    -10 नग
●छुहारे        -5 नग
●तुलसी।      - 11 पत्ते
●चिरायता      --3 ग्राम
●दालचीनी।     -3 ग्राम
●सोंठ             --2 ग्राम
●हल्दी            -2 ग्राम
●छोटी पीपल   - 3 नग कुटी
●लौंग               - 3 नग कुटी
●बड़ी इलायची - एक कुटी हुई
●गुड देसी स्वादानुसार
सब सामग्री कूटकर 6 ग्लास पानी मे उबाले।
3 ग्लास बाकी रहने पर दिन 4 बार गर्म चाय की भांति सेवन करे।
●3 पूर्ण दिन आराम करें।
●घर से बाहर न निकले।
            ◆◆◆
नोट करें।
इसको पीने के बाद ओढ़ कर लेट रहें शरीर में ठंडी हवा न लगने दें घंटे भर और कुछ खाना पीना नहीं. ।
कितना भी कठिन जकड़ा जुकाम फ्लू हो सब ठीक हो जाता है. स्वाइन फ्लू में भी फायदा होगा.
◆◆◆
              गिलोय से बनी
            स्वाइन फ्लू की दवा
      स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण 
यह दवा स्वाइन फ्लू,टाइफाइड, डेंगू, चिकन गुनिया,दिमागी बुखार, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी स हो या डेंगू बुखार हो..यह दवा रामबाण है यह समान पन्सारी से सुलभ मिल जाता है कोरियर से मँगवा सकते हैं।
और भी फ़ायदे है।
     3 ग्राम दवा 5000 डेंगू cell{ wbc} निर्मित करती है
बढ़े हुए wbc को समानता देती हैं
       स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण
गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
सतावर      100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 100 ग्राम
अजमायण-100 ग्राम
मलॅठी-50 ग्राम
सौंठ-50 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
सभी  चूर्ण को मिलाकर 250 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।

दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे । साथ मे दुध भी जरूर ले । साथ काढ़ा का सेवन करे।
स्वाईन  मे  लगातार 3 दिन दवा ले ।
             
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Friday, 11 January 2019

सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा


          
             
काढ़ा कैसे बनाए

सर्दी, जुकाम, बुखार, काली खाँसी,रेशा, निमोनिया, फेफड़ों के इंफेक्शन, लिवर खराबी, बच्चों में बड़ी/छोटी माता (चेचक)
और भी अनेकों फायदे से भरपूर है सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा

   6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
       उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★सोंठ 2 ग्राम (आधा चमच्च)
मुलेठी आधा चम्मच
★काली मिर्च आधा चम्मच
★दालचीनी आधा चम्मच
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।


सेवन विधि

200 ग्राम काढ़ा गर्म चाय की भांति उपयोग करे।
बच्चों को आधी मात्रा में दे।
 1 से 3 साल के बच्चों को 5 चमच्च एक बार मे दे।


दिन में 4 बार सिद्ध सर्दी नाशक काढ़े का इस्तेमाल करे।यह क्रिया 3 से 5 दिन लगातार करे 


फायदे

वातरोग, वातदर्द, गठिया वात, wbc, जुकाम, खासी,चेचक, टाइफाइड औऱ किसी भी प्रकार की इंफेक्शन में कारगर है।


सिद्ध आयुर्वेदिक

Monday, 7 January 2019

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण



 बढ़े ह्रदय की रामबाण दवा
यह दवा अधरंग के दौरे को भी ठीक करती है ।पोटेशियम की कमी को दूर करता है। ह्रदय का वाल बंद हो यह दवा करे।खराटे की समस्या ठीक होगी। Bp हाई रहता है तो ठीक होगा। दिल में तेज दर्द होने पर बेचैनी हो जाती है। हृदय में दर्द अचानक उठता हैं और बाएं कंधे तथा बाएं हाथ तक फैल जाता है। सांस फूलना, घबराहट बढ़ जाना, ठंडा पसीना आना तथा बेहोश हो जाना, जी मिचलाना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना तथा नब्ज कमजोर मालूम पड़ना इस रोग के अन्य लक्षण हो तो यह दवा रामबाण है।
★★★
जिन को हदय का अटैक हुआ है उन को दवा कारगर है।

जिस रोगी के दिल का आकार बढ़ा हो और सांस लेने में मुश्किल हो वो यह दवा बनाए ओर सेवन करे।
★★
यह दवा आप खुद बना सकते है।
★★
यह सभी समान पन्सारी से आसानी से मिल जाता हैं।
नही तो online मंगवा सकते हैं।
ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की
          अयूर्वादिक दवा
अर्जन छाल चुर्ण 200 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
त्रिफला 100 ग्राम
अश्वगंधा50 ग्राम
तुसली बीज 50 ग्राम
पुनर्नवा 50 ग्राम
राई 50 ग्राम
अकरकरा 50 ग्राम
मुलेठी 50 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
इन्द्रयाण अजवायन 50 ग्राम
बरगद का दूध 50 ग्राम
जावित्री 20 ग्राम
दालचीनी 20 ग्राम
पीपला मूल 20 ग्राम
छोटी इलायची 20 ग्राम
:हींग10 ग्राम
बच10 ग्राम
सोंठ10ग्राम
जीरा10ग्राम
कूट10ग्राम
जवाखार10 ग्राम
सभी को कूट छानकर चुर्ण बनाए औऱ 200 ग्राम गिलोय रस औऱ 500 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे 
सायं में सुखा कर सेवन करे।

सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
दिन में 3 बार 21 दिन ले।
★21 दिन के बाद अगले 90 दिन सुबह शाम ले।
दिन 2 बार दवा ले।
★★★
भोजन और परहेज:
★अत्यधिक गर्म एवं ठंडे दोनों खाद्य-पदार्थों से बचें।
अधिक परिश्रम, सहवास, घी, मलाई, मक्खन आदि हानिकारक है।
★तम्बाकू, जर्दा, चाय, कॉफी, शराब एवं अन्य नशीली चीजें तथा मांस-मछली, गर्म मसाला आदि का सेवन करना मना है।
★हृदय-रोग में शीर्षासन कभी न करें।
★ रोगी को हाइड्रोजनकृत चर्बी जैसे- घी, मक्खन, वनस्पति, नारियल का तेज, नकली मक्खन या ताड़ का तेल आदि का उपयोग भोजन में नहीं करना चाहिए।
इन तेलों की जगह रोगी को सोयाबीन तेल, सूर्यमुखी तेल या कुसुम कराड़ी तेल का उपयोग करना चाहिए। पापकार्न, मजोला या सफोला तेल का भी उपयोग भोजन बनाने में कर सकते हैं।
★★★
क्रीम, पनीर या दूध से बने दही या अन्य मिठाईयां जो गाढ़े दूध से बनी हो जैसे- गुलाब जामुन, मावा, चाकलेट तथा रसगुल्ले आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
★★★
यह करते रहे
रोजाना ध्यान में घंटा भर बैठना, प्राणायाम, आसन, व्यायाम, हर रोज आधा घंटा घूमने जाना और चर्बी बढऩे से रोकने के लिए सात्विक या शाकाहारी भोजन अत्यंत लाभकारी है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक स्वस्थ आहार, धूम्रपान छोडऩे, एक स्वस्थ वजन बनाए रखने और तनाव से खुद को बचाए रखना भी काफी अहम है।
★★
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।


 

Sunday, 6 January 2019

बच्चों में सर्दी और खांसी - घर बनाएं तेल



सरसों तेल 200 ग,अजवाइन 50 ग,लहसुन10 कली

एक कप सरसो के तेल में अजवाइन और लहसुन
की दस कलियां लेकर उसे पकाए, थोड़ा ठंडा होने
पर उससे बच्चे की मालिश करे। सरसों के तेल,
लहसुन और अजवाइन में कीटाणु-रोधक और विषाणु-रोधक
गुण होते हैं। यह आपके बच्चे को काफी मात्रा में
आराम प्रदान करने में सहायता करता है।

         सिद्ध आयुर्वेदिक से जुड़े सदा स्वस्थ रहे
               whats 94178 62263

Saturday, 5 January 2019

सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण ~ बढ़े लिवर, फेंटी लिवर ,खून की कमी, खाया पीया न लगे, पीलिया और गैस कब्ज की कारगर औषधि





★सुबह पेट साफ ओर सभी पेट की बीमारी    ठीक होगी
★ एक दम हल्का महसूस होगा।
★खून साफ औऱ शुद्ध होने लगेगा
★लिवर इन्फ़ेक्सन SGOT का इलाज है
          सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

कुटकी 250 ग्राम
त्रिफला          100 ग्राम
भृंगराज चूर्ण   100 ग्राम
गिलोय           100 ग्राम
अजवायन      100 ग्राम
करेला चुर्ण     100 ग्राम
तुलसी पंचाग  100 ग्राम
सोंठ               50 ग्राम
अडूसा            50 ग्राम
पिपली छोटी    50 ग्राम
त्रिकुट             50 ग्राम
मुलहठी           20 ग्राम
 हल्दी              20 ग्राम
अतीस             20 ग्राम
चिरायता          20ग्राम
काला नमक     20 ग्राम
सेंधा नमक       20 ग्राम

सभी जड़ी बूटियों को पीसकर चुर्ण बना ले।
500 ग्राम गिलोय रस औऱ 500 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे।
सेवन विधि

    1 बार मे 2 ग्राम (1चम्मच) पानी के साथ ले।
                 दिन में 3 बार दवा ले।
( बच्चों को 1 ग्राम आधा चम्मच ही दे दिन में 2 बार)
                 21 दिन का कोर्स पूरा करे।

लिवर की सभी बीमारी ठीक होगी।
अगर आप कभी कभी इस चुर्ण को लेते हैं तो कभी लिवर की बीमारी नही होगी।
★★★
नोट
★नही बना सकते तो online मंगवाए★
          ★जिगर की सूजन का कारण★

लीवर कमज़ोर होना या लीवर की खराबी, इस बिमारी के कई कारण हो सकते है। लीवर में दर्द होना, भूख कम लगना आदि इस बिमारी के सामान्य लक्षण है।

जिगर की सूजन का प्रमुख कारण भोजन को चबाए बिना निगल जाना, ठूंस-ठूंसकर तेल, मिर्च, मसालेदार पदार्थों तथा खट्टी, चटपटी चीजों का सेवन करना होता है| रात्रि का भोजन करने के बाद अधिक देर तक जागकर कार्य करने से भी जिगर में सूजन उत्पन्न हो सकती है| दिनभर कुछ न कुछ खाते रहने से भी पाचन क्रिया विकृत होकर जिगर में सूजन का कारण बन जाती है|

लिवर की खराबी का अगर सही समय पर इलाज़ न हो तो आगे जाकर यह बिमारी विकराल रूप ले सकती है, यहाँ तक की जान भी जा सकती है।

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके

★★★
          ★ खराब लिवर के लक्षण★
◆यूरिक एसिड बढ़ना
◆कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना
◆पेट में सूजन आना.
◆शरीर में थकावट.
◆छाती में जलन होती है
◆ पेट मे भारीपन महेसुस होता है.
◆पेट में कब्ज,  गैस बनने की समस्या.
◆शरीर में आलसपन आना.
◆शरीर में कमजोरी आना.
◆लीवर बड़ा हो जाता है.
◆मुह का स्वाद ख़राब होता है.

इस रोग में जिगर में सूजन आ जाती है| वह शनै:-शनै: सिकुड़कर छोटा तथा कठोर हो जाता है| रोगी को अपच, उबकाई एवं वमन की शिकायत होने लगती है| भूख नहीं लगती| शरीर का वजन कम होने लगता है| पेट दर्द, त्वचा में पीलापन, हल्का ज्वर तथा शारीरिक और मानसिक थकावट के लक्षण प्रकट होने लगते हैं| पेट की नसें फूल जाती हैं| शरीर तथा चेहरे पर मकड़ी के जाले-से हल्के चिह्न दिखाई देने लगते हैं|

लिवर में सूजन आ जाने से खाना आँतों मे सही तरीके से नहीं पहुँच पाता और ठीक तरह से हज़म भी नहीं हो पाता। ठीक तरह से हज़म न हो पानें से अन्य तरीके के रोग भी उत्पन्न हो सकते है। इसलिए लीवर की खराबी का पक्का, आसान और पूरी तरह से आयुर्वेदिक इलाज़ हम आपके लिए लेकर आये है जिससे लिवर की खराबी से निजात मिल जाएगी।

★★★

     ★ इन उपायों को साथ इसके साथ करे ★

● दो सप्ताह तक चीनी अथवा मीठा का इस्तेमाल न करें। चीनी के बजाय दूध में चार-पाँच मुनक्का डाल कर मीठा कर लें। रोटी भी कम खायें। अच्छा तो यह है कि जबै उपचार चलता रहे रोटी बिल्कुल न खाकर सब्जियाँ और फल से ही गुजारा कर लें।

 सब्जी में मसाला न डालें। टमाटर, पालक, गाजर, बथुआ, करेला, लौकी आदि शाक-सब्जियाँ और पपीता, ऑवला, करें।

 धी और तली वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें। पन्द्रह दिन में जिगर ठीक हो जाएगा।
★★★

जिगर का संकोचन में दिन में दो बार प्याज खाते रहने से भी लाभ होता है।

जिगर रोगों में छाछ (हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिलाकर) दोपहर के भोजन के बाद सेवन करना बहुत लाभप्रद है।
◆◆◆
आँवला का रस 25 ग्राम या सूखे ऑवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से 15-20 दिन में यकृत के सारे दोष हो जाते हैं।

★★★

एक सौ ग्राम पानी में आधा नीबू निचोडकर नमक (चीनी की जाय) डालें और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होगी।
7  से 21 दिन लें।
★★★
जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम दिया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है।
★★★

 तिल्ली अथवा जिगर (यकृत) व तिल्ली (प्लीहा) दोनों के बढ़ने पर पुराना गुड़ डेढ़ ग्राम और बड़ी (पीली) हरड़  का चूर्ण बराबर वजन मिलाकर एक गोली बनायें और ऐसी गोली दिन में दो बार प्रातः सायं हल्के गर्म पानी के साथ एक महीने तक लें।

 इससे यकृत (Liver) और प्लीहा (Spleen) यदि दोनों ही बढ़े हुए हों, तो भी ठीक हो जाते हैं।

विशेष-इसके तीन दिन के प्रयोग से अम्लपित्त का भी नाश होता है।

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार
सब्जियाँ।
लीन मीट।
फलियाँ।
ताजे फल।
डेरी उत्पाद।
स्वास्थ्यवर्धक वसा और तेल।
अंडे।
साबुत अनाज।
इनसे परहेज करे
शक्कर का या अधिक शक्कर युक्त आहार।
सोडा और सोडा युक्त फ्रूट पन्चेस।
संतृप्त वसा।
शराब।

सिद्ध अयूर्वादिक
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263

Thursday, 3 January 2019

सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण


त्रिफला       250 ग्राम
गिलोय चुर्ण 200 ग्राम
त्रिकुटा       200 ग्राम
ब्राहिमी बूटी 100ग्राम
संखपुष्पी    100 ग्राम
अगर         100 ग्राम
सौंठ भुनी   100 ग्राम
बेल चुर्ण       50 ग्राम
शिलाजीत    30 ग्राम
सेंधा नमक 125 ग्राम

सभी चुर्ण को 400 ग्राम एलोवेरा रस औऱ 200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
सेवन विधि
फ़िर सूखा कर दिन में 3 बार ताजे पानी से एक एक चम्मच लेते रहे।
★90 दिन में 60 से 80 % लाभ  होगा।
★90 दिन उपयोग के बाद दवा को छोड़ दे।
★यह दवा छोड़ने पर भी असर करती रहेगी।
*जरूरत अनुसार फिर चालू कर सकते हैं*
        *साथ मे यह भी अपनाएं*
फाइलेरिया बिमारी के कई अन्य नाम भी हैं जैसे कि हाथीपाँव, फीलपाँव, श्लीपद आदि.
ये बिमारी उष्णकटिबंध देशों में सामान्य है. इसकी उत्पति परजीवी (पेरेसिटिक) निमेटोड कीड़ों के कारण होता है जो छोटे धागों जैसे दिखते हैं. यह बीमारी फिलेरी वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी, ब्रूगिआ मलाई और ब्रूगिआ टिमोरि नामक निमेटोड कीड़ो के कारण होती है. फाइलेरिया के सबसे ज़्यादा मामले वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी नामक परजीवी के कारण होते हैं. फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता का सबसे बढ़ा कारण है. यह ज़्यादातर गरीब लोगों को होता है क्योंकि जहाँ गरीब लोग रहते हैं वहाँ मच्छरों की प्रजननता अधिक होती है. एलीफेंटिटिस यानि श्लीपद ज्वर एक परजीवी के कारण फैलती है जो कि मच्छर के काटने से शरीर के अंदर प्रवेश करता है. इस बीमारी से मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं. इस रोग के होने से न केवल शारीरिक विकलांगता हो सकती है बल्कि मरीजों की मानसिक और आर्थिक स्थिति भी बिगड़ सकती है.
एलीफेंटिटिस को लसीका फाइलेरिया भी कहा जाता है क्योंकि फाइलेरिया शरीर की लसिका प्रणाली को प्रभावित करता है. यह रोग मनुष्यों के हाथ-पैरों के साथ ही जननांगों को भी प्रभावित करता है. आइए फाइलेरिया को दूर करने के लिए उसके उपचार हेतु कुछ घरेलू उपायों पर प्रकाश डालें.
1. लौंग
लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिए बहुत प्रभावी घरेलू नुस्खा है. लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं और बहुत ही प्रभावी तरीके से परजीवी को रक्त से नष्ट कर देते हैं. रोगी लौंग से तैयार चाय का सेवन कर सकते हैं.
2. काले अखरोट का तेल
काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में तीन से चार बूंदे डालकर पिएं. इस मित्रण को दिन में दो बार पिया जा सकता है. अखरोट के अंदर मौजूद गुणों से खून में मौजूद कीड़ों की संख्या कम होने लगती है और धीरे धीरे एकदम खत्म हो जाती है. जल्द परिणाम के लिए कम से कम छह हफ्ते प्रतिदिन इस उपाय को करें.
3. भोजन
फाइलेरिया के इलाज के लिए अपने रोज के खाने में कुछ आहार जैसे लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि शामिल करें. इनमें विटामिन ए होता है और बैक्टरीरिया को मारने के लिए विशेष गुण भी होते हैं.
4. आंवला
आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है. इसमें एन्थेलमिंथिंक भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने में बेहद लाभप्रद है. आंवला को रोज खाने से इंफेक्शन दूर रहता है.
5. अश्वगंधा
अश्वगंधा शिलाजीत का मुख्य हिस्सा है, जिसके आयुर्वेद में बहुत से उपयोग हैं. अश्वगंधा को फाइलेरिया के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
6. ब्राह्मी
ब्राह्मी पुराने समय से ही बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है. फाइलेरिया के इलाज के लिए ब्राह्मी को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है. रोजाना ऐसा करने से रोगी सूजन कम हो जाती है.
7. अदरक
फाइलेरिया से निजात के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी से सेवन करें. इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है.
8. शंखपुष्पी
फाइलेरिया के उपचार के लिए शंखपुष्पी की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे सूजन कम होने में मदद मिलेगी.
9. कुल्ठी
कुल्ठी या हॉर्स ग्राम में चींटियों द्वारा निकाली गई मिट्टी और अंडे की सफेदी मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं. इस लेप को प्रतिदिन प्रभावित स्थान पर लगाएं, सूजन से आराम मिलेगा.
10. अगर
अगर को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें. इस लेप को प्रतिदिन 20 मिनट के लिए दिन में दो बार प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे घाव जल्दी भरते हैं और सूजन कम होती है. घाव में मौजूद बैक्टीरिया भी मर जाते हैं.
11. रॉक साल्ट - शंखपुष्पी और सौंठ के पाउडर में रॉक साल्ट मिलाकर, एक एक चुटकी रोज दो बार गरम पानी के साथ लें.


Wednesday, 2 January 2019

यूरिक एसिड की औषधि- सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण-खून को पतला कर समस्त वातदर्द को करेगा समाप्त।






     यूरिक एसिड की रामबाण औषधि
            समस्त शरीरिक दर्दों के लिए          
    यह दवा रामबाण है 

   इंग्लिश दर्द युक्त दवाईयों से मुक्ति पाएं
          ★समस्त वात रोग में रामबाण★
★आस्टि़यो आर्थराईटिस जोड़ों के दर्द कारगर।मांसपेशी संबंधी समस्या में कारगर।

असामान्य रूप से चलना, ढीली मांसपेशियां, मांसपेशियों में कमज़ोरी, मांसपेशी का नुकसान, या मांसपेशी का स्थायी रूप से छोटा होना

★सुस्ती रहती हो, थकावट और कमजोरी महसूस हो,नींद न आती हो ,शरीर में भारापन और पेट की खराबी रहत  हो तो यह रामबाण होगी केसी भी सूजन यह दवा कम करेगी। यह दवा शुगर के मरीज भी ले । यह योग शुगर को भी नार्मल करता है। सायटिका दर्द,स्तन दर्द Vrushan bagअण्डकोश की थैली(अंडकोश और निचले पेट का दर्द दर्द)

★नाक का मांस बढ़ा होने का दर्द
★नाक जंतु (Polyps) दर्द और सूजन
◆चेहरे की नसो मे दर्द
◆ Frozen shoulder_जमा हुआ( Frozen shoulder) या जकड़ा हुआ कन्धा में यह दवा रामबाणहै
◆अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) दर्द
◆सर्वकल दर्द
◆ पुरपडी (आंख से लेकर कान तक)दर्द
◆छाती का दर्द
◆घुटनों का दर्द,
◆जोड़ा का दर्द और सुजन,
◆कमर दर्द ,गठिया दर्द
◆समस्त शरीर का दर्द
◆युरिक एसिड दर्द
◆माइग्रेन का दर्द
◆डिस्क का दर्द
◆सिर (आधा) दर्द
◆नस ब्लॉक दर्द
★बुखार के बाद होने वाला दर्द
◆नजला के दर्द
यह दवा सभी प्रकार के दर्दो के लिए है क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।
अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी
दवा क्या है
इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
सौंठ भुनी 50 ग्राम
सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।
पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।
योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।
दवा तैयार हो गई ।
सेवन विधि -
1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।
☆☆☆
घुटनों के दर्द में दवा के साथ
यह जरूर करे
दिन 2 बार
3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट तक नित्य सेंकाई करें।
☆☆☆☆
परहेज -:
         *घुटने दर्द में क्या खाएं क्या नहीं*
अपथ्य भोजन:- (तीन से छह महीनों तक क्या न खाएं):- केला,सब खट्टे फल व पदार्थ ( नींबू, अचार इत्यादि) सब ठंडे पदार्थ, सब सूखे मेवे खासकर काजू ,बादाम इत्यादि उड़द दाल का उपयोग न करे। जोड़ो के दर्द ठीक होने में कब्ज सबसे बड़ी समस्या है इसलिये पेट का रोज साफ होना जरूरी है।
पथ्य:- दिन में भोजन के पहले गेंहू के दाने के बराबर चुना थोड़े से देशी गुड़ व देशी गाय के घी के साथ खाएं । कम से कम 20 मिनट धूप में (कम से कम कपड़े पहन कर ) बैठे।
घुटने के दर्द में केवल ठंडी तथा वायु बनाने वाली चीजों का उपयोग वर्जित है।
फलों तथा हरी तरकारियों का सेवन अधिक करें| मट्ठा, चाट, पकौड़े, मछली, मांस, मुर्गा, अंडा, धूम्रपान आदि का सेवन बिलकुल न करें।
घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए|।
पेट को साफ रखें तथा कब्ज न बनने दें|।
दूध के साथ ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करें।
शरीर को अधिक थकने वाले कार्य न करें।
प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने के लिए अवश्य जाएं।
***
☆साथ मे यह करे ज्यादा फायदा होगा ☆
आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लाल मिर्च, अत्‍यधिक नमक, बैगन आदि न खाये।
घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।
घुटनो के निचे तकिया रखे।
वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।
ज्‍यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।
आराम करे दर्द बढ़ाने वाली गति विधिया न करे इससे आपका दर्द और बढता जायेगा और आप इसे सहन नहीं कर पाएंगे।
सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये, विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।
और जानकारी के लिए संपर्क करे।
               सिद्ध आयुर्वेदिक
                  9417862263

  

Tuesday, 1 January 2019

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे मगवाएँ ??

 सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट

अभी whats 94178 62263 पर मैसिज करे।
दवा का नाम लिखे और कैसे मंगवाएं पूछे।
तुरंत आप को जवाब मिलेगा।


■■■
गर्भधारण कल्पचुर्ण

300 ग्राम  1050 रुपये।
कायाकल्प चुर्ण 200 ग्राम 325

टोटल 1375
 दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*
कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहलह्े कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-
 कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।
जैसे :-
बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

★★★
       सफ़ेद दाग  मूल्य


वजन 400 ग्राम
मूल्य 860
डाक खर्च ताहित (पार्सल रेट)
Speed post 960 रुपये
50 दिन दवा
★★
सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण
400 ग्राम
750 रुपए with डाक खर्च।
30 दिन की दवा
★★★
सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण


वजन 500 ग्राम
मूल्य 600  रुपये
40 दिन की दवा
डाक खर्च समेत
◆◆◆





साइनस की दवा
सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण
200 ग्राम 600 रुपये
डाक पार्सल समेत
★★





पीलिया रोग की  आयुर्वेदिक दवा
पीलिया नाशक कल्पचुर्ण

वजन 400 ग्राम र 1050 डाक पार्सल free
21 दिन की दवा
★★
■ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा
40 दिन की दवा 400 ग्राम 1050 रुपये
with कोरियर
★★★

■.बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा
     ★सिद्ध  लिवर क्ल्पचुर्ण ★


300 ग्राम 750 रुपये with कोरियर
30 दिन की दवा है।
★★★



सिद्ध वातदर्द क्ल्प चुर्ण
300 ग्राम दवा 600 रुपये
500 ग्राम 1000 रुपये
1kg 1800 रुपये
30 दिन की दवा
डाक पार्सल फ्री
★★★


शरीरिक बलवर्धक चुर्ण
400 ग्राम 1050 रुपये
40 दिन की दवा
★★★



शुगर की कामयाब दवा
सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

500 ग्राम दवा 850 रुपये
40 दिन की दवा
डाक पार्सल फ्री
★★★


खून शुद्धि की अयूर्वादिक दवा
300 ग्राम 750 रुपये
30 दिन की दवा
डाक पार्सल फ्री
★★★


.अधरंग, पक्षाघातकी अयूर्वादिक दवा
लकवे की दवा
400 ग्राम 1260  (आप के लिए 1050)
आयल 200 ग्राम 570 रुपये
★★



शुगर रोगी के लिए
कामक्ल्प चुर्ण
400 ग्राम 1260
★★★
सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण

400 ग्राम 1050



"★★★



एक्जिमा और  सोरसिस दवा

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण

*वजन 400 ग्राम*
*मूल्य 1050 रुपये*
*सिद्ध त्वचा रोग नाशक क्रीम*
          *वजन 100 ग्राम*
           *मूल्य 250 रुपये*
     *Speed पोस्ट 105 डाक खर्च*
      *टोटल 1455 रुपये जमा होंगे।*

                 *30 दिन की दवा

★★
पुराना सिर दर्द नुस्खा
100 ग्राम 300 रुपये
★★
■ई
पीरियड की कैसी भी समस्या हो
*नारी समस्या निदान कल्पचुर्ण*
200 ग्राम 550 रुपये
★★
मोटापा कम करने का योग
मोटापा नाशक कल्पचुर्ण
500 ग्राम 860 रुपये
1 kg  1500 रुपये
सभी दवा का डाक खर्च साथ ही है।
★★★
■  
सिद्ध कफ़ चुर्ण
300 ग्राम 750 रुपये
★★★
कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये।
★★
खून शुद्वि की दवा
सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण
300 ग्राम 750 रुपये
★★
  बुखार की दवा
    *सिद्ध ज्वर नाषक कल्पचुर्ण*
200 ग्राम दवा 400 रुपये with
कोरियर खर्च
◆◆
सिद्ध नाड़ी दुर्बलता कल्प चूर्ण
400 Gram 1050 रुपये
★★
■ त्वचा कल्पचुर्ण
दाद खाज खुजली के लिए।
300 ग्राम
750 रुपये
***
■■■
कैंसर की दवा
सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण
40 दिन की दवा
वजन 400 ग्राम
मूल्य 1050 रुपये सिद्ध आयुर्वेदिक
■■■
सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण
300ग्राम -1550
30 दिन की दवा
वजन 400 ग्राम
मूल्य 2050
40 दिन की दवा with डाक खर्च।
सेवन विधि
सुबह शाम शाम खाने के 1घंटे के बाद मीठे दूध से ले।
नोट- सूगर के मरीज न ले।
धातु ,शक्राणु, मर्दाना और शीघ्रपतन की यह रामबाण दवा है।
20 मिनट सफल  संभोग क्रिया
*पेशाब में गर्मी की जलन, गर्मी कारण इंफेक्शन जड़ से खत्म होगी।
*सपनदोष नही होगा।
धातु रोग जड़ से खत्म होगा।
नोट
* सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे*
नारियल तेल 100 ml
काला तिल तेल 50 ml
बादाम तेल      25 ml
इतर गुलाब  5ml
दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।
शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी
हमारी गरंटी होगी।
■■■
लकोरिया और धातु की दवा
सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण
वजन 300 ग्राम
मूल्य 1050

★★★
नोट
दवा डाक से जाएगी।
डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।
पर
Speed post का 4 अलग से होगा।
अपना पता साफ साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
हमारा अकाउंट है 
Swami veet das c/ ranjit Singh
State bank of india
A/c -65072894910
Ranjit Singh
Bank code -50966
Ifsc code -sbin0050966
Sarhind barach
Fatehgarh sahib (punjab )   

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण