Tuesday, 22 October 2019

सिद्ध महाशक्ति योग-सोना युक्त शक्राणु कमजोरी के लिए


                           सोना युक्त
                सिद्ध महाशक्ति कल्पचुर्ण   
फायदे-शक्राणु विर्दी, खून का बनना,शीघ्रपतन, धातु कमजोरी, मर्दाना कमजोरी, नशों की कमजोरी, वीर्य का पतलापन, सभी रोगों में लाभदायक और कारगर।

जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।

कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।


कारण

नपुंसकता के दो कारण होते हैं- शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।

लक्षण :

मैथुन के योग्य न रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना-इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।

बाजीकरण योग

●सफेद मूसली -100 ग्राम
●कीकर फली -100 ग्राम (बीज रहित)
●अश्वगंधा -100 ग्राम
●सतावरी-100  ग्राम
●गोखरू-100 ग्राम
●जयफल -100 ग्रा ऐसीम
●जामुन - 100 ग्राम
 की गुठली
●कौंच के - 100ग्राम
  बीज के चूर्ण
●तालमखाना-50 ग्राम
●गिलोय चुर्ण-50 ग्राम
●सफेद जीरा-50ग्राम
●सेमल का चूर्ण -50ग्राम
●बबूल गोंद-50 ग्राम
●4 मगज-50ग्राम
●सालममिश्री-50ग्राम
●सालम पंजा-50ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सुबह शाम 5-5 ग्राम दूध के साथ ले।

● इसका इस्तेमाल दो महीने तक विस्तारपूर्वक करने से इससे काफी अधिक फायदा मिलता है।

●यह वीर्य को अधिक गाढ़ा बनाता है।

यह रात को होने वाले स्वप्न रोग, वीर्य का जल्दी गिरना और यौनांग के ढीलेपन एवं कमजोरी जैसे रोगों को समाप्त कर देता है-

इससे हर प्रकार की शरीरक कमजोरी दूर होती है और
सुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।

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सिद्ध आयुर्वेदिक
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Email-sidhayurveda1

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