Sunday, 24 February 2019

सालम पंजा - शरीर की हर शक्ति देता है जगा



एक जीवित ऊर्जा प्रदान करता है। अयुर्वेदिक अनंत जड़ी बूटी मानव जीवन के लिए कुदरत क वरदान है।

सालम पंजा युक्त सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण online मंगवाए

सालमपंजा' एक बहुत ही गुणकारी,बलवीर्यवर्द्धक, पौष्टिक और यौन शक्ति को बढ़ाकर नपुंसकता नष्ट करने वाली वनौषधि है।

यह बल बढ़ाने वाला, शीतवीर्य, भारी, स्निग्ध, तृप्तिदायक और मांस की वृद्धि करने वाला होता है। यह वात-पित्त का शमन करने वाला, रस में मधुर होता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- मुंजातक। हिन्दी- सालमपंजा। मराठी- सालम। गुजराती- सालम। तेलुगू- गोरू चेट्टु। इंग्लिश- सालेप। लैटिन- आर्किस लेटिफोलिया।

परिचय : सालम हिमालय और तिब्बत में 8 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होता है। भारत में इसकी आवक ज्यादातर ईरान और अफगानिस्तान से होती है। सालमपंजा का उपयोग शारीरिक, बलवीर्य की वृद्धि के लिए, वाजीकारक नुस्खों में दीर्घकाल से होता आ रहा है। 

समुद्र यात्रा : समुद्र में प्रायः यात्रा करते रहने वाले पश्चिमी देशों के लोग प्रतिदिन 2 चम्मच चूर्ण एक गिलास पानी में उबालकर शक्कर मिलाकर पीते हैं। इससे शरीर में स्फूर्ति और शक्ति बनी रहती है तथा क्षुधा की पूर्ति होती है।

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यौन दौर्बल्य :
सालमपंजा 100 ग्राम, बादाम की मिंगी 200 ग्राम, दोनों को खूब बारीक पीसकर मिला लें।

इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन कुनकुने मीठे दूध के साथ प्रातः खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करने से शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है, यौनशक्ति में खूब वृद्धि होती है और धातु पुष्ट एवं गाढ़ी होती है। 

यह प्रयोग महिलाओं के लिए भी पुरुषों के समान ही लाभदायक, पौष्टिक और शक्तिप्रद है, अतः महिलाओं के लिए भी सेवन योग्य है।
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शुक्रमेह :
 सालम पंजा, सफेद मूसली एवं काली मूसली तीनों 100-100 ग्राम लेकर कूट-पीसकर खूब बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।
 
प्रतिदिन आधा-आधा चम्मच सुबह और रात को सोने से पहले कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से शुक्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, कामोत्तजना की कमी आदि दूर होकर यौनशक्ति की वृद्धि होती है।

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जीर्ण अतिसार :
सालमपंजा का खूब महीन चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह, दोपहर और शाम को छाछ के साथ सेवन करने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।
एक माह तक भोजन में सिर्फ दही-चावल का ही सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को लाभ होने तक जारी रखने से आमवात, पुरानी पेचिश और संग्रहणी रोग में भी लाभ होता है।

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प्रदर रोग :

 सलमपंजा, शतावरी, सफेद मूसली और असगन्ध सबका 50-50 ग्राम चूर्ण लेकर मिला लें। 

इस चूर्ण को एक-एक चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से पुराना श्वेतप्रदर और इसके कारण होने वाला कमर दर्द दूर होकर शरीर पुष्ट और निरोगी होता है।
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वात प्रकोप : 

सालमपंजा और पीपल (पिप्पली) दोनों का महीन चूर्ण मिलाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम बकरी के कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से कफ व श्वास का प्रकोप शांत होता है। सांस फूलना, शरीर की कमजोरी, हाथ-पैर का दर्द, गैस और वात प्रकोप आदि ठीक होते हैं।
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विदार्यादि चूर्ण :

 विन्दारीकन्द, सालमपंजा, असगन्ध, सफेद मूसली, बड़ा गोखरू, अकरकरा सब 50-50 ग्राम खूब महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से यौन शक्ति और स्तंभनशक्ति बढ़ती है।

यह योग online मगवां सकते हैं।
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रतिवल्लभ चूर्ण :

 सालमपंजा, बहमन सफेद, बहमन लाल, सफेद मूसली, काली मूसली, बड़ा गोखरू सब 50-50 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजवां के फूल-सब 25-25 ग्राम। मिश्री 125 ग्राम। सबको अलग-अलग खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ दो माह तक सेवन करने से यौन दौर्बल्य और यौनांग की शिथिलता एवं नपुंसकता दूर होती है। शरीर पुष्ट और बलवान बनता है।
*यह सभी चूर्ण online मगवां सकते हैं*

    Whats करे-94178 62263

Wednesday, 20 February 2019

मोटापा कैसे हटाए-बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के-- मोटापा से होने वाले सभी रोगों से पाएँ छुटकारा।





■मोटापा कम करने के लिए संपूर्ण जानकारी■
★आप जी पहले कायकल्प चुर्ण बारे जाने
     जो मोटापा की दवा साथ दिया जाता है]
★फिर मोटापा की दवा बारे जानकारी देंगे]
★फिर दवा कैसे लेनी है यह बताएगे
★ अंत मे मूल्य बताया गया है।
★★★
                     कायाकल्प चुर्ण
                    सभी रोग के लिए
                  सदैव युवा रखने वाला,
                 शरीर का पूरा कायाकल्प
                 करने वाला सदाबहार चूर्ण


★★★
कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
को संतुलित करता है
★★★
किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।
थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है।

★★★
आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा।
कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए,हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाएं। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।
इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिलकरे।
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क्या है कायाकल्प चूर्ण
कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।
कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य-कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं। लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-
नशों की कमजोरी को दूर करता है।

व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना। नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
ऒरआयु बढ़ाना।
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क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::
*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम
सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।
जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।
सेवन विधि - अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।।
अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच
सुबह खाली पेट ले ।
●●

काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है
●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।
जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।
****
● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग।
●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-
नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।
● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।
● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे
● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति
काम करता है ।
●ओवरी में सूजन ',पानी भरना' अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।
● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की
भांति काम करता है ।
● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।
● बालो की वृद्धि तेजी से होती है,
● अनावश्यक चर्बी घटेगी.
● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी
● खून साफ़ होगा
● रक्त नलिकाए साफ़ होगी.
● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे ।
● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।
● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी
नया शुद्ध खून बनेगा.
◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प
रामबाण जैसा काम करता है ।
◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे
बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।
● नपुसंकता दूर होती है।
● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण
● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ।
● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,
● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता
दात मजबूत होते है।
● हड्डीया मजबूत होती है।
● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है।
◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा ।
●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।

● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ।
● आयु बढ़ेगी
● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।
◆ Diabetes काबू में रहती है।
● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं।
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               सिद्ध मोटापा नाशक कल्पचुर्ण
 मोटापा कम करने का योग ।यह एक फ़ूड है इस योग का कोई साइड इफेक्ट्स और नुकसान नही है।बाजार में  मिलने वाली दवाए हड्ड़ी रोग का कारण बन सकती हैं।
★★★

नोट -: online दवा मंगवाए जिस में हम आप को साथ मे कायकल्प चुर्ण भी देगे। जो आप की नाड़ी तंत्र को शुद्ध और साफ करेगा।
कायकल्प  चुर्ण बारे जानने के लिए whats 94178 62263  पर sms करे।
★★★

आप खुद भी बना सकते है।
यह पेट की चर्बी में बहुत अच्छा काम करती हैं।
           आवश्यक सामग्री :
●गुग्गुल(Guggul)- 140 ग्राम
●विलायिती इमली (Camachile)-105 ग्राम (इसे जंगल जलेबी, अग्रेजी इमली, गंगा इमली भी कहते है।)
●त्रिफला (Triphala)- 105 ग्राम
●बेल चूर्ण -105 ग्राम
◆अर्जुन छाल-,105 ग्राम
●यष्टिमधु (Liquorice)-70 ग्राम (इसे मुलेठी भी कहते है।)
◆गिलोय (Tinospora)- 70 ग्राम
●नागरमोथा (Nut grass)- 70 ग्राम (Cyperus Scariosus)
जीरा (cumin)- 70 ग्राम
शुंठी(Shunti)- 70 ग्राम (सोंठ)

★ बनाने की विधि :
उपरोक्त सभी औषिधियों को बारीक-बारीक कूट-पीस ले और महीन छन्नी से छान कर किसी डिब्बे में बंद कर के रख ले-आपकी ये सामग्री कूट-पिस लगभग 700 ग्राम तैयार हो जायेगी।
★ 


सेवन करने का तरीका :
प्रतिदिन आपको इसमें से दस ग्राम सुबह खाने से पहले गुनगुने पानी से और शाम को खाने के बाद गुनगुने पानी से लेना है ।

बीस ग्राम के हिसाब से एक माह में 600 ग्राम दवा होगी तथा ये एक माह से उपर के लिए हो जायेगी।

तब तक आपका वजन लगभग आठ से दस किलो से जादा कम हो जाएगा।

पेट बढ़ा है 2 से 3 इंच कम हो जाएगा।
पहले माह तेजी से घटता है लगभग छ: से सात किलो फिर थोडा कम घटेगा।

आप इसे आगे भी जारी रख सकते है जब आपको लगे कि आपका वजन और चर्बी अब आपके लिए पर्याप्त है दवा को बंद कर सकते है।

★ आवश्यक परहेज :
भोजन और परहेज :
          मोटापे से परेशान व्यक्ति को मुद्ग, जौ, मूंग का रस, मक्खन, गर्म पानी, बाजरा, गेहूं, ताजा दूध, मुनक्का, संतरा, टमाटर, मसूर, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। मोटे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह टहलना चाहिए और थोड़ी-बहुत मेहनत भी करनी चाहिए। रोगी को पतला करके दूध, फलों का रस, कॉफी, गर्म करके पीना चाहिए।

          मोटापे के रोगी को गाय का दूध, देशी घी, गाढ़ी दाल, चावल, आलू, गर्म दूध, चीनी से बने पदार्थ, पनीर, आइसक्रीम, मिठाइयां, मांसाहारी भोजन, अधिक चिकनाई व चटपटा पदार्थ, सांभर, सूप, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ, जेली, मिठाइयां, बाहर का खाना, देर रात पार्टियों में खाना, नए शालि चावल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। शीतल पानी से नहाना मोटापे के लिए हानिकारक होता है।
तली भुनी चीजे, फास्ट-फ़ूड तथा रिफाइंड आयल का प्रयोग न करे।



Online आप दवा मंगवा सकते हैं।
हम साथ मे काया क्ल्प चूर्ण भी देगे।
जो मोटापे की दवा औऱ मोटापे में हैरानीजनक फायदा करता है।
★★★★
70  दिन की दवा होगी
खर्च जाने अब
मोटापा कम करने की दवा 500 ग्राम
1050 रुपये
कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 
500  रुपये।
टोटल 1550 जमा कराए।
★★★★
सेवन विधि
कायाकल्प चुर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट।
रात को सोते टाइम पानी से सेवन करे।
★★★
मोटापा दवा दिन 3 बार कभी भी पानी से ले।
परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।
★★
नोट
कोरियर  केवल शहर मे ही जाएगा ।
पता शहर का ही दे ।
डाक से गांव में जाएगी दवा ।
अपना पता साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा करानी होगी
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
हमारा अकाउंट है है -:
Paytm 9417862263
Swami Veet Dass c℅ Ranjit Singh
State bank of india
A/c -65072894910
Ranjit Singh
Bank code -50966
Ifsc code -sbin0050966
Sarhind barach
Fatehgarh sahib (punjab )
पढ़ कर कॉल करे
94178 622636




सिद्ध गठियावात नाशक कल्पचुर्ण



गठिया संधिवात रोग (यूरिक एसिड में रामबाण ESR बढ़ा हो तो यह दवा रामबाण  6 महीने दवा लगातार दवा करे 100% लाभ होगा

           सिद्ध गठियावात नाशक क्ल्पचुर्ण*



त्रिफला 250 ग्राम

इन्द्रयाण अजवाइन 125 ग्राम
गिलोय चूर्ण- 100 ग्राम
मैथी दाना -100 ग्राम
अजवायन -100ग्राम
चरायता -100 ग्राम
सहजन छाल-100ग्राम
काली जीरी 50 ग्राम
कड़ु - 50 ग्राम
सुरजन जीरी -50 ग्राम
हारसिंगार के -50 ग्राम
पते
नागौरी असगन्ध -50ग्राम
सौंठ -50 ग्राम
अलसी बीज -50 ग्राम
पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड,  सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी,लोंग, दारूहल्‍द , गोखुरू, खरैटी,  शतावरी,इंद्रायाण लाल, मीठा,शिलाजीत, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 10-10ग्राम।
योगराज गुग्‍गल 400 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।

कैसे सेवन करें 
2 से 3 ग्राम दिन में 3 बार दूध के साथ सेवन करें
साथ यह काढ़ा जरूर शामिल कीजिए ।? असगंधरिषट+महारास्नादि काढा और
दशमूलारिष्टा 2-2 चम्मच मिलाकर 3 बार लें ।

कब तक सेवन करना चाहिए 
यूरिक एसिड के लिए 21 से 45 दिन तक
गठिया में 90 दिन से 180 दिन
तक सेवन करें ।
गठियावात की संपूर्ण जानकारी
नोट : -
खूद दवा तैयार करें ।
हम आपके साथ रहेंगे ।
दवा शुरू कर हमे काल जरूर करते रहे ।
हम आप का ह्रदय से साथ देगे ।
Online भी मंगवा सकते हैं।

Thursday, 14 February 2019

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण


          

                                         फायदे-

अंडे का न बनना, गर्भावस्था कमजोरी, गर्भ नली का बंद होना, लकोरिया, गर्भाशय कमजोरी , अंतुसलन हार्मोन, गर्भाशय का छोटापन आदि

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण का नुस्खा

पुत्रजीवक          100 ग्राम
शिवलिंगी बीज    100 ग्राम
गजकेसर की जड़  50 ग्राम
पीपल की दाढ़ी      50 ग्राम
ब्रह्मिबुटी               50 ग्राम
तुलसी के बीज       50 ग्राम
गोरखमुण्डी।          50 ग्राम
काकोली का बीज   20 ग्राम
नागकेसर              20 ग्राम
मिश्री                   100 ग्राम

इसकी 5 ग्राम मात्रा को सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर  दूध से मासिक-धर्म खत्म होने के बाद लगभग 20 दिन तक करना चाहिए।
इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के पक्के तौर योग्य बन जाती हैं।

       *गऊ के दूध और दही का खूब सेवन करे।*
             परहेज -गर्म ओर खट्टी वस्तु न ले। 
****
नोट
***
अगर आप online मंगवाते है तो हम आप को 2 दवाएं का पैक देगे।

       जिस से बहुत फायदा होता है।
     दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             सिद्ध कायाकल्प चूर्ण
कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-
मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।
कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-
कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।
जैसे :- बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।
★★
     गर्भधारण कल्पचुर्ण कैसे उपयोग करे

मासिक धर्म बंद होने के 1 दिन बाद कोसे गर्म दूध से सुबह खाने के 30 मिनट बाद और रात को भी ऐसे ही उपयोग करे।

ध्यान रहे :-खाने में  दही का उपयोग जरूर करे।
कोई भी गर्म वस्तु इन दिनों उपयोग न करे।
           *खुद बनाएं या online मंगवाए
              Whats 94178 62263
                 Call 78890 53063

Wednesday, 13 February 2019

शरीर मे दर्द क्यों होते है ??

     वातदर्द रोगों की संपूर्ण जानकारी
मात्र जानने से दर्दो से आप दर्दो से पाएंगे मुक्ति


      सिद्ध वातदर्द नाशक कल्पचुर्ण
सभी वातदर्द रोगों को जड़ से खत्म करता है।
Online मंगवाए whats 94178 62263।
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वात क्या है ??

          वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं।

शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है।

हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है।

वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं-
1.उदान वायु    - यह कण्ठ में होती है।
2.अपान वायु   - यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है।
3.प्राण वायु     -  यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है।
4.व्यान वायु        - यह पूरे शरीर में होती है।5.समान वायु       - यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है।
वात रोग बहुत प्रकार की होती है।
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जैसे
1.आमवात :-
आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है।
इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है।

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2.सन्धिवात रोग
         जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है।

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3.यूरिक एसिड वात रोग
गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है।

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मांसपेशियों में वातदर्द :-
         इस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है।

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4.गठिया
        इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है।

●●●
अब जाने
           *वात रोग के लक्षण*
वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है।

रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है।वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है।

रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है।रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है।रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है।
●●◆
अब जाने
वात रोग होने का कारण :-

वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है।
भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है।
पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है।जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है।

जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है।

ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

●●
अब जाने
वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-
वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए।
●●

*क्या करे इस के लिए*
वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए।
इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए।
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इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।

कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।

पर यूरिक एसिड रोग  में इनका सेवन न करे।
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कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।

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रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए।

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इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।

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शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान कर इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।

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अगर आप वातरोग के आधीन आ गए हैं तो 2 से  5 महीने तक सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण जरूर इस्तेमाल करे।
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सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण online भी
         आप मगवा सकते हैं।



Thursday, 7 February 2019

सिद्ध आयुर्वेदिक शेंपू

बालों का झड़ना, खुश्क बाल, दो मुँहे बाल,
बालों के विकास का रुकना, रूसी, त्वचा की इंफेक्शन, बालों की चमक मर जाना औऱ बालों की कमजोरी को करे जड़ से खत्म।

खुद घर बनाए लुटाई से बचे हम देगे जानकारी आप करे अविष्कार एलोवेरा व शहद दोनो ही बालों को नमी देते हैं। बालों से नमी निकालने के अलावा वे जड़ों से भी तेल हटाते हैं।

           कैसे बनायें एलोवेरा शेंपू
                  सामग्री देखे

एलोवेरा रस  (जेल ) 100 ml
एक कोई भी शेंपू     20 ml
सेब का सिरका        50 ml
शहद                     50 ml
अरंडी तेल              50 ml
कोई भी खुसबू तेल   30 ml

विधि: 
एलोवीरा जेल और सामग्री को अच्छे से मिलाकर 2 से 4 बार लगा कर बालो को अच्छे से मलते रहे।

हफ्ते में 2 बार बालों को इस धोएं।
लाभः 

1.एलोवीरा एक तरह का कंडीशनर है. इसके इस्तेमाल से बाल रेशम से मुलायम बनते हैं और चमकीले नज़र आते हैं.

2. बाल झड़ेंगे नही न ही दो मुहे रहेंगे।

3.सिर की त्वचा की खुश्की, इंफेक्शन,रूसी और बालों की जड़ का दर्द में  हैरानीजनक लाभ होगा।

4. बाल लंबे और घने होने शुरू हो जाएंगे।

5.सिर में हल्कापन महसूस करेगे।
     आयुर्वेदिक निशुल्क सलाह ले

     Whats 94178 62263



Friday, 1 February 2019

सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण



 शुगर रोग की देशी दवा सुलभ और सस्ती औषधि शुगर की आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए।
चूर्ण बनाने की विधि

त्रिफला चूर्ण-400 ग्राम
इन्द्रजो कडवा या
इन्द्रजो तल्ख़ 250 ग्राम
इंद्राण अजमायन-250 ग्राम
मेथी का दना - 200 ग्राम
कलौंजी 200 ग्राम
तेज पत्ता ------- 200 ग्राम
जामुन की गुठली -200 ग्राम
बेलपत्र के पत्ते - 200 ग्राम
गुडमार -130 ग्राम
नीम की गुठली  130 ग्राम
तुलसी की पत्तियाँ- 130 ग्राम
सदाबहार की पत्तियाँ -130 ग्राम
वंशलोचन -130 ग्राम
जायफल -50 ग्राम
जावित्री -50 ग्राम
चार गोंद -50 ग्राम
छोटी इलायची -20 ग्राम
*कालीमिर्च- 50
एलोवेरा रस 500 ग्राम
सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय में
सुखाए।
सेवन विधि - सुबह -शाम  3 से 5  ग्राम पानी से लेते रहे।

*खानपान में करें परहेज
-*अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।
*गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।

मधुमेह के रोगी इसका भी जरुर  करें सेवन
जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें।

यह चूर्ण शुगर की रामबाण दवाई का काम करेगा| सुबह खाली पेट एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें और ध्यान रखें कि नाश्ता करने के कम से कम एक घंटा पहले आपको यह चूर्ण लेना है। उसी प्रकार शाम को खाना खाने के एक घंटा पहले फिर से इस चूर्ण का एक चम्मच गर्म पानी के साथ लें।
यह दवा शुगर के रोग में दैवीय औषधि का काम करती है।

यह डायबिटीज की दवा  आप ऐसे इस्तेमाल करेगे तो हैरानीजनक लाभ होगा।
करेले के जूस – से
करेला शुगर के मरीजों को विशेष लाभ पहुंचाता है| सुबह खाली पेट एक गिलास करेले का जूस के साथ 1चमच्च मधुमेह चुर्ण सेवन करे।
और करेले की सब्जी का भी सेवन करें| करेले का जूस कड़वा लग रहा हो तो उसमें थोड़ी मात्रा में पानी मिला लीजिये|
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तुलसी के 5 पत्ते – मधुमेह कल्पचुर्ण के साथ मे सेवन
1चमच्च चुर्ण पानी ले फिर  5 पत्ते धीरे चबाएं।
तुलसी अनेक रोगों में काम आने वाला पौधा है| तुलसी के 5 पत्ते रोजाना सुबह खाली पेट चबाइए| इससे शुगर का बढ़ता लेवल खुद कम हो जायेगा| तुलसी में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो आपके पेट की क्रियाओं को सुगम बनाते हैं|
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मैथी के दाने साथ – सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।रात को एक चम्मच मैथी के दाने एक गिलास पानी में डालकर रख दें|
सुबह उठकर इस पानी को छान लें और खाली पेट इस पानी से सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।
मैथी के दाने आप पानी पीने के बाद चबा जाइये| मैथी बढ़ती शुगर को तुंरत कंट्रोल करती है|

ग्रीन टी – के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।
कैसे बनाए ग्रीन टी:-
6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले
★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★मेथी दाना   1चमच्च
★चरायता 1 चमच्च
★अजवाइन 1चमच्च
★नीम पत्ती 10 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए। 3 ग्लास बाकी बची टी को:-
1चमच्च मधुमेह कल्पचुर्ण को
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।
आम की पत्तियां – के पानी से सेवन।

आम सबका पसंदीदा फल होता है लेकिन दुर्भग्यवश शुगर के रोगियों को आम का सेवन करने से बहुत नुकसान होता है लेकिन आम की पत्तियां शुगर के मर्ज में बहुत लाभ पहुंचाती हैं| आम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर डाल दें| सुबह खाली पेट इस पानी के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करें इससे शुगर कण्ट्रोल होती है|
★★★
एलोवेरा का जूस –के साथ सिद्ध  मधुमेह कल्पचुर्ण का सेवन:-
एलोवेरा के चमत्कारी गुणों के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे| रोजाना सुबह एक गिलास एलोवेरा का जूस के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करने से  शुगर का लेवल कण्ट्रोल होता है और यह लम्बे समय तक अच्छे परिणाम भी देता है।
नोट:-एलोवेरा जूस में थोड़ा करेले का जूस मिलाकर भी ले सकते हैं।
ज्वारे खायें – यह  मधुमेह में बहुत लाभदायक साबित हुआ है।
“ज्वारे” हो सकता है आपने यह नाम पहले ना सुना हो लेकिन ज्वारे को डायबिटीज की सबसे बेहतरीन औषधि माना जाता है| गेहूं के बीजों से जब छोटी पत्तियां निकलना शुरू होती हैं तो इसे “ज्वारे” कहा जाता है| घर पर ही मिटटी के बर्तन में कुछ गेहूं के बीज बो दें| इसमें समय से पानी वगैहरा डालते रहें| कुछ समय बाद जब गेहूं की पत्तिया निकलना शुरू हों तो इन पत्तियों को किसी कैंची से काट लें और इनका सेवन करें| शुगर में यह रामबाण दवा का काम करती है|
ध्यान रखें कि पत्तियों को उखाड़े नहीं क्यूंकि कुछ समय बाद फिर से पत्तियां आनी शुरू हो जाएँगी तब आप फिर से काटकर खाएं|
★★★
नित्य व्यायाम – अगर कर सको तो बहुत फायदेमंद साबित होगा।
मधुमेह की बीमारी ज्यादातर उन लोगों को होती है जो शारीरिक रूप से बिल्कुल निष्क्रिय रहते हैं| इसलिए शुगर के रोग में रोजाना सुबह व्यायाम बहुत जरुरी है| सुबह टहलने जरूर जाएँ और हो सके तो 10 से 15 मिनट की दौड़ भी लगाएं।
आपको साफ़-साफ बता दूँ कि कोई भी दवा आपको उतना लाभ नहीं पहुँचाएगी जितना सुबह का घूमना आपको लाभ पहुँचायेगा| इसलिए गर्मी, जाड़ा, बारिश कुछ भी हो लेकिन सुबह 30 मिनट टहलना ना भूलें।
योगा करें –
डायबिटीज के रोगियों के लिए कपालभाति सबसे लाभकारी योगा है।
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण